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तूफ़ान के केंद्र में यूक्रेन और बेलारूस
काला सागर में टकराव के घुमड़ते काले बादलों के बीच आशा की चमकती किरण यह है कि मास्को एवं वाशिंगटन के बीच रणनीतिक संवाद-संचार फिर से शुरू हो गया है तथा विभिन्न कार्य स्तरों पर उनमें आदान-प्रदान हो रहा है।
एम. के. भद्रकुमार
21 Nov 2021
Putin
18 नवंबर, 2021 को मास्को में रूसी विदेश मंत्रालय बोर्ड की विस्तारित बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन।

क्या ब्रिटिश रक्षा सचिव बेन वालेस गुरुवार का वारसॉ पहुंचना एक स्वादिष्ट विडंबना नहीं होगी, जो वहां बेलारूस से लगी पोलैंड की सीमा की बाड़बंदी को मजबूत करने की विस्तृत योजनाओं पर काम करने के लिए गए थे? 2003 में इराक पर आक्रमण में ब्रिटेन ने अमेरिका का साथ दिया था और अब वह इराकी प्रवासियों से यूरोपीय संघ का स्वयंभू रक्षक बन गया है!

बेलारूस के साथ पोलैंड की सीमा को चाक-चौबंद में मदद देने के लिए 150 ब्रिटिश सेना रॉयल इंजीनियर्स को वहां भेजा जाने वाला है। वालेस का अनुमान है कि ब्रिटिश सैनिक "संभवतः अन्य बाल्टिक राज्यों को भी अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने में मदद कर सकते हैं।" ब्रिटिश मीडिया ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि ब्रिटेन के विशेष बल के सैकड़ों सैनिक और पैराट्रूपर्स को भी उस क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच यूक्रेन में तैनाती के लिए तैयार किया गया है।

मंगलवार को, वालेस ने बेलारूस के प्रति अपना समर्थन जताने के लिए ऐसे समय कीव का दौरा किया, जब यूक्रेन और नाटो देशों ने यूक्रेन की सीमाओं के आसपास रूसी सेना की गतिविधियों पर अपनी चिंताएं जताई हैं।

यूक्रेनी रक्षा मंत्री ओलेक्सी रेजनिकोव के साथ वालेस की बातचीत के बाद कीव में एक संयुक्त बयान जारी किया गया। इस संयुक्त बयान में अन्य बातों के अलावा कहा गया है कि यह दौरा दोनों देशों के बीच पिछले सप्ताह लंदन में हस्ताक्षरित एक अंतर सरकारी रूपरेखा समझौते के तहत हुआ है, और काला सागर में यूक्रेन के नौसैनिक बलों की क्षमताओं को विकसित करने एवं उनकी अंतर्संचालनीयता बढ़ाने के लिए ब्रिटेन के साथ संयुक्त परियोजनाएं शुरू की जाएंगी।

ब्रिटेन और यूक्रेन ने भी हाल ही में एक संधि को अंतिम रूप दिया जो कीव को ब्रिटिश युद्धपोत और मिसाइल खरीदने के लिए लंदन से ऋण लेने में सक्षम बनाएगी। स्काई न्यूज ने बताया कि "यूक्रेन की £1.7 बिलियन की खरीदारी सूची में दो माइन हंटर हैं, आठ मिसाइलों और एक फ्रिगेट जहाज के संयुक्त उत्पादन के साथ-साथ मौजूदा जलपोतों को असलहों से लैस करने के लिए आवश्यक हथियारों की खरीद भी शामिल है।"

इसके अलावा, ब्रिटेन काला सागर में यूक्रेन के लिए दो नौसैनिक अड्डे भी बनाएगा। निस्संदेह, ग्लोबल ब्रिटेन ने मध्य यूरोप और काला सागर में अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने के लिए यूक्रेन की सीमाओं पर सैनिकों को इकट्ठा करने वाले रूस पर प्रवासियों के मुद्दे और युद्ध उन्माद के मुद्दे को हथिया लिया है।

ब्रिटेन परंपरागत रूप से अमेरिका के साथ मिलकर काम करता है। दरअसल, अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी जे ब्लिंकन और यूक्रेनी विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने 10 नवंबर को वाशिंगटन, डीसी में रणनीतिक साझेदारी पर यूएस-यूक्रेन चार्टर नामक एक प्रमुख दस्तावेज पर हस्ताक्षर भी किए हैं, जिसमें वाशिंगटन की प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई कि "क्षेत्रीय अखंडता पर खतरे की स्थिति में यूक्रेन की खुद की रक्षा-क्षमता को मजबूती प्रदान करना तथा यूरो-अटलांटिक संस्थानों (इसे नाटो पढ़ें) में यूक्रेन के एकीकरण को गहराई देना अमेरिका की समवर्ती प्राथमिकताएं हैं।”

शुरुआत से अंत तक, अमेरिकी-यूक्रेनी संधि प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रूस पर उंगली उठाती है।

पिछले शनिवार को दिए गए एक बयान में, रूसी रक्षा मंत्रालय ने अमेरिका पर "काला सागर क्षेत्र में एक आक्रामक प्रकृति की सैन्य गतिविधि" संचालित करने का आरोप लगाया था। बयान में कहा गया था कि अमेरिकी युद्धपोतों, U-2S रणनीतिक टोही विमान, एक बी- 51 सामरिक बमवर्षक विमान काला सागर में रूसी सीमा के करीब उड़ते हुए रूसी सीमा के आसपास के क्षेत्र की निगरानी कर रहे हैं।

इस सबके बीच जो बड़ी तस्वीर सामने आ रही है, वह यह है कि रूस का घेरा मध्य यूरोप के साथ बाल्टिक क्षेत्र से काला सागर और फिर काकेशस तक कसता हुआ दिखाई दे रहा है। शीत युद्ध के युग के विपरीत, नाटो की तैनाती रूस की ठीक पश्चिमी और दक्षिणी सीमाओं तक फैली हुई है।

पश्चिमी देशों की राजधानियों और मॉस्को में जो कुछ भी सामने आ रहा है, उसकी बिल्कुल विपरीत व्याख्याएं की जा रही हैं। इनमें पश्चिम की व्याख्या यह है कि मास्को इसे एक तनाव परीक्षण के रूप में ले रहा है, उसे उम्मीद है कि प्रवासी संकट और यूक्रेन की सीमा पर रूसी सेना की तैनाती से यूरोपीय संघ और नाटो में दरार दिखने लगेगी, जो बदले में उन्हें नॉर्ड स्ट्रीम गैस पाइप लाइन (जिसका अमेरिका, यूक्रेन और पोलैंड विरोध कर रहे हैं) की प्रमाणन प्रक्रिया में तेजी लाकर व्यावहारिक लेन-देन का विकल्प चुनने के लिए मजबूर करेगा।

संक्षेप में, यह तर्क दिया जाता है कि पश्चिम को मास्को का झांसा देना चाहिए। दूसरी ओर, मॉस्को की नैरेटिव यह है कि पश्चिमी शक्तियां जानबूझकर यूक्रेन की विद्रोही प्रवृत्ति को हथियार देकर और कीव में राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की के घिरे नेतृत्व को प्रोत्साहित कर रही हैं, जो खुद इस विश्वास के साथ अपने राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए लड़ रहे हैं कि उनके लिए पश्चिमी समर्थन मिलने के साथ डोनबास और क्रीमिया में खोए हुए क्षेत्रों को फिर से हासिल करने और इस तरह से अपने देश के उद्धारकर्ता होने के उनके संकल्प को भुनाने के लिए अवसर की एक खिड़की खुलती नजर आ रही है।

और, दूसरा, जैसा कि मास्को इसे देखता है, रूस के साथ बढ़ता तनाव यूक्रेन की सुरक्षा में नाटो को सीधे दखल देने और इस तरह रूस के खिलाफ पश्चिम की नियंत्रण रणनीति का एक नमूना बनाने का एक सुविधाजनक बहाना बन गया है।

इस व्याख्या का अभिसमर्थन करने के लिए साक्ष्य की कमी नहीं है। अमेरिका यूरोपीय सहयोगियों को जानकारी देता रहा है कि मॉस्को जमीन पर नए तथ्य पैदा कर सकता है और इसलिए, जवाबी उपायों की जरूरत है। फ्रांस ने कसम खाई है कि रूस ने अगर यूक्रेन पर हमला किया तो वह उसकी रक्षा करेगा। नाटो ने भी रूस को चेताया है।

वास्तव में, वाशिंगटन हाल ही में अंकारा के साथ अपने मतभेद को दूर करने जा रहा है ताकि इसे नाटो के पाले में वापस लाने के लिए एक दृढ़ कदम उठाया जा सके। यूक्रेन के साथ तुर्की के घनिष्ठ सैन्य संबंध हैं, जो काला सागर की एक प्रमुख शक्ति है, और सबसे ऊपर, अंकारा का मास्को का सामना करने का इतिहास रहा है, यदि वह आक्रमण करता है तो।

लिहाजा, अमेरिका-तुर्की के उच्चस्तरीय रक्षा समूह ने मंगलवार को पेंटागन में एक बैठक की। अमेरिकी रक्षा विभाग की अवर सचिव लॉरा कूपर ने बातचीत में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा कि तुर्की का सैन्य उन्नयन नाटो के समर्थन में एक आवश्यकता बन गया है, और वाशिंगटन ने "टीएएफ (तुर्की सशस्त्र बलों) के सैन्य-आधुनिकीकरण की आवश्यकताओं की पहचान की है।"

कहा गया कि बैठक में कूपर ने "काला सागर पर सहयोग पर प्रकाश डाला"। दोनों पक्षों ने "कार्यात्मक और क्षेत्रीय मुद्दों की एक विस्तृत श्रृंखला पर चर्चा की" और इसके बाद अंकारा में एक बैठक करने पर दोनों देशों में एक सहमति बनी है। बेशक, काला सागर में नाटो की उपस्थिति के लिए यूएस-तुर्की तालमेल एक गेम चेंजर हो सकता है।

मॉन्ट्रो कन्वेंशन (1936) के तहत, तुर्की बोस्पोरस और डार्डानेल्स जलडमरूमध्य पर नियंत्रण रखता है और पूर्वी भूमध्यसागरीय और काला सागर के बीच वह नौसैनिक युद्धपोतों के पारगमन का नियमन करता है। यह कहना पर्याप्त है कि रूस के काला सागर बेड़े के संचालन और भूमध्य सागर में रूसी युद्ध जहाजों की क्षमता तुर्की के सहयोग पर निर्भर करेगी।

इस तरह की उथल-पुथल वाली पृष्ठभूमि के खिलाफ, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को मास्को में विदेश मंत्रालय बोर्ड की एक विस्तारित बैठक में दिए गए अपने एक भाषण में कहा कि पश्चिम अब "लाल रेखाओं के बारे में हमारी चेतावनियों" पर ध्यान नहीं दे रहा है। उन्होंने अपने भाषण में, कहा कि "हमारे राज्य की सीमा से केवल 20 किलोमीटर की दूरी पर", काला सागर में उड़ने वाले अमेरिका के सामरिक बमबर्षक विमानों, पूर्व की ओर नाटो के विस्तार, "हमारी सीमाओं के ठीक बगल में" नाटो की मिसाइल-रोधी प्रणालियों की तैनाती आदि संदर्भों का उल्लेख किया।

लेकिन पुतिन ने रहस्यमय तरीके से यह भी दावा किया कि "हमारी हालिया चेतावनियों का एक निश्चित प्रभाव पड़ा है। हालांकि उन्होंने इस बारे में विस्तार से नहीं बताया। पुतिन व्हाइट हाउस को मैनेज करते नजर आए। दरअसल, वे रूसी सुरक्षा परिषद के सचिव निकोलाई पेत्रुशेव और अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन के बीच फोन पर बातचीत के एक दिन बाद बोल रहे थे।

आगे देखने से तनाव भड़कने की आशंका कम लगती है। इसलिए कि प्रवासी संकट पहले से ही कम हो रहा है, जर्मनी ने कुछ सौ इराकी शरणार्थियों को अपने यहां रखने की पेशकश कर दी है। इन सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि रूस-अमेरिका शिखर सम्मेलन साल के अंत से पहले ऑनलाइन हो सकता है। अगले साल राष्ट्रपति बाइडेन और पुतिन के बीच एक व्यक्तिगत बैठक की भी संभावना है।

अमेरिका में रूसी राजदूत अनातोली एंटोनोव ने गुरुवार को टास को बताया कि मॉस्को और वाशिंगटन के बीच सामरिक वार्ता का तीसरा दौर "निकट भविष्य में" होने की उम्मीद है। राजदूत ने कहा कि "रणनीतिक स्थिरता के क्षेत्र में सकारात्मक विकास हो रहा है...वार्ता की व्यापक प्रकृति रणनीतिक स्थिरता के सभी महत्त्वपूर्ण कारकों, पारंपरिक हथियारों और नई प्रौद्योगिकियों, दोनों पर चर्चा करने की अनुमति देती है।"

काला सागर में घुमड़ते काले बादलों के बीच आशा की एक चमकती किरण यह है कि मॉस्को और वाशिंगटन के बीच रणनीतिक संवाद-संचार फिर से शुरू हो गया है और विभिन्न कार्य स्तरों पर उनमें आदान-प्रदान हो रहा है।

हर संबंध में हमेशा ही बिगाड़ करा देने वाले पक्ष होते हैं। यहां भी हैं, जो अपने असंतोष के एजेंडे के लिए रूस के साथ तनाव बढ़ा सकते हैं-चाहे वह ब्रिटेन, यूक्रेन या पोलैंड हो-लेकिन न तो क्रेमलिन और न ही व्हाइट हाउस आपस में टकराव चाहते हैं।

अंग्रेजी में मूल रूप से प्रकाशित लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: 

Ukraine, Belarus in Eye of the Storm

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