NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कृषि
भारत
राजनीति
पश्चिम बंगाल: आलू की फ़सल के लिए एमएसपी की मांग को लेकर हुगली के किसानों का धरना
किसानों ने मांग की है कि न्यूनतम दर 600 रुपये प्रति 50 किलोग्राम निर्धारित की जाए क्योंकि पहले वाली दर उस उत्पादन लागत को भी पूरा नहीं कर पा रही है जिसमें ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई है।
संदीप चक्रवर्ती
11 Mar 2021
आलू
प्रतीकात्मक फ़ोटो। साभार: द हिंदू

कोलकाता। हुगली जिले के तारकेश्वर ब्लॉक के चंपादंगा गांव में सोमवार को किसान यूनियनों और पश्चिम बंगाल किसान कांग्रेस के आह्वान पर सैकड़ों आलू उत्पादक किसान धरने पर बैठ गये। उनकी मांग थी कि राज्य सरकार उनकी उपज को लेकर 1, 200 रुपये प्रति क्विंटल का एक "तर्कसंगत और न्यायसंगत" न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) निर्धारित करे।

किसानों ने इस हक़ीक़त पर रोशनी डालते हुए कहा कि 2010 में जब बाजार में उतार-चढ़ाव के चलते आलू की कीमतें लुढ़क गयी थीं, तो तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार ने 700 करोड़ रुपये ख़र्च करके आलू ख़रीदा था और किसानों को राहत पहुंचाई थी। उन्होंने इसके अलावा,  इस बात की मांग की कि फ़सल बीमा के लिए बीमा प्रीमियम का भुगतान सरकार की तरफ़ से की जाये और फ़सल बीमा के भुगतान करने के फ़ैसले से पहले उनकी हालत को ध्यान में रखा जाए।

अखिल भारतीय किसान सभा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष, संजय पुतुंड और एआईकेएस के सचिव, अमल हलदर सहित कई किसान नेताओं ने इस बैठक में अपनी बातें रखीं।

पुतुंड ने अपने भाषण में कहा कि आलू राज्य की सबसे अहम नक़दी फ़सलों में से एक है और पश्चिम बंगाल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य, दोनों ही सरकारें किसानों की समस्याओं को लेकर उदासीन हैं।

ग़ौरतलब है कि आलू उत्पादकों को 7, 000 रुपये प्रति बीघा की दर से नुकसान इसलिए उठाना पड़ रहा है  क्योंकि आलू का बाज़ार मूल्य गिर गया है। राज्य का बाज़ार मूल्य भारी उतार-चढ़ाव का शिकार है और इस मूल्य अस्थिरता के शिकार आलू किसान राज्य में अपनी उपज को एक या दो रुपये प्रति किलोग्राम की दर पर बेचने के लिए मजबूर किये जाते हैं। इतने सस्ते में अपने उत्पाद बेच देने के बाद बिचौलिए ख़रीदे गये इस आलू को कोल्ड स्टोरेज में डाल देते हैं। क़ीमतें बढ़ने पर ये बिचौलिये मुनाफ़ा कमाते हैं। इस साल अच्छी फ़सल होने के बावजूद किसानों को नुकसान पहुंचा है।

हलदर ने दिल्ली के बॉर्डर पर कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ किसानों के उस आंदोलन का ज़िक़्र किया, जिसने केंद्र से लड़ाई ठानी हुई है। यह ज़िक़ करते हुए कि "हर क़ीमत पर इस आंदोलन को तोड़ने" की कोशिश कर रही सरकार के ख़िलाफ़ "अन्नदाता" ने इस लड़ाई को बख़ूबी लड़ा है, किसानों ने अब तक अपने ख़िलाफ़ हो रही सभी तरह की "साज़िशों" को नाकाम किया है और समुदायों के बीच सौहार्द की भावना पैदा करके एक मिसाल पेश कर दी है।

उन्होंने यह भी कहा,  ‘त्रिपुरा जैसे राज्यों में जहां भाजपा सत्ता में है,  वहां उसने “पूरी लोकतांत्रिक प्रणाली” को ही हड़प लिया है। हमारे राज्य में भाजपा और उसके दल-बल, टीएमसी को भी हराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसान नेता पश्चिम बंगाल में आ रहे हैं और कोलकाता के रामलीला मैदान में किसानों को संबोधित करेंगे।

राज्य में आलू किसानों की स्थिति पर माकपा के पूर्व विधायक और एआईकेएस के ज़िला सचिव,  भक्तराम पान ने कहा कि इस साल आलू की उत्पादन लागत कई गुना बढ़ गयी है और प्रति पचास किलो आलू की क़ीमत 600 रुपये ही एकलौता उपाय है, जिससे किसानों को उनके भारी नुक़सान से बचाया जा सकता है।

इस समय किसानों को जो मूल्य मिल रहा है, वह 350 रुपये से 380 रुपये प्रति 50 किलोग्राम है और राज्य सरकार ने कोल्ड स्टोरेज मालिकों को उपज ख़रीदने और स्टोर करने के लिए निर्धारित दर के रूप में 300 रुपये प्रति 50 किलोग्राम की क़ीमत घोषित की है।

आलू तीन तरह से बाज़ार में पहुंचता है। उपज के एक हिस्से का संग्रह किसान ख़ुद करता है, एक हिस्सा का भंडारण बिचौलिये करते हैं (जो अब इसे 350 रुपये से 380 रुपये में ख़रीद रहे हैं) और एक हिस्सा कोल्ड स्टोरेज मालिकों द्वारा किसानों से 300 रुपये में ख़रीदा जाता है। जब नतून आलू (नया आलू) का स्टॉक ख़त्म हो जाता है, तब जाकर कोल्ड स्टोरेज के मालिक अपने भंडारित आलू को बाज़ार के उताड़-चढ़ाव के हवाले कर देते हैं।

किसानों ने मांग की है कि न्यूनतम दर 600 रुपये प्रति 50 किलोग्राम निर्धारित की जाये, क्योंकि पहले वाली दर उस उत्पादन लागत को भी पूरा नहीं कर पा रही है, जिसमें  ज़बरदस्त बढ़ोत्तरी हुई है।

पश्चिम बंगाल उत्तर प्रदेश के बाद देश के सबसे ज़्यादा आलू उगाने वाले राज्यों में से एक है और यह वाम मोर्चा सरकार के शासन के दौरान इस मामले में अग्रणी राज्य हुआ करता था। हुगली ज़िला राज्य के आलू उत्पादन का केंद्र है और राज्य की कुल आलू की खेती में इसका 40% से ज़्यादा का योगदान है और यह अपनी उच्च गुणवत्ता वाली चंद्रमुखी क़िस्म के लिए मशहूर है। इस ज़िले के 60, 000 से ज़्यादा किसान अपनी रोज़-ब-रोज़ की ज़रूरत को पूरा करने को लेकर इसी आलू की खेती पर निर्भर हैं।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

West Bengal: Farmers’ Sit on Dharna in Hooghly Demanding MSP for Potato Crop

farmers protest
West Bengal Farmers
Hooghly Farmers Protests
Farm Laws
AIKS
potato farmers
Potato farming
MSP

Related Stories

किसानों और सत्ता-प्रतिष्ठान के बीच जंग जारी है

अगर फ़्लाइट, कैब और ट्रेन का किराया डायनामिक हो सकता है, तो फिर खेती की एमएसपी डायनामिक क्यों नहीं हो सकती?

युद्ध, खाद्यान्न और औपनिवेशीकरण

किसान-आंदोलन के पुनर्जीवन की तैयारियां तेज़

MSP पर लड़ने के सिवा किसानों के पास रास्ता ही क्या है?

किसान आंदोलन: मुस्तैदी से करनी होगी अपनी 'जीत' की रक्षा

बिहार: कोल्ड स्टोरेज के अभाव में कम कीमत पर फसल बेचने को मजबूर आलू किसान

सावधान: यूं ही नहीं जारी की है अनिल घनवट ने 'कृषि सुधार' के लिए 'सुप्रीम कमेटी' की रिपोर्ट 

ग़ौरतलब: किसानों को आंदोलन और परिवर्तनकामी राजनीति दोनों को ही साधना होगा

बंगाल: बीरभूम के किसानों की ज़मीन हड़पने के ख़िलाफ़ साथ आया SKM, कहा- आजीविका छोड़ने के लिए मजबूर न किया जाए


बाकी खबरें

  • कैथरीन स्काएर, तारक गुईज़ानी, सौम्या मारजाउक
    अब ट्यूनीशिया के लोकतंत्र को कौन बचाएगा?
    30 Apr 2022
    ट्यूनीशिया के राष्ट्रपति धीरे-धीरे एक तख़्तापलट को अंजाम दे रहे हैं। कड़े संघर्ष के बाद हासिल किए गए लोकतांत्रिक अधिकारों को वे धीरे-धीरे ध्वस्त कर रहे हैं। अब जब ट्यूनीशिया की अर्थव्यवस्था खस्ता…
  • international news
    न्यूज़क्लिक टीम
    रूस-यूक्रैन संघर्षः जंग ही चाहते हैं जंगखोर और श्रीलंका में विरोध हुआ धारदार
    29 Apr 2022
    पड़ताल दुनिया भर की में वरिष्ठ पत्रकार ने पड़ोसी देश श्रीलंका को डुबोने वाली ताकतों-नीतियों के साथ-साथ दोषी सत्ता के खिलाफ छिड़े आंदोलन पर न्यूज़ क्लिक के प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ से चर्चा की।…
  • NEP
    न्यूज़क्लिक टीम
    नई शिक्षा नीति बनाने वालों को शिक्षा की समझ नहीं - अनिता रामपाल
    29 Apr 2022
    नई शिक्षा नीति के अंतर्गत उच्च शिक्षा में कार्यक्रमों का स्वरूप अब स्पष्ट हो चला है. ये साफ़ पता चल रहा है कि शिक्षा में ये बदलाव गरीब छात्रों के लिए हानिकारक है चाहे वो एक समान प्रवेश परीक्षा हो या…
  • abhisar sharma
    न्यूज़क्लिक टीम
    अगर सरकार की नीयत हो तो दंगे रोके जा सकते हैं !
    29 Apr 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के इस अंक में अभिसार बात कर रहे हैं कि अगर सरकार चाहे तो सांप्रदायिक तनाव को दूर कर एक बेहतर देश का निर्माण किया जा सकता है।
  • दीपक प्रकाश
    कॉमन एंट्रेंस टेस्ट से जितने लाभ नहीं, उतनी उसमें ख़ामियाँ हैं  
    29 Apr 2022
    यूजीसी कॉमन एंट्रेंस टेस्ट पर लगातार जोर दे रहा है, हालाँकि किसी भी हितधारक ने इसकी मांग नहीं की है। इस परीक्षा का मुख्य ज़ोर एनईपी 2020 की महत्ता को कमजोर करता है, रटंत-विद्या को बढ़ावा देता है और…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License