NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
यूपी चुनाव: उन्नाव पीड़िता की मां के बाद अब सोनभद्र की ‘किस्मत’ भी कांग्रेस के साथ!
यूपी में महिला उम्मीदवारों के लिए प्रियंका गांधी की तलाश लगातार जारी है, प्रियंका गांधी ने पहले उन्नाव रेप पीड़िता की मां पर दांव लगाया था, और अब वो सोनभद्र नरसंहार में अपने भाई को खो चुकी महिला को टिकट देने की फिराक में हैं।
रवि शंकर दुबे
27 Jan 2022
यूपी चुनाव:  उन्नाव पीड़िता की मां के बाद अब सोनभद्र की ‘किस्मत’ भी कांग्रेस के साथ!
image courtesy:dainik bhaskar

उत्तर प्रदेश चुनावों को लेकर सभी राजनीतिक पार्टियां अपनी-अपनी जीत के दावे कर रही हैं, हालांकि तमाम कयास लगाए जा रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी में कांटे की टक्कर देखने को मिलेगी। इन सबके बीच कई दशकों से यूपी की सत्ता से बाहर चल रही कांग्रेस भी ‘लड़की हूं लड़ सकती हूं’ के सहारे डटी हुई है, जिसकी कमान प्रियंका गांधी वाड्रा ने संभाल रखी है। प्रियंका गांधी ज्यादा ज़ोर महिलाओं पर हुए अत्याचारों पर दे रही हैं। साथ ही राजनीति में 40 फीसदी महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की भी बात कर रही हैं।

कांग्रेस की ओर से उम्मीदवारी पर नज़र डाली जाए तो उन महिलाओं को तरजीह दी जा रही है, जिन्होंने योगी सरकार में कोई न कोई दंश झेला हैं। चाहे सोनभद्र में उम्भा नरसंहार की बात हो, या फिर उन्नाव में कुलदीप सेंगर के अत्याचारों से रेप पीड़िता की मौत की बात हो।

‘किस्मत’ होंगी कांग्रेस के साथ?

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक- उम्भा नरसंहार में अपने भाई को खो चुकी ‘किस्मत देवी’ नाम की महिला को टिकट देने के लिए कांग्रेस ने आवेदन ले लिया है, ख़बर है वो अगले कुछ दिनों में लखनऊ जाने वाली हैं।

कौन हैं ‘किस्मत’?

सोनभद्र के घोरावल विधानसभा क्षेत्र के उम्भा गांव में जब 11 लोगों का नरसंघार हुआ था तो ‘किस्मत’ अपनी ससुराल में थी। भाई की मौत की ख़बर सुनकर ये माइके लौटीं और संघर्ष में जुट गईं। दरअसल कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी जब उम्भा गांव पहुंची तो ‘किस्मत’ उनके साथ-साथ चल पड़ीं, और घर-घर जाकर पीड़ितों को न्याय दिलाने की बात के लिए अगवाई करने लगीं। बस तभी से ‘किस्मत’ कांग्रेस के कलेंडर में छाई हुई हैं।

19 अक्टूबर 2021 को लखनऊ में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोनभद्र की किस्मत देवी का नाम लिया था, और उनकी तारीफ की थी। प्रियंका ने कहा था कि- किस्मत देवी ने अपने लोगों के लिए आवाज़ उठाई, न्याय मांगा और संघर्ष किया। तभी से तनुआ गांव के लोग ‘किस्मत’ को कांग्रेस का प्रत्याशी मानकर चल रहे हैं।

सोनभद्र जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर दूर उम्भा गांव में 17 जुलाई 2019 को 144 बीघा ज़मीन के लिए नरसंहार की घटना घटी। सोसायटी की ज़मीन पर ग्रामीण वर्षों से खेती कर रहे थे, लेकिन ग्राम प्रधान इसे कब्ज़ाना चाहता था। वाद-विवाद हुआ और नतीज़ा 11 लोगों की मौत निकला। मरने वालों में एक शख्स किस्मत देवी का भाई रामचंद्र भी था।

इससे पहले भी नरसंहार पीड़ित को दी टिकट

आपको बताते चलें कि नरसंहार मामले में ही संघर्ष करने वाले रामराज गोंड को सोनभद्र की अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित ओबरा सीट से कांग्रेस की ओर से पहले ही उम्मीदवार बनाया जा चुका है। उम्भा कांड को उनके माध्यम से कांग्रेस ने प्रमुखता से उठाया था, इस मेहनत का परिणाम उन्हें पहले जिलाध्यक्ष की कुर्सी और अब विधानसभा के टिकट के रूप में मिला है। वहीं दूसरी ओर अगर किस्मत देवी का भी टिकट फाइनल हो जाता है, तो कांग्रेस इन दोनों के सहारे पिछड़ा वर्ग को साधने में कामयाब हो सकती है।

उन्नाव रेप पीड़िता की मां को टिकट

‘लड़की हूं लड़ सकती हूं’ के तहत प्रियंका गांधी ने उन्नाव रेप पीड़िता की मां को भी कांग्रेस का प्रत्याशी बनाया है, जिसके तुरंत बाद सपा की ओर से एक बयान जारी किया था, कि उन्नाव में सपा अपना प्रत्याशी नहीं उतारेगी, बल्कि कांग्रेस समर्थित आशा सिंह का समर्थन करेगी। वहीं दूसरी ओर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी यूपी के तमाम राजनीतिक दलों से आशा सिंह के खिलाफ प्रत्याशियों को नहीं उतारने की अपील की है।

आपको बता दें कि उन्नाव में बीजेपी विधायक कुलदीप आशा सिंह की बेटी से रेप का और हत्या का दोषी है, जिसके कारण कुलदीप उम्र कैद की सज़ा काट रहा है।

कांग्रेस को उतारनी होंगी 160 महिलाएं

कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश चुनाव प्रभारी प्रियंका गांधी पहले ही ऐलान कर चुकी हैं कि 40 फीसदी महिलाओं को टिकट दिया जाएगा। इस लिहाज़ से देखा जाए तो 403 सीटों पर कम से कम 160 महिला प्रत्याशी उतारने होंगे। लेकिन शुरुआत से ही ये देखने को मिल रहा है कि कांग्रेस की नज़र ऐसी महिलाओं पर है, जो अपने-अपने क्षेत्र में जीतने का माद्दा रखती हों, या फिर किसी न किसी कारण वो चर्चा में रही हों।

अभी सिर्फ 10 प्रतिशत महिलाएं विधायक

वर्तमान में राज्य विधानसभा में महिलाओं की भागीदारी 10 प्रतिशत है। 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में कुल 40 महिलाएं विधायक बनीं, जो उस वक्त तक की सर्वश्रेष्ठ संख्या थी, हालांकि बाद में हुए उपचुनावों के कारण इस संख्या में बढ़ोत्तरी हुई और इस वक्त राज्य विधानसभा में 44 महिला सदस्य हैं। इनमें भाजपा की 37, सपा, बसपा और कांग्रेस की दो-दो तथा अपना दल सोनेलाल की एक महिला विधायक शामिल हैं।

पिछले विधानसभा चुनाव यानि 2017 में सभी प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने कुल मिलाकर 96 महिला प्रत्याशियों को टिकट दिया था, भाजपा ने सबसे ज्यादा 43 महिलाओं को उम्मीदवार बनाया था।

वहीं, 2012 के विधानसभा चुनाव में 35 महिलाएं विधायक बनी थीं जो उस वक्त का एक रिकॉर्ड था। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 1952 में हुए प्रदेश के पहले विधानसभा चुनाव में कुल 20 महिलाएं चुनी गई थी। उसके बाद 1985 में 31 महिलाएं विधायक बनीं। 1989 में यह संख्या गिरकर 18 रह गई और 1991 के विधानसभा चुनाव में यह और गिरकर महज़ 10 रह गई। 1993 के विधानसभा चुनाव में 14 महिलाओं ने जीत हासिल की। 1996 में यह संख्या 20 और 2002 में बढ़कर 26 हो गई।

आंकड़ों के अनुसार, 2007 के विधानसभा चुनाव में मात्र तीन महिलाएं ही चुनकर विधानसभा पहुंच सकीं। बसपा ने केवल 20 महिलाओं को टिकट दिया था जबकि 2012 में उसने 33 महिलाओं को उम्मीदवार बनाया था। 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा था और सपा ने 22 तथा कांग्रेस ने 11 महिलाओं को टिकट दिया था। 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा ने 34 महिलाओं को उम्मीदवार बनाया था, जिनमें से 22 में जीत हासिल की थी।

इतिहास लिखने के लिए प्रियंका गांधी ने 40 फीसदी महिलाओं के लिए भागीदारी की बात कह तो दी है, लेकिन देखना ये होगा कि कितनी महिलाएं प्रियंका गांधी के लिए सीटें जीतकर ला पाती हैं।

UP elections
Congress
PRIYANKA GANDHI VADRA
kismat devi
sonbhadra killings

Related Stories

हार्दिक पटेल भाजपा में शामिल, कहा प्रधानमंत्री का छोटा सिपाही बनकर काम करूंगा

राज्यसभा सांसद बनने के लिए मीडिया टाइकून बन रहे हैं मोहरा!

ED के निशाने पर सोनिया-राहुल, राज्यसभा चुनावों से ऐन पहले क्यों!

ईडी ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी को धन शोधन के मामले में तलब किया

राज्यसभा चुनाव: टिकट बंटवारे में दिग्गजों की ‘तपस्या’ ज़ाया, क़रीबियों पर विश्वास

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

केरल उप-चुनाव: एलडीएफ़ की नज़र 100वीं सीट पर, यूडीएफ़ के लिए चुनौती 

कांग्रेस के चिंतन शिविर का क्या असर रहा? 3 मुख्य नेताओं ने छोड़ा पार्टी का साथ

‘आप’ के मंत्री को बर्ख़ास्त करने से पंजाब में मचा हड़कंप

15 राज्यों की 57 सीटों पर राज्यसभा चुनाव; कैसे चुने जाते हैं सांसद, यहां समझिए...


बाकी खबरें

  • Dalit Panther
    अमेय तिरोदकर
    दलित पैंथर के 50 साल: भारत का पहला आक्रामक दलित युवा आंदोलन
    10 Jan 2022
    दलित पैंथर महाराष्ट्र में दलितों पर हो रहे अत्याचारों की एक स्वाभाविक और आक्रामक प्रतिक्रिया थी। इसने राज्य के राजनीतिक परिदृश्य को बदल दिया था और भारत की दलित राजनीति पर भी इसका निर्विवाद प्रभाव…
  • Muslim Dharm Sansad
    रवि शंकर दुबे
    हिन्दू धर्म संसद बनाम मुस्लिम धर्म संसद : नफ़रत के ख़िलाफ़ एकता का संदेश
    10 Jan 2022
    पिछले कुछ वक्त से धर्म संसदों का दौर चल रहा है, पहले हरिद्वार और छत्तीसगढ़ में और अब बरेली के इस्लामिया मैदान में... इन धर्म संसदों का आखिर मकसद क्या है?, क्या ये आने वाले चुनावों की तैयारी है, या…
  • bjp punjab
    डॉ. राजू पाण्डेय
    ‘सुरक्षा संकट’: चुनावों से पहले फिर एक बार…
    10 Jan 2022
    अपने ही देश की जनता को षड्यंत्रकारी शत्रु के रूप में देखने की प्रवृत्ति अलोकप्रिय तानाशाहों का सहज गुण होती है किसी निर्वाचित प्रधानमंत्री का नहीं।
  • up vidhan sabha
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी: कई मायनों में अलग है यह विधानसभा चुनाव, नतीजे तय करेंगे हमारे लोकतंत्र का भविष्य
    10 Jan 2022
    माना जा रहा है कि इन चुनावों के नतीजे राष्ट्रीय स्तर पर नए political alignments को trigger करेंगे। यह चुनाव इस मायने में भी ऐतिहासिक है कि यह देश-दुनिया का पहला चुनाव है जो महामारी के साये में डिजिटल…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपी: आचार संहिता लगते ही प्रशासन ने हटाने शुरू किए पोस्टर, बैनर, होर्डिंग
    10 Jan 2022
    यूपी की सड़कों से राजनीतिक दलों के पोस्टर-बैनर हटाए जाने शुरू हो गए हैं, लेकिन सरकार की तरफ से जनहित की योजनाओं के नाम से जारी “विज्ञापनों” के पोस्टर-बैनर पर भी इसी तरह कार्रवाई होगी, स्पष्ट नहीं है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License