NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
त्रिपुरा हिंसा के पीड़ितों ने आगज़नी में हुए नुकसान के लिए मिले मुआवज़े को बताया अपर्याप्त
प्रशासन ने पहले तो किसी भी हिंसा से इंकार कर दिया था, लेकिन ग्राउंड से ख़बरें आने के बाद त्रिपुरा सरकार ने पीड़ितों को मुआवज़ा देने की घोषणा की थी। हालांकि, घटना के तीन महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी पीड़ितों को बहुत कम मुआवज़ा मिला है, जिसे लेकर सवाल उठ रहे हैं।
मसीहुज़्ज़मा अंसारी
25 Jan 2022
Victims of Tripura

नई दिल्ली: अक्टूबर 2021 को बांग्लादेश में दुर्गा पूजा के समय हुई एक घटना को आधार बनाकर भारत के उत्तर पुर्वी राज्य त्रिपुरा में हिंदुत्वादी संगठनों ने एक हफ्ते तक उत्पात मचाया और मुसलमानों की दुकानों, मस्जिदों और घरों को निशाना बनाया था। एक हफ्ते तक चली इस हिंसा के आखरी दिन 26 अक्टूबर को नॉर्थ त्रिपुरा के रोवा पानीसागर में मुसलमानों की 8 दुकानों को आग के हवाले कर दिया गया था। इस हिंसा के लिए कथित रूप से विश्व हिंदू परिषद और बजरंगदल को ज़िम्मेदार ठहराया गयाथा।

त्रिपुरा के रोवा पानीसागर में 26 अक्टूबर को हिंदुत्ववादी संगठनों द्वारा जलाई गई मुसलमानों की आठ दुकानें आमिर हुसैन, आमिरुद्दीन, निज़ामुद्दीन, सनोफर, यूसुफ अली, जमालुद्दीन, मोहम्मद अली और सुल्तान हुसैन की थीं जो आगज़नी में पूरी तरह जल गईं थीं।

प्रशासन ने पहले तो किसी भी हिंसा से इंकार किया था, लेकिन ग्राउंड से ख़बरें आने के बाद त्रिपुरा सरकार ने पीड़ितों को मुआवज़ा देने की घोषणा की थी। हालांकि, घटना के तीन महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी पीड़ितों को बहुत कम मुआवज़ा मिला है, जिसे लेकर सवाल उठ रहे हैं।

पीड़ितों को मिलने वाले मुआवज़े में आमिर को 26,000, अमिरुद्दीन को 20,000, निज़ामुद्दीन को 85,000, सनोहर को 90,000, सनोफर को 30,000, यूसुफ को 36,000, मोहम्मद अली को 20,000 रुपये और सुल्तान को 30,000 रुपये मिला है।

हालांकि, पीड़ितों को हिंसा में जलाई गई दुकानों में लाखों का नुकसान हुआ था। आमिर की इलेक्ट्रिक सामानों की दुकान थी, उन्हें 12 लाख का नुकसान हुआ था। आमिरुद्दीन की राशन की दुकान थी, जिनका 15 लाख का नुकसान हुआ, निज़ामुद्दीन की कॉस्मेटिक और मोबाइल की दुकान थी, जिनका 10 लाख का नुकसान हुआ था।

सनोफर और सनोहर की  कपड़े, जूते और स्कूल बैग की दुकान थी जिनका 15 लाख का नुकसान हुआ। यूसुफ अली की राशन की दुकान थी, उन्हें 15 लाख का नुकसान हुआ है। जमालुद्दीन की फोटोकॉपी की दुकान जल गई जिसमें 7 लाख का नुकसान हुआ। मोहम्मद अली की जूते, कपड़े और कॉस्मेटिक्स की दुकान थी, जिनका 5 लाख का नुकसान हुआ और सुल्तान हुसैन की फोटोकॉपी की दुकान थी, जिनका 3 लाख का नुकसान हुआ है।

हालांकि मुआवज़े की रकम पीड़ितों को दोबारा अपनी दुकान शुरू करने के लिए नाकाफी है।

मोहम्मद अली का 5 लाख रुपये का नुकसान हुआ था। उन्होंने बताया कि, "सरकार ने अब तक मात्र 30 हज़ार रुपये मुआवज़ा दिया है। हमने और मुआवज़े की बात की तो अधिकारियों ने कहा कि सरकार ने इतना ही पैसा दिया है।"

उन्होंने कहा, "इतने पैसों में तो एक सामान भी नहीं आएगा, फिर हम दुकान कैसे शुरू कर सकते हैं?"

हिंसा में पनीसागर के आमिर हुसैन की भी दुकान जला दी गई थी। इनकी फोटो काफी और इलेक्ट्रिक सामानों की दुकान थी। आमिर का 12 लाख का नुकसान हुआ था, हालांकि मुआवज़े के नाम पर सरकार से 26 हज़ार रुपये ही मिले हैं।

आमिर कहते हैं कि, "मैंने किसी तरह से कुछ लोगों से पैसा लेकर दुकान को दुबारा शुरू करने की कोशिश की है, लेकिन इतने पैसों में दुकान के सामान नहीं खरीदे जा सकते हैं इसलिए सरकार को हमें और मुआवज़ा देना चाहिए।"

एक और पीड़ित मोहम्मद अली हैं जिनकी कपड़े, जूते और किताबों की दुकान थी। हिंसा में दुकान को जला दिया गया था, जिसमें इनको 5 लाख का नुकसान हुआ था।

मोहम्मद अली कहते हैं, "हमें 20 हज़ार रूपये ही मुआवज़ा मिला है। हम इतने रुपयों में दुकान का मलबा भी साफ नहीं कर सकते, दुकान कैसे शुरू करेंगे?"

इस सवाल पर कि मुआवज़े की पूरी रक़म क्यों नहीं दी गई, अली कहते हैं, "हमने तो सरकार से कई बार कहा कि मुआवज़ा बहुत कम है, लेकिन अधिकारियों ने कहा कि सरकार के द्वारा इतनी ही रक़म दी गई है।"

पानीसागर के एसडीएम रजत पंत से जब मुआवज़े की रक़म को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि, “मुआवज़े की रक़म वितरित करने से पहले आगज़नी की घटना में पीड़ितों को हुए नुकसान का अनुमान लगाया गया जिसके बाद ही मुआवज़े की राशि निर्धारित की गई।"

उन्होंने कहा, "पीड़ितों को हुए नुकसान के अनुसार ही मुआवज़ा दिया गया है।”

जब पानीसागर के एसडीएम रजत पंत से मुआवज़े पर पीड़ितों के आरोप पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, “पीड़ितों को निर्धारित प्रकिया के तहत ही मुआवज़ा दिया गया है, फिर भी कोई पीड़ित मुआवज़े को लेकर संतुष्ट नहीं है तो दोबारा एप्लीकेशन दे सकता है।”

मुआवज़े की रक़म के अलावा पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया कि, “असल आरोपियों को अभी तक पुलिस ने गिरफ्तार नहीं किया है। हम ने पुलिस को उन आरोपियों के नाम और पहचान बताई है जिन्हें हमने हिंसा में संलिप्त देखा था। हालांकि अभी तक उन आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की गई है।”

गौरतलब है कि उत्तर पूर्वी राज्य त्रिपुरा में पिछले वर्ष अक्तूबर 2021 में मुसलमानों की मस्जिदों, घरों और दुकानों को हिंदुत्ववादी संगठनों ने निशाना बनाया था। एक हफ्ते तक प्रदेश के कुछ हिस्सों में अराजकता का माहौल था। कथित रूप से 12 से अधिक मस्जिदों को नुकसान पहुंचाया गया। हालांकि राज्य सरकार मस्जिदों पर हमले की बात से इनकार करती रही, लेकिन बहुत से मीडियाकर्मी, अधिवक्ता और सामाजिक संगठनों ने ग्राउंड से हिंसा की खबरों की पुष्टि की थी।

कथित तौर पर बजरंगदल और विश्व हिंदू परिषद जैसे हिंदुत्ववादी संगठनों  पर हिंसा का आरोप लगा था। इन संगठनों पर आरोप था कि  इन्होंने बांग्लादेश में दुर्गा पूजा के समय हुई सांप्रदायिक घटना को आधार बनाकर त्रिपुरा में मुसलमानों की दुकानों और संपत्तियों को निशाना बनाया गया। हिंदुत्ववादी संगठनों ने मस्जिदों को जलाने के साथ-साथ पैगंबर मोहम्मद पर भी अपमानजनक टिप्पणी की थी, जिसे लेकर मुसलमानों में काफी रोष था।

इन हमलों को सुनियोजित बताया गया था जो एक हफ्ते तक जारी रहे।

पुलिस का दावा है कि आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, लेकिन पीड़ितों का आरोप है कि असल मुजरिम अभी तक गिरफ्तार नहीं किये गए हैं।

कैसे जलाई गईं दुकानें?

नॉर्थ त्रिपुरा में 26 अक्तूबर को पानीसागर रोवा में हिंदुत्वादी संगठनों का प्रदर्शन और भी उग्र हो गया। आरोप है कि विश्व हिंदू परिषद और बजरंगदल के कार्यकर्ताओं ने 8 हज़ार लोगों की रैली निकाल कर अल्पसंख्यक समुदाय से संबंध रखने वाले दुकानदारों की 8 दुकानों को पुलिस की मौजूदगी में जला दिया था।

आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी में दुकानों में तोड़फोड़ की गई, पेट्रोल डाला गया और फिर दुकानों को आग के हवाले कर दिया गया। पुलिस पूरे मामले में कथित रूप से मूकदर्शक बनी रही।

रोवा पानीसागर थाने के एएसआई उदयराम ने भी इन आरोपों की पुष्टि की थी। उन्होंने बातचीत में बताया था कि, “विश्व हिंदू परिषद की रैली में शामिल कार्यकर्ताओं द्वारा मुसलमानों की दुकानों को जलाया गया।”

सोशल मीडिया पर लिखने वालों को भी निशाना बनाया गया

त्रिपुरा हिंसा को लेकर सोशल मीडिया पर लिखने वालों, फैक्ट फाइंडिंग के लिए गए अधिवक्ताओं और ग्राउंड पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को निशाना बनाया गया था। 102 लोगों पर UAPA के तहत मामला दर्ज किया गया था और कुछ को नोटिस भी भेजा गया था। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट से सभी को राहत मिल गयी थी।

त्रिपुरा में अल्पसंख्यकों पर हुए इस सुनियोजित हमले ने देश और दुनियाभर का ध्यान आकर्षित किया था। हालांकि त्रिपुरा सरकार के रवैये में कोई तब्दीली देखने को नहीं मिली है।

घटना के तीन महीने से अधिक बीत जाने के बाद भी पीड़ितों को इंसाफ नहीं मिला है। मुआवज़े की पर्याप्त रक़म भी नहीं मिल सकी है और मुख्य आरोपियों पर अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

हम जानते हैं कि मुआवज़ा इंसाफ नहीं होता है, लेकिन फिर भी इंसाफ का एक हिस्सा ज़रूर होता है। सरकार जब तक पीड़ितों को हुए नुकसान की पर्याप्त क्षतिपूर्ति न कर दे और दोषियों पर कार्रवाई न करे, तब तक इंसाफ नहीं हो सकता है। जब सरकारें हिंसा के ऐसे मामलों पर त्वरित कार्रवाई करती हैं, तो भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होती है।

Tripura
Tripura Violence
Tripura violence and UAPA act
UAPA
Muslims
Tripura Government

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़

त्रिपुरा: सीपीआई(एम) उपचुनाव की तैयारियों में लगी, भाजपा को विश्वास सीएम बदलने से नहीं होगा नुकसान

पूर्वोत्तर के 40% से अधिक छात्रों को महामारी के दौरान पढ़ाई के लिए गैजेट उपलब्ध नहीं रहा

विशेष: कौन लौटाएगा अब्दुल सुब्हान के आठ साल, कौन लौटाएगा वो पहली सी ज़िंदगी

बिहार पीयूसीएल: ‘मस्जिद के ऊपर भगवा झंडा फहराने के लिए हिंदुत्व की ताकतें ज़िम्मेदार’

श्रृंगार गौरी के दर्शन-पूजन मामले को सुनियोजित रूप से ज्ञानवापी मस्जिद-मंदिर के विवाद में बदला गयाः सीपीएम

त्रिपुरा: बिप्लब देब के इस्तीफे से बीजेपी को फ़ायदा या नुक़सान?

दिल्ली दंगा : अदालत ने ख़ालिद की ज़मानत पर सुनवाई टाली, इमाम की याचिका पर पुलिस का रुख़ पूछा


बाकी खबरें

  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    यति नरसिंहानंद न्यायिक हिरासत में, उत्तराखंड बीजेपी में खलबली और अन्य ख़बरें
    17 Jan 2022
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी हरिद्वार धर्म संसद मामला, उत्तराखंड बीजेपी में चल रही हलचल और अन्य ख़बरों पर
  • poisonous liquor
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहारः पूर्ण शराबबंदी के बावजूद ज़हरीली शराब से जा रही लोगों की जानें
    17 Jan 2022
    "ज़हरीली शराब से हुई मौतों के प्रति सरकार व प्रशासन का रवैया असंवेदनशील व ग़ैर ज़िम्मेदाराना है। सत्ता के संरक्षण व पुलिस तंत्र के सहयोग से ज़िला में शराब का ग़ैरक़ानूनी तंत्र चल रहा है।"
  • akhilesh
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव:  बीजेपी को नहीं पचा अखिलेश का ‘अन्न संकल्प’
    17 Jan 2022
    सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने किसानों के वोट साधने के लिए अन्न संकल्प लिया है, और किसानों से कई वादे किए हैं। जिसके बाद बीजेपी भी अखिलेश यादव पर हमलावर हो गई।
  • Scenes from the Kashmir press club
    अनीस ज़रगर
    कश्मीर प्रेस क्लब पर जबरन क़ब्ज़े पर पत्रकारों की संस्थाओं ने जताई नाराज़गी और हैरानी
    17 Jan 2022
    केपीसी में “राज्य समर्थित” तख़्तापलट पर पत्रकारों द्वारा बड़े पैमाने पर आक्रोश जताया जा रहा है। इसे जम्मू-कश्मीर में स्वतंत्र अभिव्यक्ति और स्वतंत्र पत्रकारिता के दमन को तेज करने के लिए उठाया गया क़दम…
  • Dalit Movement
    महेश कुमार
    पड़ताल: पश्चिमी यूपी में दलितों के बीजेपी के ख़िलाफ़ वोट करने की है संभावना
    17 Jan 2022
    साल भर चले किसान आंदोलन ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनावी समीकरण बदल दिए हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License