NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
भारत
राजनीति
क्या है आईआईएम और सरकार के बीच टकराव की वजह?
सरकार यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन के नियमों का हवाला देकर एक साल के एमबीए कोर्स को बंद करना चाहती है तो वहीं आईआईएम इसे अपने एक्ट के अनुरूप बताकर इसे जारी रखना चाहते हैं।
सोनिया यादव
17 Dec 2020
आईआईएम
Image courtesy: EduPadhai

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट यानी आईआईएम और मोदी सरकार के बीच टकराव इन दिनों सुर्खियों में है। इसकी वजह बहुत से आईआईएम्स द्वारा शुरू की गई एक साल की एमबीए डिग्री है, जिससे सरकार नाखुश नज़र आ रही है। कई मीडिया रिपोर्ट्स में इस बात की चर्चा है कि इस विवाद के चलते सरकार जल्द ही आईआईएम्स को मिली स्वायत्तता को कमज़ोर कर सकती है। हालांकि जानकार इसे प्रतिष्ठित संस्थानों की स्वतंत्रता में सरकारी हस्तक्षेप के तौर पर देख रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

आईआईएम अहमदाबाद, बेंगलुरु और इंदौर समेत कई आईआईएम ने सेशन 2021-22 के लिए सरकार के आदेश के बावजूद एक साल के एमबीए डिग्री कोर्स यानी एग्जिक्यूटिव पोस्ट प्रोग्राम फॉर मैनेजमेंट के लिए फ्रेश एप्लीकेशन जारी कर दिए हैं। सरकार यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन के नियमों का हवाला देकर इस कोर्स को बंद करना करने को कह रही है लेकिन आईआईएम्स इसे अपने एक्ट के अनुरूप बताकर इसे समय की जरूरत बता रहे हैं।

आपको बता दें कि फिलहाल 20 आईआईएम्स में से अहमदाबाद, बैंगलौर, कोलकाता, इंदौर, कोझिकोड, लखनऊ, और उदयपुर, एग्ज़ीक्यूटिव्स के लिए एक साल की डिग्री देते हैं।

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय इसके पक्ष में नहीं है। दो अवसरों पर उसने आईआईएम्स से अपनी शंका को व्यक्त किया। पहले इस साल की शुरुआत में मौखिक रूप से, और बाद में जुलाई में एक लिखित कम्यूनिकेशन के माध्यम से। लेकिन इसके बावजूद आईआईएम्स इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहे जिसके चलते अब सरकार इनकी स्वायत्तता को कमज़ोर करने पर विचार कर रही है।

क्या कहता है यूजीसी का नियम?

एमएचआरडी ने जुलाई के पहले सप्ताह में आईआईएम्स से कहा था कि यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन के नियमानुसार वे एक साल का पोस्ट ग्रेजुएट मैनेजमेंट डिग्री प्रोगाम नहीं चला सकते।

यूजीसी एक्ट 1956 के मुताबिक ‘कोई भी छात्र मास्टर डिग्री के लिए योग्य तब तक नहीं होगा, जब तक ग्रेजुएशन डिग्री के बाद कम से कम दो साल, या प्लस टू के बाद पांच साल पूरे न कर लिए हों, या प्रोग्राम के लिए यूनिवर्सिटी द्वारा निर्धारित क्रेडिट्स के, न्यूनतम नंबर हासिल न कर लिए हों।

यूजीसी केवल दो साल के पाठ्यक्रम के लिए ही मास्टर डिग्री की परमीशन देता है और पश्चिमी देशों से इतर एक साल के कोर्स को पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा ही माना जाता है।

आईआईएम एक्ट और बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के आदेश और सहमति से आईआईएम कोलकत्ता ने साल 2019 में एग्जीक्यूटिव पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम (PGPEX) का नाम बदलकर मास्टर्स ऑफ बिजनेसेस एडमिनिस्ट्रेशन फॉर एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम (MBA- EP) कर दिया था। मतलब जो पहले डिप्लोमा कोर्स था, उसे एक साल के डिग्री प्रोग्राम में तब्दील कर दिया गया था। उस साल PGPEX के छात्रों को कॉन्वोकेशन में MBA-EP की डिग्री दी गई था।

सरकार क्यों कोर्स बंद करवाना चाहती है?

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एचआरडी मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि आईआईएम्स के इस कोर्स का सरकार यह कहकर विरोध कर रही है कि भारत में एक साल के कोर्स में डिग्री देने का प्रावधान नहीं है। लॉ मिनिस्ट्री ने भी सरकार को एक साल की ऐसी डिग्री के खिलाफ राय दी थी।

अधिकारियों की दलील है कि अगर आईआईएम एक साल के एमबीए कोर्स में डिग्री देते रहेंगे तो बाकी के बिजनेस स्कूल भी यही प्रक्रिया अपना लेंगे। ऐसे में सरकार उन्हें ऐसा करने से रोक नहीं पाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि आईआईएम दूसरे मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट्स के बीच बहुत गलत मिसाल कायम कर रहे हैं। पिछले साल भी ये मुद्दा उठाया गया था, पर उस समय भी आईआईएम्स ने सुनने से इंकार कर दिया था।

अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर अखबार से कहा, “मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने आपत्ति इसीलिए जताई क्योंकि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के तहत एक साल की डिग्री का कोई प्रावधान ही नहीं है। अगर यूजीसी विशेष रूप से आईआईएम को एक साल की डिग्री की परमीशन देने का आदेश जारी करता है तो हमें कोई समस्या नहीं है।”

आईआईएम्स का कहना है?

एक वर्ष की एमबीए डिग्री पर मंत्रालय की आपत्ति के बाद, आईआईएम्स ने सरकार को एक विस्तृत नोट भेजा था, जिसमें उनकी एक वर्ष की एमबीए डिग्री के पीछे के, कारणों की व्याख्या की गई थी।

द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक एक आईआईएम डायरेक्टर ने नाम छिपाने की शर्त पर कहा, “एक साल की पूर्णकालिक स्नातकोत्तर एमबीए डिग्री, सिर्फ उन छात्रों के लिए है, जिनके पास काम का अनुभव होता है। कम से कम चार साल के काम के अनुभवी उम्मीदवार ही, इन प्रोग्राम्स में लिए जाते हैं।”

एक दूसरे आईआईएम डायरेक्टर ने कहा, ‘जब आईआईएम एक्ट आया, तो वो ताज़ा हवा के एक झोंके की तरह था, और अब सरकार उसे हल्का करना चाहती है…ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। इसके पीछे एक साल की एमबीए डिग्री के अलावा, कोई दूसरी वजह नहीं हो सकती।”

डायरेक्टर ने आगे कहा, “एक साल की एमबीए डिग्री ऐसी चीज़ नहीं है, जो संस्थानों ने यूंही शुरू कर दी। 20 आईआईएम्स ने बैठकर इसपर अच्छे से विचार विमर्श किया, और डिग्री पेश करने के लिए बाक़ायदा नियम तय किए। चूंकि आईआईएम्स द्वारा ऑफर किए एमबीए में, काम का अनुभव नहीं मांगा जाता, इसलिए एग्ज़ीक्यूटिव एमबीए के लिए, जो एक साल की अवधि का होता है, काम का अनुभव अनिवार्य होता है। हमने इसे इसी तरह डिज़ाइन किया है।”

क्या है आईआईएम एक्ट?

प्रीमियर इंस्टीट्यूट्स की एकेडमिक ऑटोनॉमी के लिए 2017 में आईआईएम एक्ट पास किया गया था। ये 31 जनवरी 2018 से प्रभावी हुआ। इस एक्ट के तहत भारत के सभी 20 प्रीमियर बिज़नेस स्कूलों को डिग्री देने की पावर, अकादमिक फैसले लेने की आजादी दी गई। साथ ही निदेशकों, अध्यक्षों तथा गवर्नर मंडल के सदस्यों की नियुक्ति की पूरी शक्ति भी दी गई। मतलब इस एक्ट ने इन इंस्टीट्यूट्स में सरकार की भूमिका सीमित कर दी।

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक अब सरकार अपनी भूमिका के विस्तार का प्लान बना रही है। शिक्षा मंत्रालय एक ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, जिसमें अगर सरकार चाहें तो किसी अनियमितता की शिकायत पर किसी संस्थान के गवर्नर मंडलों के खिलाफ, जांच शुरू करा सकती है।

द प्रींट ने शिक्षा मंत्रालय (एमओई) के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से लिखा है, “हम एक प्रस्ताव पर चर्चा कर रहे हैं, जिससे अगर ये संस्थान कदाचार में लिप्त पाए जाते हैं, तो मंत्रालय इनके गवर्नर मंडलों के खिलाफ, जांच शुरू करा सकती है। अभी तक इस बारे में कोई अध्यादेश नहीं है, हम अभी सिर्फ चर्चा की स्टेज पर हैं।”

शिक्षाविद् अनिल जैन सरकार के इस कदम को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहते हैं कि देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में इस तरह सरकार की दख़लअंदाज़ी सही नहीं है। अगर सरकार आने वाले दिनों में इसे लेकर कोई कानून बनाती है तो निश्चित ही ये आईआईएम्स की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप होगा।

अनिल जैन ने न्यूज़क्लिक को बताया, “सरकार का ये क़दम, इसका नतीजा है कि आईआईएम्स ने एक साल का एमबीए बंद करने के लिए, मंत्रालय के पत्रों पर कोई तवज्जो नहीं दिया। लेकिन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 खुद स्वीकार करती है कि दुनिया भर में, डिग्रियां किसी प्रोग्राम में पढ़ाई के सालों के नहीं, बल्कि क्रेडिट-घंटों की संख्या के आधार पर दी जाती हैं। ऐसे में गुणवत्ता सुनिश्चित करने और अंतर्राष्ट्रीय स्तर प्राप्त करने के लिए ये एक साल की डिग्री बेस्ट माध्यम हो सकती है।”

बीते एक दशक से शिक्षा क्षेत्र से जुड़े और खुद मैनेज़मेंट छात्र रहे प्रदीप वालिया मानते हैं कि अब समय आ गया है कि यूजीसी अपने नियमों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर के अनुरूप बनाए या शीर्ष संस्थानों को ही उनकी अकादमिक पावर दे दी जाए।

प्रदीप वालिया के अनुसार, “विश्व स्तर पर ज़्यादातर बी-स्कूल एक साल की एमबीए डिग्री देते हैं। अगर अब आईआईएम भी यही कर रहे हैं तो मुझे इसमें कुछ गलत नहीं लगता। क्योंकि सरकार खुद संस्थानों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का बनाने की बात करती है। फिर अगर इसी मसले पर स्वायत्तता को कमज़ोर करने की बात होती है, तो ये अनुचित है।”

IIM
University Grants Commission
Indian Institute of Management
Union Ministry of Human Resource Development
MHRD
Modi government
BJP
Central Government
State Government

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

कर्नाटक पाठ्यपुस्तक संशोधन और कुवेम्पु के अपमान के विरोध में लेखकों का इस्तीफ़ा

'KG से लेकर PG तक फ़्री पढ़ाई' : विद्यार्थियों और शिक्षा से जुड़े कार्यकर्ताओं की सभा में उठी मांग

अलविदा शहीद ए आज़म भगतसिंह! स्वागत डॉ हेडगेवार !

कर्नाटक: स्कूली किताबों में जोड़ा गया हेडगेवार का भाषण, भाजपा पर लगा शिक्षा के भगवाकरण का आरोप

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

उत्तराखंड : ज़रूरी सुविधाओं के अभाव में बंद होते सरकारी स्कूल, RTE क़ानून की आड़ में निजी स्कूलों का बढ़ता कारोबार 

NEP भारत में सार्वजनिक शिक्षा को नष्ट करने के लिए भाजपा का बुलडोजर: वृंदा करात

ऑस्ट्रेलिया-इंडिया इंस्टीट्यूट (AII) के 13 अध्येताओं ने मोदी सरकार पर हस्तक्षेप का इल्ज़ाम लगाते हुए इस्तीफा दिया

नेट परीक्षा: सरकार ने दिसंबर-20 और जून-21 चक्र की परीक्षा कराई एक साथ, फ़ेलोशिप दीं सिर्फ़ एक के बराबर 


बाकी खबरें

  • ntpc
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार : रेलवे परीक्षा परिणाम में धांधली का आरोप लगाते हुए अभ्यर्थियों का दूसरे दिन भी प्रदर्शन
    25 Jan 2022
    भारी संख्या में अभ्यर्थियों ने बिहार की राजधानी पटना और आरा में रेलवे ट्रैक पर गत सोमवार को प्रदर्शन किया वहीं आज मंगलवार को नालंदा, बक्सर, नवादा समेत अन्य स्टेशनों पर उन्होंने रेलवे ट्रैक पर…
  • Biden
    पीपल्स डिस्पैच
    बाइडेन का पहला साल : क्या कुछ बुनियादी अंतर आया?
    25 Jan 2022
    जनआंदोलनों के दबाव की प्रतिक्रिया में बाइडेन ने अपने कार्यकाल के लिए ऊंचे-ऊंचे लक्ष्य तय किए थे। लेकिन इनमें से कितने पूरे हुए?
  • Sudha Bharadwaj
    एजाज़ अशरफ़
    सामाजिक कार्यकर्ताओं की देशभक्ति को लगातार दंडित किया जा रहा है: सुधा भारद्वाज
    25 Jan 2022
    जेल में अपने तजुर्बों का हवाला देते हुए और कामगारों की नुमाइंदगी करने वाली एक वकील के तौर पर जानी-मानी कार्यकर्ता कहती हैं कि भारत अब भी संविधान में किये गये इंसाफ़ और बराबरी के वादों को साकार करने…
  • Netaji
    सबरंग इंडिया
    नेताजी पर कब्ज़ा ज़माने की हिन्दू राष्ट्रवादी कवायद
    25 Jan 2022
    नेताजी सुभाषचंद्र बोस की 125वीं जयंती (23 जनवरी) के अवसर पर देश भर में अनेक आयोजन हुए. राष्ट्रपति भवन में उनके तैल चित्र का अनावरण किया गया. केंद्र सरकार ने घोषणा की कि नेताजी का जन्मदिन हर वर्ष '…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,55,874 नए मामले, 614 मरीज़ों की मौत 
    25 Jan 2022
    देश में अब कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 3 करोड़ 97 लाख 99 हज़ार 202 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License