NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
जॉर्डन में नए सदन के लिए कल मतदान होगा
130 सदस्यों वाले हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव के लिए चुनाव अभूतपूर्व आर्थिक और स्वास्थ्य संकट के बीच हो रहा है।
पीपल्स डिस्पैच
09 Nov 2020
जॉर्डन

जॉर्डन में मंगलवार 10 नवंबर को संसद के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव के सदस्यों का चुनाव करने के लिए मतदान होगा। किंग अब्दुल्ला द्वितीय द्वारा गत सितंबर में संसद भंग करने के बाद चुनाव कराने की आवश्यकता पड़ी।

जॉर्डन के क़ानून के अनुसार मौजूदा सदन के भंग होने के बाद चार महीने के भीतर चुनाव कराने की आवश्यकता होती है। सदन का कार्यकाल चार साल होता है।

लगभग 4.5 मिलियन पात्र मतदाता हैं जो नेशनल एसेंबली (मजलिस अल-उम्मा) नामक दो सदनों वाली संसद में 130 हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव (मजलिस अल-नुवाब) का चुनाव करने के लिए मतदान करेंगे। पहले सदन को सीनेट कहा जाता है। सीनेट या मजलिस अल-अयान में राजा द्वारा नियुक्त 65 सदस्य होते हैं।

294 लिस्ट में 1,670 से अधिक उम्मीदवार हैं। ये देश 23 चुनावी ज़िलों में विभाजित है। इन प्रतिनिधियों को इन 23 जिलों से ओपन लिस्ट प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेटिव के आधार पर चुना जाता है। 15 सीटें महिलाओं के लिए और 9 ईसाई और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित हैं।

COVID-19 से जुड़े प्रतिबंधों के कारण देश में प्रचार करना प्रतिबंधित था। अधिकांश उम्मीदवारों को सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के माध्यम से ऑनलाइन प्रचार करने के लिए मजबूर किया गया था।

हालांकि जॉर्डन की संसद को बहुत अधिक शक्ति प्राप्त नहीं है और राजा अंतिम शक्ति है। इसके सदस्य अपने मतदाताओं को महत्वपूर्ण सहायता और सेवाएं प्रदान करते हैं जो ज्यादातर जनजातीय संबंध और स्थानीय संपर्कों पर आधारित होते हैं।

COVID-19 के प्रकोप के कारण खासकर के देश के सामने आने वाली गंभीर आर्थिक चुनौतियों के बीच इस साल चुनाव कराया गया। इस प्रकोप ने यहां के पर्यटन उद्योग को बुरी तरह प्रभावित किया है। पर्यटन देश की जीडीपी में 14% से अधिक योगदान देता है। जॉर्डन बड़े पैमाने पर विदेशी सहायता पर आधारित अर्थव्यवस्था है। COVID के कारण सहायता भी प्रभावित होती है। देश में बेरोज़गारी दर 23% से अधिक है और आवश्यक वस्तुओं की क़ीमतें बढ़ रही हैं। देश में ग़रीबी दर में 16% की वृद्धि के साथ ग़रीबों की संख्या भी बढ़ रही है।

हालांकि देश में अधिकांश निर्वाचित प्रतिनिधि किसी समूह से संबद्ध नहीं हैं ऐसे में देश में प्रमुख राजनीतिक ब्लॉक इस्लामिक एक्शन फ्रंट ने लोगों के अधिकारों की रक्षा करने का वादा किया है, जबकि जॉर्डननियन कम्युनिस्ट पार्टी जिसे पिछले संसद में एक निर्वाचित प्रतिनिधि थे वह अन्य अन्य वाम दलों के साथ प्रगतिशील गठबंधन का गठन किया है और "जनता अधिकार का स्रोत है" के नारे और संसद के लिए अधिक शक्ति के एजेंडा के साथ चुनाव लड़ रहा है।

Jordan
House of Representatives
COVID-19
Jordan's Independent Election Commission

Related Stories

आर्थिक रिकवरी के वहम का शिकार है मोदी सरकार

महामारी के दौर में बंपर कमाई करती रहीं फार्मा, ऑयल और टेक्नोलोजी की कंपनियां

विश्व खाद्य संकट: कारण, इसके नतीजे और समाधान

महामारी में लोग झेल रहे थे दर्द, बंपर कमाई करती रहीं- फार्मा, ऑयल और टेक्नोलोजी की कंपनियां

कोविड मौतों पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट पर मोदी सरकार का रवैया चिंताजनक

महंगाई की मार मजदूरी कर पेट भरने वालों पर सबसे ज्यादा 

जनवादी साहित्य-संस्कृति सम्मेलन: वंचित तबकों की मुक्ति के लिए एक सांस्कृतिक हस्तक्षेप

कोरोना अपडेट: देश में एक हफ्ते बाद कोरोना के तीन हज़ार से कम मामले दर्ज किए गए

दिल्लीः एलएचएमसी अस्पताल पहुंचे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मंडाविया का ‘कोविड योद्धाओं’ ने किया विरोध

WHO और भारत सरकार की कोरोना रिपोर्ट में अंतर क्य़ों?


बाकी खबरें

  • अनिंदा डे
    मैक्रों की जीत ‘जोशीली’ नहीं रही, क्योंकि धुर-दक्षिणपंथियों ने की थी मज़बूत मोर्चाबंदी
    28 Apr 2022
    मरीन ले पेन को 2017 के चुनावों में मिले मतों में तीन मिलियन मत और जुड़ गए हैं, जो  दर्शाता है कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद धुर-दक्षिणपंथी फिर से सत्ता के कितने क़रीब आ गए थे।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली : नौकरी से निकाले गए कोरोना योद्धाओं ने किया प्रदर्शन, सरकार से कहा अपने बरसाये फूल वापस ले और उनकी नौकरी वापस दे
    28 Apr 2022
    महामारी के भयंकर प्रकोप के दौरान स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक सर्कुलर जारी कर 100 दिन की 'कोविड ड्यूटी' पूरा करने वाले कर्मचारियों को 'पक्की नौकरी' की बात कही थी। आज के प्रदर्शन में मौजूद सभी कर्मचारियों…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में आज 3 हज़ार से भी ज्यादा नए मामले सामने आए 
    28 Apr 2022
    देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 3,303 नए मामले सामने आए हैं | देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 0.04 फ़ीसदी यानी 16 हज़ार 980 हो गयी है।
  • aaj hi baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    न्यायिक हस्तक्षेप से रुड़की में धर्म संसद रद्द और जिग्नेश मेवानी पर केस दर केस
    28 Apr 2022
    न्यायपालिका संविधान और लोकतंत्र के पक्ष में जरूरी हस्तक्षेप करे तो लोकतंत्र पर मंडराते गंभीर खतरों से देश और उसके संविधान को बचाना कठिन नही है. माननीय सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कथित धर्म-संसदो के…
  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    जुलूस, लाउडस्पीकर और बुलडोज़र: एक कवि का बयान
    28 Apr 2022
    आजकल भारत की राजनीति में तीन ही विषय महत्वपूर्ण हैं, या कहें कि महत्वपूर्ण बना दिए गए हैं- जुलूस, लाउडस्पीकर और बुलडोज़र। रात-दिन इन्हीं की चर्चा है, प्राइम टाइम बहस है। इन तीनों पर ही मुकुल सरल ने…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License