NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
वर्धा विश्वविद्यालय : देशव्यापी विरोध के बाद छात्रों का निष्कासन रद्द, छात्रों ने कहा- हम चुप नहीं रहेंगे
छात्रों ने कहा कि हमारे निष्कासन की वापसी हुई है, देशहित के मुद्दे पर हम अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे। देश के सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को बेचा जाएगा, हम चुप नहीं रहेंगे। देश में मॉब लिंचिंग, बलात्कार बढ़ता रहेगा तो हम चुप कैसे रह सकते हैं?
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
14 Oct 2019
wardha university
विश्वविद्यालय द्वारा निष्कासन वापस लिए जाने के बाद विजयी मुद्रा में छात्र। 

महाराष्ट्र के वर्धा स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय (MGAHV) के निष्कासित बहुजन छात्रों का निष्कासन विश्वविद्यालय प्रशासन ने वापस ले लिया। निष्कासन वापसी के पश्चात निष्कासित बहुजन छात्र नेताओं ने बयान जारी कर कहा कि संघ बनाम संविधान और अन्याय बनाम न्याय की इस लड़ाई में हिंदी विश्वविद्यालय के निष्कासित बहुजन छात्रों की यह जीत संविधान और न्याय की जीत है।

लेकिन छात्रों ने प्रशासन की मंशा पर सवाल भी खड़े किये और कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने राष्ट्रव्यापी दबाव में फिलहाल तो हमारा निष्कासन वापस ले लिया है। किंतु विश्वविद्यालय प्रशासन हमें भविष्य में तरह-तरह से प्रताड़ित कर सकता है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता है।
ef723518-dd02-4058-bd71-e06cf7d9979c.jpg
छात्रों के निष्कासन के खिलाफ और छात्रों के समर्थन में देशव्यापी मुहीम चली। छात्रों ने इसके लिए सभी का शुक्रिया किया। छात्रों ने कहा इस लड़ाई में राष्ट्रव्यापी जनसमर्थन ने यह साबित कर दिया है कि देश का बहुमत संविधान, लोकतंत्र व न्याय के पक्ष में है।

जारी बयान में आगे कहा गया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने हम सबों को असामाजिक तत्व और न जाने क्या-क्या कहा। उन सबों ने भी हमारी लड़ाई के खिलाफ जमकर प्रोपेगेंडा करने की कोशिश की, किंतु आम जनता की शक्ति के आगे वे कामयाब नहीं हो पाए। बावजूद इसके उन्होंने भी अपने तरीके से इस लड़ाई को मजबूती प्रदान की है।

छात्र नेताओं ने हिंदी विश्वविद्यालय के सभी छात्र-छात्राओं और देशभर के छात्र-छात्राओं, बुद्धिजीवियों, राजनीतिक दलों के नेताओं, इलेक्ट्रॉनिक-प्रिंट व वेब मीडिया को आंदोलन का समर्थन करने के लिए आभार व्यक्त किया।

छात्र नेताओं ने कहा कि हमने जिन मुद्दों पर पीएम मोदी को पत्र लिखा है, उन मुद्दों को हम देश के वर्तमान-भविष्य के लिए बेहद जरूरी मुद्दा मानते हैं और आज भी हम उन मुद्दों पर संघर्ष के लिए प्रतिबद्ध हैं। इन मुद्दों पर हमारी लड़ाई आगे जारी रहेगी। हम अपने नायकों को भविष्य में भी याद करते रहेंगे और पीएम-सीएम चाहे कोई भी हो दमन की परवाह किए बगैर आम जनों से संबंधित सवाल पूछते रहेंगे! दलितों-अल्पसंख्यकों के मॉब लिंचिंग से देश का लोकतंत्र खतरे में है; रेलवे-रेलवे स्टेशन, बीपीसीएल, एयरपोर्ट आदि की बिक्री राष्ट्रहित में नहीं है।

बैंकों व रिजर्व बैंक की खास्ता हालत पर सरकार को ठोस कदम उठाना ही होगा। कश्मीर के नागरिकों के नागरिक अधिकार मिलने ही चाहिए; बलात्कार व यौन हिंसा की घटनाएं रुकनी ही चाहिए। दलित-आदिवासी नेताओं व मानवाधिकार कार्यकर्ताओं व लेखकों-बुद्धिजीवियों को प्रताड़ित किए जाने को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। इस किस्म के तमाम अन्याय-अत्याचार के खिलाफ देशहित के लिए हम आवाज बुलंद करते रहेंगे!

Wardha University
Nationwide Protest
Central University Mahatma Gandhi International Hindi University
minorities
mob lynching
Narendra modi
KASHMIR ISSUE

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

सिवनी मॉब लिंचिंग के खिलाफ सड़कों पर उतरे आदिवासी, गरमाई राजनीति, दाहोद में गरजे राहुल

मध्यप्रदेश: गौकशी के नाम पर आदिवासियों की हत्या का विरोध, पूरी तरह बंद रहा सिवनी

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी

झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!

दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को मिला व्यापक जनसमर्थन, मज़दूरों के साथ किसान-छात्र-महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन

देशव्यापी हड़ताल का दूसरा दिन, जगह-जगह धरना-प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • राज वाल्मीकि
    अब साहित्य का दक्षिण टोला बनाने की एक कोशिश हो रही है: जयप्रकाश कर्दम
    13 Feb 2022
    इतवार विशेष: दलित साहित्य और दलित लेखकों के साथ भेदभाव हो रहा है जैसे गांव में होता है न, दलित बस्ती दक्षिण टोला। दलित साहित्य को भी यह मान लीजिए कि यह एक दक्षिण टोला है। इस तरह वे लोग दलित साहित्य…
  • Saharanpur
    शंभूनाथ शुक्ल
    यूपी चुनाव 2022: शांति का प्रहरी बनता रहा है सहारनपुर
    13 Feb 2022
    बीजेपी की असली परीक्षा दूसरे चरण में हैं, जहां सोमवार, 14 फरवरी को वोट पड़ेंगे। दूसरे चरण में वोटिंग सहारनपुर, बिजनौर, अमरोहा, संभल, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, बदायूँ, शाहजहांपुर ज़िलों की विधानसभा…
  • Uttarakhand
    कृष्ण सिंह
    चुनाव 2022: उत्तराखंड में दलितों के मुद्दे हाशिये पर क्यों रहते हैं?
    13 Feb 2022
    अलग उत्तराखंड राज्य बनने के बाद भी दलित समाज के अस्तित्व से जुड़े सवाल कभी भी मुख्यधारा के राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक प्रश्न नहीं रहे हैं। पहाड़ी जिलों में तो दलितों की स्थिति और भी…
  • Modi
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: अगर आरएसएस न होता...अगर बीजेपी नहीं होती
    13 Feb 2022
    "...ये तो अंग्रेजों की चापलूसी में लगे थे। कह रहे थे, अभी न जाओ छोड़ कर, कि दिल अभी भरा नहीं"
  • election
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: चुनाव आयोग की साख पर इतना गंभीर सवाल!
    13 Feb 2022
    हर हफ़्ते की कुछ खबरें और उनकी बारिकियाँ बड़ी खबरों के पीछे छूट जाती हैं। वरिष्ठ पत्रकार जैन हफ़्ते की इन्हीं कुछ खबरों के बारे में बता रहे हैं। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License