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उत्तराखंड : कोरोना का डर, बढ़ती सांप्रदायिकता और फ़र्ज़ की मिसाल
मुश्किल वक़्त में फ़र्ज़ निभाने के लिए निकाह टालने वाली सब-इंस्पेक्टर शाहिदा परवीन कहती हैं कि तबलीग़ी जमात का जो सिलसिला हुआ वो गलत था। लेकिन इसके लिए पूरे धर्म को टार्गेट किया जाना ठीक नहीं है।
वर्षा सिंह
07 Apr 2020
बढ़ती सांप्रदायिकता और फ़र्ज़ की मिसाल
धर्म और फ़र्ज़ :  तबलीग़ी ज़मात, दिल्ली निज़ामुद्दीन मरकज़ (बाएं),  सब-इंस्पेक्टर शाहिदा परवीन (दाएं)

ऋषिकेश के मुनि की रेती थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर शाहिदा परवीन का निकाह 5 अप्रैल को होना था। उनके मां-बाप चाहते थे कि तय तारीख पर ही घर के सदस्यों के बीच बेटी का निकाह पढ़वा लेते हैं, कोरोना का समय बीत जाने के बाद लोगों को दावत दे दी जाएगी। लेकिन शाहिदा ने फैसला किया कि वह कोरोना का ये समय खत्म होने के बाद ही शादी करेंगी। न्यूज़क्लिक से बातचीत में वह कहती हैं कि मैं पुलिस में हूं तो मेरी भी कुछ ज़िम्मेदारियां भी बनती हैं, मुझे पहले इन ज़िम्मेदारियों को निभाना है।

देहरादून के भानियावाला की रहने वाली शाहिदा बताती हैं कि शुरू में उनके इस फैसले से घरवाले थोड़ा नाराज़ भी हुए। अब कोरोना खत्म होने के बाद शादी की नई तारीख तय होगी।

‘व्यक्ति को ग़लत बोलो धर्म को नहीं’

मुश्किल वक़्त में फ़र्ज़ निभाने के लिए निकाह टालने वाली शाहिदा परवीन कहती हैं कि तबलीग़ी जमात का जो सिलसिला हुआ वो गलत था। इससे जुड़े लोगों को खुद सामने आना चाहिए। ताकि कोरोना का संक्रमण और न फैले। वह ये भी कहती हैं कि किसी व्यक्ति ने गलत किया है तो आप उस पर बोलिए धर्म को लेकर बात नहीं होनी चाहिए।

दिल्ली के निज़ामुद्दीन मरकज़ में तबलीग़ी जमात में शामिल लोगों के चलते कोरोना संक्रमण से जुड़े कई पॉजीटिव मामले एक साथ सामने आए। जिसके बाद बहुत से लोग धर्म से जुड़ी प्रतिक्रियाएं देने लगे। हालांकि इसी दौरान मंदिरों में पूजा-पाठ की तस्वीरें भी आईं। खुद नेताओं की पूजा-पाठ की तस्वीरें सामने आईँ। इससे भी आगे ताली बजाते-थाली बजाते लोगों की रैलियां तक सड़कों पर निकली।

मुस्लिम समाज आहत!

तबलीग़ी जमात की घटना के बाद आ रही प्रतिक्रियाओं से मुस्लिम समाज खुद को आहत महसूस कर रहा है। कोरोना वायरस के संक्रमण ने दुनियाभर के ताकतवर देशों तक को ये एहसास करा दिया है कि स्वास्थ्य के मोर्चे पर हम कितना पीछे हैं और इस मुद्दे पर हमें बहुत कार्य करने की जरूरत है। भारत जैसे विकासशील देशों में खासतौर पर सेहत का मोर्चा बहुत पीछे छूटा हुआ है। लेकिन कोरोना संक्रमण की बीमारी को भी हिंदू-मुस्लिम कर दिया गया है।

देहरादून के एक व्यक्ति ने बातों-बातों में कहा कि उसने अपने मोहल्ले में ठेले पर सब्जी बेचने वाले मुस्लिम व्यक्ति को आऩे से मना कर दिया है। जबकि कोरोना से जंग लड़ रहे डॉक्टरों, पुलिसकर्मियों, सफाई कर्मियों में मुस्लिम भी बराबर शामिल हैं। शाहिदा परवीन की बात इसलिए भी जरूरी लगती है। यहां जेल में बंद गोरखपुर के डॉक्टर कफ़ील ख़ान को भी याद किया जा सकता है जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कोरोना के इलाज के लिए अपनी सेवाएं देने की पेशकश की। ऐसे कई उदाहरण हमें अपने आसपास ही मिल जाएंगे।

फिरोज़ाबाद में चार तबलीग़ी जमात में शामिल लोगों के मेडिकल टीम पर पथराव करने की खबर दी गई, जिसका फिरोजाबाद पुलिस ने खंडन किया। इसी तरह सहारनपुर पुलिस ने भी तबलीग़ी जमात के लोगों के नॉनवेज मांगने की खबर का खंडन किया। राजस्थान के भरतपुर में एक डॉक्टर ने गर्भवती मुस्लिम महिला को एडमिट करने से इंकार कर दिया और अस्पताल की गैलरी में जन्मे उसके बच्चे की मौत हो गई। ऐसी तमाम ख़बरें अलग-अलग मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध हैं।

तबलीगियों पर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज करने की चेतावनी

इस बीच उत्तराखंड पुलिस ने ऐसे सभी तबलीगियों से सामने आने की अपील की है जो निज़ामुद्दीन या किसी अन्य तबलीग में शामिल हुए हैं। पुलिस ने ऐसे सभी लोगों को सोमवार, 6 अप्रैल की शाम तक खुद आगे आने को कहा था।

राज्य के पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी ने कहा है कि तबलीग में शामिल सभी लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर क्वारंटीन किया जाएगा। इसके साथ ही ये चेतावनी भी दी है कि यदि 6 अप्रैल के बाद ये जानकारी पुलिस या प्रशासन के संज्ञान में आती है कि तबलीग में शामिल होने के बाद किसी ने जानबूझकर खुद को छिपाया है या संक्रमण फैलाया है, तो इसमें डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट, IPC की धाराओं में कार्रवाई की ही जाएगी। इसके साथ ही हत्या के प्रयास का मामला भी दर्ज किया जाएगा।

तबलीग में शामिल किसी व्यक्ति के संक्रमण से उस क्षेत्र के किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर हत्या का मामला दर्ज करने की बात भी कही गई है।

चेतावनी के बाद भी नहीं सामने आया कोई तबलीग़ी

हालांकि पुलिस महानिदेशक की चेतावनी के बाद भी तबलीग़ी जमात से लौटा कोई और व्यक्ति सोमवार शाम तक सामने नहीं आया। हालांकि 64 ऐसे लोग सामने आए जो तबलीग़ी जमात से लौटे व्यक्ति के संपर्क में आए। इन सभी को होम क्वारंटीन किया जा रहा है।

उत्तराखंड पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार ने जानकारी दी कि तबलीग़ी जमात में शामिल बहुत से लोगों में कोरोना पॉजीटिव पाया गया है। इसके बाद उत्तराखंड पुलिस ने भी उत्तराखंड या अन्य राज्यों में तबलीग़ी जमात में शामिल लोगों का डाटा तैयार किया। एक मार्च के बाद अब तक उत्तराखंड में तबलीग़ी जमात में शामिल होने के लिए बाहर से 325 लोग आए। जिसमें से नौ वापस चले गए। इनमें से 260 लोगों को चिह्नित कर संस्थागत क्वारंटीन किया गया है।

जबकि 56 लोगों को होम क्वारंटीन किया है। इसी तरह उत्तराखंड से बाहर अन्य राज्यों में तबलीग़ी जमात में शामिल होने के लिए 383 लोग एक मार्च के बाद बाहर गए। उनमें से 26 लोग अभी तक वापस नहीं आए हैं। बाकी लोगों को घरों या संस्थागत क्वारनटीन कर दिया गया है। पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने कहा कि 4 अप्रैल को देहरादून में सात ऐसे लोग पकड़े गए जो बेहट तबलीग़ी जमात में शामिल होने गए थे और पैदल-पैदल जंगल के रास्ते चोरी-छिपे डोइवाला की तरफ़ जा रहे थे। इनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कर ली गई है और इन्हें भी संस्थागत क्वारंटीन में डाल दिया गया है।

उत्तराखंड में अब तक 31 कोरोना पॉजीटिव केस

उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण के अब तक कुल 31 मामले सामने आए हैं। इनमें से 5 मामले आज, 6 अप्रैल के हैं।

कुल मामलों में से चार लोग स्वस्थ्य हो चुके हैं। 18,497 लोग घरों या संस्थागत क्वारनटीन किए गए हैं। सबसे ज्यादा 18 मामले देहरादून के हैं। इसके अलावा अल्मोड़ा में एक, हरिद्वार में एक, नैनीताल में छह, पौड़ी में एक और उधमसिंहनगर में चार मामले सामने आए हैं। उत्तराखंड में 15 मार्च को पहला कोरोना पॉजीटिव मरीज मिला था और एक अप्रैल तक सात लोगों में संक्रमण पाया गया था। ये सभी विदेश से लौटे थे। इसके बाद पॉजीटिव केसों की संख्या तेजी से बढ़ी है। ज्यादातर तबलीग़ी जमात में शामिल लोग हैं। देहरादून में 5 कॉलोनी पूरी तरह सीज़ कर दी गई हैं। जहां कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। इनमें डोईवाला का जब्बरवाला और लक्खीबाग मुस्लिम कॉलोनी है।

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