NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
उत्पीड़न
भारत
राजनीति
UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश
21 अप्रैल से विभिन्न जिलों से आये कई छात्र छात्रायें इको गार्डन में धरने पर बैठे हैं। ये वे छात्र हैं जिन्होंने 21 नवंबर 2021 से 2 दिसंबर 2021 के बीच हुई दरोगा भर्ती परीक्षा में हिस्सा लिया था
सरोजिनी बिष्ट
26 May 2022
upsi
फ़ोटो साभार: ट्विटर

इन दिनों उत्तर प्रदेश में दरोगा भर्ती परीक्षा की चर्चा हर जुबान पर है, आख़िर यह परीक्षा इतनी चर्चा का विषय क्यों बन रही है और कौन से ऐसे तथ्य हैं जो यूपी पुलिस भर्ती बोर्ड की पारदर्शिता पर सवालिया निशान लगा रहे हैं उसे परखना जरूरी है और इसलिए जरूरी है क्योंकि यह तस्वीर बताती है कि यूपी में सरकार की नौकरी पाने से पहले होने वाली परीक्षाओं का स्तर किस हद तक गर्त में जा रहा है। या तो परीक्षायें ही नहीं हो रहीं या परीक्षा की तारीख आने के बाद परीक्षा ही स्थगित हो जा रही हैं या परीक्षा हो भी रही हैं तो फर्जीवाड़े की भेंट चढ़ जा रही हैं.....तो आईये चलते हैं उन छात्र छात्राओं के पास जो दरोगा भर्ती परीक्षा धांधली के खिलाफ़ धरने पर डटे हुए हैं और इनकी एक ही प्रमुख माँग है- जाँच के लिए एसआईटी का गठन। 

"बोलने का अधिकार नहीं.... हमारे लिए रोजगार नहीं" 
"पढ़े लिखे युवाओं का दर्द....

"उत्तर प्रदेश में 15 से 22 लाख में दरोगा बनो"

"काली एजेंसी NSEIT को उत्तर प्रदेश में हमेशा के लिए बैन करो "
"गली गली में शोर है.. पुलिस भर्ती बोर्ड चोर है”

आदि नारों के साथ बीते 21 अप्रैल से विभिन्न जिलों से आये कई छात्र छात्रायें इको गार्डन में धरने पर बैठे हैं। ये वे छात्र हैं जिन्होंने 21 नवंबर 2021 से 2 दिसंबर 2021 के बीच हुई दरोगा भर्ती  परीक्षा में हिस्सा लिया था और परीक्षा उत्तीर्ण भी की लेकिन आज ये छात्र अपना घर और दूसरी परीक्षाओं की पढ़ाई छोड़कर खुले आसमान के नीचे भीषण गर्मी और बरसात को झेलते हुए धरने पर डटे हुए हैं और इसलिए डटे हुए हैं क्योंकि ये दरोगा भर्ती परीक्षा में हुए फर्जीवाड़े के खिलाफ़ आवाज़ उठाकर यह बताना चाहते हैं कि किस कदर ऐसे छात्र छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है जो अपने घर परिवार से दूर ईमानदारी से रात दिन एक कर मेहनत कर रहे हैं और ये तमाम वे बच्चे हैं जो मध्यम वर्ग या निम्न मध्यम वर्ग परिवार से आते हैं जिनके लिए घर से दूर रहकर पढ़ाई करने का मतलब है प्रतिदिन एक बड़ी आर्थिक और मानसिक चुनौती से जूझना। 

दरअसल पूरा मामला कुछ यूँ है, मार्च 2021 में उत्तर प्रदेश सरकार ने यूपी पुलिस दरोगा भर्ती का ऐलान किया इसके बाद 1 अप्रैल 2021 से 15 जून 2021 तक 12 लाख बच्चों ने फॉर्म भरे। कुल 9,534 पदों पर भर्ती होनी थी। सामान्य और ओबीसी श्रेणी के अभ्यर्थियों से 400 रुपए, एससी-एसटी और महिला उम्मीदवारों से 200 रुपए फॉर्म फीस के रूप में लिया गया। मार्च में ऐलान होने के बाद अप्रैल 2021 में भर्ती के लिए विज्ञापन जारी हुआ और सितंबर में कोरोना के चलते परीक्षा की तारीख बदल दी गई इसके बाद 12 नवंबर से 2 दिसंबर तक परीक्षा ऑनलाइन मोड में संपन्न हुई। कुल 54 शिफ्ट हुए। 7.61 लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। 8 जनवरी 2022 को आचार संहिता लागू हो गई इसलिए यह तय हो गया कि परिणाम नई सरकार बनने के बाद आएंगे।

प्रदेश सरकार ने परीक्षा करवाने की जिम्मेदारी एक ऐसी एजेंसी, NSEIT को दे दी जो पहले से ही 6 राज्यों में प्रतिबंधित है और जबकि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धांधली के ही एक मामले में इस एजेंसी पर साढ़े तीन करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया था। अब छात्रों का योगी सरकार से यह सवाल है कि जब यह एजेंसी 6 राज्यों में Black listed थी और इसमें जुर्माना भी लग चुका है तो आख़िर इसे परीक्षा कराने की जिम्मेदारी किस आधार दी गई जबकि यह एजेंसी हर स्तर पर भ्रष्टाचार में लिप्त है। 

14 अप्रैल 2022 को मेरिट जारी कर दी गई। इस मेरिट लिस्ट में कुल 36,170 सफल अभ्यर्थियों के नाम थे। लेकिन जब अभ्यर्थियों को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और फिजिकल टेस्ट के लिए बुलाया गया तो लिए परीक्षा के दौरान बड़े पैमाने पर हुई धांधली का भांडाफोड हुआ और तस्वीर सामने आई कि कई छात्र ऐसे भी थे  जिन्होंने पहले एक घंटा तो कुछ नहीं किया और बाद में मात्र 9 से 10 मिनट में 160 में से 150 से लेकर 158 तक सवाल हल कर दिये जबकि कुछ ऐसे छात्र भी थे जिन्होंने दो घंटे का पेपर जादुई तरीके से महज तीन मिनट में हल कर दिया। जब ऐसे अभ्यर्थियों को पकड़ा गया और जांच हुई तो पता चला इनका कम्प्यूटर बाहर से मैनेज किया जा रहा था। जैसे-जैसे अभ्यर्थी डाक्यूमेंट्स वेरिफिकेशन और शारीरिक परीक्षण के लिए आते गए वैसे-वैसे परीक्षा में हुए बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा होता गया जो अभी तक जारी है। 15 मई को  ख़ुलासा होता है कि देहरादून और ग्वालियर की कंपनियों ने 10-10 लाख रुपए में परीक्षा पास करवाने की गारंटी ली थी और कुछ लड़कों को पास करवाया भी। उस कंपनी ने एक आईटी कंपनी की मदद ली और परीक्षा केंद्र प्रबंधकों से मिलकर कम्प्यूटर ही हैक करवा लिया।

धरने पर बैठे छात्रों का कहना है कि 14 नवंबर को लखनऊ के जानकीपुरम में कॉस्मो फाउंडेशन परीक्षा केंद्र पर चार ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया गया जो सेंटर के बाहर बैठकर अंदर बैठे अभ्यर्थी को ब्लूटूथ के जरिए सही जवाब बता रहे थे तो वहीं परीक्षा के दौरान ऐसे साइबर एक्सपर्ट भी पकड़ में आये थे जो परीक्षा केंद्र के मास्टर कम्प्यूटर को हैक कर लेते थे और रिमोट के जरिए एक्सेस करते थे। इन लोगों ने परीक्षा पास करवाने के लिए 8 से 10 लाख रुपए लिए थे। इस परीक्षा में ऐसे सॉल्वर गैंग भी पकड़े गए थे जो दूसरे की जगह परीक्षा दे रहे थे। जानकारी के मुताबिक परीक्षा के समय होने वाली इन धांधली के मद्देनजर ही STF की उतीर्ण अभ्यर्थियों की गतिविधियों पर नजर थी। 21 मई को एसीपी लखनऊ प्राची सिंह ने इसी परीक्षा में धांधली करने वाले 16 और लोगों को लखनऊ से गिरफ्तार किया। इसमें हाथरस, हापुड़, प्रयागराज, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, के अलावा बिहार और हरियाणा के भी लोग शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की जांच के आधार पर अब तक कुल 129 अभ्यर्थी गिरफ्तार कर जेल भेजे जा चुके हैं और अभी भी ऐसे छात्रों की धड़पकड़ जारी है जिन्होंने फर्जी तरीके से परीक्षा पास की। खासकर ऐसे अभ्यर्थियों पर पैनी नजर है जिन्होंने काफी हाई स्कोर किया है। बीते दिनों 35वीं वाहिनी पीएसी लखनऊ में 66 अभ्यर्थियों को दौड़ के लिए बुलाया गया था। इस दौरान इन अभ्यर्थियों से बोर्ड के उच्चाधिकारियों द्वारा आनलाइन लिखित परीक्षा के संबंध में गहन पूछताछ की गई तो उनमें से 11 अभ्यर्थियों द्वारा संतोषजनक उत्तर नहीं दिया जा सका। बोर्ड के अनुसार परीक्षा में सफल होने के लिए इन अभ्यर्थियों द्वारा परीक्षा केंद्रों के व्यवस्थापकों की मदद से अनुचित साधन का प्रयोग किए जाने का पर्याप्त साक्ष्य पाया गया है। इन 11 अभ्यर्थियों में पांच पुरुष व छह महिला अभ्यर्थी शामिल हैं। कई जगह परीक्षा केन्द्र व्यवस्थापकों के खिलाफ़ भी मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

इस पूरे फर्जीवाड़े के खिलाफ़ दरोगा भर्ती परीक्षा देने वाले छात्र छात्रायें करीब करीब चालीस दिन से धरने पर हैं। इनमें से कुछ छात्र ऐसे भी हैं जो बहुत कम अंतर से सफल अभ्यर्थियों की श्रेणी में आने से चूक गए लेकिन इनका आन्दोलन इस उम्मीद में भी जारी है कि शायद इनकी मेहनत का आंकलन ईमानदरी से किया जाये। धरने में मौजूद मऊ के रहने वाले नित्या ने परीक्षा पास की है, वे बेहद क्रोधित भाव में कहते हैं- मौजूदा हालात यही हैं कि धांधलीबाज धन के बल पर आगे बढ़ जा रहे हैं और मेहनत करने वाले छात्र पास होकर भी यूँ ही बैठे हुए हैं। नित्या के मुताबिक एग्जाम के पहले दिन से ही धांधली के मामले सामने आ रहे थे तो तब भी इस पर रोक लगाई जा सकती थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। नित्या के पिता एक किसान हैं और माँ गृहणी। नित्या लखनऊ में अपने चाचा के पास रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। वे कहते हैं- धरने पर बैठे हुए आज हमें एक महीने से ज्यादा हो गया लेकिन अभी तक सरकार का रुख उनकी मांगो के प्रति बहुत स्पष्ट नजर नहीं आ रहा। नित्या कहते हैं- छात्रों की केवल एक ही माँग है DV/PST यानी डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और फिजिकल टेस्ट पर रोक लगाते हुए सरकार इस पूरी धांधली की उच्चस्तरीय जाँच के लिए एसआईटी (SIT) का गठन करें और चूंकि यह मामला पुलिस विभाग से जुड़ा है इसलिए इस जाँच से पुलिस को दूर रखा जाये। 

उन्नाव की रहने वाली मोहिनी तिवारी कहती हैं- भर्ती बोर्ड बेशक यह दिखा रहा हो कि हर रोज 10-12 अभ्यर्थी पकड़े जा रहे हैं लेकिन फर्जीवाड़े से पास हुए छात्र छात्राओं का आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा है। मोहिनी के मुताबिक बड़ी संख्या में अभ्यर्थी DV/ PST छोड़ रहे हैं और यह वही अभ्यर्थी हैं जिन्होंने धांधली से परीक्षा पास की है। वे कहती हैं हमारी केवल एक ही माँग है एसआईटी का गठन हो और जिसमें पुलिस भर्ती बोर्ड का कोई भी सदस्य शामिल न हो। 

धरने में त्रिवेंद्रम (केरल) से आई एक सफल महिला अभ्यर्थी  प्रियांशी से भी मुलाकात हुई। वे कहती हैं जब उन्होंने इस परीक्षा को  पास किया तो उन्हें इतनी खुशी हुई कि अब तो नौकरी पक्की है लेकिन जब अंतिम रिजल्ट जारी हुआ तो उनके सपने चकनाचूर हो गए क्योंकि कई अभ्यर्थी इतने अधिक नंबर लाये थे कि तब ही समझ में आ गया था कि बड़े पैमाने पर धांधली हुई है और वही सच भी हुआ। प्रियांशी बताती हैं- हर दिन छात्र छात्राएँ धरने पर आ रहे हैं हाँ किसी दिन संख्या कम कभी ज्यादा रहती है लेकिन हर दिन छात्र धरने पर आ रहे हैं । 

बहरहाल मुख्य अतिरिक्त न्यायाधीश (CJM) रवि कुमार गुप्ता ने वर्ष 2021 में आयोजित दरोगा भर्ती परीक्षा में गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर रिपोर्ट दर्ज करने की मांग वाली अर्जी को पोषणीय मानते हुए इसे सुनवाई के लिए प्रकीर्ण वाद के रूप में दर्ज कर लिया है। मामले की अगली सुनवाई 16 जून को होगी। पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने कोर्ट में अर्जी देकर बताया कि इस परीक्षा के अभ्यर्थियों द्वारा दिए गए तथ्यों व सुबूतों से प्रथमदृष्टया भर्ती में भारी गड़बड़ी की आशंका है। वहीं परीक्षा के दौरान एसटीएफ ने भी कई एफआईआर दर्ज किन, गोरखपुर में दर्ज दो एफआईआर में परीक्षा कराने वाली एजेंसी का नाम लिया गया है और इस एजेंसी के कई राज्यों में ब्लैकलिस्टेड होने के बावजूद यहां उसे काम दिया। इससे मामला गंभीर जान पड़ता है। इतना ही नहीं पीईटी में बहुत कम नंबर पाने वाले कई अभ्यर्थियों को दरोगा भर्ती परीक्षा में भारी नंबर मिले, इससे परीक्षा की शुचिता पर प्रश्चचिह्न लग गए हैं। इस मामले में अब लखनऊ समेत कई जिलों में रोजाना काफी संख्या में फर्जी अभ्यर्थी पकड़े जा रहे हैं।

(लेखिका स्वतन्त्र पत्रकार हैं)

ये भी पढ़ें: यूपी चुनाव: योगी राज में पेपर लीक और परीक्षा-संबंधित घोटालों की कोई कमी नहीं

Uttar pradesh
UPSI
UPSI Scam
unemployment
yogi government
Yogi Adityanath
Police Recruitment Board

Related Stories

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

जन-संगठनों और नागरिक समाज का उभरता प्रतिरोध लोकतन्त्र के लिये शुभ है

वाम दलों का महंगाई और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ कल से 31 मई तक देशव्यापी आंदोलन का आह्वान

मनरेगा मज़दूरों के मेहनताने पर आख़िर कौन डाल रहा है डाका?

यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन

CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा

अनुदेशकों के साथ दोहरा व्यवहार क्यों? 17 हज़ार तनख़्वाह, मिलते हैं सिर्फ़ 7000...

पत्रकारों के समर्थन में बलिया में ऐतिहासिक बंद, पूरे ज़िले में जुलूस-प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • Lucknow university
    असद शेख़
    कैंपस से: यूपी के छात्रों के क्या हैं मुद्दे, किसे देंगे अपना वोट?
    17 Jan 2022
    स्वतंत्र युवा पत्रकार असद शेख़ ने न्यूज़क्लिक के लिए उत्तर प्रदेश के अलग-अलग विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राओं से उनके मुद्दों और विधानसभा चुनाव के बारे में बात की।
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में लगातार चौथे दिन ढाई लाख से ज़्यादा नए मामले
    17 Jan 2022
    स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा आज सोमवार, 17 जनवरी को जारी आंकड़ों के अनुसार देश में लगातार चौथे दिन भी कोरोना के ढाई लाख से ज़्यादा यानी 2,58,089 नए मामले सामने आए हैं।
  • akhilesh and yogi
    सुबोध वर्मा
    क्या यूपी सरकार से भाजपा के बाहर होने की उल्टी गिनती शुरू हो गई है?
    17 Jan 2022
    सत्तारूढ़ भाजपा गठबंधन, जिसके खाते में 403 में से 326 सीटें आई थीं, वह आगामी चुनाव हार सकता है – जोकि पूरी तरह से संभव है यदि सपा गठबंधन के पक्ष में 4-5 प्रतिशत वोटों की बढ़ोतरी का रुझान होता है।
  • punjab
    न्यूज़क्लिक टीम
    पंजाब : मुख्यमंत्री चेहरों की घोषणा इतनी मुश्किल क्यों ?
    16 Jan 2022
    पंजाब की जनता क्या चाहती है? इस 2022 विधान सभा चुनावों में एक तरफ आम आदमी पार्टी की तेज़ पकड़ है और दूसरी तरफ़ बीजेपी और कांग्रेस अपने दांव अलग खेल रही है। देखिये वरिष्ठ पत्रकार नीलू व्यास का पंजाब…
  • Bulli Bai', 'Sully Deals
    न्यूज़क्लिक टीम
    बुल्ली बाई और सुल्ली डील जैसे ऐप्स क्या दर्शाते हैं?
    16 Jan 2022
    बुल्ली बाई और सुल्ली डील जैसे ऐप्स के आने के बाद कई नयी चीज़ें सामने आयीं. क्या ऐसा पहली बार हुआ? 'इतिहास के पन्ने मेरी नज़र से' के इस अंग में वरिष्ठ पत्रकार नीलांजन बताते हैं कि दक्षिणपंथी विचार ने…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License