NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
भारत
राजनीति
उत्तर प्रदेश: फ़ीस जमा न कर पाने के लिए विद्यालय ने छात्रा को अपमानित किया, रोते-रोते हुई मौत
फ़ीस माफ़ी का प्रार्थना-पत्र लेकर जब छात्रा स्कूल गई, तो प्रिंसिपल सत्येंद्र शुक्ला ने उसे अपमानित किया और तिमाही परीक्षा में बैठने से भी मना कर दिया। इस से आहत होकर छात्रा रोते हुए घर लौटी, जहां आकर वह बेहोश होकर गिर पड़ी। जब उसे ज़िला अस्पताल लाया गया तो वहां डॉक्टरों ने छात्रा को मृत घोषित कर दिया।
असद रिज़वी
12 Aug 2021
उत्तर प्रदेश: फ़ीस जमा न कर पाने के लिए विद्यालय ने छात्रा को अपमानित किया, रोते-रोते हुई मौत
'प्रतीकात्मक फ़ोटो' साभार: The Indian Express

बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ नारे को धराशाही माना जाना चाहिए, अगर एक छात्रा की फ़ीस जमा न कर पाने के कारण रोते-रोते मृत हो जाये। 

उन्नाव के एक स्कूल में हाईस्कूल छात्रा (14) को फ़ीस के लिए कथित तौर पर स्कूल में अपमानित किये जाने के बाद हुई मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है।

सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में पढ़ने वाली छात्रा स्मृति अवस्थी के पिता सुशील कुमार अवस्थी आर्थिक तंगी के कारण अपनी इकलौतीबेटी की फ़ीस जमा नहीं कर सके। उन्नाव शहर के आदर्शनगर निवासी सुशील अवस्थी एक तंबाकू फ़ैक्टरी में मज़दूरी का काम करते हैं। 

कोविड-19 के कारण हुई तालाबंदी के कारण सुशील काफ़ी समय से आर्थिक संकट में चल रहे थे। इसके कारण वह अपनी बेटी की दो-तीन महीने की बकाया फीस, जो 2000 रुपए बताई जा रही है, उसे जमा करने में असफल रहे।

आरोप है कि 5 अगस्त गुरुवार को फ़ीस माफ़ी का प्रार्थना-पत्र लेकर जब छात्रा स्कूल गई, तो प्रिंसिपल सत्येंद्र शुक्ला ने उससे मिलने से इनकार कर दिया। इसके अलावा उसको स्कूल में अपमानित भी किया गया और तिमाही परीक्षा में बैठने से भी मना कर दिया गया।

इस से आहत होकर छात्रा रोते हुए घर लौटी, जहां आकर वह बेहोश होकर गिर पड़ी। घर में मौजूद लोगों द्वारा छात्रा पर पानी के छींटे डालने और हिलाने पर भी कोई प्रतिक्रिया न होने पर उसे ज़िला अस्पताल लाया गया। यहां डॉक्टरों ने छात्रा को मृत घोषित कर दिया।

इस मामले की ख़बर फैलते ही शहर में हड़कंप मच गया। मौक़े पर पहुंची पुलिस ने छात्रा के शव को क़ब्ज़े में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। छात्रा के पिता ने इस मामले में स्कूल के ख़िलाफ़ मुक़ामा दर्ज कराया है। उन्नाव पुलिस के अनुसार धारा 306 (आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित/उकसाना) के तहत मुक़दमा थाना कोतवाली में दर्ज किया गया है। 

लेकिन पीड़ित परिवार पुलिस की जांच से संतुष्ट नहीं है।

मृतक छात्रा के मामा राकेश तिवारी का कहना है कि पुलिस ने नामज़द एफ़आईआर होने के बावजूद भी अभी तक आरोपित प्रिंसिपल को गिरफ़्तार नहीं किया है। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में भी मृत्यु का कारण स्पष्ट नहीं लिखा गया है।

तिवारी का आरोप है कि पुलिस-प्रशासन दबाव में है “क्योंकि कॉलेज प्रबंधन का सीधा सम्बंध आरएसएस और संघ से हैं और सत्ता में उन्हीं के लोग बैठे हैं”। उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी कहा गया है कि मृतक के शरीर के कुछ अंशो को जांच के लिए भेजा गया है, उसकी रिपोर्ट के बाद ही मौत का कारण स्पष्ट हो सकेगा।

पुलिस भी इस मसले पर खुल कर कोई बयान देने से बच रही है।इस मामले में क्षेत्राधिकारी (सिटी) कृपा शंकर ने न्यूज़क्लिक को बताया कि मुक़दमा दर्ज कर लिया गया है और विवेचना चल रही है। स्कूल प्रबंधन और आरोपी प्रिंसिपल की गिरफ़्तारी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि विवेचना की रिपोर्ट आने से पहले कुछ नहीं कहा जा सकता है।

अब उन्नाव के अभिभावक संघ भी प्रशासन पर स्मृति की मौत की निष्पक्ष जांच कराने के लिए दबाव बना रहा है। अभिभावकों के प्रतिनिधिमंडल ने इस मामले में ज़िलाधिकारी से मुलाक़ात कर छात्रा की मौत के आरोपियों के ख़िलाफ़ तुरंत कार्रवाई की मांग की है।

अभिभावक संघ के अध्यक्ष सुनित तिवारी ने बताया कि उनकी मांग है फ़ीस के लिए छात्रा को अपमानित करने वाले दोषियों ख़िलाफ़ तुरंत करवाई की जाये। 

तिवारी के अनुसार प्रशासन ऐसी व्यवस्था बनाए ताकि फ़ीस के लिए अभिभावकों या विद्यार्थियों पर दबाव ना बनाया जाये। ताकि स्मृति जैसी घटना भविष्य में दोबारा न हो क्योंकि बहुत बड़ी संख्या में अभिभावकों के कोविड-19 की तालाबंदी से कारोबार ठप हुए हैं, नौकरियां डूब गई हैं, जिसके कारण वह आर्थिक संकट से गुज़र रहे हैं।

न्यूज़क्लिक ने सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल सत्येंद्र शुक्ला से संपर्क किया तो उन्होंने कहा, “स्मृति मेरी बेटी जैसी थी, मुझे भी उसकी मृत्यु का दुःख है।” 

हालांकि, उन्होंने फ़ीस के लिए छात्रा को अपमानित करने या आहत करने के आरोप को ख़ारिज कर दिया।

प्रिन्सिपल के अनुसार “छात्रा की माता ने 4 अगस्त (बुधवार) को 2,000 रुपये जमा किए थे। बाक़ी बची फ़ीस की माफ़ी के लिए छात्रा स्वयं अर्ज़ी लेकर 5 अगस्त को स्कूल आई थी, लेकिन उसको किसी तरह अपमानित या आहत नहीं किया गया था। प्रिंसिपल ने अपनी सफ़ाई में यह भी कहा कि फ़ीस की बात कभी बच्चों से नहीं, बल्कि अभिभावकों से की जाती है।

दूसरी ओर, कॉम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सवादी) से संबद्ध अखिल भारतीय जनवादी समिति कोविड-19 काल में फ़ीस के लिए छात्रों को प्रताड़ित किए जाने के मुद्दे पर अभियान चला रही है। समिति ने स्मृति की रहस्यमय मौत की जांच की मांग की है। समिति की राष्ट्रीय संयुक्त सचिव मधु गर्ग  के अनुसार उन्होंने मंडल आयुक्त से मिलकर स्कूल प्रशासन और प्रिन्सपल की शिकायत की है।

उन्होंने कहा कि अगर पुलिस-प्रशासन ने छात्रा की मौत की जांच में कोई ढिलाई दिखाई तो वे आंदोलन के लिए भी तैयार हैं। उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि प्रदेश में बड़े स्तर पर ग़रीब अभिभावकों पर निजी स्कूलों द्वारा फ़ीस के लिए दबाव बनाया जा रहा है। यह भाजपा की योगी सरकार की नाकामी है कि कोरोना काल में फ़ीस को लेकर उसके प्रशासन द्वारा कोई स्पष्ट आदेश नहीं दिया गया है।

UttarPradesh
PRIVATE SCHOOL
School fee
beti bachao beti padhao
Yogi Adityanath
yogi government
BJP
AIDWA

Related Stories

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

चंदौली पहुंचे अखिलेश, बोले- निशा यादव का क़त्ल करने वाले ख़ाकी वालों पर कब चलेगा बुलडोज़र?

2023 विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र तेज़ हुए सांप्रदायिक हमले, लाउडस्पीकर विवाद पर दिल्ली सरकार ने किए हाथ खड़े

चंदौली: कोतवाल पर युवती का क़त्ल कर सुसाइड केस बनाने का आरोप

प्रयागराज में फिर एक ही परिवार के पांच लोगों की नृशंस हत्या, दो साल की बच्ची को भी मौत के घाट उतारा

रुड़की से ग्राउंड रिपोर्ट : डाडा जलालपुर में अभी भी तनाव, कई मुस्लिम परिवारों ने किया पलायन

हिमाचल प्रदेश के ऊना में 'धर्म संसद', यति नरसिंहानंद सहित हरिद्वार धर्म संसद के मुख्य आरोपी शामिल 

प्रयागराज: घर में सोते समय माता-पिता के साथ तीन बेटियों की निर्मम हत्या!


बाकी खबरें

  • सोनिया यादव
    आंगनवाड़ी की महिलाएं बार-बार सड़कों पर उतरने को क्यों हैं मजबूर?
    23 Feb 2022
    प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं का कहना है कि केंद्र और राज्य दोनों सरकारों द्वारा घोषणाओं और आश्वासनों के बावजूद उन्हें अभी तक उनका सही बकाया नहीं मिला है। एक ओर दिल्ली सरकार ने उनका मानदेय घटा दिया है तो…
  • nawab malik
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हम लड़ेंगे और जीतेंगे, हम झुकेंगे नहीं: नवाब मलिक ने ईडी द्वारा गिरफ़्तारी पर कहा
    23 Feb 2022
    लगभग आठ घंटे की पूछताछ के बाद दक्षिण मुंबई स्थित ईडी कार्यालय से बाहर निकले मलिक ने मीडिया से कहा, '' हम लड़ेंगे और जीतेंगे। हम झुकेंगे नहीं।'' इसके बाद ईडी अधिकारी मलिक को एक वाहन में बैठाकर मेडिकल…
  • SKM
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बंगाल: बीरभूम के किसानों की ज़मीन हड़पने के ख़िलाफ़ साथ आया SKM, कहा- आजीविका छोड़ने के लिए मजबूर न किया जाए
    23 Feb 2022
    एसकेएम ने पश्चिम बंगाल से आ रही रिपोर्टों को गम्भीरता से नोट किया है कि बीरभूम जिले के देवचा-पंचमी-हरिनसिंह-दीवानगंज क्षेत्र के किसानों को राज्य सरकार द्वारा घोषित "मुआवजे पैकेज" को ही स्वीकार करने…
  • राजस्थान विधानसभा
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    राजस्थान में अगले साल सरकारी विभागों में एक लाख पदों पर भर्तियां और पुरानी पेंशन लागू करने की घोषणा
    23 Feb 2022
    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को वित्तवर्ष 2022-23 का बजट पेश करते हुए 1 जनवरी 2004 और उसके बाद नियुक्त हुए समस्त कर्मचारियों के लिए आगामी वर्ष से पूर्व पेंशन योजना लागू करने की घोषणा की है। इसी…
  • चित्र साभार: द ट्रिब्यून इंडिया
    भाषा
    रामदेव विरोधी लिंक हटाने के आदेश के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया की याचिका पर सुनवाई से न्यायाधीश ने खुद को अलग किया
    23 Feb 2022
    फेसबुक, ट्विटर और गूगल ने एकल न्यायाधीश वाली पीठ के 23 अक्टूबर 2019 के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें और गूगल की अनुषंगी कंपनी यूट्यूब को रामदेव के खिलाफ मानहानिकारक आरोपों वाले वीडियो के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License