NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
यूपी: फिर मंडराया बाढ़ का ख़तरा, कई ज़िले हर साल होते हैं बुरी तरह प्रभावित, ग्रामीण झेलते हैं विस्थापन का दर्द
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के किसानों का कहना है कि नदी के कटाव से हर साल भारी नुकसान होता है। खेत-खलियान, घेर-घर समेत गांव के गांव जलमग्न हो जाते हैं।
अब्दुल अलीम जाफ़री
23 Jun 2021
यूपी: फिर मंडराया बाढ़ का ख़तरा, कई ज़िले हर साल होते हैं बुरी तरह प्रभावित, ग्रामीण झेलते हैं विस्थापन का दर्द
तस्वीर साभार: बिजनेस स्टैंडर्ड

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में राप्ती नदी के पास स्थित जगदीशपुर गाँव में पिछले दस सालों में बाढ़ के कारण सौ से अधिक घर बाढ़ में जलमग्न हो चुके हैं, जिसके चलते कई परिवारों को कहीं और जाकर शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है। यह केवल एक गांव की कहानी नहीं है। यूपी के कई ज़िलों में नदियों के किनारे बसे गांवों की हर साल की यही कहानी है। बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ता है और गांव के गांव जलमग्न हो जाते हैं। खेत-खलियान, मकान सब बर्बाद हो जाते हैं।

गोरखपुर के जगदीशपुर गांव में तकरीबन 125 घर थे, जिनमें से 105 घर पिछले 10 वर्षों में राप्ती नदी के तेज बहाव में जलमग्न हो चुके हैं। कई वर्षों से नदियों के इस कटाव ने बाकी के बचे घरों और आसपास के गाँवों के अस्तित्व को खतरे में डाल दिया है, क्योंकि नदी की धारा की दूरी अब इन घरों से मात्र 10 से 15 मीटर की रह गई है।

ग्रामीणों का दावा था कि प्रशासनिक अधिकारियों और नेताओं द्वारा कई दफा गाँव का दौरा किया जा चुका है, मानो यह कोई “पिकनिक स्पॉट” हो, लेकिन पिछले 10 वर्षों में गाँव और उनके जीवन को बचाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारी निभाई होती तो उनके गाँव का अस्तित्व खतरे में नहीं होता।

गाँव के एक निवासी संतोष भारती ने न्यूज़क्लिक को बताया “दस वर्षों की अवधि कोई कम समय नहीं होता, हमारी आँखों के सामने एक-एक करके अकेले जगदीशपुर गाँव में 105 घर जलमग्न हो गये। इस घोर लापरवाही की जिम्मेदारी कौन लेगा?” उन्होंने आगे बताया कि किसी समय वे बड़े किसान थे लेकिन नदी के कटाव और “सरकारी नीतियों” ने उन्हें भूमिहीन बना दिया है, जिसके चलते अब वे लुढ़ककर प्रवासी मजदूरों की श्रेणी में पहुँच गए हैं।

भारती ने कहा कि जिला प्रशासन ने एक बार फिर से ग्रामीणों को गाँव खाली करने और कहीं और जाकर शरण लेने के लिए कहा है। भारती आगे बताते हैं “प्रशासन हर बार यही कहता था कि गाँव को बचाने के प्रयास किये जा रहे हैं और कभी-कभार वे इस बात का भी दावा करते हैं कि लोगों को कहीं और ले जाकर बसाया जायेगा। इस बचाने और बसाने की प्रक्रिया में सारा गाँव तबाह हो गया है।”

एक प्रवासी श्रमिक, रामाश्रय जिनका घर बहराइच जिले में घाघरा नदी के पास है ने बताया, “पिछले दस वर्षों में हमने दो अलग-अलग जगहों पर शरण ली है और अब बाढ़ और सरकार की विफलता के कारण हम एक बार फिर से कहीं और जाकर बसने के लिए मजबूर हैं।”

बाढ़-प्रभावित क्षेत्रों के किसानों का कहना है कि कटाव से सबसे पहले कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा और अब यह उनके आवासीय भूमि के लिए खतरा बना हुआ है। बाराबंकी के एक अन्य ग्रामीण सतेन्द्र, जो कुछ इसी प्रकार की समस्या का सामना कर रहे हैं, ने न्यूज़क्लिक को बताया “पहले ही हम दो बार अपने घर को स्थानांतरित कर चुके हैं। गरीबी और खानाबदोशों की तरह जीवन बिताना अब हमारी जिन्दगी का हिस्सा बन चुका है।”

उन्होंने आगे बताया “मैंने चार साल पहले अपनी मेहनत की कमाई से जमीन के कुछ छोटे-छोटे टुकड़े ख़रीदे थे, लेकिन नदी ने उस जमीन को निगल लिया।”

बाराबंकी, सीतापुर और बहराइच जिले भी कुछ इसी प्रकार की समस्या का सामना कर रहे हैं, जहाँ सरयू और घाघरा नदियों ने पिछले कुछ वर्षों में भारी तबाही मचा रखी है। भूमि के कटाव के चलते पलायन में तेजी से वृद्धि हुई है क्योंकि खेती योग्य भूमि सिकुड़ चुकी है। जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं के मुताबिक, लगभग 70% से 80% लोग अपनी आजीविका की खातिर पंजाब, दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे अन्य राज्यों में पलायन करते हैं।

सीतापुर स्थित एक सामाजिक कार्यकर्ता, ऋचा सिंह ने न्यूज़क्लिक को बताया “शारदा और घाघरा नदियों का जलस्तर कम से कम 42 गावों को नुकसान पहुंचा रहा है। रविवार (20 जून) को रेउसा ब्लॉक के फौजदार पुरवा में कम से कम पांच घर पानी में जलमग्न हो गए, और उसी दिन गाँव के पांच परिवारों के सदस्य एक सुरक्षित स्थान के लिए पलायन कर गए थे।” उनका कहना था कि 2013 में उन्होंने ‘जल सत्याग्रह’ की शुरुआत की थी, लेकिन न तो तत्कालीन अखिलेश सरकार और ना ही वर्तमान भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने नदियों के पास बसे ग्रामीणों के लिए कुछ खास काम किया है। 

इस बीच, वर्तमान में बहराइच, बलरामपुर, गोरखपुर, लखीमपुर खीरी, कुशीनगर, महाराजगंज, पीलीभीत, श्रावस्ती, सीतापुर, बाराबंकी और सिद्धार्थनगर जैसे जिलों के 22 गाँव नदी के उफनते जलस्तर से प्रभावित चल रहे हैं।

राहत आयुक्त रणवीर प्रसाद ने मीडिया को विवरण देते हुए अपने वक्तव्य में कहा कि “राज्य सरकार बाढ़ से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए पूरी तरह से चौकस है, और एनडीआरएफ की 10 टीमों को तैनात किया गया है।” उन्होंने आगे बताया कि इन 10 जिलों के 22 गाँव पानी में जलमग्न थे।

बहराइच में ग्रामीणों के अनुसार, रविवार को जिला प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि नेपाल द्वारा अपने तीन बैराजों से नदियों में पानी छोड़े जाने के बाद से जिले के 60 से अधिक गाँव जलमग्न हो गये हैं।

बाढ़ प्रबंधन सूचना प्रणाली केंद्र (एफएमआईएससी) के द्वारा जारी सूचना के अनुसार, बदायूं के कछला घाट और बलिया में भी गंगा खतरे के निशान पर बह रही है। इसके अलावा राप्ती नदी श्रावस्ती में राप्ती बैराज के साथ-साथ गोरखपुर और बलरामपुर जिलों में भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल ख़बर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें

UP: Hundreds of Houses in Gorakhpur, Sitapur, Lakhimpur Submerge Due to Flood, Many Forced to Seek Shelter

UP flood
Soil Erosion in UP
Agricultural Land Erosion
Rapti River
Gorakhpur Flood
Yogi Adityanath Government
Flood Management

Related Stories

यूपी: प्रतापगढ़ में शराब माफ़िया का पर्दाफ़ाश करने के बाद टीवी पत्रकार की 'सड़क दुर्घटना' में मौत


बाकी खबरें

  • अनिल अंशुमन
    झारखंड: हेमंत सरकार की वादाख़िलाफ़ी के विरोध में, भूख हड़ताल पर पोषण सखी
    04 Mar 2022
    विगत 23 फ़रवरी से झारखंड राज्य एकीकृत पोषण सखी संघ के आह्वान पर प्रदेश की पोषण सखी कार्यकर्ताएं विधान सभा के समक्ष अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठी हुई हैं।
  • health sector in up
    राज कुमार
    यूपी चुनाव : माताओं-बच्चों के स्वास्थ्य की हर तरह से अनदेखी
    04 Mar 2022
    देश में डिलीवरी के दौरान मातृ मृत्यु दर 113 है। जबकि उत्तर प्रदेश में यही आंकड़ा देश की औसत दर से कहीं ज़्यादा 197 है। मातृ मृत्यु दर के मामले में उत्तर प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है।
  • Mirzapur
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी चुनाव : मिर्ज़ापुर के ग़रीबों में है किडनी स्टोन की बड़ी समस्या
    04 Mar 2022
    जिले में किडनी स्टोन यानी गुर्दे की पथरी के मामले बहुत अधिक हैं, और सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव के चलते पहले से ही दुखी लोगों की आर्थिक स्थिति ओर ख़राब हो रही है।
  • workers
    अजय कुमार
    सरकार की रणनीति है कि बेरोज़गारी का हल डॉक्टर बनाकर नहीं बल्कि मज़दूर बनाकर निकाला जाए!
    04 Mar 2022
    मंदिर मस्जिद के झगड़े में उलझी जनता की बेरोज़गारी डॉक्टर बनाकर नहीं, बल्कि मनरेगा जैसी योजनाएं बनाकर हल की जाती हैं।
  • manipur election
    न्यूज़क्लिक टीम
    मणिपुर चुनाव: भाजपा के धनबल-भ्रष्ट दावों की काट है जनता का घोषणापत्र
    03 Mar 2022
    ख़ास इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकारा भाषा सिंह ने बातचीत की ह्यूमन राइट्स अलर्ट के बबलू लोइतोंगबन से। आप भी सुनिए मणिपुर के राजनीतिक माहौल में मानवाधिकारों पर छाए ख़ौफ़ के साये के बारे में बेबाक बातचीत।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License