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यूपी: ‘रामराज’ में आमजन तो छोड़िए, पुलिस भी सुरक्षित नहीं है!
राज्य में दो दिनों के भीतर ही दो बार पुलिस, बदमाशों के हमले का शिकार हुई। कासगंज के बाद अब शाहजहांपुर में पुलिस टीम पर हमला हुआ है। जिसमें खबर है कि दरोगा को चोटें आई हैं। 
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
11 Feb 2021
यूपी: ‘रामराज’ में आमजन तो छोड़िए, पुलिस भी सुरक्षित नहीं है!
Image Courtesy: Financial Express

“अपराधी या तो उत्तर प्रदेश से बाहर चले गए हैं या फिर ज़मानत रद्द करा कर जेल में बंद हैं।”

योगी सरकार के इस दावे के उलट उत्तर प्रदेश में अपराधियों के हौसलें बुलंद दिखाई दे रहे हैं। आमजन तो छोड़िए यहां पुलिस तक सुरक्षित नहीं हैं। राज्य में दो दिनों के भीतर ही दो बार पुलिस बदमाशों के हमले का शिकार हुई है। कासगंज के बाद अब शाहजहांपुर में पुलिस टीम पर हमला हुआ है। जिसमें खबर है कि दरोगा को चोटें आई हैं। इस पूरी वारदात ने एक बार फिर राज्य में बेहतर कानून व्यवस्था के मुख्यमंत्री के दावे को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

अमर ऊजाला की रिपोर्ट के मुताबिक यह घटना यूपी के शाहजहांपुर के कलान कस्बे की है। यहां बुधवार, 10 फरवरी की रात कुछ दबंगों ने एक बच्ची से छेड़छाड़ की। विरोध करने पर बदमाशों ने बच्ची के घरवालों को पीटना शुरू कर दिया। सूचना पाकर थाने से कस्बा इंचार्ज तीन सिपाहियों के साथ मौके पर पहुंचे तो दबंगों ने उन पर हमला कर दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार छेड़छाड़ के आरोपियों ने पुलिसवालों से हाथापाई की, जिसमें दरोगा को चोटें आई हैं। इस घटना से मौके पर अफरातफरी होने के साथ भय का माहौल बन गया। कलान थाने से इसकी सूचना मिलने पर मिर्जापुर और परौर पुलिस भी कलान पहुंच गई। तब जाकर मामला शांत हुआ।

पुलिस का क्या कहना है?

पुलिस की ओर से एसपी ग्रामीण संजीव कुमार वाजपेयी ने बताया कि पांच आरोपियों को अभी पकड़ा गया है। अन्य नाम सामने आने पर उनकी भी गिरफ्तारी की जाएगी। एफआईआर दर्ज की जा रही है। कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

आपको बता दें कि इससे पहले कासगंज में यूपी पुलिस की टीम पर हमला हुआ था। जिसके बाद पुलिस ने एक आरोपी को मुठभेड़ में मार गिराया गया था, लेकिन मामले का मुख्य आरोपी अभी भी फरार चल रहा है।

कासगंज में क्या हुआ था?

कासगंज में पुलिस नगला धीमर गांव में अवैध शराब के गोरखधंधे को बंद कराने गई थी। इसी दौरान अवैध शराब कारोबारियों ने घात लगाकर पुलिस टीम पर हमला कर दिया। आरोपियों ने लाठी और अन्य हथियारों से पुलिसकर्मियों पर हमला बोल दिया और बंधक बनाकर उनकी पिटाई भी की। शराब माफियाओं ने सिपाही देवेंद्र की पीट-पीटकर कर हत्या कर दी, जबकि दरोगा अशोक कुमार बुरी तरह घायल हो गए थे।

इस घटना के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा एक बयान जारी किया गया, जिसमें कहा गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपराध में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए कहा है। बयान में कहा गया, "राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।"

पुलिस मुठभेड़ों पर उठते सवाल

गौरतलब है कि बीते साल कानपुर मुठभेड़ में 8 पुलिसकर्मियों के शहीद होने के बाद यूपी शासन-प्रशासन की खूब किरकीरी हुई थी। इस मामले में पुलिस, अपराध और राजनीति का तगड़ा गठजोड़ सामने आया था। मामले में मुख्य आरोपी विकास दुबे का ‘नाटकीय’ एनकाउंटर देखने को मिला था, जिसने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था को चर्चा का विषय बना दिया था।

मार्च 2017 में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनने के बाद से प्रदेश में हो रहीं पुलिस मुठभेड़ों पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी उत्तर प्रदेश में पुलिस मुठभेड़ों को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार को नोटिस जारी किया था। यह नोटिस एक याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया गया। जिसमें कहा गया था कि इन मुठभेड़ों की सीबीआई या एसआईटी से जांच कराई जाए और इसकी निगरानी कोर्ट करे।

रामराज में कानून व्यवस्था भगवान भरोसे?

उत्तर प्रदेश में लगातार दर्ज हो रही आपराधिक घटनाओं के चलते प्रदेश की कानून व्यवस्था अक्सर सुर्खियों में रहती है। कभी समाजवादी पार्टी को कानून व्यवस्था के नाम पर घेरने वाली बीजेपी, अब सत्ता में आने के बाद खुद जिस मुद्दे पर सबसे ज़्यादा नाकाम रहने का आरोप झेल रही है, वो भी कानून व्यवस्था ही है। बदहाल कानून व्यवस्था को लेकर विपक्ष, सरकार पर हमलावर है, तो वहीं प्रशासन तुलनात्मक आंकड़े साधने-संभालने में जुटा है।

दलितों के ख़िलाफ़ बढ़ते अपराध

दलितों के खिलाफ भी यूपी में अपराध तेज़ी से बढ़े हैं। इसी स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आजमगढ़ के बांसा गांव के दलित सरपंच सत्यमेव जयते की बेरहमी से गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इससे पहले भी राज्य में दलितों पर अत्याचार के कई गंभीर मामले सामने आए हैं।

एनसीआरबी के आंकड़ों को देखें तो उत्तर प्रदेश में दलितों के खिलाफ अपराधों में, बलात्कार, हत्या, हिंसा और भूमी से संबंधित मुद्दों को लेकर उत्तर प्रदेश का नाम शीर्ष राज्यों में रहता है। एनसीआरबी के अनुसार, यूपी में दलितों के खिलाफ अपराधों में वर्ष 2014 से 2018 तक 47 प्रतिशत की भारी बढ़ोत्तरी हुई है। इसके बाद गुजरात और हरियाणा हैं, जहां क्रमश: 26 और 15 फीसदी अपराध बढ़े हैं।

रामराज में नहीं हैं सुरक्षित महिलाएं

महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता बताने वाली बीजेपी की योगी सरकार में महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों का ग्राफ तेज़ी से बढ़ता जा रहा है। बीते दिनों एक के बाद एक बलात्कार और हत्या की घटनाओं ने रामराज पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध के मामले में उत्तर प्रदेश पहली कतार में खड़ा है। देश में महिलाओं के ख़िलाफ़ 2018 में कुल 378,277 मामले दर्ज हुए और अकेले यूपी में 59,445 मामले दर्ज किए गए। यानी देश के कुल महिलाओं के साथ किए गए अपराध का लगभग 15.8%।

इसके अलावा प्रदेश में कुल रेप के 4,322 केस हुए। यानी हर दिन 11 से 12 रेप केस दर्ज हुए। ध्यान देने वाली बात ये है कि ये उन अपराधों पर तैयार की गई रिपोर्ट है जो थानों में दर्ज होते हैं। दर्ज मामलों से अधिक कई मामलें ऐसे होते हैं जिनकी थाने में कभी शिकायत ही दर्ज नहीं हो पाती है। एनसीआरबी देश के गृह मंत्रालय के अंतर्गत आता है।

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Attack on UP Police
Ram Rajya
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