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वेनेज़ुएला की नव निर्वाचित संसद का गठन
नए कांग्रेस का गठन अमेरिकी साम्राज्यवाद के प्रति इस निकाय के समर्पण और साइमन बोलिवर और ह्यूगो चावेज़ की क्रांतिकारी विरासत की वापसी को दर्शाता है।
पीपल्स डिस्पैच
06 Jan 2021
वेनेज़ुएला

वेनेजुएला की नई नेशनल एसेंबली (एएन) का गठन आधिकारिक तौर पर 5 जनवरी को हो गया। इस विधायिका का हालिया गठन अमेरिकी साम्राज्यवाद के प्रति अधीनता की समाप्ति और क्रांतिकारी नेताओं लिबरेटर सिमोन बोलिवर और कमांडर ह्यूगो शावेज की विरासत की वापसी को दर्शाता है।

सत्तारूढ़ यूनाइटेड सोशलिस्ट पार्टी ऑफ वेनेजुएला (पीएसयूवी) और चविस्टा के अन्य समर्थकों के नेतृत्व में ग्रेट पैट्रियटिक पोल (जीपीपी) के पास 2021-2026 के कार्यकाल के लिए निर्वाचित नई नेशनल एसेंबली के लिए बहुमत हासिल है। जीपीपी ने 6 दिसंबर 2020 को हुए संसदीय चुनावों में शानदार जीत हासिल की और देश की एक सदन वाली संसद में 277 सीटों में से 257 सीटें हासिल कीं।

नए कांग्रेस के प्रारंभ के साथ वेनेजुएला के लोग अपनी संसद और विधायी स्वतंत्रता को पुनः प्राप्त करेंगे। पिछले पांच वर्षों से दक्षिणपंथी पार्टियों के प्रभुत्व के चलते समाजवादी राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को उखाड़ फेंकने के प्रयासों में इस विधायी संस्था को एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया गया था।

शपथ ग्रहण समारोह राजधानी काराकास में सुबह 11 बजे शुरू हुआ और नेशनल एसेंबली के मुख्यालय में आयोजित किया गया। इस दौरान COVID-19 को लेकर सभी स्वच्छता नियमों का पालन किया गया। दुनिया भर के राष्ट्रपति और राष्ट्राध्यक्ष इस समारोह में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में लैटिन अमेरिका के विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

2015 में बोलिवर और चावेज़ के चित्रों को हटाने के बाद इस समारोह से पहले संसद के हेमीसाइकल में इन चित्रों को फिर लगाया गया। 2015 के चुनावों में दक्षिणपंथी ताकतों की जीत के बाद इन चित्रों को हटा दिया गया था।

नई गठित नेशनल एसेंबली को देश में आर्थिक, संस्थागत, राजनीतिक और सामाजिक स्थिरता की बहाली जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। इसके पास मसौदा तैयार करने और कानून बनाने की एक बड़ी जिम्मेदारी है जिसे संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर लगाए गए कई एकतरफा कठोर नियमों से उत्पन्न आर्थिक संकट का सामना करना पर सकता है।

राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने 4 जनवरी को एक बैठक में जीपीपी के नवनिर्वाचित साथियों से देश की अर्थव्यवस्था में समावेश, राजनीतिक संवाद, सामंजस्य और सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करने को कहा।

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