NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका और डेमोक्रेट- आगे भविष्य क्या है? 
डेमोक्रेटिक पार्टी और राष्ट्र दोनों के भविष्य को सुनिश्चित करना नवनिर्वाचित राष्ट्रपति पर निर्भर है। अब वे चाहे  दक्षिणपंथ या मध्यमार्गी रास्ता अपनाएँ, दोनों ही किसी काम के नहीं हैं। 
सोनाली कोल्हटकर
16 Nov 2020
Translated by महेश कुमार
अमेरिका और डेमोक्रेट- आगे भविष्य क्या है? 

नवंबर 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को बाईडेन ने "राष्ट्र की आत्मा की लड़ाई" कहा था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मुखालफत करते हुए बाईडेन ने अपने राजनीतिक एजेंडे और खुद को बेहतर राजनेता बताते हुए अपने और ट्रम्प के बीच के अंतर को स्पष्ट किया। अंततः, लाखों अमेरिकियों ने ट्रम्प के मुक़ाबले बाईडेन को चुना और अमेरिकी इतिहास में किसी भी अन्य राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार से बड़ा जनादेश दिया यानि रिकॉर्ड मत दिए। बर्नी सैंडर्स के समर्थक प्रगतिशील विचार वाले लोगों और मध्यमार्गी उदारवादियों के बीच बने गठबंधन के कारण बाईडेन की यह बड़ी जीत संभव हुई॰ जो ओबामा के वर्षों में वापसी के लिए तरस रहे थे। अब यहां से बाईडेन की आत्मा की लड़ाई शुरू होती है।

दोनों प्रमुख दलों ने राष्ट्रपति पद के लिए अपने ऊन उम्मीदवारों को चुना जो मध्यमार्गी थे। यह माना जाता है कि हर चार साल में होने वाले चुनावो में अधिकांश अमेरिकी मतदाता किसी ऐसे व्यक्ति को पसंद करते हैं जो राजनीतिक स्पेक्ट्रम के किसी एक छोर पर न खड़ा हो बल्कि जिसकी सबके बीच अपील हो। लेकिन रोनाल्ड रीगन के बाद, रिपब्लिकन पार्टी बढ़-चढ़कर दक्षिणपंथी उम्मीदवारों को पसंद करने लगी और इसके जवाब में डोनाल्ड ट्रम्प धुर-दक्षिणपंथी राष्ट्रपति पद के लिए चुने गए- जिनके शासन के चार साल को "आतंक का शासनकाल" कहा जाता है और जिसका इतिहास में कोई अनय सबब नहीं मिलता है। इस प्रतियोगिता में डेमोक्रेट भी दक्षिणपंथ की तरफ चले गए थे, उम्मीद हैं कि अब उनकी पार्टी एक पुराने मध्यमार्गी बहुमत की तरफ जाएगी जो उनकी चुनावी जीत सुनिश्चित करता रहा है। इस सब के चलते, अमेरिकियों का राजनीति से मोहभंग हो रहा था और वे इसमें भाग नहीं ले रहे थे। 2016 में, योग्य मतदाताओं के तीन ब्लॉक थे: एक, ट्रम्प को मतदान करने वाला था, दूसरा, क्लिंटन को मतदान करने वाला और तीसरा वह जिसने वोट ही नहीं किया था। जबकि ट्रम्प का हिस्सा इन तीन ब्लॉक में सबसे छोटा था, लेकिन बाद वाला सबसे बड़ा समूह था।

ट्रम्प के विनाशकारी राष्ट्रपति शासन के तीन साल बाद, प्रगतिशील खेमे ने उदारवादियों और यहां तक कि ट्रम्प विरोधी रिपब्लिकनस के साथ मिलकर कड़ी मेहनत की और अमेरिकी मतदाताओं को यह समझाया कि 2020 के चुनाव में सब कुछ दांव पर लगा है और इसलिए उनकी चुनावी भागीदारी पर राष्ट्र का भविष्य निर्भर है। मतदान के दौरान पूरे देश में मतदाता बढ़ा, लेकिन यह विशेष रूप से उन जनसांख्यिकी स्विंग वाले प्रान्तों में बढ़ा, जहां प्रगतिशील और गैर-श्वेत युवा बड़ी तादाद में वोट के लिए संगठित हुए या अभियान चलाए। 

उदाहरण के लिए, फिलाडेल्फिया जिसके डेमोक्रेटिक वोटों ने बाईडेन को पेंसिल्वेनिया जीतने में  महत्वपूर्ण राज्य के रूप में मदद की, निकोलस ओ'रोरके नाम के युवा ब्लैक ऑर्गनाइज़र ने वर्किंग फैमिली पार्टी के साथ काम करते लिखा, "हमेशा की तरह, डेमोक्रेटिक पार्टी ने कल्पित स्विंग वोटर का खेल खेला जिसमें उन्होने काले और भूरे रंग के मतदाताओं को अपना पक्का मतदाता मान लिया था।” उन्होंने समझाया, "यह फिलाडेल्फिया में प्रगतिशील आंदोलन की तरफ से शुरुआती वोट केंद्रों में प्रवेश के समय पानी और मास्क बांटने तथा मतदाताओं के सवालों के जवाब देते हुए अभियान से संभव हुआ।"

यद्यपि बाईडेन ने राष्ट्रपति पद पर स्पष्ट और निर्णायक जीत हासिल की है- वोट देने और उनकी गिनती में महामारी के कारण हुई देरी के बावजूद- उनकी पार्टी व्हाइट हाउस से अधिक कुछ नहीं जीत पाई। डेमोक्रेट्स उम्मीदवार हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में सीटें हार गए और सीनेट में बहुमत हासिल करने में असफल रहे जैसा कि उन्हें उम्मीद थी। इस तरह के बड़े नुकसान के लिए प्रगतिशील तबके को दोषी ठहराने में मध्यमार्गियों ने समय बर्बाद नहीं किया। न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में कांग्रेस के अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कॉर्टेज़ (डी-एनवाई) ने अपने इन तथ्यों के बारे में बताया: “हर वह उम्मीदवार जिसने स्विंग जिले में सभी को मेडिकेयर की बात काही वे अपनी सीट जीत गए। हम यह भी जानते हैं कि ग्रीन न्यू डील की तरफदारी डूबने का कारण नहीं थी।” दरअसल, कांग्रेस में युवा प्रगतिशील और गैर-श्वेत तबके की वृद्धि हुई है।

हालांकि, वास्तव में यह दावा किया जा सकता है कि घनी आबादी वाले विभिन्न शहरी केंद्रों में निचले स्तर के पद के लिए एक प्रगतिशील उम्मीदवार के रूप में लड़ना आसान है, क्योंकि ट्रम्प ने साबित किया कि पूरे देश में राष्ट्रपति का चुनाव जीतने के लिए एक संकीर्ण एजेंडा और जबरदस्त लोकलुभावन बयानबाजी से राष्ट्रीय चुनाव जीतना संभव है। वास्तव में, बाईडेन ने जिस एजेंडे से पूरे देश के मतदाताओं के समर्थन को हासिल किया वह एक प्रभावी प्रगतिशील एजेंडे है। 

अब, बाईडेन का काम 2022 के मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी का राजनीतिक भविष्य सुनिश्चित करना है, और महत्वपूर्ण रूप से अगले चार वर्षों के लिए भी क्योंकि ट्रम्प ने पहले ही 2024 का चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। उन्हे यह सुनिश्चित करना होगा कि लाखों अमेरिकी जो विनाशकारी महामारी से उत्पन्न वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं वे तबाह न हो,  जलवायु तबाही से बचे, आप्रवासियों की यातना का अंत हो, और जल्द से जल्द विनाशकारी युद्ध की समाप्ती हो।

वे अपनी पार्टी के राजनीतिक भविष्य और देश की जनता की भलाई एवं दोनों की रक्षा निर्णायक रूप से वामपंथ के रास्ते की तरफ बढ़कर ही कर सकते हैं, न कि दाईं ओर (जिसे अक्सर ग़लती से "मध्यमार्गी" कहा जाता है)। वामपंथ मेडिकेयर फॉर ऑल जैसी प्रगतिशील नीतियों, न्यूनतम वेतन बढ़ाने, अमीरों और निगमों पर कर लगाने, ग्रीन न्यू डील को अपनाने, आप्रवास को वैध बनाने का पक्षधर है युद्ध समाप्त करने का पक्षधर है जो सिर्फ लोकप्रिय हैं न कि किसी के हित में हैं। लेकिन दक्षिणपंथी ताकतों द्वारा किए गए जबरदस्त वामपंथ विरोधी प्रचार ने अबिगेल स्पैनबर्गर (डी-वीए) जैसे मध्यमार्गी डेमोक्रेट्स को डरा दिया है, जिनका मानना है कि उनकी पार्टी का इतना बड़ा नुकसान "समाजवाद" शब्द का उपयोग करने से हुआ। स्पैनबर्गर ने प्रगतिशील तबके के खिलाफ बोलते हुए कहा कि, "हमें कभी भी 'समाजवादी' या 'समाजवाद' शब्द का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।" लेकिन बाईडेन ने अपने अभियान के दौरान उन शब्दों का उपयोग भी नहीं किया, बल्कि उन्होने ने "समाजवाद" के विचार को स्पष्ट रूप से नकार दिया था। उन्होंने अपने इस विचार का रहस्योद्घाटन या कह कर किया कि उन्होंने प्राथमिक चुनावों में समाजवादी उम्मीदवार सीनेटर बर्नी सैंडर्स (I-VT) को हराया था। कम मत पाने वाले हारे उम्मीदवारों में से कोई भी स्पष्ट रूप से यह महीन पहचान पाया कि समाजवादियों ने वास्तव में दक्षिणपंथी उम्मीदवारों के मुक़ाबले चुनाव की रात बेहतर काम किया और जीत हासिल की। 

तथ्य यह है कि रिपब्लिकन चुनाव जीतने के लिए कुछ भी करेंगे और कहेंगे फिर वह सच है या नहीं और इसलिए वे डेमोक्रेट्स को "समाजवादी" भी कह देते हैं। कट्टर दक्षिणपंथी द्वारा डेमोक्रेटिक पार्टी के बारे में इस तरह का प्रचार करने से ट्रम्प और उनके समर्थकों को यह मौका मिल जाता है और वे उदारवादियों और प्रगतिशील तबके को कुचल देते हैं।

बाईडेन और डेमोक्रेटस प्रगतिशील और लोकप्रिय नीतियों को अपनाते हुए और बिना सोचे समझे समाजवादी होने के आरोपों को नकारते हुए आगे बढ़ सकते हैं। यदि सबके लिए मेडिकेयर समाजवादी है, तो वर्तमान में जारी ‘कुछ के लिए मेडिकेयर’ भी हमारे पास है। यदि न्यूनतम वेतन बढ़ाना समाजवादी है, तो फ्लोरिडा के मतदाताओं ने इसे केवल शब्द में निरूपित करते हुए गर्व से काम में लागू कर दिखाया। ग्रीन न्यू डील फ्रैंकलिन डेलानो रूजवेल्ट की मूल योजना समाजवादी है, जिसके लिए इसका नाम रखा गया है। यदि युद्ध को समाप्त करना समाजवादी माना जाता है, तो ट्रम्प भी समाजवादी हैं, क्योंकि उन्होने सैनिकों को घर लाने का संकल्प लिया। प्रगतिशील नीतियों का मामला बनाना मुश्किल नहीं है क्योंकि वे लोकप्रिय हैं। वामपंथियों से निपटने के खिलाफ बनाया जाने वाला एकमात्र मामला भयावह प्रचार है, जिस पर रिपब्लिकन विश्वास करते हैं। 

बाईडेन पार्टी और राष्ट्र के भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए क्या कर सकते है? उनके एजेंडे के सबसे पहले के कामों में ट्रम्प के उन सबसे खराब कार्यकारी आदेशों का उलटना है जिनका असर आम दिखाई देता है। यह एक आसान और गैर-विवादास्पद कदम है। लेकिन बाईडेन के सामने दक्षिणपंथ का सामना करने का गंभीर दबाव हैं। वे अपने मंत्रिमंडल के गठन में रिपब्लिकन सत्ता के सामने झुकते दिखाई दे रहे हैं। एक्सियोस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सीनेट में बहुमत के नेता मिच मैककोनेल (आर-केवाई) "बाईडेन के साथ मध्यमार्गी उम्मीदवारों के साथ काम करना चाहते हैं, लेकिन उनके साथ काम नहीं करेंगे जो कट्टर प्रगतिशील हैं या जिंका कंजरवेटिव के साथ विवादास्पद मसला हैं। कंजर्वेटिव और मध्यमार्गी मीडिया के पंडितों ने बाईडेन को बार-बार चेतावनी दी है कि उसे दक्षिणपंथ से निपटने की जरूरत पड़ेगी। वे बाईडेन की "एकता" की बात को मध्यमार्गी झुकाव का स्पष्टीकरण मानते हैं।

लेकिन मतदाताओं की चिंताएं साफ-सुथरी ज्यामितीय आकृतियों में फिट नहीं होतीं हैं, जहां वाम  और दक्षिण दोनों को एक मध्यमार्गी रास्ते पर लाया जा सके, जिसका स्पष्ट मतलब है कि आप राजनीतिक स्पेक्ट्रम के दोनों छोर को खारिज कर रहे हैं। बीच का रास्ता क्रूरता, दुर्व्यवहार, भ्रष्टाचार, कॉर्पोरेट लालच, युद्ध, नस्लवाद, गलतफहमी, होमोफोबिया और बेईमानी को नकारने की धरा पर केंद्रित हो सकता है। बीच का मैदान लोकप्रिय नीतियों पर केंद्रित हो सकता है जो लोगों को सीधे लाभ पहुंचाती हैं। दूसरे शब्दों में, बाईडेन को खुद को एक वामपंथी लोकप्रिय नेता के रूप में बदलने की जरूरत है, और वह ऐसा खुद को स्पष्ट रूप से लेबल किए बिना कर सकते हैं। क्योंकि राष्ट्र और इस ग्रह का भविष्य इस सब पर काफी निर्भर करता है।

सोनाली कोल्हाटकर "राइजिंग अप विद सोनाली" की संस्थापक, होस्ट और कार्यकारी निर्माता हैं, जो एक टेलीविज़न और रेडियो शो है जो फ्री स्पीच टीवी और पैसिफिक स्टेशनों पर प्रसारित होता है।

यह लेख इकोनॉमी फॉर ऑल में प्रकाशित हो चुका है, जो स्वतंत्र मीडिया संस्थान की  परियोजना है।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

America—and the Democrats—Won’t Have a Future If Joe Biden Adopts a Centrist Agenda

USA Elections
US Polls
Joe Biden
Bernie Sanders
Donald Trump

Related Stories

बाइडेन ने यूक्रेन पर अपने नैरेटिव में किया बदलाव

सऊदी अरब के साथ अमेरिका की ज़ोर-ज़बरदस्ती की कूटनीति

गर्भपात प्रतिबंध पर सुप्रीम कोर्ट के लीक हुए ड्राफ़्ट से अमेरिका में आया भूचाल

अमेरिका ने रूस के ख़िलाफ़ इज़राइल को किया तैनात

नाटो देशों ने यूक्रेन को और हथियारों की आपूर्ति के लिए कसी कमर

यूक्रेन में छिड़े युद्ध और रूस पर लगे प्रतिबंध का मूल्यांकन

रूस पर बाइडेन के युद्ध की एशियाई दोष रेखाएं

'सख़्त आर्थिक प्रतिबंधों' के साथ तालमेल बिठाता रूस  

ज़ेलेंस्की ने बाइडेन के रूस पर युद्ध को बकवास बताया

रूस-यूक्रेन युद्ध अपडेट: कीव के मुख्य टीवी टावर पर बमबारी; सोवियत संघ का हिस्सा रहे राष्ट्रों से दूर रहे पश्चिम, रूस की चेतावनी


बाकी खबरें

  • एनबीए को आईटी नियमों से राहत, वेदांता ज़िंक प्लांट और अन्य ख़बरें
    न्यूज़क्लिक टीम
    एनबीए को आईटी नियमों से राहत, वेदांता ज़िंक प्लांट और अन्य ख़बरें
    09 Jul 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी केरल हाई कोर्ट ने नए आईटी नियमों से एनबीए को दी राहत, वेदांता ज़िंक प्लांट और अन्य ख़बरों पर।
  • उत्तर प्रदेश: ब्लॉक प्रमुख चुनाव के नामांकन के दौरान 14 जिलों में हिंसक घटनाएं, पुलिस और प्रशासन बने रहे मूक दर्शक
    असद रिज़वी
    उत्तर प्रदेश: ब्लॉक प्रमुख चुनाव के नामांकन के दौरान 14 जिलों में हिंसक घटनाएं, पुलिस और प्रशासन बने रहे मूक दर्शक
    09 Jul 2021
    उत्तर प्रदेश के कई जिलों से प्रस्तावकों के अपहरण और प्रत्याशियों के बीच गोलियां चलने की खबर है। पूर्व मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे लोकतंत्र की हत्या बताया।
  • वन भूमि पर दावों की समीक्षा पर मोदी सरकार के रवैये से लाखों लोगों के विस्थापित होने का ख़तरा
    अयस्कांत दास
    वन भूमि पर दावों की समीक्षा पर मोदी सरकार के रवैये से लाखों लोगों के विस्थापित होने का ख़तरा
    09 Jul 2021
    विशिष्ट मार्गदर्शिका का अभाव और केंद्रीय निगरानी की मशीनरी न होने के कारण राज्य दर राज्य वन भूमि पर अधिकारों के दावों के मामले अलग-अलग हैं।
  • डाटा संरक्षण विधेयक जब तक कानून का रूप नहीं लेता, नई निजता नीति लागू नहीं करेंगे: वॉट्सऐप
    भाषा
    डाटा संरक्षण विधेयक जब तक कानून का रूप नहीं लेता, नई निजता नीति लागू नहीं करेंगे: वॉट्सऐप
    09 Jul 2021
    वॉट्सऐप ने मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ के समक्ष यह भी साफ किया कि इस बीच वह नई निजता नीति को नहीं अपनाने वाले उपयोगकर्ताओं के लिए उपयोग के दायरे को सीमित नहीं करेगा।
  • झुग्गियों को उजाड़ने के ख़िलाफ़ एवं उनके पुनर्वास की मांग को लेकर माकपा का नोएडा प्राधिकरण पर प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    झुग्गियों को उजाड़ने के ख़िलाफ़ एवं उनके पुनर्वास की मांग को लेकर माकपा का नोएडा प्राधिकरण पर प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन
    09 Jul 2021
    सीपीआईएम ने मांग की है कि जब तक प्राधिकरण या सरकार द्वारा कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कराई जाती है तब तक इन झुग्गी बस्ती में रह रहे गरीब लोगों को वहीं पर रहने दिया जाए। और यदि किसी कारणवश उन्हें जनहित…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License