NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
वाराणसी: लॉकडाउन के चलते खेतों में ही बर्बाद हो रही फूलों की फसल, बेहाल हैं किसान
देशव्यापी लॉकडाउन से फूल की खेती करने वाले किसानों और उसके व्यवसाय से जुड़े लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। चूंकि फूल जरूरी समानों की सूची में शामिल नहीं है ऐसे में फूल खेतों से मंडियों तक नहीं पहुंच रहे और खेत में ही सड़ रहे हैं। उत्तर प्रदेश के वाराणसी से विशेष रिपोर्ट
रिज़वाना तबस्सुम
24 Apr 2020
lockdown

वाराणसी: दीनापुर वाराणसी का ऐसा अनूठा गांव है जहां धान-गेहूं नहीं, सिर्फ फूलों की खेती होती है। वही फूल जो बाबा विश्वनाथ और काशी के कोतवाल काल भैरव के माथे की शोभा बनते रहे हैं। यहां के रंग-बिरंगे फूल सिर्फ पूर्वांचल ही नहीं, बिहार से कोलकाता तक जाते रहे हैं। दीनापुर के बागवानों के लिए ये फूल सोने से कम नहीं थे, लेकिन कोरोना के चलते अब माटी हो गए हैं। फूलों की खेती से समृद्ध और खुशहाल दीनापुर के किसान अब खून के आंसू रो रहे हैं।

दीनापुर गांव वाराणसी मुख्यालय से करीब दस किलोमीटर दूर है, यहां की आबादी लगभग सात हज़ार है। इस गांव में जाने के ठीक से सड़कें भी नहीं हैं। इसके बाद भी यहां के लोग लगातार जी तोड़ मेहनत करते रहते हैं। यहां रहने वाले करीब तीन सौ परिवार सिर्फ फूलों की खेती करते हैं। लगभग तीन सौ एकड़ जमीन में पीले नारंगी गेंदे तो कभी सफेद बेले, कुंद व टेंगरी और गुलाब से ढका रहता है।

यहां पर फूलों की खेती करने वाली सुनीता देवी नाम की महिला बताती हैं कि, 'हाड़तोड़ मेहनत करने पर ही फूलों की खेती कर सकते हैं। पौधे लगाना, पानी देना और दिनभर उनकी देखभाल करना आसान काम नहीं है।' अपने सरकते पल्लू को ठीक करते हुए सुनीता कहती हैं 'फूल आने पर उन्हें तोड़ना, उनकी माला बनाना और फिर उसे मंडी में ले जाकर बेचना हर किसी के बूते में नहीं है।'

इसी गांव में करीब तीस साल से फूलों की खेती कर रहे अनिल बताते हैं कि उनको खेती करता देख और कई लोग फूलों की खेती करने लग गए। पूरे तीस साल की जिंदगी में ऐसा कभी नहीं हुआ था कि हम लोगों को इतना नुकसान हो, ऐसा पहली बार हुआ है कि, 'खेतों में फूल तैयार होकर गिर रहे हैं लेकिन बाजार तक नहीं पहुंच पा रहा है। अपने सर पर हाथ रखकर बैठते हुए अनिल कहते हैं 'लॉकडाउन के चलते अब हमारी पूरी खेती ही नहीं, समूचा कारोबार बैठ गया है।'

फूलों की खेती 3.jpg
इसी गांव से सटा हुआ है चिरईगांव! करीब दस हजार की आबादी वाले इस गांव में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जिनकी आजीविका फूलों पर टिकी है। कोरोना वायरस ने अब इन्हें तबाह कर दिया। गुलाब की खेती करने वाले विनोद कुमार को अब इनके फूल चुभ रहे हैं। करीब दस बिस्वा जमीन में देसी गुलाब की खेती करने वाले विनोद कुमार कहते हैं, 'लॉकडाउन में मंदिर बंद, मंडी बंद-आखिर कहां लेकर जाएं अपने फूलों को?'

विनोद मौर्य कहते हैं, 'गुलाब को तोड़कर उसकी पंखुड़ियों को सुखा रहे हैं। बस उम्मीद भर है कि शायद वो औने-पौने दाम में बिक जाएं। इन पंखुड़ियों का प्रयोग ठंडई में किया जाता है। पहले गुलाब की ये पंखुड़ियां 50-60 रुपये प्रति किग्रा की दर से बिक जाती थीं, अब बीस के भाव बिक जाएं तो बड़ी बात होगी।'

फूलों की खेती करने वाले एक अन्य किसान अरविंद कहते हैं कि, 'फूलों की खेती कच्चा रोजगार है, लॉकडाउन की वजह से सब बेकार हो रहा है। केवल गुलाब ही है जिसे हम लोग तोड़ रहे हैं बाकी फूलों को यूं ही छोड़ दिया जा रहा है।' बातों ही बातों में फूलों की तरफ इशारा करते हुए अरविंद कहते हैं कि 'शायद इन फूलों की किस्मत मंदिरों के लिए नहीं है?'

शोभनाथ मौर्य इंद्रपुर में देशी गुलाब की खेती करते हैं। यहाँ पैदा होने वाला गुलाब सोनभद्र, रेनूकोट, शक्तिनगर से लेकर भदोही तक भेजते रहे हैं। इस गांव में घर-घर में फूलों की माला बनती है। घर की महिलाएं माला बनाती हैं और पुरुष उसे बांसफाटक व मलदहिया की फूल मंडी में बेचते हैं।  

इंद्रपुर के राजेंद्र कुमार मौर्य कहते हैं, 'लॉकडाउन और आगे बढ़ा तो हमारी मुश्किलें इतनी बढ़ जाएंगी, जिसका कोई ओर-छोर नहीं होगा। आखिर कोरोना का दंश सिर्फ किसान ही क्यों झेलें? योगी सरकार किसानों के नुकसान की भरपाई करे। पूरा न सही, थोड़ी सी राहत उनके लिए संजीवनी बन सकती है।'

पूर्वांचल किसान यूनियन के अध्यक्ष योगीराज सिंह पटेल बताते हैं कि, वाराणसी में पूरे साल फूलों की खेती होती हैं, यहां से दूसरे शहरों में भी फूलों की सप्लाई किया जाता है। लॉकडाउन की वजह से फूलों की खेती करने वाले किसानों का काफी नुकसान हुआ है। योगीराज बताते हैं कि एक बिस्वा जमीन पर गुलाब के फूलों की खेती करने पर पांच हज़ार रुपये का खर्च आता है, गुलाब के फूलों की खेती करना काफी महंगा है, लॉकडाउन में बंद होने की वजह से गुलाब के फूल पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं।

योगी राज कहते हैं कि नवरात्र का सीजन आया और चला गया, इस दौरान फूलों की काफी बिक्री होती है, किसान पूरी तरह तैयारी किए हुए थे लेकिन सबकुछ तबाह हो गया। योगीराज बताते हैं कि, 'वाराणसी में फूलों का सालाना कारोबार लगभग दस करोड़ रुपये से ऊपर का है, लेकिन कोरोना वायरस की वजह से फूलों के किसान का ना सिर्फ खेती तबाह हुआ है बल्कि उनका व्यवसाय भी चौपट हो गया है।'

UttarPradesh
varanasi
Lockdown
Coronavirus
Lockdown crisis
farmer crises
farmer
Flower crops
yogi sarkar
Yogi Adityanath
फूलों की फसल

Related Stories

कार्टून क्लिक: किसानों की दुर्दशा बताने को क्या अब भी फ़िल्म की ज़रूरत है!

मनरेगा मज़दूरों के मेहनताने पर आख़िर कौन डाल रहा है डाका?

ब्लैक राइस की खेती से तबाह चंदौली के किसानों के ज़ख़्म पर बार-बार क्यों नमक छिड़क रहे मोदी?

ग्राउंड रिपोर्ट: किसानों के सामने ही ख़ाक हो गई उनकी मेहनत, उनकी फसलें, प्रशासन से नहीं मिल पाई पर्याप्त मदद

ग़ौरतलब: किसानों को आंदोलन और परिवर्तनकामी राजनीति दोनों को ही साधना होगा

यूपी चुनाव: पूर्वी क्षेत्र में विकल्पों की तलाश में दलित

बनारस की जंग—चिरईगांव का रंज : चुनाव में कहां गुम हो गया किसानों-बाग़बानों की आय दोगुना करने का भाजपाई एजेंडा!

यूपी: महामारी ने बुनकरों किया तबाह, छिने रोज़गार, सरकार से नहीं मिली कोई मदद! 

यूपी चुनावों को लेकर चूड़ी बनाने वालों में क्यों नहीं है उत्साह!

यूपीः योगी सरकार में मनरेगा मज़दूर रहे बेहाल


बाकी खबरें

  • kisan
    न्यूज़क्लिक टीम
    किसानों ने देश को संघर्ष करना सिखाया - अशोक धवले
    25 Dec 2021
    किसान आंदोलन ने इस देश के मजदूरों और किसानों को नई हिम्मत दी है। ऑल इंडिया किसान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक धवले ने न्यूज़क्लिक के साथ ख़ास बातचीत में कहा कि आंदोलन के कामयाब होने की बुनियादी शर्त…
  • yogi
    अजय कुमार
    योगी सरकार का काम सांप्रदायिकता का ज़हर फैलाना है या नौजवानों को बेरोज़गार रखना?
    25 Dec 2021
    उत्तर प्रदेश का चुनावी माहौल हिंदू-मुस्लिम धार पर बर्बाद करने की कोशिश की जा रही है। तो आइए इस नफ़रत के माहौल को काटते हुए उत्तर प्रदेश की बेरोज़गारी पर बात करते हैं।
  • manipur
    शशि शेखर
    मणिपुर : ड्रग्स का कनेक्शन, भाजपा और इलेक्शन
    25 Dec 2021
    मणिपुर में ड्रग कार्टेल और भाजपा नेताओं की उसमे संलिप्तता की कई खबरें आ चुकी हैं। टेररिस्ट संगठन से लिंक के आरोपी, थोनाजाम श्याम कुमार सिंह, 2017 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते हैं। विधायकी की…
  • up
    सत्येन्द्र सार्थक
    यूपी चुनाव 2022: पूर्वांचल में इस बार नहीं हैं 2017 वाले हालात
    25 Dec 2021
    पूर्वांचल ख़ासकर गोरखपुर में सभी प्रमुख पार्टियां अपनी जीत का दावा कर रही हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में गोरखपुर ज़िले की 9 सीटों में से 8 पर भाजपा ने जीत हासिल की थी, लेकिन जानकारों का मानना है कि…
  • bhasha singh
    भाषा सिंह
    बात बोलेगी : दरअसल, वे गृह युद्ध में झोंकना चाहते हैं देश को
    24 Dec 2021
    हरिद्वार में 17 से 19 दिसंबर 2021 तक चली बैठक को धर्म संसद का नाम देने वाले वे सारे उन्मादी मारने-काटने की बात करने वाले, ख़ुद को स्वामी और साध्वी कहलाने वाले शख़्स दरअसल समाज को उग्र हिंदु राष्ट्र के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License