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राजनीति
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अमरिका का सुप्रीम कोर्ट कभी भी उदारवादी नहीं रहा है
रूढ़िवादी रिपब्लिकन पार्टी देश की सर्वोच्च अदालत में 6-3 का बहुमत चाहती है। यह सर्वोच्च न्यायालय को मध्यमार्गी दक्षिणपंथ से धुर दक्षिणपंथी रुझान की तरफ़ ले जाएगा जिसके परिणाम भयानक होंगे।
सोनाली कोल्हटकर
29 Sep 2020
Translated by महेश कुमार
अमरिका का सुप्रीम कोर्ट

अमरीकी सुप्रीम कोर्ट की जज रूथ बेडर गिन्सबर्ग के निधन के कुछ ही घंटों बाद, आहत अमेरिकियों ने अटकलें लगानी शुरू कर दी कि रिपब्लिकन सीनेटर मिट रोमनी चुनाव से कुछ हफ्ते पहले सीनेट की पुष्टि के वक़्त नए जज का विरोध करेंगे या नहीं। आखिरकार, रोमनी हाई-प्रोफ़ाइल रिपब्लिकन सांसद के रूप में तब उभरे थे जब वे अपनी पार्टी के एकमात्र सीनेटर थे, जिन्होंने वर्ष के शुरू में सीनेट द्वारा राष्ट्रपति ट्रम्प के खिलाफ महाभियोग के मुकदमे में दोषी ठहराने के पक्ष में मतदान किया था। तब उन्होंने ट्रम्प पर "सत्ता में बने रहने के लिए चुनाव को भ्रष्ट करने के प्रयास" और "सार्वजनिक विश्वास को धता बताने के दोषी" का आरोप लगाया था। फिर भी, गिन्सबर्ग की मृत्यु के बाद, रोमनी ने देश के सर्वोच्च न्यायालय में एक दशक के लंबे समय से दक्षिणपंथी झुकाव की तरफ हाथ बढ़ा दिया। इस बारे में उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि "मेरे उदार मित्र, कई दशकों से, एक उदार अदालत का इस्तेमाल करते आए हैं," और अब यह उचित समय है कि "एक राष्ट्र जिसकी अदालत मध्यमार्गी दक्षिणपंथी रुझान की रही है वह अब मध्यमार्गी दक्षिणपंथी रुझान/दृष्टिकोण को दर्शाए।"

बेशक, यह सच नहीं है। राष्ट्र मध्यमार्गी-दक्षिणपंथी रुझान मुद्दे के आधार पर तय करता है,  चाहे वह गर्भपात, स्वास्थ्य देखभाल, बंदूक संस्कृति पर नियंत्रण, आव्रजन, या श्रम अधिकार और यूनियन के अधिकार का मुद्दा हो। उपरोक्त सभी मुद्दों पर केंद्रित मामले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के समाने आने वाले कई वर्षों में आने की संभावना है, जिन पर रूढ़िवादी न्याय राष्ट्र पर अपने विचारों को लागू करेंगे जो विपरीत दिशा होगी। 

रिपब्लिकन को सुनकर, यह कल्पना करना आसान है कि राजनीतिक स्पेक्ट्रम के दाएं और बाएं छोर की ताक़तें नैतिक आधार पर समान रूप से लदी हुई हैं। लेकिन रूढ़िवादी ताक़तें "कट्टरपंथी वामपंथियों" के उत्थान के प्रति संतुलन नहीं बना पाती हैं, जिसका कि वे बार-बार आह्वान करते हैं। वे वस्तुतः यथास्थिति का "संरक्षण" यानि उसे बनाए रखना चाहते हैं। वे यानि कंजरवेटिव अतीत के अन्याय और अति नस्लीय और लैंगिक असमानता की भयावहता का प्रतिनिधित्व करते हैं जो पहले के समय का कड़ुवा सच थे।

इसके विपरीत, वामपंथी बेहतर भविष्य और "प्रगति" की उम्मीद करते है, इसलिए वे "प्रगतिशील" नाम से जाने जाते है। पूरे इतिहास में, प्रगति हुई है क्योंकि वामपंथी झुकाव वाले क्रांतिकारियों ने रूढ़िवादी ताकतों के खिलाफ न्याय के लिए लगातार लड़ाई लड़ी है। आज के रूढ़िवादी नेता, डॉ॰ मार्टिन लूथर किंग जूनियर और नागरिक अधिकारों के आंदोलन के नाम पर केवल बुदबुदाते हैं। वे गुलामी की भयावहता की निंदा करते हैं। लेकिन वे अलगाववादी और ग़ुलामी थोपने वालों के वैचारिक मित्र या उनके चचेरे भाई हैं। यहां तक कि राष्ट्रपति ट्रम्प भी लूथर किंग का हवाला देते हुए 22 सितंबर के अपने कार्यकारी आदेश में "नस्ल और सेक्स स्टीरियोटाइपिंग" पर कहा कि, "हर व्यक्ति की अंतर्निहित समानता में विश्वास", ही वह विश्वास है जिसका ख्वाब डॉ मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने अपने बच्चों के लिए देखा था और कहा था कि एक दिन उन्हे 'उनकी त्वचा के रंग से नहीं बल्कि उनके चरित्र से से आंका जाएगा।'

जब डॉ॰ किंग जीवित थे, तो उन्हें अधिकांश श्वेत अमेरिकियों ने तिरस्कृत कर दिया था। क्या हम यह मान सकते हैं कि अगर उस समय ट्रम्प एक राजनीतिक नेता होते तो क्या वे लूथर किंग के समर्थक हो सकते थे? बल्कि इसकी कहीं अधिक संभावना है कि वह उस वक़्त उन  अग्रणी नेताओं में से होते जो लूथर किंग का सरेआम हत्या का आह्वान करते।

इतिहास आज के कंजरवेटिव/रूढ़िवादी नेताओं और विशेष रूप से ट्रम्प (हाँ, सीनेटर रोमनी, आप को भी) का उसी अपमान के साथ न्याय होगा, जैसा दमनकारी व्यवहार आपने हमारे साथ किया हैं। रूढ़िवादी ताक़तें सामाजिक डायनासोर हैं जो इस बात का संकेत देती हैं कि वे लोग जो कम सफेद, कम अमीर हैं, पुरुष नहीं हैं अमरिका या अमरिका में होना उनके लिए एक बुरा सपना है। रोमनी ने जून में हुए नस्लीय न्याय के लिए विरोध में मार्च हिस्सा लिया था और ट्वीट किया कि "ब्लैक लाइव्स मैटर।" लेकिन सुप्रीम कोर्ट में ट्रम्प के दक्षिणपंथी उम्मीदवार को सीनेट के वोट से समर्थन यह भी सुनिश्चित करता है कि दक्षिणपंथी बहुमत के परिणामस्वरूप ब्लैक लाइव्स मैटर जैसे मुद्दे ज़िंदा रहे यानि उन पर दमन होता रहे। अफोर्डेबल केयर एक्ट- यानि सबको स्वास्थ्य देखभाल जिस कि रूढ़िवादी बहुसंख्यक न्यायालय में हार की संभावना है, वह अफ्रीकी अमेरिकियों पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। दांव पर लगे अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों में मतदान अधिकार, सकारात्मक कार्रवाई, कार्यस्थल पर भेदभाव आदि शामिल हैं।

यह बताना ज़रूरी है कि आज हम जिस विषम परिस्थिति से गुजर रहे हैं, उसके लिए रिपब्लिकन सांसदों को दोषी ठहराया जाना जरूरी है, डेमोक्रेट्स भी कोई दोषी नहीं हैं। कंजरवेटिव ने नैतिकता के दावों को घड़ते हुए नव उदारवाद का समर्थन किया है-उदार पार्टी में वे मध्यमार्गी  जिनके उदारवाद असमानताओं के बीच असमानता को पूंजीवाद ने गढ़ा है ने उन्हें न्यायोचित खुली आलोचना और उदारवादी विचारधारा की तरफ आकांक्षा लगाए रखने के लिए खुला छोड़ दिया हैं।

मध्यमार्गियों ने सामाजिक न्याय के मुद्दों के प्रति मौखिक निष्ठा का वादा करते हुए फिलहाल पानी को धुंधला दिया है, जबकि उल्टे अधिक चतुराई से अपने रूढ़िवादी समकक्षों की तरह यथास्थिति बनाए रखने का काम कर रहे हैं। इसे कैसे समझा जाए कि डेमोक्रेट द्वारा संचालित शहरों और राज्यों जैसे-लॉस एंजिल्स, न्यूयॉर्क, शिकागो, मिनियापोलिस में शहर के बाद शहर में नस्लवादी पुलिस हिंसा कलर समुदायों पर जारी रहती है? या कि यह पार्टी सभी को सरकार समर्थित स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करने के अपने मूल वादे से पीछे हटती दिखती है, जबकि टैक्स से इकट्ठे किए गए डॉलर को सेना के खर्च में डालने से वह बहुत खुश है?

जब जस्टिस गिन्सबर्ग जीवित थी, तब भी सुप्रीम कोर्ट उदार विचारों का रक्षक था, जिसे रोमनी ने अपनाया था। लेकिन पिछले वर्ष के आदेशों की जाँच करते हुए एक संवैधानिक वकील ने निष्कर्ष निकाला कि "बड़ी अदालत रूढ़िवाद का गढ़ बनी हुई है," क्योंकि जिन आदेशों के माध्यम से अप्रवासी अधिकारों, गर्भपात के अधिकारों और श्रमिक अधिकारों को संरक्षित करने में मदद मिली थी, वे सीमित और तकनीकी दायरे के मामले में काफी सीमित थे, जिससे वे भविष्य की अदालतों के मामले में कमजोर पड़ जाएंगे। इस बीच, "धार्मिक स्वतंत्रता" जैसे मुद्दों पर रूढ़िवादी निर्णय व्यापक थे और उनमें चुनौतियों को सहन करने की संभावना थी। वकील और पत्रकार एडम कोहेन ने अपनी हालिया पुस्तक सुप्रीम असमानता में तर्क दिया कि पिछले 50 वर्षों में, सर्वोच्च न्यायालय ने लगातार कमजोरों के अधिकारों के मामलों में शक्तिशाली हितों का पक्ष लिया है।

अब गिंसबर्ग की मृत्यु के बाद उनकी जगह युवा और अति-रूढ़िवादी जज ने ली है, अब सर्वोच्च अदालत मध्यमार्गी वाम से दक्षिणपंथ की तरफ नहीं झुकेगी। बल्कि, यह मध्यमार्गी दक्षिणपंथ से धूर दक्षिणपंथ की तरफ झुकेगी। यह परिवर्तन 3 नवंबर की राष्ट्रपति की दौड़ को अधिक महत्वपूर्ण बना देता है। अगर ट्रम्प को सिर्फ चार साल के भीतर सुप्रीम कोर्ट के तीन न्यायाधीशों को चुनने का मौका मिला है-तो यह उनके पूर्ववर्तियों की तुलना में कहीं अधिक है- कल्पना कीजिए कि अगर ट्रम्प को चार साल ओर मिल गए तो उसका मतलब क्या होगा। लेकिन चुनाव से ठीक एक महीने पहले, ट्रम्पवाद के खिलाफ एकमात्र चुनौती पूर्व उपराष्ट्रपति बिडेन हैं, जो एक मध्यमार्गी डेमोक्रेट हैं। ट्रम्प के रिपब्लिकन समर्थकों का दावा कि बिडेन कट्टरपंथी वामपंथी हैं, पूरी तरह से गलत है, जबकि सच कड़ुवा सच है कि वे लगभग प्रगतिशील भी नहीं हैं। लेकिन फासीवाद की तरफ झुकाव को रोकने के लिए ट्रम्पिज़्म को समाप्त करना जरूरी है और इसलिए बिडेन का समर्थन करना अनिवार्य है, यह दमनकारी और प्रगतिविरोधी ताकतों को पीछे धकेलने और राष्ट्र को प्रगति के रास्ते पर लौटने की दिशा में एक लंबी यात्रा की शुरुवात में पहला कदम होगा।

सोनाली कोलहाटकर “राइज़िंग अप विद सोनाली” की संस्थापक, मेज़बान और कार्यकारी निर्माता हैं। यह एक टेलीविज़न और रेडियो शो है जिसे फ़्री स्पीच टीवी और पैसिफ़िक स्टेशनों पर प्रसारित किया जाता है।

यह लेख ‘इकोनॉमी फ़ॉर ऑल’ में प्रकाशित किया जा चुका है, जो स्वतंत्र मीडिया संस्थान की एक परियोजना है।

अंग्रेज़ी में प्रकाशिक मूल आलेख पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें

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