NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
लीबिया के युद्धरत गुटों ने चुनाव कराने के लिए समझौता किया
ट्यूनिस और लीबियाई शहर सिर्ते में बातचीत से उत्तर अफ्रीकी देश में शांति और स्थिरता हासिल होने की उम्मीद बढ़ी है।
पीपल्स डिस्पैच
12 Nov 2020
लीबिया

लीबिया के कई प्रतिद्वंद्वी गुटों ने अगले 18 महीनों के भीतर युद्धग्रस्त देश में राष्ट्रीय चुनाव कराने के लिए एक प्रमुख समझौते को बुधवार 11 नवंबर को अंजाम दिया है। कई मीडिया रिपोर्ट में ये सामने आई है। युद्धरत पक्षों द्वारा किए गए इस 'प्रारंभिक' समझौता ने देश के लिए 'स्वतंत्र, निष्पक्ष, विश्वसनीय और समावेशी संसदीय और राष्ट्रपति चुनाव' के लिए एक रोडमैप तैयार किया है।

संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में ट्यूनीशिया की राजधानी ट्यूनिस में बातचीत हुई और जिसके परिणाम स्वरूप ये युद्धविराम समझौता हुआ जो इस साल अक्टूबर में दो मुख्य लीबियाई गुटों द्वारा किया गया था। इन दो गुटों में त्रिपोली के बाहर स्थित गवर्नमेंट ऑफ नेशनल अकॉर्ड (जीएनए) और विद्रोही जनरल खलीफा हफ्तार के नेतृत्व में लिबियन नेशनल आर्मी के गठबंधन वाले टोब्रुक में स्थित पूर्वी सरकार के बीच हुई थी।

संयुक्त राष्ट्र ने लीबिया के हितधारकों द्वारा किए गए इस समझौते का स्वागत किया। लीबिया में संयुक्त राष्ट्र के दूत स्टेफनी विलियम्स ने कहा कि "यह वास्तविक शक्ति है और हमें इस पर ध्यान केंद्रित करने और प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।" आगे कहा कि इस वार्ता में तेजी से प्रगति होनी चाहिए ताकि संबंधित पक्षों के साथ-साथ लीबिया के लोगों में जल्द से जल्द विश्वास पैदा करने के लिए राष्ट्रीय चुनाव हो। उन्होंने यह भी कहा कि ये गुट महत्वपूर्ण लीबिया संस्थानों को विलय करने और अंततः सभी इकट्ठा करने के लिए करने के लिए सहमत हो गए हैं।

वर्तमान में चल रही वार्ताएं चुनावों से पहले के महीनों में अंतरिम, एकजुट, संक्रमणकालीन सरकार बनाने की कोशिश करेंगी।

सोमवार को शुरू हुई बातचीत में लीबिया के 75 भागीदार शामिल हुए जिसे यून द्वारा लीबिया में वर्तमान में सक्रिय विभिन्न स्थानीय सशस्त्र समूहों और राजनीतिक इकाईयों का प्रतिनिधित्व करने के लिए चयन किया गया और बुलाया गया। ये बातचीत जीएनए और एलएनए के बीच लीबिया के सिर्ते शहर में भी हो रही थी जिसमें देश में प्रमुख लड़ाई और हिंसा के क्षेत्रों से सशस्त्र सैनिकों की म्यूचुअल वापसी की निगरानी के लिए एक संयुक्त सैन्य आयोग की स्थापना शामिल है।

लीबिया के पूर्व नेता मुअम्मर गद्दाफी की हत्या और 2011 में नाटो के नेतृत्व वाले आक्रमण के जरिए 2011 में उनके शासन को उखाड़ फेंकने के बाद से लीबिया पिछले नौ सालों से भीषण और खूनी गृहयुद्ध में उलझ गया है।

libya
Libya Election
Tunisia
United nations

Related Stories

जलवायु परिवर्तन : हम मुनाफ़े के लिए ज़िंदगी कुर्बान कर रहे हैं

अब ट्यूनीशिया के लोकतंत्र को कौन बचाएगा?

अफ़्रीकी देश अपनी मुद्रायें यूरोप से क्यों छपवाते हैं

क्या यूक्रेन मामले में CSTO की एंट्री कराएगा रूस? क्या हैं संभावनाएँ?

पुतिन को ‘दुष्ट' ठहराने के पश्चिमी दुराग्रह से किसी का भला नहीं होगा

रूस-यूक्रेन युद्ध अपडेट: संयुक्त राष्ट्र ने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद इसे यूरोप का सबसे बड़ा शरणार्थी संकट बताया 

यह वक्त रूसी सैन्य गठबंधन को गंभीरता से लेने का क्यों है?

ट्यूनीशिया: पहली डिजिटल राजनीतिक सुझाव प्रक्रिया पर लोगों में मत-विभाजन

141 दिनों की भूख हड़ताल के बाद हिशाम अबू हव्वाश की रिहाई के लिए इज़रायली अधिकारी तैयार

मानवाधिकार संगठनों ने कश्मीरी एक्टिविस्ट ख़ुर्रम परवेज़ की तत्काल रिहाई की मांग की


बाकी खबरें

  • RELIGIOUS DEATH
    श्रुति एमडी
    तमिलनाडु : किशोरी की मौत के बाद फिर उठी धर्मांतरण विरोधी क़ानून की आवाज़
    27 Jan 2022
    कथित रूप से 'जबरन धर्मांतरण' के बाद एक किशोरी की हालिया खुदकुशी और इसके ख़िलाफ़ दक्षिणपंथी संगठनों की प्रतिक्रिया ने राज्य में धर्मांतरण विरोधी क़ानून की मांग को फिर से केंद्र में ला दिया है।
  • cb
    वर्षा सिंह
    उत्तराखंड चुनाव: ‘बीजेपी-कांग्रेस दोनों को पता है कि विकल्प तो हम दो ही हैं’
    27 Jan 2022
    उत्तर प्रदेश से अलग होने के बाद उत्तराखंड में 2000, 2007 और 2017 में भाजपा सत्ता में आई। जबकि 2002 और 2012 के चुनाव में कांग्रेस ने सरकार बनाई। भाजपा और कांग्रेस ही बारी-बारी से यहां शासन करते आ रहे…
  •  नौकरी दो! प्राइम टाइम पर नफरती प्रचार नहीं !
    न्यूज़क्लिक प्रोडक्शन
    नौकरी दो! प्राइम टाइम पर नफरती प्रचार नहीं !
    27 Jan 2022
    आज के एपिसोड में अभिसार शर्मा बात कर रहे हैं रेलवे परीक्षा में हुई धांधली पर चल रहे आंदोलन की। क्या हैं छात्रों के मुद्दे और क्यों चल रहा है ये आंदोलन, आइये जानते हैं अभिसार से
  • सोनिया यादव
    यूपी: महिला वोटरों की ज़िंदगी कितनी बदली और इस बार उनके लिए नया क्या है?
    27 Jan 2022
    प्रदेश में महिलाओं का उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीतने का औसत भले ही कम रहा हो, लेकिन आधी आबादी चुनाव जिताने का पूरा मददा जरूर रखती है। और शायद यही वजह है कि चुनाव से पहले सभी पार्टियां उन्हें लुभाने…
  • यूपी चुनाव:  उन्नाव पीड़िता की मां के बाद अब सोनभद्र की ‘किस्मत’ भी कांग्रेस के साथ!
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव: उन्नाव पीड़िता की मां के बाद अब सोनभद्र की ‘किस्मत’ भी कांग्रेस के साथ!
    27 Jan 2022
    यूपी में महिला उम्मीदवारों के लिए प्रियंका गांधी की तलाश लगातार जारी है, प्रियंका गांधी ने पहले उन्नाव रेप पीड़िता की मां पर दांव लगाया था, और अब वो सोनभद्र नरसंहार में अपने भाई को खो चुकी महिला को…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License