NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
समाज
साहित्य-संस्कृति
हाँ, तुम मुझसे प्रेम करो जैसे मछलियाँ लहरों से करती हैं...
प्यार के मायने क्या हो सकते हैं, इसे अगर ढूंढना-समझना हो तो शमशेर बहादुर सिंह की कविताओं में ढूंढा-समझा जा सकता है। वही कह सकते हैं कि "हाँ, तुम मुझसे प्रेम करो जैसे मछलियाँ लहरों से करती हैं...जिनमें वह फँसने नहीं आतीं"। वैलेंटाइन डे के मौके पर शमशेर बहादुर सिंह की एक प्रसिद्ध कविता 'टूटी हुई, बिखरी हुई'।
शमशेर बहादुर सिंह
14 Feb 2020
वैलंटाइन्स डे
प्रतीकात्मक फोटो : गूगल से साभार

टूटी हुई, बिखरी हुई

टूटी हुई बिखरी हुई चाय

की दली हुई पाँव के नीचे

पत्तियाँ

मेरी कविता

 

बाल, झड़े हुए, मैल से रूखे, गिरे हुए,

गर्दन से फिर भी चिपके

... कुछ ऐसी मेरी खाल,

मुझसे अलग-सी, मिट्टी में

मिली-सी

 

दोपहर बाद की धूप-छाँह में खड़ी इंतजार की ठेलेगाड़ियाँ

जैसे मेरी पसलियाँ...

खाली बोरे सूजों से रफू किये जा रहे हैं...जो

मेरी आँखों का सूनापन हैं

 

ठंड भी एक मुसकराहट लिये हुए है

जो कि मेरी दोस्‍त है।

 

कबूतरों ने एक ग़ज़ल गुनगुनायी . . .

मैं समझ न सका, रदीफ़-क़ाफ़िये क्‍या थे,

इतना ख़फ़ीफ़, इतना हलका, इतना मीठा

उनका दर्द था।

 

आसमान में गंगा की रेत आईने की तरह हिल रही है।

मैं उसी में कीचड़ की तरह सो रहा हूँ

और चमक रहा हूँ कहीं...

न जाने कहाँ।

 

मेरी बाँसुरी है एक नाव की पतवार -

जिसके स्‍वर गीले हो गये हैं,

छप्-छप्-छप् मेरा हृदय कर रहा है...

छप् छप् छप्

 

वह पैदा हुआ है जो मेरी मृत्‍यु को सँवारने वाला है।

वह दुकान मैंने खोली है जहाँ 'प्‍वाइजन' का लेबुल लिए हुए

दवाइयाँ हँसती हैं -

उनके इंजेक्‍शन की चिकोटियों में बड़ा प्रेम है।

 

वह मुझ पर हँस रही है, जो मेरे होठों पर एक तलुए

के बल खड़ी है

मगर उसके बाल मेरी पीठ के नीचे दबे हुए हैं

और मेरी पीठ को समय के बारीक तारों की तरह

खुरच रहे हैं

उसके एक चुम्‍बन की स्‍पष्‍ट परछायीं मुहर बनकर उसके

तलुओं के ठप्‍पे से मेरे मुँह को कुचल चुकी है

उसका सीना मुझको पीसकर बराबर कर चुका है।

 

मुझको प्‍यास के पहाड़ों पर लिटा दो जहाँ मैं

एक झरने की तरह तड़प रहा हूँ।

मुझको सूरज की किरनों में जलने दो -

ताकि उसकी आँच और लपट में तुम

फौवारे की तरह नाचो।

 

मुझको जंगली फूलों की तरह ओस से टपकने दो,

ताकि उसकी दबी हुई खुशबू से अपने पलकों की

उनींदी जलन को तुम भिगो सको, मुमकिन है तो।

हाँ, तुम मुझसे बोलो, जैसे मेरे दरवाजे की शर्माती चूलें

सवाल करती हैं बार-बार... मेरे दिल के

अनगिनती कमरों से।

 

हाँ, तुम मुझसे प्रेम करो जैसे मछलियाँ लहरों से करती हैं

...जिनमें वह फँसने नहीं आतीं,

जैसे हवाएँ मेरे सीने से करती हैं

जिसको वह गहराई तक दबा नहीं पातीं,

तुम मुझसे प्रेम करो जैसे मैं तुमसे करता हूँ।

 

आईनो, रोशनाई में घुल जाओ और आसमान में

मुझे लिखो और मुझे पढ़ो।

आईनो, मुसकराओ और मुझे मार डालो।

आईनो, मैं तुम्‍हारी जिंदगी हूँ।

 

एक फूल उषा की खिलखिलाहट पहनकर

रात का गड़ता हुआ काला कम्‍बल उतारता हुआ

मुझसे लिपट गया।

 

उसमें काँटें नहीं थे - सिर्फ एक बहुत

काली, बहुत लम्बी जुल्‍फ थी जो जमीन तक

साया किये हुए थी... जहाँ मेरे पाँव

खो गये थे।

 

वह गुल मोतियों को चबाता हुआ सितारों को

अपनी कनखियों में घुलाता हुआ, मुझ पर

एक जिन्‍दा इत्रपाश बनकर बरस पड़ा -

 

और तब मैंने देखा कि मैं सिर्फ एक साँस हूँ जो उसकी

बूँदों में बस गयी है।

जो तुम्‍हारे सीनों में फाँस की तरह खाब में

अटकती होगी, बुरी तरह खटकती होगी।

 

मैं उसके पाँवों पर कोई सिजदा न बन सका,

क्‍योंकि मेरे झुकते न झुकते

उसके पाँवों की दिशा मेरी आँखों को लेकर

खो गयी थी।

 

जब तुम मुझे मिले, एक खुला फटा हुआ लिफाफा

तुम्‍हारे हाथ आया।

बहुत उसे उलटा-पलटा - उसमें कुछ न था -

तुमने उसे फेंक दिया : तभी जाकर मैं नीचे

पड़ा हुआ तुम्‍हें 'मैं' लगा। तुम उसे

उठाने के लिए झुके भी, पर फिर कुछ सोचकर

मुझे वहीं छोड़ दिया। मैं तुमसे

यों ही मिल लिया था।

 

मेरी याददाश्‍त को तुमने गुनाहगार बनाया - और उसका

सूद बहुत बढ़ाकर मुझसे वसूल किया। और तब

मैंने कहा - अगले जनम में। मैं इस

तरह मुस्कुराया जैसे शाम के पानी में

डूबते पहाड़ गमगीन मुसकराते हैं।

 

मेरी कविता की तुमने खूब दाद दी - मैंने समझा

तुम अपनी ही बातें सुना रहे हो। तुमने मेरी

कविता की खूब दाद दी।

 

तुमने मुझे जिस रंग में लपेटा, मैं लिपटता गया :

और जब लपेट न खुले - तुमने मुझे जला दिया।

मुझे, जलते हुए को भी तुम देखते रहे : और वह

मुझे अच्‍छा लगता रहा।

 

एक खुशबू जो मेरी पलकों में इशारों की तरह

बस गयी है, जैसे तुम्‍हारे नाम की नन्‍हीं-सी

स्‍पेलिंग हो, छोटी-सी प्‍यारी-सी, तिरछी स्‍पेलिंग।

 

आह, तुम्‍हारे दाँतों से जो दूब के तिनके की नोक

उस पिकनिक में चिपकी रह गयी थी,

आज तक मेरी नींद में गड़ती है।

 

अगर मुझे किसी से ईर्ष्‍या होती तो मैं

दूसरा जन्‍म बार-बार हर घंटे लेता जाता

पर मैं तो जैसे इसी शरीर से अमर हूँ -

तुम्‍हारी बरकत!

 

बहुत-से तीर बहुत-सी नावें, बहुत-से पर इधर

उड़ते हुए आये, घूमते हुए गुजर गये

मुझको लिये, सबके सब। तुमने समझा

कि उनमें तुम थे। नहीं, नहीं, नहीं।

उसमें कोई न था। सिर्फ बीती हुई

अनहोनी और होनी की उदास

रंगीनियाँ थीं। फकत।

(कविता कोश से साभार)

valentines day
Poetry
love poetry

Related Stories

इतवार की कविता : 'पुनल तुम आदमी निकले...'


बाकी खबरें

  • जेएनयू आतंकवाद रोधी पाठ्यक्रम: दबे स्वरों में होने वाली बेहूदा बकवास अब मुख्यधारा शिक्षा में शामिल
    वसी मनाज़िर
    जेएनयू आतंकवाद रोधी पाठ्यक्रम: दबे स्वरों में होने वाली बेहूदा बकवास अब मुख्यधारा शिक्षा में शामिल
    06 Sep 2021
    एक मुस्लिम-विरोधी और इस्लाम-विरोधी आख्यान को संस्थाबद्ध करने का काम जिसे अतीत में सिर्फ खुस-फुसाहट वाली बातचीत या कट्टर व्हाट्सएप्प ग्रुपों में ही सुना जाता था, एक प्रकार से मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय…
  • गिनी में तख़्तापलट: सेना ने राष्ट्रपति अल्फा कोंडे को गिरफ़्तार किया, सरकार भंग करने की घोषणा
    पीपल्स डिस्पैच
    गिनी में तख़्तापलट: सेना ने राष्ट्रपति अल्फा कोंडे को गिरफ़्तार किया, सरकार भंग करने की घोषणा
    06 Sep 2021
    तख़्तापलट करने वाले नेताओं ने देश के संविधान को भंग करने की भी घोषणा की है। इसे पिछले साल संशोधित किया गया था ताकि कोंडे को तीसरी बार राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ने की अनुमति मिल सके।
  • पंजशीर विद्रोह का पूरे अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान प्रतिरोध खड़ा करना असंभव है
    एम. के. भद्रकुमार
    पंजशीर विद्रोह का पूरे अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान प्रतिरोध खड़ा करना असंभव है
    06 Sep 2021
    पंजशीर विद्रोह एक फुटनोट बन कर रह गया है क्योंकि इसकी पूरे अफ़गानिस्तान में तालिबान विरोधी प्रतिरोध पैदा करने की संभावना शून्य है।
  • ग्रमीण बैंक
    अंकित शुक्ला, प्रकाश रंजन
    बिहार ग्रामीण बैंक में एक और बड़ा घोटाला!, लेकिन बैंक और पुलिस ने दर्ज नहीं की FIR
    06 Sep 2021
    मामला 19 अगस्त का है जब लोगों को इस बात की भनक लगी कि कस्तूरी सराय बैंक में ग़बन हो गया है तो लोग अपने साथ भी ग़बन की आशंका में डर सहम गए। मामले के बारे में सुनते ही बैंक के आगे भीड़ उमड़ गई , लोग अपनी-…
  • वृद्धावस्था पेंशन में वृद्धि से इंकार, पूंजीपतियों पर देश न्यौछावर करती मोदी सरकार
    प्रभात पटनायक
    वृद्धावस्था पेंशन में वृद्धि से इंकार, पूंजीपतियों पर देश न्यौछावर करती मोदी सरकार
    06 Sep 2021
    केंद्र सरकार ने संसद में कहा है कि राष्ट्रीय सामाजिक सहायता योजना के अंतर्गत बुजुर्गों को दी जाने वाली मासिक पेंशन की राशि में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। इस समय इस योजना के अंतर्गत 60 से 79 साल तक उम्र…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License