NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका
अमेरिका की वापसी प्रक्रिया पूरी, तालिबान ने "स्वतंत्र और संप्रभु" अफ़ग़ानिस्तान के लिए जश्न मनाया
सभी विदेशी सैनिकों की वापसी से अफ़ग़ानिस्तान पर अमेरिका के नेतृत्व में दो दशकों के हमले का औपचारिक रूप से अंत हो गया।
पीपल्स डिस्पैच
31 Aug 2021
अमेरिका की वापसी प्रक्रिया पूरी

मंगलवार 31 अगस्त की आधी रात को शेष सभी अमेरिकी सैनिकों के देश छोड़ने के बाद तालिबान सैनिकों ने काबुल हवाई अड्डे का पूरी तरीके से अपने कब्जे में ले लिया। इसे "ऐतिहासिक क्षण" बताते हुए तालिबान ने अमेरिकी सैनिकों की वापसी पर जश्न मनाया और गोलियां चलाते हुए आतिशबाजी की। अमेरिकी सैनिकों की पूर्ण वापसी ने अफगानिस्तान को "स्वतंत्र और संप्रभु" देश बना दिया।

अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन ने सोमवार को घोषणा की कि अफगानिस्तान से अपने नागरिकों और सैन्य कर्मियों को निकालने का काम पूरा कर लिया गया है। इस तरह अमेरिकी इतिहास के सबसे लंबे युद्ध का अंत हो गया।

यूएस सेक्रेटरी ऑफ स्टेट एंथनी ब्लिंकन ने घोषणा की कि अमेरिकी राजनयिक मिशन अस्थायी रूप से काबुल से दोहा स्थानांतरित हो गया है।

वर्ष 2001 में 11 सितंबर को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के हमलों के बाद तथाकथित "आतंक के खिलाफ युद्ध" शुरू करने के लिए 50 भिन्न देशों के नाटो के नेतृत्व वाले गठबंधन के एक हिस्से के रूप में अमेरिकी सैनिकों ने अक्टूबर 2001 में अफगानिस्तान पर हमला किया। इस साल जनवरी में पद संभालने के बाद राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इस साल की शुरुआत में घोषणा की थी कि फरवरी 2020 में तालिबान और अमेरिका के बीच दोहा में हस्ताक्षरित समझौते के अनुसार सभी अमेरिकी सैनिक 31 अगस्त तक इस देश से निकल जाएंगे।
 

अफगानिस्तान में अपनी उपस्थिति के पिछले दो दशकों में अमेरिकी और अन्य विदेशी सैनिक तालिबान को देश पर नियंत्रण करने से रोकने में विफल रहे। 2004 में बनाई गई तथाकथित लोकतांत्रिक व्यवस्था ने स्थानीय भ्रष्टाचार के कारण जनता का विश्वास खो दिया और जब तालिबान ने 15 अगस्त को राजधानी काबुल पर कब्जा कर लिया तो अंतिम निर्वाचित राष्ट्रपति अशरफ गनी और उनके अधिकांश मंत्रिमंडल को देश से भागना पड़ा।

पिछले दो दशकों में अमेरिका ने अफगानिस्तान में युद्ध में 2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक खर्च किए थे और 6,000 से अधिक सैनिकों को खो दिया था, जिनमें से अधिकांश अमेरिकी कॉन्ट्रैक्टर थे। इस युद्ध में हजारों अफगान नागरिकों की मौत भी हुई। इनमें से अधिकांश की मौत युद्धरत गुटों की ओर से की गई गोलीबारी में हुई, जिसमें विदेशी सैनिक भी शामिल थे या अमेरिका और विदेशी सैनिकों द्वारा किए गए अंधाधुंध बमबारी में हुई।

सोमवार को पेंटागन के प्रमुख जनरल केनेथ मैकेंजी ने कई ट्वीट किए जिसमें उन्होंने अफगानिस्तान में अमेरिकी कर्मियों की मौत पर शोक व्यक्त किया और कहा कि अमेरिका ने 14 अगस्त से 6,000 अमेरिकी नागरिकों सहित काबुल से 79,000 लोगों को निकाला है।

USA
Afghanistan
TALIBAN
us leaves afghanistan

Related Stories

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन में हो रहा क्रांतिकारी बदलाव

अमेरिकी आधिपत्य का मुकाबला करने के लिए प्रगतिशील नज़रिया देता पीपल्स समिट फ़ॉर डेमोक्रेसी

भोजन की भारी क़िल्लत का सामना कर रहे दो करोड़ अफ़ग़ानी : आईपीसी

छात्रों के ऋण को रद्द करना नस्लीय न्याय की दरकार है

अमेरिका ने रूस के ख़िलाफ़ इज़राइल को किया तैनात

तालिबान को सत्ता संभाले 200 से ज़्यादा दिन लेकिन लड़कियों को नहीं मिल पा रही शिक्षा

रूस पर बाइडेन के युद्ध की एशियाई दोष रेखाएं

पश्चिम बनाम रूस मसले पर भारत की दुविधा

पड़ताल दुनिया भर कीः पाक में सत्ता पलट, श्रीलंका में भीषण संकट, अमेरिका और IMF का खेल?


बाकी खबरें

  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,067 नए मामले, 40 मरीज़ों की मौत
    20 Apr 2022
    देश की राजधानी दिल्ली में आज फिर कोरोना के नए मामले में बढ़ोतरी हुई है | दिल्ली में 24 घंटों में कोरोना के 632 नए मामले सामने आए हैं। साथ ही देश के अन्य राज्यों में कोरोना के मामलों में धीरे-धीरे बढ़ने…
  • जेनिफ़र हॉलेस
    यूक्रेन युद्ध: क्या गेहूं का संकट मध्य पूर्व के देशों को अधिक खाद्य स्वतंत्र बनाएगा?
    20 Apr 2022
    मध्य पूर्वी देश आने वाले गेहूं की कमी का मुकाबला करने के लिए अपनी खाद्य क्षमता को बढ़ा रहे हैं। लेकिन कुछ उत्साहजनक पहलों के बावजूद, मौजूदा चुनौतियां खाद्य संप्रभुता को लगभग असंभव बना रही हैं – ख़ास…
  • शारिब अहमद खान
    तालिबान को सत्ता संभाले 200 से ज़्यादा दिन लेकिन लड़कियों को नहीं मिल पा रही शिक्षा
    20 Apr 2022
    अफ़ग़ानिस्तान में लड़कियों की शिक्षा हासिल करने पर तालिबानी सरकार द्वारा रोक लगाए हुए 200 दिनों से ज़्यादा बीत चुके हैं। यह रोक अभी भी बदस्तूर जारी है।
  • जितेन्द्र कुमार
    मुसलमानों के ख़िलाफ़ हो रही हिंसा पर अखिलेश व मायावती क्यों चुप हैं?
    20 Apr 2022
    समाजवादी पार्टी या बहुजन समाज पार्टी के नेताओं की सबसे बड़ी परेशानी यही है कि वे संस्कृति के सवाल को ठीक से समझ ही नहीं पा रहे हैं। सामाजिक न्याय व हिन्दुत्व एक दूसरे का विरोधी है फिर भी मुसलमानों के…
  • jahangirpuri
    न्यूज़क्लिक टीम
    खोज ख़बर : VHP की दिल्ली पुलिस को धमकी, गृह मंत्री रहे चुप, प्रतिरोध में हुईं आवाज़ें तेज़
    19 Apr 2022
    खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने नफ़रती राजनीति के बेशर्म राजनीतिक कनेक्शन को कुछ तस्वीरों-घटनाओं के साथ सामने रखा। साथ ही इसके विरोध में उठे विपक्षी दलों के स्वरों को लोकतंत्र को जिंदा रखने…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License