NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
जंगल राज में बदलता योगी का 'राम राज'
महिलाओं, दलितों, मुसलमानों और ग़रीबों के ख़िलाफ़ निरंतर हमलों ने उत्तर प्रदेश के लोगों को हिला कर रख दिया है।
सुबोध वर्मा
05 Oct 2020
Translated by महेश कुमार
जंगल राज

2017 में, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में अप्रत्याशित रूप से बहुत बड़ी जीत हासिल की थी और सभी ने सोचा था कि भाजपा राज्य के अनुभवी नेताओं में से किसी एक को मुख्यमंत्री के रूप में चुनेगी। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा सत्ता में कुछ 'झटकों और खौफ' पैदा करने के लिए जाने जाते हैं, इसलिए उन्होने सभी किस्म की अटकलों को नकारते हुए गोरखपुर के गोरखनाथ मठ के प्रमुख योगी आदित्यनाथ को नेता चुन लिया। योगी यहाँ से तीन बार लोकसभा के लिए चुने जा चुके हैं।  इसलिए वे राजनीति के मामले में अजनबी नहीं थे। लेकिन क्या किसी ने इस बात की कल्पना की थी कि उन्हें भारत के सबसे अधिक आबादी वाले और पेचीदा राज्य का मुख्यमंत्रित्व दिया जाएगा।

तब से, पीएम मोदी और सीएम योगी आपसी प्रशंसा का क्लब चला रहे हैं। मोदी ने योगी की प्रदेश में नौकरियों के सृजन से लेकर निवेश लाने, कुंभ का सही प्रबंधन करने और यहां तक कि कोविड महामारी से निपटने के लिए योगी की प्रशंसा की है। मोदी ने वृद्ध होने के नाते, अक्सर नीति के महत्वपूर्ण मसलों पर छोटे योगी को सलाह दी है और देते हैं। जैसा कि उन्होंने हाल ही में हाथरस में कथित रूप से सामूहिक बलात्कार के मामले के नियंत्रण से बाहर चले जाने के बाद तब दी और जब यूपी पुलिस ने आधी रात को ही पीड़िता के शव का अंतिम संस्कार कर दिया था, और मिट्टी के तेल और उपलों से चीता को आग के हवाले कर दिया था। 

हाथरस मामला जहरीली शराब की तरह है- जिसका अंतिम परिणाम- सीएम योगी और उनके प्रशासन के दृष्टिकोण और मानसिकता में सामने आया है। एक गरीब, दलित महिला का कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार किया जाना और भरे दिन के उजाले में उसकी निर्मम हत्या कर देना और पुलिस की यह घोषणा करना कि कोई बलात्कार ही नहीं हुआ है, और फिर आधी रात में चुपके से जबरन शव का दाह संस्कार कर देना- कुछ और नहीं बल्कि यूपी में गरीब वंचित और सामाजिक रूप से उत्पीड़ित वर्गों का भाग्य है जो अब योगी के हाथ में है।

पुलिस की लीपा-पोती

इस जघन्य कांड के तथ्य अब भारतीयों और दुनिया के दिलों पर अंकित हो गए हैं। लेकिन वह बहुत ही  संक्षिप्त सी पुनरावृत्ति हैं। 14 सितंबर को, 19 वर्षीय दलित लड़की को चार उच्च जाति के पुरुषों ने उस वक़्त अगुवा कर लिया जब वह दिल्ली से 230 किमी दूर हाथरस जिले के बुलगढ़ी गाँव में खेतों में अपनी माँ के साथ घास काट रही थी। बेरहम पुरुषों ने उसे खेत में खींच लिया और उसके साथ कथित रूप से बलात्कार किया और फिर उसके दुपट्टे से उसका गला घोंट दिया। यह उसकी माँ ने बताया जिसने उसके शरीर की खोज की थी। 

चंदपा पुलिस स्टेशन में पुलिस को इसके खिलाफ एफआईआर (पहली सूचना रिपोर्ट) दर्ज करने में घंटों लग गए। लड़की को एक स्थानीय अस्पताल में ले जाया गया और फिर अलीगढ़ के दूसरे अस्पताल में भेज दिया गया। 15 सितंबर को, वह होश में आई और इस घटना को सुनाया और चार लोगों की पहचान की गई। 20 सितंबर को पुलिस उसका बयान लेने अस्पताल पहुंची थी।

किसी ने भी बलात्कार का पता लगाने के लिए वैधानिक जांच नहीं की थी- कम से कम जो अभी तक रिपोर्ट किया गया है। स्थानीय पुलिस प्रमुख विक्रांत वीर ने कहा कि यौन हिंसा स्थापित नहीं हुई है और नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। जबकि चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है, इस दौरान लड़की की हालत बिगड़ गई और 28 सितंबर को उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां 29 सितंबर को उसकी मौत हो गई। 30 सितंबर की तड़के पुलिस उसके शव को गांव ले आई थी, उस जगह के चारों ओर 200 सिपाहियों का मजबूत घेरा डाल दिया था, न तो परिवार को उसका चेहरा देखने दिया और उसकी चिता को जलाने की अनुमति देने से भी इनकार कर दिया था, और पुलिस ने खुद ही उसकी चिता को जलाकर राख कर दिया।

जाहिर है, प्रशासन और पुलिस पूरे मामले की लीपा-पोती करने की दौड़ में लगे थे। जिला मजिस्ट्रेट ने परिवार का दौरा किया और उन्हें चुपके से धमकी देते हुए कहा कि मीडिया अंततः एक या दो दिन में चला जाएगा, लेकिन आप तो यहीं रह जाएंगे। आपको इसके बारे में सोचना चाहिए, उन्होंने जो कहा, वह कैमरे में कैद हो गया, और वह वीडियो राष्ट्रीय नेटवर्क पर दिखाया गया। मीडिया के गांवों में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई तथा विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया और उन्हें परिवार से नहीं मिलने दिया गया, और न ही उस प्रसिद्ध वकील को जिन्होंने 2012 के कुख्यात निर्भया केस को लड़ा था।

इस जुल्म के खिलाफ देश भर में जो आक्रोश पनप रहा था, उसने पीएम मोदी ने न्याय के पक्ष में तेजी से काम करने का संदेश सीएम योगी के कान में फूंका। योगी ने तुरंत एक विशेष जांच दल (SIT) की स्थापना की, और जल्द से जल्द रिपोर्ट जमा करने का आदेश दिया, और फिर शनिवार को कुछ शीर्ष पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया।

क्या महिला के खिलाफ अपराध में पुलिस की लापरवाही का यह एक अन्य दुखद मामला है? क्या सच में ऐसा है। नहीं यह सिर्फ इतना है। क्या यह दलित महिला के खिलाफ एक और अपराध है? क्या सच में ऐसा है, नहीं यह सिर्फ ऐसा नहीं है। हाथरस का मामला समाज में उस सड़ांध का प्रतीक है, जिसे योगी की अगुवाई वाली बीजेपी सरकार ने उत्प्रेरित यानि ज़िंदा किया है, यहां तक कि प्रधानमंत्री भी खुद इसकी प्रशंसा करते रहे हैं।

महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध 

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल यूपी में 60,777 विभिन्न प्रकार के अपराध महिलाओं के खिलाफ हुए हैं। यानि पूरे साल महिलाओं के खिलाफ हर घंटे में ऐसे सात अपराध होते हैं। यह उस राज्य में अपराधों की एक बड़ी संख्या है, जिसके ऊर्जावान और तीक्ष्ण  मुख्यमंत्री ने तीन साल पहले सत्ता में आने पर महिलाओं की रक्षा करने का वादा किया था, और जिसने बार-बार यह दावा किया कि वह राज्य में किसी भी अपराधी को नहीं बख्शेंगे। ध्यान दें कि योगी के सत्ता संभालने के बाद से यह संख्या लगभग 5 प्रतिशत बढ़ी है।

इसमें से 3,131 महिलाओं का बलात्कार हुआ है, और 358 वे हैं जिन पर बलात्कार की कोशिश हुई है,  2,424 महिलाओं को दहेज की मांग के कारण जला कर या उन्हे अन्यथा मार दिया गया, 18,617 वे हैं जिनके ऊपर उनके पतियों या रिश्तेदारों ने क्रूरता की (धारा 498 ए आईपीसी) के तहत, और धारा 354 आईपीसी के मामले के रूप में 12,157 महिलाओं पर हमला किया गया था, जो हमले उनकी ''शालीनता को नष्ट करने के इरादे से' किए गए थे, बल्कि जिन्हे यौन उत्पीड़न कहा जा सकता हैं।

इन आंकड़ों को इस नज़र से देखना चाहिए कि ऐसी हजारों महिलाएं हैं जो सार्वजनिक डर, या परिवारों के दबाव में, या फिर केस लड़ने के लिए साधन न होने की वजह से अपराधों को रिपोर्ट नहीं करती हैं,  खासकर अगर अपराधी शक्तिशाली लोग हैं। वास्तव में, इस तरह के अपराधों में पीड़ितों की संख्या दोगुनी या उससे भी अधिक हो सकती है, जहां मृत्यु भी अंत नहीं है।

शासक अक्सर यह तर्क देकर मूह फेर लेते हैं कि पुलिस या सरकार सभी अपराधों को नहीं रोक सकती है। परन्तु यह सच नहीं है। अगर हाथरस मामले में, पुलिस तेज़ी और कुशलता से काम करती तो यह कहने के बजाय कि लड़की नाटक कर रही है, वह भी तब ’जब लड़की खून में लथपथ थी और उनकी आंखों के सामने दर्द में चिल्ला रही थी, ऐसा कर पुलिस ने समाज में हानिकारक संदेश दिया। लेकिन अब वही पुलिस कह रही हैं कि कोई बलात्कार ही नहीं हुआ है। 

जातीय उत्पीड़न

मामले की लीपा-पोती करने के लिए इस साजिश के पीछे काम करने वाला दूसरा कारक जाति है। लड़की वाल्मीकि समुदाय से है, जो पारंपरिक रूप से सफाई कर्मी समुदाय हैं, जिनके बारे में आपने अक्सर सीवर की सफाई करते समय मरने की खबर सुनी होगी। कथित अपराधी ’उच्च’ ठाकुर जाति के थे,  सीएम योगी भी इसी जाती से हैं।

यूपी में, पिछले साल अनुसूचित जाति/जनजाति समुदायों से जुड़े 9,790 नारिकों ने अत्याचारों का सामना किया है- इनमें से 219 लोग मारे गए और 545 दलित महिलाएँ थी जिनका बलात्कार हुआ था। जो पूरे साल भर में रोजाना अत्याचार के लगभग 27 मामले बैठते हैं। ये संख्या फिर से बहुत अधिक गंभीर स्थिति को छिपाती है जो उच्च जातियों की शक्तिशाली पहुँच के कारण उजागर नहीं हो पाती है। लेकिन बावजूद, उसके निर्दयी अत्याचार की आँधी अविश्वसनीय है।

हाथरस मामले में दोनों पहलुओं मौजूद हैं- एक तो महिला ऊपर से दलित। इसलिए शरीर को जिस तरह से जलाया गया जबकि जांच रिपोर्ट आने में हफ्तों लग जाते हैं, और पीड़ित को इस तरह की यंत्रणा के  बाद कई दिनों तक चिकित्सकीय देखभाल दी जाती है।

योगी के पैर तले ज़मीन खिसक रही है

योगी आदित्यनाथ एक ऐसी सत्ता को चला रहे हैं, जिसे किसी भी भारतीय राज्य में नहीं देखा गया है। कुछ महीने पहले, उन्होंने पुलिस को भेदभावपूर्ण नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ कार्यवाही करने और विरोध को जड़ से उखाड़ने का आदेश दिया, जिसके कारण मुस्लिम परिवारों के खिलाफ हमले, पुलिस की कार्रवाई में क्रूरतापूर्ण मौतें हुईं, घरों में तोड़फोड़ की गई, और संपत्ति जब्ती के नोटिस दर्जनों परिवारों को भेजे गए।

योगी के शासन में दर्जनों ‘तथाकथित मुठभेड़ें’ देखी गई है जहां गोली दागने के लिए हमेशा तैयार पुलिस बल कुछ अपराधियों को कथित रूप से गोली मार देती है। यह उनका ही शासन है जिसमें पिछले साल जुलाई में सोनभद्र जिले में जमींदारों ने 11 आदिवासी किसानों का नरसंहार कर दिया था, यहां तक कि इस घटना से पुलिस को भी दूर रखा गया था।

उन्होने महामारी के नाम पर जल्दी से श्रमिकों के अधिकारों को निलंबित कर दिया, और राज्य में निवेश करने के लिए बड़ी कंपनियों को आमंत्रित किया, कानपुर में गंगा जलमार्ग को सुशोभित करने की योजना में खूब समय बिताया, और सरकार की पोल खोलने वाले पत्रकारों के खिलाफ तेज़ी के साथ आपराधिक मामले दर्ज़ किए, यहाँ तक कि प्रशासन की विफलता पर ट्वीट और सोशल मीडिया पोस्ट के लिए मामले मीन भी केस दर्ज़ किए गए है।

लेकिन, हर नए अत्याचार के साथ, लोकतांत्रिक अधिकारों पर हर बार नया अंकुश यूपी पर योगी की पकड़ को कमकरता जा रहा है। आग बुझाने की कोई भी कोशिश अब खोई हुई जमीन को पुनः वापस नहीं दिला पाएगी, और वादा किए गए ‘राम राज’ की पैरोडी भी बढ़ते विद्रोह को नहीं रोक पाएगी जो कि तेजी से ‘जंगल राज’ में बदल रहा है।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

Under Yogi, ‘Ram Raj’ Turns Into Jungle Raj

Hathras Horror
Yogi Adityanath
UP Crimes
crimes against women
Dalit atrocities
UP encounters
UP police
Hathras Gang Rape

Related Stories

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

क्या वाकई 'यूपी पुलिस दबिश देने नहीं, बल्कि दबंगई दिखाने जाती है'?

क्या पुलिस लापरवाही की भेंट चढ़ गई दलित हरियाणवी सिंगर?

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?


बाकी खबरें

  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    बीमार लालू फिर निशाने पर क्यों, दो दलित प्रोफेसरों पर हिन्दुत्व का कोप
    21 May 2022
    पूर्व रेलमंत्री लालू प्रसाद और उनके परिवार के दर्जन भर से अधिक ठिकानों पर सीबीआई छापेमारी का राजनीतिक निहितार्थ क्य है? दिल्ली के दो लोगों ने अपनी धार्मिक भावना को ठेस लगने की शिकायत की और दिल्ली…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    ज्ञानवापी पर फेसबुक पर टिप्पणी के मामले में डीयू के एसोसिएट प्रोफेसर रतन लाल को ज़मानत मिली
    21 May 2022
    अदालत ने लाल को 50,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही जमानत राशि जमा करने पर राहत दी।
  • सोनिया यादव
    यूपी: बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच करोड़ों की दवाएं बेकार, कौन है ज़िम्मेदार?
    21 May 2022
    प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक खुद औचक निरीक्षण कर राज्य की चिकित्सा व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं। हाल ही में मंत्री जी एक सरकारी दवा गोदाम पहुंचें, जहां उन्होंने 16.40 करोड़…
  • असद रिज़वी
    उत्तर प्रदेश राज्यसभा चुनाव का समीकरण
    21 May 2022
    भारत निर्वाचन आयोग राज्यसभा सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा  करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश समेत 15 राज्यों की 57 राज्यसभा सीटों के लिए 10 जून को मतदान होना है। मतदान 10 जून को…
  • सुभाष गाताडे
    अलविदा शहीद ए आज़म भगतसिंह! स्वागत डॉ हेडगेवार !
    21 May 2022
    ‘धार्मिक अंधविश्वास और कट्टरपन हमारी प्रगति में बहुत बड़े बाधक हैं। वे हमारे रास्ते के रोड़े साबित हुए हैं। और उनसे हमें हर हाल में छुटकारा पा लेना चाहिए। जो चीज़ आजाद विचारों को बर्दाश्त नहीं कर सकती,…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License