NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कहीं आपकी भी यह समझ तो नहीं कि मुसलमानों की बढ़ती आबादी हिंदुओं को निगल जाएगी!
योगी सरकार की नई जनसंख्या नियंत्रण नीति का असली मकसद चुनावी राजनीति में ध्रुवीकरण के लिए हिंदू-मुस्लिम दीवार को और गहरा बनाना है।
अजय कुमार
15 Jul 2021
कहीं आपकी भी यह समझ तो नहीं कि मुसलमानों की बढ़ती आबादी हिंदुओं को निगल जाएगी!
'प्रतीकात्मक फ़ोटो' साभार: The Companion

भारतीय जनता पार्टी को पता है कि हिंदी बेल्ट मुस्लिमों की आबादी को लेकर ढेर सारी बनी बनाई और परोसी गई झूठी कहानियों को सच मानता है। उसे पता है कि एक औसत सीधा-साधा हिंदू भी यही मानकर चलता है कि मुस्लिमों लोग खूब बच्चे पैदा करते हैं। उसे पता है कि जमीन पर टहल रहे राष्ट्रीय स्वयंसेवक के कार्यकर्ताओं ने लोगों के बीच यह भ्रम जमकर फैला दिया है कि अगर मुस्लिमों की आबादी रोकी नहीं गई तो एक दिन ऐसा आएगा कि वह हिंदुओं की आबादी से आगे निकल जाएंगे। उसे पता है कि जब हिंदू और मुस्लिम में झगड़े वाली स्थिति पनपती है तो कहीं ना कहीं से आवाज जरूर आती है कि मुस्लिम लोग एक मकसद से ढेर सारे बच्चा पैदा कर रहे हैं। और उस मकसद का नाम है कि हिंदुस्तान से लेकर पूरी दुनिया में मुस्लिमों का राज हो। इसी तरह की तमाम धारणाओं पर  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार इस बार का चुनावी खेल खेलने जा रही है। इसलिए तकरीबन सभी राजनीतिक चिंतकों का कहना है कि जनसंख्या नियंत्रण नीति का ऐलान तो महज बहाना है। असली मकसद तो यह है कि चुनावी राजनीति में ध्रुवीकरण के लिए हिंदू मुस्लिम दीवार को और गहरा बनाना है।चुनावी राजनीति को चुनावी राजनीति के हवाले छोड़ देते हैं। लेकिन एक सजग नागरिक होने के नाते यह समझने की कोशिश करते हैं कि क्यों मुस्लिमों की आबादी को लेकर फैलाई गई धारणाएं क्यों केवल धारणाएं हैं? इसके सिवाय कुछ भी नहीं।

* भारत की पहली जनगणना के समय भारत की कुल आबादी तकरीबन 36 करोड़ थी। इसमें से तकरीबन 84 फ़ीसदी हिस्सा हिंदू धर्म के मानने वाले लोगों का था और महज 9.8 फ़ीसदी हिस्सा मुस्लिम धर्म के अनुयायियों का था। यानी 36 करोड़ में केवल 3 करोड़ के आस पास की आबादी मुस्लिम धर्म की थी और तकरीबन 33 करोड़ की आबादी हिंदू धर्म को मानने वाले लोगों की थी।

* साल 2011 की जनगणना के बाद भारत की कुल आबादी में हिंदुओं की जनसंख्या तकरीबन 96 करोड हो गई और मुस्लिमों की जनसंख्या तकरीबन 17 करोड। यानी पहली जनगणना के समय हिंदू और मुस्लिम आबादी के बीच अगर 30 करोड़ का अंतर था। तो साल 2011 में यह अंतर बढ़कर 79 करोड़ हो चुका था। आंकड़े यह भी बताते हैं कि मुस्लिमों की जनसंख्या की वृद्धि दर में हर साल गिरावट दर्ज की जा रही है। यह गिरावट हिंदुओं से ज्यादा है। इस तरह से देखा जाए तो हिंदू और मुस्लिम आबादी के बीच का अंतर जमीन और आसमान की तरह है।

जिसे हजारों साल में भी नहीं पाटा जा सकता। वह दिन कभी नहीं आएगा जब मुस्लिमों की जनसंख्या हिंदुओं से अधिक होगी। यह उस झूठ का जवाब है जो आर एस एस के कार्यकर्ता जमीन पर फैलाते हैं कि मुस्लिमों की आबादी एक दिन हिंदुओं को निगल जाएगी।

* आबादी के बारे में आधारभूत तौर पर पहले हमें यह समझना चाहिए कि एक निश्चित समय में कुछ लोग जन्म लेते हैं, कुछ लोग मरते हैं और ढेर सारे लोग जिंदा रहते हैं। यह तीनों प्रक्रिया हर समय चलती रहती है। इस तरह से  आबादी बढ़ रही है या घट रही है। इसे तय करने का पैमाना प्रजनन दर कहलाता है। मोटे तौर पर समझे तो इसका यह मतलब होता है कि एक औरत अपने प्रजनन काल में कितने बच्चे पैदा कर सकती है। 15 साल से लेकर 49 साल को औरत का प्रजनन काल माना जाता है।

इसी पैमाने के आधार पर अगर किसी क्षेत्र में कुल प्रजनन दर 2.1 से कम है तो इसका मतलब होता है कि आबादी नियंत्रित अवस्था में है। इस 2.1 के स्थिति को रिप्लेसमेंट दर भी कहा जाता है। इससे कम और करीब की स्थिति को कहीं से भी पापुलेशन एक्सप्लोजन यानी जनसंख्या विस्फोट की स्थिति नहीं कहा जा सकता। साल 2016 के नेशनल फैमिली सैंपल सर्वे के मुताबिक भारत का कुल प्रजनन दर 2.3 है और मुस्लिम समुदाय का कुल प्रजनन दर 2.7 है। यानी दोनों स्थितियां रिप्लेसमेंट दर के बिल्कुल नजदीक है।

कहने का मतलब यह है कि अगर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कोई भी मुस्लिमों की जनसंख्या को यह कहकर संबोधित कर रहे है कि यह समुदाय खूब बच्चे पैदा करता है। तो वह बिल्कुल तथ्यहीन और भ्रामक बात है। कोई राजनेता है तो इसका मतलब है कि वह सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने के मकसद से बात कर रहा है।

* भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने द पॉपुलेशन मिथ, इस्लाम, फैमिली प्लानिंग एंड पॉलिटिक्स इन इंडिया नाम से किताब लिखी है जिसमें वह जरूरी आंकड़ों और अपने प्रभावशाली शोध के माध्यम से मुस्लिमों के प्रति बनाए गए भय के माहौल को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

एस वाई कुरैशी अपनी किताब में लिखते हैं कि यह बात तो बिल्कुल तथ्यहीन है कि मुस्लिमों की आबादी बहुत अधिक बढ़ रही है, वह खूब बच्चा पैदा करते हैं। लेकिन यह बात बिल्कुल सही है कि आबादी का वह हिस्सा जो गरीबी में रहता है वह अब भी परिवार नियोजन पर ध्यान नहीं देता। यह केवल मुस्लिमों के बारे में ही नहीं बल्कि दूसरे धर्म पर भी लागू होता है। इसके पीछे कोई धार्मिक कारण नहीं है। अगर मुस्लिम महिला की प्रजनन दर 2.7 है और वह भारत के कुल प्रजनन दर 2.3 से थोड़ी सी अधिक है तो इसके पीछे किसी भी तरह से मुस्लिम धर्म जिम्मेदार नहीं है। मुस्लिम समुदाय में शिक्षा की कमी जिम्मेदार है। गरीबी जिम्मेदार है। स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच ना होना जिम्मेदार है।

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक छठी क्लास या छठी क्लास से ऊपर की पढ़ाई करने वाले मुस्लिम मर्द की कुल मुस्लिम जनसंख्या में तकरीबन 66 फ़ीसदी हिस्सा है तो मुस्लिम औरत का हिस्सा महज 53 फ़ीसदी है। यही अगर हिंदू धर्म में देखा जाए तो तकरीबन 77 फ़ीसदी हिंदू मर्द ऐसे हैं जिन्होंने छठी या छठी क्लास से ऊपर की पढ़ाई की है और औरतों में तकरीबन 60 फ़ीसदी हिंदू औरतों ने भी इतनी पढ़ाई की है। मुस्लिमों में हिंदुओं के मुकाबले गरीबी ज्यादा है।

यह सारी कमियां प्रशासनिक लिहाज से पूरी की जानी चाहिए। सचर कमेटी की रिपोर्ट है कि मुस्लिमों की भीतर पिछड़ापन बहुत ज्यादा है। इस पिछड़ेपन को जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाकर दूर नहीं किया जा सकता क्योंकि पिछड़ेपन के सभी कारण शासन विधि से जुड़े हुए नहीं हैं। बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। शिक्षा का अभाव है। स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। रोजगार का अभाव है। गरीबी है। यह सारी कमियां वैसी सरकारी नीतियों से दूर होंगी जिनका इन पर सीधा असर पड़े।

वह लोग जो मुस्लिमों की आबादी को लेकर भ्रम फैलाते हैं, वह खास रणनीति के लिहाज से भ्रम फैलाते हैं। उन्हें हकीकत पता है कि भारत में जनसंख्या विस्फोट जैसी कोई स्थिति नहीं है। मुस्लिम समुदाय की जनसंख्या भी नियंत्रित हो रही है। लेकिन यह एक तरह का भय है। जो उस समाज में अपने आप पनपने लगता है जहां पर एक दूसरे के बीच अलगाव की दीवार पहले से मौजूद हो। वहां पर कोई आकर इस बात के लिए किसी समुदाय को डरा सकता है कि "अगर दूसरे समुदाय को रोको नहीं गया तो वह तुम्हारे संसाधन को हड़प लेंगे, तुम्हारा हक दूसरा समुदाय लेकर चला जाएगा।” यही भावना सांप्रदायिकता की भावना होती है। भारत ही नहीं बल्कि दूसरे देश की दक्षिणपंथी राजनीति इसका फायदा उठाने की भरपूर कोशिश करती हैं।

विश्व इतिहास बताता है कि आबादी के मसले पर पहचान की राजनीति पहले से बहुत तीखी हो जाती है। अगर हमारी चुनावी राजनीति के भीतर थोड़ी बहुत भी मर्यादा होती तो वह चुनाव जीतने के लिए वैसे कदम न उठाते जो समाज को ही बर्बाद करते हैं। अगर हमारे राज्य के संस्थाओं के भीतर थोड़ी बहुत भी सत्यनिष्ठा होती तो विधायिका के ऐसे तिकड़मों का बिल्कुल सहयोग न करती।

UP Population Regulation Bill
up population control bill
Yogi Adityanath
BJP
communal politics
Muslim population

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • yogi bulldozer
    सत्यम श्रीवास्तव
    यूपी चुनाव: भाजपा को अब 'बाबा के बुलडोज़र' का ही सहारा!
    26 Feb 2022
    “इस मशीन का ज़िक्र जिस तरह से उत्तर प्रदेश के चुनावी अभियानों में हो रहा है उसे देखकर लगता है कि भारतीय जनता पार्टी की तरफ से इसे स्टार प्रचारक के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।”
  • Nagaland
    अजय सिंह
    नगालैंडः “…हमें चाहिए आज़ादी”
    26 Feb 2022
    आफ़्सपा और कोरोना टीकाकरण को नगालैंड के लिए बाध्यकारी बना दिया गया है, जिसके ख़िलाफ़ लोगों में गहरा आक्रोश है।
  • women in politics
    नाइश हसन
    पैसे के दम पर चल रही चुनावी राजनीति में महिलाओं की भागीदारी नामुमकिन
    26 Feb 2022
    चुनावी राजनीति में झोंका जा रहा अकूत पैसा हर तरह की वंचना से पीड़ित समुदायों के प्रतिनिधित्व को कम कर देता है। महिलाओं का प्रतिनिधित्व नामुमकिन बन जाता है।
  • Volodymyr Zelensky
    एम. के. भद्रकुमार
    रंग बदलती रूस-यूक्रेन की हाइब्रिड जंग
    26 Feb 2022
    दिलचस्प पहलू यह है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने ख़ुद भी फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से सीधे पुतिन को संदेश देने का अनुरोध किया है।
  • UNI
    रवि कौशल
    UNI कर्मचारियों का प्रदर्शन: “लंबित वेतन का भुगतान कर आप कई 'कुमारों' को बचा सकते हैं”
    26 Feb 2022
    यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया ने अपने फोटोग्राफर टी कुमार को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान कई पत्रकार संगठनों के कर्मचारी भी मौजूद थे। कुमार ने चेन्नई में अपने दफ्तर में ही वर्षों से वेतन न मिलने से तंग आकर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License