NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
आंदोलन
उत्पीड़न
कानून
भारत
राजनीति
स्वामी चिन्मयानंद पर आरोप लगाने वाली छात्रा के अपने ही बयान से पलटने के क्या मायने हैं?
इस हाई-प्रोफाइल केस में एसआईटी पर जानबूझ कर मुक़दमा कमज़ोर करने का आरोप लगा। पीड़िता के बयान के बाद भी चिन्मयानंद के विरुद्ध रेप का केस दर्ज नहीं करने की बात उठी। पीड़िता और उसके परिवार को धमकाने और डराने सहित तमाम आरोप लगे।
सोनिया यादव
14 Oct 2020
Image courtesy: Top Indi News
Image courtesy: Top Indi News

लगभग एक साल पहले एक लड़की एक बड़े नामी नेता पर चीख-चीख कर यौन शोषण, बलात्कार का आरोप लगाती है, आरोपी नेता के खिलाफ वीडियो और तमाम साक्ष्य पेश करती है और फिर वही लड़की एक दिन खुद ही लगाए गए अपने आरोपों से मुकर जाती है। अदालत के सामने कहती है कि उसके साथ ऐसा कुछ हुआ ही नहीं है।

क्या ये बातें आपको अजीब नहीं लगती, क्या ये बातें किसी को सामान्य लग सकती हैं? ठीक कुछ ऐसा ही हुआ है हाई-प्रोफाइल स्वामी चिन्मयानंद के मामले में। पीड़ित लड़की अपने ही बयान से अदालत में मुकर गई।

हो सकता है पितृसत्ता के गुलाम लोग इसे पीड़ित लड़की की चालाकी करार दे दें, हो सकता है कई लोग इसे पैसे का लालच भी बता दें लेकिन क्या वास्तव में एक लड़की के लिए ये सब इतना आसान है। नहीं, बिल्कुल नहीं लेकिन शायद कोई इस बात को जानने की कोशिश ही नहीं करता कि बलात्कार मामलों में समझौता, पीड़िता का बयान से पलटना किसी दबाव, डर या साजिश का हिस्सा भी हो सकता है।

क्या है पूरा मामला?

उत्तर प्रदेश का शाहजहाँपुर और बीजेपी के टिकट से पूर्व सांसद और केंद में गृह राज्य मंत्री रहे स्वामी चिन्मयानंद बीते एक साल में कई बार सुर्खियों में रहे हैं। वजह स्वामी चिन्मयानंद के ट्रस्ट से चलने वाले स्वामी शुकदेवानंद विधि महाविद्यालय में पढ़ने वाली एक छात्रा के साथ यौन शोषण, बलात्कार का आरोप था, जिसमें खुद बीजेपी नेता चिन्मयानंद आरोपी थे।

सोशल मीडिया पर छात्रा ने मदद मांगी थी

यह मामला पहली बार तब सामने आया जब बीते साल अगस्त में छात्रा लापता हो गई।  छात्रा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें उसने रोते हुए आरोप लगाया कि "संत समुदाय के वरिष्ठ नेता" उसे परेशान कर रहे हैं और उसे जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। छात्रा ने वीडियो अपलोड कर चिन्मयानंद पर शारीरिक शोषण तथा कई लड़कियों की जिंदगी बर्बाद करने के आरोप भी लगाया था।

लड़की के पिता ने चिन्मयानंद पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री के वकील द्वारा आरोप लगाया गया कि यह उन्हें ब्लैकमेल करने की "साजिश" है। छात्रा और उसके तीन दोस्तों की रंगदारी मांगने के आरोप में गिरफ्तारी भी हुई।

लाइव लॉ ने सरकारी वकील अभय त्रिपाठी के हवाले से लिखा है कि पीड़िता ने 5 सितंबर, 2019 को नई दिल्ली के लोधी कॉलोनी पुलिस स्टेशन में इस संबंध में एक प्राथमिकी यानी एफआईआर दर्ज कराई थी। पीड़िता के पिता ने शाहजहांपुर में एक और शिकायत दर्ज कराई थी। इन दोनों ही केस को एक साथ जोड़ दिया गया था।

मजिस्ट्रेट और एसआईटी के सामने भी छात्रा ने कही थी दुष्कर्म की बात!

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इस मामले में जांच के लिए सितंबर में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एक एसआईटी का गठन किया गया था। अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत शाहजहांपुर में मजिस्ट्रेट के सामने पीड़िता का बयान भी रिकॉर्ड किया गया था, जिसमें दुष्कर्म की बात थी।

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक एसआईटी को दिए बयान में पीड़िता ने बताया था कि चिन्मयानंद ने ब्लैकमेल कर उसके साथ दुष्कर्म किया है। पीड़िता का हॉस्टल के बाथरूम में नहाने का वीडियो बनाया गया और उस वीडियो को वॉयरल करने की धमकी देकर एक साल तक दुष्कर्म करता रहा। साथ ही पीड़िता ने बताया कि चिन्मयानंद ने शारीरिक शोषण का वीडियो भी बनाया है। चिन्मयानंद पीड़िता से मसाज करने का भी दबाव बनाता था और कई बार उसके साथ बंदूक के दम पर भी रेप हुआ है।

तब एसआईटी प्रमुख और पुलिस महानिरीक्षक नवीन अरोड़ा ने कहा था “स्वामी चिन्मयानंद ने खुद पर लगे लगभग सभी आरोप स्वीकार कर लिए हैं, जिसमें यौन वार्तालाप और मालिश के आरोप भी शामिल हैं।''

भारी जनदबाव के बाद गिरफ़्तारी

इस मामले में भारी जनदबाव के बाद पूर्व गृह राज्य मंत्री चिन्मयानंद की 20 सितंबर 2019 को गिरफ़्तारी भी हुई थी। लगभग पांच महीने जेल में रहने के बाद चिन्मयानंद को स्वास्थ्य कारणों के चलते तीन फरवरी 2020 को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिली थी।

इस केस के संबंध में एसआईटी जांच अधिकारी ने 13 पृष्ठ की चार्जशीट में 33 गवाहों और 29 दस्तावेजी साक्ष्यों का हवाला दिया था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 3 फरवरी, 2020 को शाहजहाँपुर से लखनऊ की एमपी-एमएलए अदालत में ट्रायल को स्थानांतरित कर दिया था।

9 अक्टूबर को न्यायाधीश पी के राय के समक्ष पीड़ित लड़की अपने बयान से पलट गई। इस पर, अभियोजन पक्ष ने सीआरपीसी की धारा 340 के तहत एक आवेदन दिया, जिसमें लड़की के खिलाफ झूठा साक्ष्य देने की कार्रवाई की मांग की गई है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।

चिन्मयानंद के खिलाफ बलात्कार की धारा 376 (2) दर्ज ना कर आईपीसी की धारा 376 (c) किसी व्यक्ति द्वारा अपने प्राधिकार का इस्तेमाल कर शक्ति के दुरुपयोग कर किसी महिला को "प्रेरित या प्रलोभन" देकर यौन उत्पीड़न किया गया हो) आईपीसी की धारा 342 (गलत तरीके से बंधक बनाने ), 354-डी (पीछा करने ) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

प्रशासन पर मुकदमा कमज़ोर करने का आरोप

बता दें कि इस दौरान एसआईटी पर जानबूझ कर मुकदमा कमज़ोर करने का आरोप भी लगा। पीड़िता के बयान के बाद भी चिन्मयानंद के विरुद्ध रेप का केस दर्ज नहीं करने की बात उठी। प्रदर्शन और विरोध के चलते विपक्ष के कई नेताओं को नज़रबंद कर दिया गया। पीड़िता और उसके परिवार को धमकाने और डराने सहित तमाम आरोप लगे।

सरकार चिन्मयानंद के साथ!

मालूम हो चिन्मयानंद के खिलाफ ये कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी 30 नवंबर, 2011 को चिन्मयानंद के ख़िलाफ़ शहर कोतवाली में बलात्कार का मुक़दमा दर्ज हुआ था। तब गिरफ़्तारी से बचने के लिए स्वामी ने हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था। कोर्ट ने उनकी गिरफ़्तारी पर स्टे दे दिया था, तब से केस लंबित चला आ रहा था। जिसे साल 2018 में उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने खत्म करने संबंधी आदेश का एक पत्र शाहजहांपुर ज़िला प्रशासन को भेजा था।

तब कथित बलात्कार पीड़िता ने राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र में सरकार के इस क़दम पर आपत्ति दर्ज कराते हुए चिन्मयानंद के ख़िलाफ़ वारंट जारी करने की मांग भी की थी।

हालांकि इस तरह के बड़े हाई प्रोफाइल केसों में सरकार और सत्ता का आरोपी के साथ खड़े होने के कई मामले हाल के सालों में देखे गए हैं। कई जगह पीड़ित को ही बार-बार प्रताड़ित होते हुए भी देखा गया है। उन्नाव का चर्चित माखी कांड शायद ही कोई भूल पाए। दोषी कुलदीप सेंगर को जिस तरह बचाने के लिए पूरी मशीनरी एक हो गई, नेता पीड़िता का चरित्र-हनन करने लगे, कई बार इसे पीड़िता की साजिश तक करार दिया गया। लेकिन आखिरकार सच सामने तो आया लेकिन पीड़िता ने इस दौरान अपने परिवार के कई सदस्यों को खो दिया, अनेकों बार जिल्लतें सहीं, न्याय के लिए दर-दर भटकी। हाथरस मामले में भी ‘बलात्कार’ के आरोप को जातीय और संप्रदायिक मामले का रंग देने की बात बनाई जा रही है। ऐसे में निश्चित ही बलात्कार पीड़िताओं को न्याय की आस दूर ही नज़र आएगी।

UttarPradesh
Swami Chinmayananda
crimes against women
Yogi Adityanath
BJP
Kuldeep Singh Sengar
process in sexual harrassment

Related Stories

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

चंदौली पहुंचे अखिलेश, बोले- निशा यादव का क़त्ल करने वाले ख़ाकी वालों पर कब चलेगा बुलडोज़र?

यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन

2023 विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र तेज़ हुए सांप्रदायिक हमले, लाउडस्पीकर विवाद पर दिल्ली सरकार ने किए हाथ खड़े

चंदौली: कोतवाल पर युवती का क़त्ल कर सुसाइड केस बनाने का आरोप

प्रयागराज में फिर एक ही परिवार के पांच लोगों की नृशंस हत्या, दो साल की बच्ची को भी मौत के घाट उतारा

रुड़की से ग्राउंड रिपोर्ट : डाडा जलालपुर में अभी भी तनाव, कई मुस्लिम परिवारों ने किया पलायन

हिमाचल प्रदेश के ऊना में 'धर्म संसद', यति नरसिंहानंद सहित हरिद्वार धर्म संसद के मुख्य आरोपी शामिल 


बाकी खबरें

  • World Inequality Report
    अजय कुमार
    वर्ल्ड इनिक्वालिटी रिपोर्ट: देश और दुनिया का राजकाज लोगों की भलाई से भटक चुका है!
    09 Dec 2021
    10 फ़ीसदी सबसे अमीर लोगों की भारत की कुल आमदनी में हिस्सेदारी 57% की हो गई है। जबकि आजादी के पहले 10 फ़ीसदी सबसे अधिक अमीर लोगों की हिस्सेदारी कुल आमदनी में तकरीबन 50% की थी। यानी आजादी के बाद आर्थिक…
  • निहाल अहमद
    सूर्यवंशी और जय भीम : दो फ़िल्में और उनके दर्शकों की कहानी
    09 Dec 2021
    जय भीम एक वास्तविक कहानी पर आधारित है जो समाज की एक घिनौनी तस्वीर प्रस्तुत करती है। इसके इतर सूर्यवंशी हक़ीक़त से कोसों दूर है, यह फ़िल्म ग़लत तथ्यों से भरी हुई है और दर्शकों के लिए झूठी उम्मीदें पैदा…
  • Indian Air Force helicopter crash
    न्यूज़क्लिक प्रोडक्शन
    सेना का हेलीकॉप्टर क्रैश, किसानों के केस वापसी पर मानी सरकार और अन्य ख़बरें।
    08 Dec 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंड अप में आज हमारी नज़र रहेगी, सेना का हेलीकॉप्टर क्रैश, किसान आंदोलन अपडेट और अन्य ख़बरों पर।
  • skm
    भाषा
    सरकार के नये प्रस्ताव पर आम सहमति, औपचारिक पत्र की मांग : एसकेएम
    08 Dec 2021
    संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने सरकार से 'लेटरहेड' पर औपचारिक संवाद की मांग की है। साथ ही आंदोलन के लिए भविष्य की रणनीति तय करने को बृहस्पतिवार को फिर बैठक हो रही है।
  • सोनिया यादव
    विनोद दुआ: निंदा या प्रशंसा से अलग समग्र आलोचना की ज़रूरत
    08 Dec 2021
    ऐसे समय में जब एक तरफ़ विनोद दुआ के निधन पर एक वर्ग विशेष ख़ुशी मना रहा है और दूसरा तबका आंसू बहा रहा है, तब उनकी समग्र आलोचना या कहें कि निष्पक्ष मूल्यांकन की बेहद ज़रूरत है, क्योंकि मीटू के आरोपों…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License