NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
उत्तराखंड: वेतन भुगतान की मांग को लेकर रोडवेज कर्मचारियों का प्रदर्शन
उत्तराखंड रोडवेज के देहरादून मंडल, टनकपुर मंडल एवं नैनीताल में सभी डिपो में कर्मचारियों को अप्रैल और मई महीने का वेतन भुगतान नहीं किया गया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
23 Jun 2020
उत्तराखंड रोडवेज

उत्तराखंड रोडवेज कर्मचारी यूनियन के आह्वान पर 22 जून 2020 को उत्तराखंड रोडवेज के सभी मंडलों में कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया। उत्तराखंड रोडवेज के देहरादून मंडल, टनकपुर मंडल एवं नैनीताल में सभी डिपो में कर्मचारियों को अप्रैल और मई महीने का वेतन भुगतान नहीं किया गया है। इसके विरोध में निगम प्रबंधन के खिलाफ़ हाथ पर काली पट्टी बांधकर ड्यूटी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया गया।

कर्मचारी यूनियन ने कहा कि कर्मचारियों के द्वारा बिना वेतन प्राप्त किए झारखंड, बिहार, दिल्ली हरियाणा, पंजाब, गुजरात से उत्तराखंड के हजारों प्रवासियों को उनके गृह जनपद तक पहुंचाया गया है। कोरोना संक्रमण के दौरान कर्मचारियों ने जान की परवाह किए बिना डयूटी की है तथा राज्य सरकार द्वारा भी उनको कोरोना योद्धा के नाम से विभूषित किया गया है। किंतु बड़े खेद का विषय है कि माह अप्रैल तथा माह मई 2020 का वेतन आज तक कर्मचारियों को प्राप्त नहीं हो पाया है। जिससे उनका पूरा परिवार आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है।
 
कई कर्मचारियों का कहना है कि "इस दौर में वेतन न मिलाना एक आपरधिक कृत्य है। क्योंकि यह ऐसा संकट का समय है जब देश में पूर्ण लॉकडाउन था तब से ही वेतन नहीं दिया गया जबकि इसी समय पैसों की सबसे अधिक जरूरत थी। निगम प्रबंधन और सरकार ने हम सभी को भूखा मरने के लिए छोड़ दिया है। "

कर्मचारियों के द्वारा निगम प्रबंधन से तत्काल लंबित 2 माह के वेतन का भुगतान किए जाने का अनुरोध किया गया। रोडवेज में लगभग 6500 कर्मचारी हैं जिसमे से 3500 कर्मचारी अल्प वेतनभोगी है। उसके सामने रोजी रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

U2.jpg

इस आर्थिक तंगी के लिए सरकार हैं जिम्मेदार !

यूनियन ने यह भी कहा देश की बाकि राज्य सरकारों ने गाड़ियों का संचालन ठप होने की वजह से कर्मचारियों को गंभीर वित्तीय संकटों को देखते हुए आर्थिक मदद की। कर्नाटक सरकार ने KSRTC को कर्मचारियों को वेतन दने के लिए 650 करोड़ अतिरिक्त बजट दिया। महाराष्ट्र सरकार ने भी MSRTC के कर्मचारियों के पूरे वेतन का भुगतान किया।  

राजस्थान की सरकार ने 200 करोड़ रुपये RSRTC को कर्मचारियों के वेतन के लिए दिए। इसी तरह हिमाचल और हरियाणा सरकार ने भी अपने अपने रोडवेज के कर्मचारियों का पूरा वेतन भुगतान किया हैं। लेकिन पहाड़ी राज्य उत्तरखंड की सरकार ने रोडवेज को एक रुपये की भी मदद नहीं की है।
 
रोडवेज आर्थिक तंगी के लिए कर्मचारियों ने उत्तरखंड के बीजेपी सरकार को जिम्मेदार बताया। उन्होंने राज्य सरकार पर रोडवेज का 54 करोड़ के बकाया भुगतान न करने का आरोप भी लगाया है।  

U3.jpg

यूनियन के महमंत्री अशोक चौधरी ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि इस संकट की घड़ी में सरकार आर्थिक मदद करनी चाहिए, क्योंकि रोडवेज का संचालन बंद है। परन्तु सरकार हमारा बकाया ही नहीं दे रही है। सरकार और शासन रोडवेज कर्मचारियों की आर्थिक दिक्कतों के लिए कतई गंभीर नहीं हैं।

उन्होंने कहा भले हमारी मदद न करे लेकिन रोडवज का अपना पैसा तो दे दें। उसी से रोडवेज अपने सभी कर्मचारियों का वेतन दे देगा।

अशोक चौधरी ने बताया, 'उत्तराखंड रोडवेज का सरकार पर लगभग 14 करोड़ तो इस लॉकडाउन में किये गए संचालन का बकया है। जबकि 36 करोड़ पर्वतीय क्षेत्रों में संचालन का  बाकी है। सरकार के कई तरह के कल्याणकारी योजनाओं के तहत कई वर्गों को किराये में राहत और छूट दी जाती है। उसका भी भुगतान सरकार को करना होता है उसका लगभग 4 करोड़ 25 लाख बकाया है। इस तरह से उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार को लगभग 54 करोड़ 25 लाख का भुगतान रोडवेज को करना है।'

इसके साथ ही चौधरी इस आर्थिक संकट का सबसे बड़ा कारण लगातर डीजल के महंगे होने को मानते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य के रोडवेज के बजट का मोटा हिस्सा डीजल की खरीद पर जाता है। उत्तराखंड में भी यही है परन्तु जब से डीजल 50 रुपये के पार हुआ तब से ही स्थिति खराब होनी शुरू हो गई थी लेकिन केंद्र में इस सरकार के आने के बाद से लगातर डीजल के दामों में बढ़ोतरी हुई है,जिसने रोडवेज की कमर तोड़ दी हैं।

कर्मचारियों के वेतन में अनियमिता कोई नई बात नहीं

आपको बता दें उत्तरखंड में रोडवेज़ कर्मचारियों के वेतन में अनियमिता कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी लगातर इस तरह की समस्या वहां बनी रही है। साल 2003 में उत्तरांचल रोडवेज़ को उत्तर प्रदेश रोडवेज़ से अलग किया गया था। उस समय केंद्र सरकार ने वादा किया था कि जितनी भी साझी संपत्ति है उसके बाज़ार मूल्य का लगभग 14% उत्तरांचल रोडवेज़ को दिया जाएगा। लेकिन परिवहन निगम के मुताबिक़ वो राशि अभी तक नहीं मिली है। एक अंदाज़े के मुताबिक़ यह राशि क़रीब सात-आठ सौ करोड़ हैं। वो अभीतक नहीं दिया गया हैं। इसको लेकर भी कर्मचारी सवाल उठाते हैं। अब तो दोनों राज्यों और केंद्र में भी एक ही पार्टी की सरकार है फिर भी परिसंपत्तियों का बंटवारा नही हो पा रहा है। बंटवारा न होने के कारण परिवहन निगम को आर्थिक नुक़सान उठाना पड़ रहा है।

यूनियन पदाधिकारियों ने कहाकि कर्मचारियों की समस्याओं को देखते हुए सरकार को परिवहन निगम के लिए जल्द से जल्द आर्थिक पैकेज की घोषणा करनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने साफ किया कि यदि कर्मचारियों का वेतन भुगतान जल्द ही किया गया तो वे आंदोलन तेज कर सकते हैं जिसकी जिम्मेदारी सरकार, शासन और परिवहन निगम प्रबंधन की होगी।

Uttrakhand
roadways
Roadways Employees
Workers salary
BJP
Trivendra Singh Rawat
workers protest

Related Stories

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

मुद्दा: आख़िर कब तक मरते रहेंगे सीवरों में हम सफ़ाई कर्मचारी?

#Stop Killing Us : सफ़ाई कर्मचारी आंदोलन का मैला प्रथा के ख़िलाफ़ अभियान

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

आंगनवाड़ी महिलाकर्मियों ने क्यों कर रखा है आप और भाजपा की "नाक में दम”?


बाकी खबरें

  • hisab kitab
    न्यूज़क्लिक टीम
    लोगों की बदहाली को दबाने का हथियार मंदिर-मस्जिद मुद्दा
    20 May 2022
    एक तरफ भारत की बहुसंख्यक आबादी बेरोजगारी, महंगाई , पढाई, दवाई और जीवन के बुनियादी जरूरतों से हर रोज जूझ रही है और तभी अचनाक मंदिर मस्जिद का मसला सामने आकर खड़ा हो जाता है। जैसे कि ज्ञानवापी मस्जिद से…
  • अजय सिंह
    ‘धार्मिक भावनाएं’: असहमति की आवाज़ को दबाने का औज़ार
    20 May 2022
    मौजूदा निज़ामशाही में असहमति और विरोध के लिए जगह लगातार कम, और कम, होती जा रही है। ‘धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचाना’—यह ऐसा हथियार बन गया है, जिससे कभी भी किसी पर भी वार किया जा सकता है।
  • India ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    ज्ञानवापी विवाद, मोदी सरकार के 8 साल और कांग्रेस का दामन छोड़ते नेता
    20 May 2022
    India Ki Baat के दूसरे एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश, भाषा सिंह और अभिसार शर्मा चर्चा कर रहे हैं ज्ञानवापी विवाद, मोदी सरकार के 8 साल और कांग्रेस का दामन छोड़ते नेताओं की। एक तरफ ज्ञानवापी के नाम…
  • gyanvapi
    न्यूज़क्लिक टीम
    पूजा स्थल कानून होने के बावजूद भी ज्ञानवापी विवाद कैसे?
    20 May 2022
    अचानक मंदिर - मस्जिद विवाद कैसे पैदा हो जाता है? ज्ञानवापी विवाद क्या है?पक्षकारों की मांग क्या है? कानून से लेकर अदालत का इस पर रुख क्या है? पूजा स्थल कानून क्या है? इस कानून के अपवाद क्या है?…
  • भाषा
    उच्चतम न्यायालय ने ज्ञानवापी दिवानी वाद वाराणसी जिला न्यायालय को स्थानांतरित किया
    20 May 2022
    सर्वोच्च न्यायालय ने जिला न्यायाधीश को सीपीसी के आदेश 7 के नियम 11 के तहत, मस्जिद समिति द्वारा दायर आवेदन पर पहले फैसला करने का निर्देश दिया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License