NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
क्या मायने हैं अखिल भारतीय हिंदू राष्ट्र अधिवेशन के?  
हिंदू जनजागृति समिति इस देश की प्रतिरोध की परंपरा और सांझी-संस्कृति की ताकत को कम करके आंक रही है। लेकिन, ये सच है कि हिंदुस्तान के लिए ये समय कठोर परीक्षा का रहने वाला है।
राज कुमार
14 Aug 2020
भारतीय हिंदू राष्ट्र
प्रतीकात्मक तस्वीर। साभार : अमर उजाला

राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण को एक नये भारत के उद्य के तौर पर देखा जा रहा है। इसे हिंदू राष्ट्र की तरफ प्रस्थान की तरह समझा जा रहा है। जबकि सच्चाई ये है कि ये शुरुआत बहुत पहले हो चुकी है। आरएसएस अपनी असंख्य छोटी-बड़ी संस्थाओं के जरिये लगातार इसमें सक्रिय है। अभी हाल ही में हिंदू जन जागृति संस्था ने नवम अखिल भारतीय हिंदू राष्ट्र अधिवेशन का आयोजन किया है। ये हिंदू राष्ट्र अधिवेशन 6-9 अगस्त 2020 को ऑनलाइन संपन्न हुआ है। इससे पहले ये गोवा में आयोजित होता रहा है।

हिंदू जन जागृति समिति, सनातन संस्था का ही एक घटक है। आगे बढ़ने से पहले एक बार इन दोनों संस्थाओं के बारे में कुछ जानकारी ले लेते हैं। क्योंकि ये वही संस्थाएं हैं जो गोविंद पनसरे, नरेंद्र दाभोलकर, एम एम कलबुर्गी और गौरी लंकेश की हत्या में आरोपित रही हैं। सनातन संस्था की स्थापना 1999 में डॉ. अठावले ने की। संस्था के उद्देश्य के खंड में साफतौर पर लिखा गया है कि हिंदू राष्ट्र का निर्माण करना इस संस्था का मुख्य उद्देश्य है। हिंदू जनजागृति समिति का गठन 2002 में किया गया। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य हिंदू राष्ट्र के निर्माण के लिए देश-विदेश के हिंदूओं और संस्थाओं को एक मंच पर लेकर आना है।

image 1_27.JPG

गौरतलब है कि पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या की जांच के लिए एक स्पेशल जांच टीम बनाई गई थी। टीम ने जांच शुरू की और 12 लोगों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ चार्जशीट पेश की थी। इनमें से पांच लोगों का संबंध सनातन संस्था और हिंदू जनजागृति समिति के साथ था। बाकी आरोपी हिंदू युवा सेना और श्रीराम सेना जैसे हिंदूवादी संस्थाओं से ही थे। एंटी टेरेरिस्ट स्क्वॉयड (ATS) के एक सदस्य ने ये भी बताया था कि हिंदू युवा सेना व श्रीराम सेना आदि सनातन संस्था के ही घटक हैं। गोविंद पनसरे और दाभोलकर की हत्या के संदर्भ में सीबीआई ने जो चार्जशीट पेश की थी उसमें भी सनातन संस्था के लोग शामिल थे। दाभोलकर, कलबुर्गी और गौरी लंकेश की हत्या की जांच के दौरान ही ये सामने आया था कि नाला सोपारा में विस्फोटकों के साथ पकड़े गये आरोपियों और इन तीनों हत्याओं में शामिल आरोपियों में कनेक्शन है।

गोवा में 2009 में हुए बम विस्फोट के पीछे सनातन संस्था थी। सनातन संस्था और इसके अन्य हिंदूवादी घटकों के नाम हत्याओं से लेकर बम विस्फोट तक में सामने आए हैं। परिणामस्वरूप सनातन संस्था को बैन करने की मांग भी लगातार उठती रही है। बम विस्फोट के समय गोवा में मांग उठी थी कि सनातन संस्था को बैन किया जाए। इसके कुछ वर्ष बाद भी गोवा, महाराष्ट्र और कर्नाटक ने सनातन संस्था को बैन करने के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजे थे। हत्याओं में फिर से संस्था का नाम शामिल होने के बाद महाराष्ट्र की सरकार ने नरेंद्र मोदी को प्रस्ताव भेजा कि सनातन संस्था को बैन किया जाए। लेकिन इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया गया। फिलहाल स्थिति ये है कि हिंदू जनजागृति संस्था धड़ल्ले से नौवां अखिल भारतीय हिंदू राष्ट्र अधिवेशन आयोजित करती है।

वीडी सावरकर और एमएस गोलवलकर को अपना मार्गदर्शक मानने वाली इन संस्थाओं का सीधा ताल्लुक आरएसएस और भाजपा से दिखता है। हाल ही में संपन्न हुए हिंदू राष्ट्र अधिवेशन में भाजपा और राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष शामिल हुए हैं। मात्र इतना ही नहीं है बल्कि पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों आदि के मुद्दे पर हिंदू जनजागृति समिति केंद्र स्तरीय सरकारी बैठकों का हिस्सा रही है।

image 2_23.JPG

मोदी सरकार और अतिवादी हिंदू संगठनों के इस संजाल को समझने की ज़रूरत है। ऊपर जो विवरण दिया गया है, एक बार उसके सूत्रों को आपस में जोड़कर देखेंगे तो आपको सरकार और इन अतिवादी हिंदू संगठनों का एक नेटवर्क और इनकी कार्यशैली नज़र आएगी।

ये संविधान की ताकत है कि हमारे प्रधानमंत्री और भाजपा अब तक खुलकर नहीं कह पा रहे कि वो हिंदू राष्ट्र की स्थापना के लिए प्रतिबद्ध हैं। हालांकि इनके मंत्री, मुख्यमंत्री और यहां तक कि स्वयं प्रधानमंत्री भी अनेकों मौकों पर इस तरह की भंगिमाएं और संकेत लगातार प्रस्तुत करते रहे हैं।

एक बार भाजपा के कार्यकाल पर नज़र डालें। भाजपा के कार्यकाल में बुनियादी जन सुविधाओं, रोज़गार, कृषि और महंगाई आदि पर कोई खास प्रगति नहीं है। बल्कि आप साफ-साफ देख सकते हैं कि ये कोई प्राथमिकता भी नहीं है। धारा 370, राम जन्मभूमि, तीन तलाक, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, लेखकों व बुद्धिजीवियों को जेल में डलना और आंदोलन व प्रतिरोध के स्वरों को कुचलना सरकार की प्राथमिकता रही है। सरकार की प्राथमिकता है कि साम-दाम-दंड-भेद हर तरह से सत्ता में काबिज़ रहना है। कोरोना महामारी के दौरान सरकारें गिराना- बनाना, विधायकों की खरीद-फरोख्त, राम मंदिर भूमिपूजन, शाहीन बाग आंदोलन को कुचलना सरकार की प्राथमिकता रही है।

भाजपा ने देश में अघोषित आपातकाल लगा रखा है। भाजपा की रणनीति है कि जो करना है उसे कहने की क्या ज़रूरत है। कहो कुछ और करो कुछ। मतलब अंदर खाने अपने एजेंडे पर काम करते रहो। तो, जिस तरह अघोषित आपातकाल लगाया है उसी तरह अघोषित तौर पर हिंदू राष्ट्र के एजेंडे की तरफ भाजपा सरकार लगातार काम कर रही है। हालांकि ये इतना छिपा हुआ नहीं है, बशर्तें आप देखना चाहें।

देश की तमाम लोकतांत्रिक संस्थाएं और स्वयं लोकतंत्र ख़तरे में है। हिंदू जनजागृति समिति ने संविधान से “धर्मनिरपेक्ष” शब्द को हटाए जाने के लिए याचिका डाल रखी है। हिंदू जनजागृति समिति की वेबसाइट पर हिंदूराष्ट्र निर्माण के साल की घोषणा भी की गई है। समिति के अनुसार वर्ष 2023 और 2025 के मध्य तक भारत हिंदूराष्ट्र बन जाएगा। हिंदू जनजागृति समिति इस देश की प्रतिरोध की परंपरा और सांझी-संस्कृति की ताकत को कम करके आंक रही है। लेकिन, ये सच है कि हिंदुस्तान के लिए ये समय कठोर परीक्षा का रहने वाला है।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार एवं ट्रेनर हैं। आप सरकारी योजनाओं से संबंधित दावों और वायरल संदेशों की पड़ताल भी करते हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

hindu rashtra
Hinduvta
Ram Mandir
ram janm bhoomi
RSS
BJP
religion
Religion Politics
India Hindu Rashtra

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: अभी नहीं चौथी लहर की संभावना, फिर भी सावधानी बरतने की ज़रूरत
    14 May 2022
    देश में आज चौथे दिन भी कोरोना के 2,800 से ज़्यादा मामले सामने आए हैं। आईआईटी कानपूर के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. मणींद्र अग्रवाल कहा है कि फिलहाल देश में कोरोना की चौथी लहर आने की संभावना नहीं है।
  • afghanistan
    पीपल्स डिस्पैच
    भोजन की भारी क़िल्लत का सामना कर रहे दो करोड़ अफ़ग़ानी : आईपीसी
    14 May 2022
    आईपीसी की पड़ताल में कहा गया है, "लक्ष्य है कि मानवीय खाद्य सहायता 38% आबादी तक पहुंचाई जाये, लेकिन अब भी तक़रीबन दो करोड़ लोग उच्च स्तर की ज़बरदस्त खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। यह संख्या देश…
  • mundka
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मुंडका अग्निकांड : 27 लोगों की मौत, लेकिन सवाल यही इसका ज़िम्मेदार कौन?
    14 May 2022
    मुंडका स्थित इमारत में लगी आग तो बुझ गई है। लेकिन सवाल बरकरार है कि इन बढ़ती घटनाओं की ज़िम्मेदारी कब तय होगी? दिल्ली में बीते दिनों कई फैक्ट्रियों और कार्यस्थलों में आग लग रही है, जिसमें कई मज़दूरों ने…
  • राज कुमार
    ऑनलाइन सेवाओं में धोखाधड़ी से कैसे बचें?
    14 May 2022
    कंपनियां आपको लालच देती हैं और फंसाने की कोशिश करती हैं। उदाहरण के तौर पर कहेंगी कि आपके लिए ऑफर है, आपको कैशबैक मिलेगा, रेट बहुत कम बताए जाएंगे और आपको बार-बार फोन करके प्रेरित किया जाएगा और दबाव…
  • India ki Baat
    बुलडोज़र की राजनीति, ज्ञानवापी प्रकरण और राजद्रोह कानून
    13 May 2022
    न्यूज़क्लिक के नए प्रोग्राम इंडिया की बात के पहले एपिसोड में अभिसार शर्मा, भाषा सिंह और उर्मिलेश चर्चा कर रहे हैं बुलडोज़र की राजनीति, ज्ञानवापी प्रकरण और राजद्रोह कानून की। आखिर क्यों सरकार अड़ी हुई…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License