NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
आंदोलनकारियों की ज़मानत रद्द कराने के लिए यूपी सरकार अदालत गई
सीएए के विरुद्ध प्रदर्शन के मामले में अभियुक्त मोहम्मद शोएब, सदफ़ जाफ़र और दीपक कबीर की ज़मानत को रद्द करने के लिए अदालत में अर्ज़ी दी गई है। इस पर अब 5 सितंबर को सुनवाई होगी।
असद रिज़वी
22 Aug 2020
आंदोलनकारियों की ज़मानत रद्द करने के लिए यूपी सरकार अदालत गई

उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालत में नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) के मुखर विरोधियों की ज़मानत रद्द करने के लिए अर्ज़ी दी है। ज़मानत रद्द करने के लिए तर्क दिया गया है कि प्रदर्शनकारी ज़मानत पर रिहा होने के बाद, दोबारा फिर धरना-प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं। जो ज़मानत की शर्तों का उल्लंघन है। इस पर अब 5 सितंबर को सुनवाई होगी। उधर, आंदोलनकारी मानते हैं कि सरकार असहमति कि आवाज़ों को दबाना चाहती है।

सीएए के विरुद्ध प्रदर्शन के मामले में अभियुक्त मोहम्मद शोएब, सदफ़ जाफ़र और दीपक कबीर की ज़मानत को रद्द करने के लिए अदालत में अर्ज़ी दी गई है। लखनऊ प्रशासन का कहना है कि ज़मानत पर रिहा होने बाद,यह प्रदर्शनकारी घंटाघर पर चल रहे सीएए के ख़िलाफ़ प्रदर्शन में शामिल हुए थे। जो एक अवैध धरना था। इस मामले में इन तीनों प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध ठाकुरगंज थाने में एफ़आईआर भी दर्ज हुई है।

IMG_20200822_180536.jpg

ज़मानत रद्द करने की अर्ज़ी मिलने के बाद रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शोएब, कांग्रेसी नेता सदफ़ जाफ़र और रंगकर्मी दीपक को एक नोटिस भेजकर अदालत ने तलब किया। अदालत ने नोटिस में कहा की अभियुक्त को स्वयं या उनके अधिवक्ता अदालत में पेश होना होगा। जिसके बाद न्यायालय जनपद एवं सत्र न्यायाधीश में अलग-अलग तारीख़ों में अभियुक्त पेश हुए। पेशी पर प्रदर्शनकारियों ने बताया की वह इस मामले में आपत्ति दाख़िल करने की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन इसके लिए अभी तक ज़रूरी दस्तावेज़ प्राप्त नहीं हुए हैं। इस मामले में अब अगली सुनवाई 5 सितंबर को होगी। 

सीएए के मुखर विरोधी रहे मोहम्मद शोएब का कहना है कि वह जेल में रहे या ज़मानत पर रिहा रहें, वह सरकार की ग़लत नीतियों के विरुद्ध आवाज़ उठाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि वह इन्दिरा गांधी के आपातकाल के वक़्त भी जेल गए थे और आज भी वह लोकतंत्र को बचाने के लिए जेल जाने को तैयार हैं। ज़मानत पर रिहा मोहम्मद शोएब का कहना है की ज़मानत की शर्तों में कही नहीं लिखा है कि हम रिहा होने बाद संवैधानिक ठंग से अपनी आवाज़ नहीं उठा सकते हैं। मोहम्मद शोएब का कहा “मैं लोकतंत्र के समर्थक हैं और सीएए के विरोधी, इसी लिए सरकार मेरी आवाज़ को दबाने के लिए, मुझे और मेरे परिवार को लगातार प्रताड़ित कर रही है।” उन्होंने कहा कि ज़मानत रद्द करने कि अर्ज़ी इसी प्रताड़ना का एक हिस्सा है।

 सदफ़ जाफ़र का कहना है की सरकार असहमति की आवाज़ों को दबाना चाहती है। न्यूज़क्लिक से बात करते हुए उन्होंने कहा कि केवल उत्तर प्रदेश में नहीं बल्कि पूरे भारत में असहमति को दबाने की कोशिश की जा रही है। सदफ़ जाफ़र ने कहा की पहले प्रदर्शनकारियों की तस्वीरों को चौराहों पर लगाकर उनकी जान को ख़तरे में डाला गया और अब सरकार सीएए विरोधियों को झूठे आरोप लगाकर दोबारा जेल भेजने की तैयारी कर रही है।

 यहां सीएए के विरोध प्रदर्शन में जेल जाने वाली अकेली महिला सदफ़ जाफ़र कहती हैं की वह सरकार से पूछना चाहती हैं, कि लोकतंत्र में सरकार के विरुद्ध शांतिपूर्ण ठंग से आवाज़ उठाना कब से अपराध हो गया है? क्यूँकि घंटाघर के प्रदर्शन में शामिल होने के आधार पर ही सरकार उनकी ज़मानत रद्द करने की अदालत से माँग कर रही है।

 रंगकर्मी दीपक कबीर का कहना है असहमति की आवाज़ों को दबाना फ़ासीवादी तरीक़ा है। दीपक ने कहा लोकतंत्र में, संसद से लेकर सड़क तक असहमति की आवाज़ें उठती हैं, तो क्या सारे विपक्ष को जेल भेज दिया जायेगा? उन्होंने कहा कि न केवल उनको बल्कि सारे नागरिक समाज को निशना बनाया जा रहा है। दीपक कबीर के अनुसार जिस तरह सत्ता पक्ष से सवाल करने वालों को जेल भेजा जा रहा है, उस से लगता है कि देश में फ़ासीवाद लाने की कोशिश हो रही है। रंगकर्मी दीपक कबीर कहते हैं “उनकी लड़ाई लोकतांत्र को बचाने कि है, क्यूँकि जिस देश में भी फ़ासीवाद आया वहाँ केवल बर्बादी ही हुई है।”

 दीपक कबीर कहते हैं कि “अगर सरकार असहमति और अपराध का अंतर नहीं समझती है, तो उसको एक बार फिर से संविधान पढ़ने की ज़रूरत है।” उन्होंने कहा कि पुलिस के पास कोई ऐसा सबूत नहीं है कि वह हिंसा में शामिल थे, और शांतिपूर्ण ढंग प्रदर्शन में सम्मिलित होना कोई अपराध नहीं है।

 वहीं मोहम्मद शोएब के अधिवक्ता जमाल सईद सिद्दीक़ी का कहना है की ज़मानत रद्द करने के लिए दिया गया शपथपत्र ही अधूरा है। न्यूज़क्लिक को जमाल सईद सिद्दीक़ी ने बताया कि जो शपथपत्र अदालत में दाखिल हुआ है उस पर किसी पुलिसकर्मी का नाम नहीं है। जिस पर उनको आपत्ति है। उन्होंने कहा अभी तक उनको अर्ज़ी के साथ पेश किये गये संलग्नक प्राप्त नहीं हुए हैं। अगली सुनवाई में वह संलग्नक की माँग करेंगे और फ़िर आपत्ति दाख़िल की जायेगी।

 उल्लेखनीय है कि 19 दिसंबर को लखनऊ समेत पूरे देश में सीएए के विरुद्ध प्रदर्शन हुए थे। राजधानी लखनऊ में प्रदर्शनकरियों और पुलिस के बीच हसनगंज, हुसैनाबाद और परिवर्तन चौक इलाक़ों में टकराव हो गया था। जिसमें एक व्यक्ति की मौत भी हो गई और टकराव के दौरान सार्वजनिक सम्पत्ति और निजी संपत्ति का काफ़ी नुक़सान भी हुआ। जिसके बाद पुलिस ने रात में क़रीब 11 बजे एक एफ़आईआर 600/2019 दर्ज की थी। जिसमें अन्य प्रदर्शनकारियों के अलावा मोहम्मद शोएब, सदफ़ जाफ़र और दीपक मिश्रा (दीपक कबीर) को भी तोड़-फोड़ और आपराधिक साज़िश का अभियुक्त बनाया गया था। जिसके बाद तीनों को गिरफ़्तार कर के जेल भेज दिया गया था। लेकिन एक महीने के क़रीब जेल में रहने के बाद इसको ज़मानत मिल गई थी। अब सरकार ने एक बार फिर इनकी ज़मानत को रद्द करने की अर्ज़ी दी है।

 इसके अलावा जनवरी 2020 से दिल्ली के शहीन बाग़ की तर्ज़ पर लखनऊ के घंटाघर (हुसैनाबाद) पर भी महिलाओं ने क़रीब ढाई महीने तक सीएए के विरुद्ध प्रदर्शन किया। इस दौरान ठाकुरगंज थाने में प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध कई एफ़आईआर हुईं। जिसमें मोहम्मद शोएब, सदफ़ जाफ़र और दीपक के भी नाम भी मुक़दमा दर्ज हुआ था। धरना कोविड-19 के लिए तालाबंदी के समय महिलाओं और प्रशासन के बीच एक समझौते के बाद स्थगित किया गया था।

 

CAA
Protest against CAA
UttarPradesh
Yogi govt
Sadaf Jafar
deepak Kabir

Related Stories

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

मनरेगा मज़दूरों के मेहनताने पर आख़िर कौन डाल रहा है डाका?

CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा

बलिया: पत्रकारों की रिहाई के लिए आंदोलन तेज़, कलेक्ट्रेट घेरने आज़मगढ़-बनारस तक से पहुंचे पत्रकार व समाजसेवी

पत्रकारों के समर्थन में बलिया में ऐतिहासिक बंद, पूरे ज़िले में जुलूस-प्रदर्शन

यूपी: खुलेआम बलात्कार की धमकी देने वाला महंत, आख़िर अब तक गिरफ़्तार क्यों नहीं

पेपर लीक प्रकरणः ख़बर लिखने पर जेल भेजे गए पत्रकारों की रिहाई के लिए बलिया में जुलूस-प्रदर्शन, कलेक्ट्रेट का घेराव

देश बड़े छात्र-युवा उभार और राष्ट्रीय आंदोलन की ओर बढ़ रहा है

बंधुआ हालत में मिड डे मील योजना में कार्य करने वाली महिलाएं, अपनी मांगों को लेकर लखनऊ में भरी हुंकार

यूपी: कृषि कानूनों को रद्दी की टोकरी में फेंक देने से यह मामला शांत नहीं होगा 


बाकी खबरें

  • mamta banerjee
    भाषा
    तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल में चारों नगर निगमों में भारी जीत हासिल की
    15 Feb 2022
    तृणमूल कांग्रेस ने बिधाननगर, चंदरनगर और आसनसोल नगरनिगमों पर अपना कब्जा बरकरार रखा है तथा सिलीगुड़ी में माकपा से सत्ता छीन ली।
  • hijab
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    हिजाब विवादः समाज सुधार बनाम सांप्रदायिकता
    15 Feb 2022
    ब्रिटेन में सिखों को पगड़ी पहनने की आज़ादी दी गई है और अब औरतें भी उसी तरह हिजाब पहनने की आज़ादी मांग रही हैं। फ्रांस में बुरके पर जो पाबंदी लगाई गई उसके बाद वहां महिलाएं (मुस्लिम) मुख्यधारा से गायब…
  • water shortage
    शिरीष खरे
    जलसंकट की ओर बढ़ते पंजाब में, पानी क्यों नहीं है चुनावी मुद्दा?
    15 Feb 2022
    इन दिनों पंजाब में विधानसभा चुनाव प्रचार चल रहा है, वहीं, तीन करोड़ आबादी वाला पंजाब जल संकट में है, जिसे सुरक्षित और पीने योग्य पेयजल पर ध्यान देने की सख्त जरूरत है। इसके बावजूद, पंजाब चुनाव में…
  • education budget
    डॉ. राजू पाण्डेय
    शिक्षा बजट पर खर्च की ज़मीनी हक़ीक़त क्या है? 
    15 Feb 2022
    एक ही सरकार द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे बजट एक श्रृंखला का हिस्सा होते हैं इनके माध्यम से उस सरकार के विजन और विकास की प्राथमिकताओं का ज्ञान होता है। किसी बजट को आइसोलेशन में देखना उचित नहीं है। 
  • milk
    न्यूज़क्लिक टीम
    राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के साथ खिलवाड़ क्यों ?
    14 Feb 2022
    इस ख़ास पेशकश में परंजॉय गुहा ठाकुरता बात कर रहे हैं मनु कौशिक से राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड से सम्बंधित कानूनों में होने वाले बदलावों के बारे में
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License