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यूपी: ‘135 शिक्षक, शिक्षा मित्रों की पंचायत चुनावों में तैनाती के बाद कोविड जैसे लक्षणों से मौत'
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने यूपी पंचायत चनावों के बाकी चरणों को स्थगित करने अथवा ड्यूटी पर तैनात सभी के लिए अनिवार्य टीकाकरण की मांग की है।
अब्दुल अलीम जाफ़री
28 Apr 2021
Shikshamitra
प्रतीकात्मक तस्वीर। चित्र साभार: पत्रिका

लखनऊ: प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों के एक राष्ट्रीय स्तर के संगठन, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (आरएसएम) के मुताबिक, फिलहाल पंचायत चुनावों के तीसरे चरण का मतदान सोमवार को संपन्न हो चुका है। इस दौरान राज्य में अपनी पंचायत चुनाव की ड्यूटी करने के बाद से पिछले 10 दिनों में कोविड और कोविड जैसे लक्षणों के चलते तकरीबन 135 शिक्षकों, ‘शिक्षा मित्र’ एवं प्रशिक्षकों की मृत्यु हो चुकी है।

यूनियन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को तत्काल प्रभाव से पंचायत चुनावों को स्थगित करने और संक्रमित कर्मचारियों को मुफ्त इलाज मुहैय्या कराने के लिए कहा है। इसकी ओर से सरकार से मांग की गई है कि इन कर्मचारियों को फ्रंटलाइन वर्कर्स घोषित किया जाए और मृतकों के परिजनों को 50 लाख रूपये का बीमा कवर प्रदान किया जाए।

कमाने वालों को खोया है 

श्रावस्ती जिले के सिरसिया ब्लॉक के रामपुर बंध प्राथमिक स्कूल में सहायक अध्यापक, 35 वर्षीय सूरज प्रसाद को लंगरी गुलारिन गिलौला ब्लॉक में पंचायत चुनाव की ड्यूटी पर तैनात किया गया था। 21 अप्रैल को सांस लेने में तकलीफ की वजह से उनका देहांत हो गया था।

विक्षिप्तता की हालत में उनकी पत्नी नुपूर ने न्यूज़क्लिक  को बताया “14 अप्रैल को मेरे पति ने चुनावी ड्यूटी के लिए घर छोड़ा और काम के बोझ के कारण उसी दिन घर वापस नहीं लौट सके। अगले दिन खबर आई कि उन्हें साँस लेने में तकलीफ हो रही है और हल्की खांसी है। 15 अप्रैल को उनके सहकर्मी उन्हें आज़मगढ़ के वेदांता अस्पताल ले गये। कुछ दिन आईसीयू और फिर वेंटीलेटर पर बिताने के बाद 21 अप्रैल को उनकी मौत हो गई।” उनका आरोप था कि सरकार के एक भी प्रतिनिधि ने अभी तक परिवार का हाल जानने की कोशिश नहीं की है।

रोती हुई नुपूर का कहना था “मैं सरकार से पूछना चाहती हूँ कि राज्य में कोरोना के तांडव मचाने के बावजूद चुनावों के लिए शिक्षकों की तैनाती क्यों कराई गई? क्या वे इंसान नहीं हैं? मेरे पति की मौत की जिम्मेदारी कौन लेगा?”

इसी प्रकार गोंडा जिले में एक अन्य परिवार भी अपने एकमात्र कमाने वाले की मौत पर मातम मना रहा है। उन्हें भी पंचायत चुनाव की ड्यूटी पर तैनात किया गया था।

इसी प्रकार एक शिक्षा मित्र, रविन्द्र दूबे को पहले चरण के दौरान पंचायत चुनावों की ड्यूटी के लिए नियुक्त किया गया था। ड्यूटी से वापस लौटने के तुरंत बाद जांच में पॉजिटिव पाए गए थे। उनके पिता, भोलानाथ दूबे ने न्यूज़क्लिक  को बताया: “मेरा बेटा कटरा बाज़ार ब्लॉक के रंजीतपुर प्राथमिक विद्यालय में शिक्षा मित्र था, और पहले चरण के लिए 19 अप्रैल को उसे नवाबगंज में तैनात किया गया था। वहां से लौटते ही उसने बुखार, खांसी और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत की। जब हम उसे जिला अस्पताल लेकर गए तो उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव निकली। 24 अप्रैल को उसकी मौत हो गई।” 

दूबे को भी इस बात की शिकायत थी कि उनके घर पर अभी तक एक भी सरकारी अधिकारी शोक संवेदना व्यक्त करने नहीं पहुंचा है।

न्यूज़क्लिक  ने इस बीच गोंडा, बहराइच, लखीमपुर और गोरखपुर में पंचायत चुनावों के दौरान तैनात कम से कम एक दर्जन शिक्षकों, शिक्षा मित्रों और सहायक अध्यापकों के परिवार के सदस्यों के साथ बातचीत की है, जिनमें से कुछ ने पिछले 10 दिनों में अपनी जानें गँवा दी हैं।

सभी जान गंवाने वाले लोगों के परिवार के सदस्यों का कहना था कि उनके प्रिय सदस्यों ने इस साल की तरह पिछले साल भी चुनावी ड्यूटी की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी ओर से राज्य सरकार से कई दफा टीकाकरण करने की अपील की गई थी, लेकिन उनकी इस मांग को ठुकरा दिया गया। उन्होंने दावा किया कि कोविड के सारे लक्षण होने के बावजूद इन व्यक्तियों को ड्यूटी पर रिपोर्ट करने के लिए कहा गया, जिसके परिणामस्वरूप अंततः उन्हें अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है।  

लखीमपुर के एक प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका सुषमा कनौजिया ने अनुरोध किया था कि चुनाव प्रशिक्षण के एक दिन बाद से उन्हें कोविड के हल्के लक्षण पैदा होने शुरू हो चुके हैं, अतः उन्हें चुनाव ड्यूटी से हटा दिया जाये, लेकिन उनके अनुरोध को अस्वीकृत कर दिया गया। बुधवार को उनकी मौत हो गई।

न्यूज़क्लिक  से बात करते हुए कनौजिया के बेटे ने दावा किया कि “वे लगातार गुहार लगाती रहीं कि उनकी ड्यूटी निरस्त की जाये, क्योंकि उनमें कोविड के सभी लक्षण देखने को मिल रहे हैं, लेकिन जिला प्रशासन ने इसे ठुकरा दिया। पिछले बुधवार के दिन सांस की कमी के कारण उनकी मौत हो गई।”

इससे पूर्व भी न्यूज़क्लिक  ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि पंचायत चुनाव की ड्यूटी के बाद से ही भारी संख्या में कर्मचारी बीमार हो गये थे, इसके बावजूद उनके प्रतिस्थापन के आवेदन को ठुकरा दिया गया था।

आरएसएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वीरेंद्र मिश्रा ने न्यूज़क्लिक  को बताया कि पंचायत चुनावों में ड्यूटी कर चुके शिक्षकों और कर्मचारियों के परिवारों में बैचेनी का आलम बना हुआ है।

सारे राज्य भर में कोरोनावायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए कोई भी चुनावी ड्यूटी करने से कतरा रहा है। हजारों की संख्या में शिक्षकों, ‘शिक्षा मित्र’ और प्रशिक्षकों को पहले चरण की ट्रेनिंग से लेकर तीसरे चरण के चुनाव के बीच में वायरस या कोरोना जैसे लक्षणों के चपेटे में आने की खबरें प्रकाश में हैं।

मिश्रा के अनुसार “पंचायत चुनाव की ड्यूटी पर तैनात लोगों में से 300 से अधिक लोगों की मृत्यु कोरोनावायरस के कारण हुई है, लेकिन मैं अभी तक सिर्फ 135 लोगों के आंकड़े ही जुटा सका हूँ। पहले और दूसरे चरण के पंचायत चुनाव क्रमशः 15 और 19 अप्रैल को 38 जिलों में संपन्न हुए थे। मरने वाले 135 कर्मचारियों का यह आंकड़ा पहले दो चरणों के दौरान का ही है। तीसरे चरण के चुनाव परसों (सोमवार) को 20 जिलों में संपन्न हुए हैं, और हताहतों के बारे में जानकारी एक सप्ताह में जाकर मिल पायेगी।” उनका कहना था कि मौत के आंकड़ों में अभी और बढ़ोत्तरी होगी। उनके अनुसार आरएसएम ने प्राथमिक स्तर पर डेटा को क्रमवार लगा दिया है, लेकिन संचार के अभाव में कई जिलों के आंकड़े छूट गए हैं।

राज्य सरकार द्वारा एक ऐसे दौर में जब महामारी की दूसरी लहर भारी संख्या में लोगों की जान ले रही है, ऐसे में शिक्षकों और शिक्षा मित्रों को बिना किसी पर्याप्त सुरक्षा कवच के चुनावी ड्यूटी का कार्यभार देकर “उनके जीवन से खिलवाड़” करने का आरोप लगाते हुए आरएसएम प्रवक्ता ने कहा: “सरकार द्वारा हमें चुनावी ड्यूटी के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय नहीं मुहैय्या कराये जा रहे हैं। यहाँ तक कि जिन लोगों ने कोविड के हल्के लक्षणों की शिकायत की, उन्हें भी दवा खाकर अपनी ड्यूटी पर रिपोर्ट करने के लिए कहा गया। जिला प्रशासन किसी भी कर्मचारी की रिपोर्ट कोविड पॉजिटिव आने के बावजूद उसे छूट दिए जाने के लिए तैयार नहीं था।”

उनकी दुश्चिंताओं को व्यक्त करते हुए, शिक्षकों के संगठनों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिखकर उनसे तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है, और 29 अप्रैल को निर्धारित अंतिम (चौथे) चरण के पंचायत चुनावों को स्थगित किये जाने की मांग की है। यूनियन ने उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी और अतिरिक्त मुख्य सचिव (शिक्षा) को भी तत्काल कार्यवाही करने के सम्बंध में पत्र लिखा है।

मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र में जिसकी प्रति न्यूज़क्लिक  के हाथ लगी है, के अनुसार अब तक चुनाव प्रशिक्षण और (दूसरे चरण) की ड्यूटी तक, हरदोई और लखमीपुर में 10-10 कर्मचारियों की मौत हो चुकी है। जबकि बुलंदशहर, हाथरस, शाहजहांपुर और सीतापुर जिलों में 8-8; भदोही, लखनऊ, प्रतापगढ़ में 7-7; गाजियाबाद, गोंडा और सोनभद्र में 6-6; देवरिया, कुशीनगर, जौनपुर, महराजगंज, मथुरा में से हर जिले में पांच-पांच मौतें; जबकि गोरखपुर, उन्नाव, बहराइच और बलरामपुर में चार-चार मौतें हुई हैं। श्रावस्ती में तीन लोगों की मौत हुई है, लेकिन वे मौतें दुर्घटनावश हुई हैं। 

न्यूज़क्लिक  ने जिलाधिकारी, प्रतापगढ़ से उनकी प्रतिक्रिया जानने के लिए कई बार फोन किया लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिल सका।

इस बीच बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा लिखे गए एक और पत्र में, जिसे न्यूज़क्लिक ने हासिल किया है, के अनुसार अकेले प्रतापगढ़ में 12 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है। बीएसए प्रतापगढ़, अशोक कुमार सिंह द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में कहा गया है “अत्यंत दुःख के साथ हमारी ओर से आपको कोरोनावायरस के कारण शिक्षकों की मौत के बारे में सूचित किया जा रहा है।” 

उत्तर प्रदेश में तीसरे चरण के पंचायत चुनाव के लिए मतदान सोमवार के दिन राज्य के 20 जिलों में संपन्न हुए। इन जिलों में शामली, मेरठ, मुरादाबाद, पीलीभीत, कासगंज, फिरोजाबाद, औरैया, कानपुर देहात, जालौन, हमीरपुर, फतेहपुर, उन्नाव, अमेठी, बाराबंकी, बलरामपुर, सिद्धार्थ नगर, देवरिया, चंदौली, मिर्ज़ापुर और बलिया शामिल हैं।

इससे पहले, उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक संघ (पीएसपीएसए) ने इसी प्रकार का मांगपत्र जारी किया था।

तीसरे चरण के पंचायत चुनाव से दो दिन पीला 24 अप्रैल को मुख्यमंत्री के नाम जारी अपने पत्र में, यूनियन ने कहा था कि राज्य के 2.31 लाख कर्मचारियों का जीवन दांव पर लगा हुआ है क्योंकि उन्हें बिना किसी सुरक्षा उपकरण के काम करना पड़ रहा है। यूनियन ने चुनाव आयोग और राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) से पंचायत चुनावों के शेष दो चरणों को स्थगित करने की अपील की थी, जिसमें उनका कहना था कि हालिया कोरोनावायरस मामलों में जबर्दस्त उछाल के बीच यह चुनावी आयोजन एक “सुपर स्प्रेडर” साबित हो सकता है। न्यूज़क्लिक ने अपनी पूर्व की रिपोर्ट में बताया था कि राज्य सरकारी कर्मचारियों के संघ ने 20 अप्रैल को आदित्यनाथ से अपील की थी कि वे पंचायत चुनावों के संचालन पर राज्य के संसाधन झोंकने के बजाय कोविड-19 से मुकाबला करने पर अपना ध्यान केंद्रित करें और बाकी के चरण के चुनावों को फिलहाल स्थगित करें।

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के उत्तर प्रदेश ईकाई के संगठन सचिव शिव शंकर सिंह ने न्यूज़क्लिक  को बताया: “यह समस्या तभी से शुरू हो गई थी जबसे जिला प्रशासन ने पंचायत चुनावों के लिए प्रशिक्षण का आयोजन किया था। एक 50x30 के कमरे में प्रशिक्षण के दौरान करीब 60-70 कर्मचारियों की मौजूदगी में कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन खुद में एक मजाक बनकर रह गया था। अगर प्रशिक्षण के कार्यक्रम को गूगल या ज़ूम के माध्यम से आयोजित किया गया होता तो 80% से अधिक लोगों को बचाया जा सकता था। सिंह का दावा है कि मृतकों की संख्या वर्तमान आंकड़ों की तुलना में दो गुना हो सकती हैं। 

सिंह के अनुसार “मेरे संज्ञान में आया है कि पंचायत चुनावों के दौरान जिन लोगों को नियुक्त किया गया था, उनमें से अकेले रायबरेली में ही कम से कम 22 शिक्षकों एवं अन्य कर्मचारियों की मौत हो चुकी है। मेरे पास सभी का पूरा आंकड़ा उपलब्ध है। यह सब राज्य सरकार की सरासर लापरवाही का नतीजा है, क्योंकि जब हमने चुनावों को स्थगित किये जाने की मांग उठाई थी, तो उन्होंने इस विषय पर कोई ध्यान नहीं दिया या चुनावों की ड्यूटी पर जा रहे लोगों का टीकाकरण करने या ऑनलाइन प्रशिक्षण आयोजित करने की हमारी मांग अनसुनी कर दी थी। हजारों की संख्या में कर्मचारी संक्रमित हो चुके हैं और होम आइसोलेशन में रह रहे हैं। लेकिन एक भी सरकारी प्रतिनिधि ने इस तथ्य का संज्ञान नहीं लिया है कि उनके परिवार अस्पतालों में एक बेड पाने के लिए जूझ रहे हैं।”

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