NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
चुनाव 2022
विधानसभा चुनाव
भारत
राजनीति
उत्तराखंड चुनाव : रुद्रप्रयाग में दस साल पहले प्रस्तावित सैनिक स्कूल अभी तक नहीं बना, ज़मीन देने वाले किसान नाराज़!
रुद्रप्रयाग विधानसभा के जखोली विकासखंड के थाती-बड़मा गांव में 2013 में सैनिक स्कूल प्रस्तावित किया गया था मगर आज तक यहाँ सरकार स्कूल नहीं बनवा पाई है। पढ़िये न्यूज़क्लिक संवाददाता मुकुंद झा की यह ग्राउंड रिपोर्ट।
मुकुंद झा
08 Feb 2022
Uttarakhand

रुद्रप्रयाग विधानसभा के जखोली विकासखंड के थाती-बड़मा गांव के लोगों ने चुनाव बहिष्कार करने की धमकी दी क्योंकि पिछले लगभग दस साल से बीजेपी और पूर्व की कांग्रेस सरकारों ने इन्हें धोखा दिया है। इस गांव में 2013 में ही सैनिक स्कूल बनने का प्रस्ताव पास हो गया था लेकिन आजतक यहां स्कूल का नामो-निशान तक नहीं है। हालांकि इस स्कूल के निर्माण के लिए भूमि पूजन और शुभारंभ कई बार और कई मुख्यमंत्रियों ने किया है।

बड़मा क्षेत्र के लगभग सौ से अधिक गांवों के लोगों के लिए ये एक ड्रीम प्रोजेक्ट था जिसके लिए बड़मा ग्रामीणों ने बिल्कुल मुफ़्त में अपनी खेती की एक हज़ार नाली भूमि दान दे दी, लेकिन फिर भी वहां स्कूल निर्माण नहीं हुआ है जिससे ग्रामीणों में भारी गुस्सा है। इस बार विधानसभा चुनाव में सैनिक स्कूल जखोली विकासखंड के बड़मा पट्टी के लिए एक बड़ा मुद्दा दिख रहा है। 

न्यूज़क्लिक की चुनावी टीम जब इस गांव में पहुंची तो ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि वो दोनों राष्ट्रीय पार्टी भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) और कांग्रेस को वोट नहीं करेंगें क्योंकि दोनों ने ही उनके साथ धोखा किया है। इस बीच गांव के कई प्रमुख लोगों ने कहा उनकी आस-पास के ग्राम प्रधानों से बात चल रही है, वो इस चुनाव का बहिष्कार करेंगे।

आपको बता दें कि 2012-13 में केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने उत्तराखंड में इस सैनिक स्कूल को मंजूर किया था। उस समय राज्य में भी कांग्रेस सरकार थी तब से लेकर अब जब बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार भी अपना कार्यकाल पूरा कर चुकी है, आजतक सैनिक स्कूल नहीं बना है, बनना छोड़िए अभी कायदे से शुरू भी नहीं हुआ है। माना जाता है कि इसे पूर्व में तत्कालीन सैनिक कल्याण मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने शुरू किया था परन्तु जब वो कांग्रेस तोड़ कर बीजेपी में शामिल हुए उसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस प्रोजेक्ट पर रोक लगवा दी थी। हालांकि उसके बाद उनकी सरकार चली गई। हरक सिंह रावत दोबारा बीजेपी सरकार में कैबिनट मंत्री बने और अपना कार्यकाल लगभग पूरा कर कांग्रेस में आ गए है लेकिन स्कूल कब बनेगा या अब बन भी पाएगा यह कह पाना मुश्किल है। 

तत्कालीन सरकार ने 10 करोड़ का बजट दिया था जिसमें से लगभग 9 करोड़ भूमि समतल करने और एक दीवार बनाने में ही खर्च हो चुके हैं। इस मामले में निर्माण गड़बड़ी को लेकर कई अफसरों पर एफआईआर तक हुई है।

किसानों द्वारा दी गई एक हज़ार नाली से अधिक भूमि पर बनने वाले सैनिक स्कूल में मुख्य कैंपस के साथ छात्रावास, शिक्षक/कर्मचारी आवास निर्माण किया जाना था। इसके अलावा यहां सेमीनार हॉल, खेल मैदान व अन्य संसाधन भी जुटाए जाने थे। परन्तु अभी वहां एक बंजर मैदान बना हुआ है जिसपर स्थनीय युवा और बच्चे क्रिकेट और बाकि खेल - खेलते हैं।

स्कूल के लिए अपनी ज़मीन देने वाले दीपक सिंह रावत ने कहा, "सरकार कह रही है कि इसमें गड़बड़ी हुई और तकनीकी कारण से इसका निर्माण नहीं हो पाया लेकिन हमारा क्या हमनें अपने बच्चो और युवाओं के भविष्य और जिले राज्य के तरक्की के लिए सरकार को ज़मीन दी थी न की हमारी खेती की ज़मीन को बंजर मैदान बनाने के लिए। हमे किसी भी हाल में स्कूल चाहिए।"

जनता के दबाव में दो साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने स्कूल बनाने के लिए आश्वस्त किया और पुनः इसका  शिलान्यास कर फिर से निर्माण शुरू करने की घोषणा की लेकिन निर्माण अभी तक शुरू नहीं हो सका है। स्वीकृति मिलने से लेकर अब तक सैनिक स्कूल का दो बार शिलान्यास और भूमि पूजन हो चुका है। इसके साथ ही वर्तमान बने नए मुख्य्मंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी ग्रामीणों से कहा कि वो इसका पुनर्निर्माण शुरू कराएंगे लेकिन अभी कुछ होता नहीं दिख रहा है। 

ग्रामीण सुशीला देवी ने कहा, "हमारे विधायक भरत सिंह चौधरी ने कई आश्वासन दिए कि वो इसका निर्माण शुरू करवाएँगे एक बार तो उन्होंने कहा कि सरकार ने इसके निर्माण के लिए एक करोड़ रूपए दे दिए हैं लेकिन जब हमने उनसे इस आवंटन के कागज़ मांगे तो नहीं दिए। वो सरासर झूठ बोल रहे थे।"

सैनिक स्कूल संघर्ष समिति के मदन सिंह नेगी ने कहा, "थाती, बड़मा और अन्य गांवों के ग्रामीणों ने अपनी एक हजार नाली कृषि भूमि को बिना किसी शर्त सरकार को दान दी थी। क्योंकि हमें आशा थी कि सैनिक स्कूल बनने से क्षेत्र का कायाकल्प होगा और इस क्षेत्र में विकास की एक नई बयार बहेगी। परन्तु अब लग रहा है ये विनाश हो रहा है।"

गाँवो के युवाओं में भी इसको लेकर भारी गुस्सा है। ऐसे ही एक नौजवान अर्जुन सिंह जिनकी उम्र लगभग 25 वर्ष है उन्होंने कहा, "अगर स्कूल बनता तो देश भर से छात्र यहाँ रहने और पढ़ने आते।  इस क्षेत्र के लोगों को रोज़गार मिलता, सड़कें अच्छी होतीं और हम लोगों को भी अच्छी शिक्षा मिलती परन्तु अब न स्कूल बना और न ही कोई विकास कार्य हुआ है इसलिए हम इसबार चुनाव में किसी भी दल को वोट नहीं देंगे।"

गांव के प्रधान त्रिलोक सिंह रावत अपने साथ राज्य और केंद्र सरकार के शासन आदेश और उनके द्वारा किए गए पत्राचारों की एक पोथी सी लेकर आए और दिखाने लगे कि उन्हें कब और  किसने क्या आश्वासन दिया है। वो कहते हैं, "हमें दिल्ली से लेकर देहरादून तक केवल आश्वासन ही मिला है लेकिन हमें न्याय नहीं मिला है।"

बीजेपी इस चुनाव में अपने पिछले पांच साल के शासन में कह रही है कि उन्होंने धुआँधार काम किया है लेकिन इस सैनिक स्कूल के सवाल पर उसका ये कथन बेमानी लगता है। साथ ही हरीश रावत खुद को विकास पुरुष बताने का प्रयास कर रहे हैं परन्तु सच्चाई यह है कि दोनों ने ही इस मुद्दे को लटकाए रखा है। रक्षा मंत्रालय ने अपनी चिठ्ठी में साफ कहा है कि जैसे ही राज्य द्वारा भवन बन जाने की सूचना प्राप्त होगी वे वहां सैनिक स्कूल शुरू कर देंगें।

आपको बात दें रुद्रप्रयाग विधानसभा में सबसे बड़ा क्षेत्र जखोली है जहां इस विधानसभा के लगभग 70% मतदाता रहते हैं। ये पूरा इलाका इस स्कूल से प्रभावित है। इसलिए इस चुनाव में इस मुद्दे की काफ़ी अहमियत है क्योंकि ये मुद्दा यहाँ के लोगों की भावना के साथ-साथ उनके विकास से भी जुड़ा है। इस विधानसभा में कांग्रेस ने अपने युवा चेहरे ब्लॉक प्रमुख प्रदीप थपलियाल को तो वहीं बीजेपी ने अपने वर्तमान विधायक भरत सिंह चौधरी पर दांव खेला है। हालाँकि इस सीट पर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे भाजपा से मंत्री और विधायक रहे मातबर सिंह कंडारी ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है।

(सभी तस्वीर अविनाश सौरभ ने ली है )

UTTARAKHAND
Uttarakhand Election 2022
Rudraprayag Assembly
Sainik School
BJP
unemployment

Related Stories

यूपी : आज़मगढ़ और रामपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा की साख़ बचेगी या बीजेपी सेंध मारेगी?

त्रिपुरा: सीपीआई(एम) उपचुनाव की तैयारियों में लगी, भाजपा को विश्वास सीएम बदलने से नहीं होगा नुकसान

यूपीः किसान आंदोलन और गठबंधन के गढ़ में भी भाजपा को महज़ 18 सीटों का हुआ नुक़सान

जनादेश-2022: रोटी बनाम स्वाधीनता या रोटी और स्वाधीनता

पंजाब : कांग्रेस की हार और ‘आप’ की जीत के मायने

यूपी चुनाव : पूर्वांचल में हर दांव रहा नाकाम, न गठबंधन-न गोलबंदी आया काम !

जनादेश—2022: वोटों में क्यों नहीं ट्रांसलेट हो पाया जनता का गुस्सा

उत्तराखंड में भाजपा को पूर्ण बहुमत के बीच कुछ ज़रूरी सवाल

गोवा में फिर से भाजपा सरकार

त्वरित टिप्पणी: जनता के मुद्दों पर राजनीति करना और जीतना होता जा रहा है मुश्किल


बाकी खबरें

  • tourism sector
    भाषा
    कोरोना के बाद से पर्यटन क्षेत्र में 2.15 करोड़ लोगों को रोज़गार का नुकसान हुआ : सरकार
    15 Mar 2022
    पर्यटन मंत्री ने बताया कि सरकार ने पर्यटन पर महामारी के प्रभावों को लेकर एक अध्ययन कराया है और इस अध्ययन के अनुसार, पहली लहर में 1.45 करोड़ लोगों को रोजगार का नुकसान उठाना पड़ा जबकि दूसरी लहर में 52…
  • election commission of India
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली नगर निगम चुनाव टाले जाने पर विपक्ष ने बीजेपी और चुनाव आयोग से किया सवाल
    15 Mar 2022
    दिल्ली चुनाव आयोग ने दिल्ली नगर निगम चुनावो को टालने का मन बना लिया है। दिल्ली चुनावो की घोषणा उत्तर प्रदेश और बाकी अन्य राज्यों के चुनावी नतीजों से पहले 9 मार्च को होनी थी लेकिन आयोग ने इसे बिल्कुल…
  • hijab
    सीमा आज़ाद
    त्वरित टिप्पणी: हिजाब पर कर्नाटक हाईकोर्ट का फ़ैसला सभी धर्मों की औरतों के ख़िलाफ़ है
    15 Mar 2022
    इस बात को दरअसल इस तरीके से पढ़ना चाहिए कि "हर धार्मिक रीति का पालन करना औरतों का अनिवार्य धर्म है। यदि वह नहीं है तभी उस रीति से औरतों को आज़ादी मिल सकती है, वरना नहीं। "
  • skm
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    एमएसपी पर फिर से राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेगा संयुक्त किसान मोर्चा
    15 Mar 2022
    एसकेएम ने फ़ैसला लिया है कि अगले महीने 11 से 17 अप्रैल के बीच एमएसपी की क़ानूनी गारंटी सप्ताह मना कर राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरूआत की जाएगी। 
  • Karnataka High Court
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हिजाब  मामला: हिजाब इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं, कर्नाटक उच्च न्यायालय ने खारिज की याचिका
    15 Mar 2022
    अदालत ने अपना फ़ैसला सुनते हुए यह भी कहा कि शिक्षण संस्थानों में यूनिफ़ॉर्म की व्यवस्था क़ानूनी तौर पर जायज़ है और इसे संविधान के तहत दी गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन नहीं कहा जा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License