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उत्तराखंड में हड़ताल स्थगित कर काम पर लौटे सफ़ाईकर्मी
सफाईकर्मचारी संगठनों ने यह फैंसला उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से वार्ता के बाद लिया है। काम पर लौटने के बाद नगर निगम और नगर निकायों के सफाईकर्मियों ने हड़ताल के दौरान फ़ैली गंदगी और कूड़े के ढेरों को साफ़ करना शुरू कर दिया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
29 Jul 2021
sanitation workers

पौड़ी गढ़वाल: उत्तराखंड राज्य के नगर निगम और नगर निकायों में पिछले एक सप्ताह से जारी सफाईकर्मियों की हड़ताल स्थगित हो गई है। सफाईकर्मचारी संगठनों ने यह फैंसला उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से वार्ता के बाद लिया है। फ़िलहाल सभी सफ़ाईकर्मी अपने साफ-सफाई के काम पर लौट आए हैं। सफाईकर्मियों के काम पर लौट आने से शहर में फ़ैली गंदगी से आम लोगों को निज़ात मिली है और उन्होंने राहत की सांस ली है।

उत्तराखंड के नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के सफाई कर्मी पिछले एक सप्ताह से कार्य का बहिष्कार कर हड़ताल पर थे जिससे शहरों और नगरों में गंदगी के अंबार लग गए थे। साथ ही बीमारी फ़ैलने का खतरा भी मंडराने लगा था। समस्या बढ़ती देख मुख्यमंत्री धामी ने मंगलवार शाम को सफाईकर्मियों के संगठनों से बात की। मुख्यमंत्री के द्वारा कुछ एक मांगों को मानने के आश्वासन पर सफाईकर्मियों के संगठनों ने फ़िलहाल हड़ताल को स्थगित कर दिया है और अपने काम पर लौट आये हैं। वहीं काम पर लौटने के बाद नगर निगम और नगर निकायों के सफाईकर्मियों ने हड़ताल के दौरान फ़ैली गंदगी और कूड़े के ढेरों को साफ़ करना शुरू कर दिया है।

सफाईकर्मचारी संघ, नगर निगम कोटद्वार के अध्यक्ष का कहना है कि मुख्यमंत्री धामी के द्वारा उनकी कुछ मांगे मान लेने और कुछ मांगों पर विचार करने के आश्वासन के बाद उन्होंने अपनी हड़ताल स्थगित की है। हालांकि उन्हें अभी तक उनकी मांगों के सम्बंध में कोई शासन आदेश या जीओ प्राप्त नहीं हुआ है। जिसकी अगले माह अगस्त में मिलने की उम्मीद है। इसलिए उनकी यह हड़ताल अगस्त माह में जीओ आने तक स्थगित रहेगी। अगर उनकी मांगों के बारे में सरकार कोई जीओ या शासन आदेश जारी नहीं करती है तो वो अपनी हड़ताल फिर से करने के लिए स्वतंत्र हैं और अपनी मांगों के समर्थन में दोबारा कार्य बहिष्कार कर हड़ताल पर चले जाने की चेतावनी दी है।

उत्तराखंड राज्य में 8 नगर निगम, 43 नगर पालिका परिषद और 43 नगर पंचायतें हैं। जहां 6 से 7 हज़ार स्थायी सफ़ाई कर्मचारी और करीब 10 हज़ार अस्थायी सफाईकर्मी कार्यरत हैं जो देवभूमि उत्तराखंड के शहरों और नगरों की साफ़-सफ़ाई करने में लगे हैं।

उनकी मांग है कि सम्पूर्ण उत्तराखंड से स्थानीय निकाय, नगर निगम और नगर पंचायतों सहित अन्य विभागों (चिकित्सालय, शैक्षणिक संस्थानों आदि) में सफ़ाई कार्य से ठेका प्रथा को पूर्ण रूप से समाप्त किया जाये, सफाईकर्मियों के स्थायी पदों पर भर्ती शुरू करते हुए मौहल्ला स्वच्छता समिति, संविदा और आउट सोर्सिंग सफ़ाई कर्मचारियों को नियमित किया जाए, शासनादेश संख्या 757 दिनांक - 12 जून 2015 के ढांचे को संशोधित किया जाए जिससे कि सफ़ाई कर्मचारी आउट सोर्सिंग पद के स्थान पर स्थायी पद मानकर भर्ती की जाए, पुरानी पेंशन बहाल की जाए, सफ़ाई कर्मियों का जीवनबीमा और स्वास्थ्य बीमा किया जाए, जैसी मांगों सहित अपनी 11 सूत्रीय मांगों के समर्थन में सड़कों पर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं।


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