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अपराध
स्वास्थ्य
भारत
‘ये कैसा सुशासन है जहां महिलाएं अस्पताल में भी सुरक्षित नहीं हैं!’
बिहार के एक अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती एक महिला से यौन हिंसा का मामला सामने आया है। पीड़िता की मौत हो गई है और आरोपी स्वास्थ्यकर्मी को गिरफ्तार कर लिया गया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
13 Apr 2020
women harassment
प्रतीकात्मक तस्वीर

 “अगर हम आपको बताएंगे तो कहीं आप हमें छोड़ तो नहीं देंगे।”

ये डर हमारे समाज में अमूमन हर यौन हिंसा की शिकार महिला के मन में होता है कि कहीं उसका परिवार या उसका पति उसकी आपबीती सुनने के बाद उसे छोड़ न दे। बिहार के गया में भी एक महिला लगभग चार से पांच दिन इसी डर के साये में जीती रही और आख़िरकार उसने 6 अप्रैल को दम तोड़ दिया।

एक ओर जब देश कोरोना के संकट से जूझ रहा है तो वहीं दूसरी ओर महिलाएं अपनी अस्मिता बचाने की लड़ रही हैं। बिहार के गया जिले में अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज से एक शर्मनाक घटना सामने आई है। अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती एक महिला से कथित तौर पर यौन हिंसा (कई जगह बलात्कार की बातें भी कही जा रही हैं) का आरोप है। फिलहाल मामले में पीड़िता की मौत हो गई है और आरोपी स्वास्थ्यकर्मी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

क्या है पूरा मामला?

मीडिया में आई ख़बरों के अनुसार पीड़िता का पति पंजाब के लुधियाना में काम करता था, पीड़िता भी अपने डेढ़ साल के बच्चे के साथ वहीं रहती थी। 25 मार्च को 22 वर्षीय यह महिला अपने पति के साथ अपने ससुराल बिहार के गया लौटी। गर्भपात होने के कारण पीड़ित महिला की तबीयत पहले से ही ठीक नहीं थी। इसलिए जब 27 मार्च को पीड़िता की तबीयत ज़्यादा बिगड़ने लगी तो परिवार वालों ने उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया। यहां महिला को कोरोना वायरस के संदेह में आइसोलेशन वार्ड में अलग रखा गया। जिसके बाद कोरोना टेस्ट हुआ और रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद 2 अप्रैल को उसे अस्पताल से डिस्चार्ज भी कर दिया गया। 6 अप्रैल को पीड़ित महिला की मौत हो गई।

परिवारजनों का आरोप है कि आइसोलेशन वार्ड में पीड़िता की देखरेख करने वाले स्वास्थ्यकर्मी ने उससे दुष्कर्म किया।

डेक्कनहेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला सात अप्रैल को सामने आया। पीड़िता की सास फुलवा देवी ने आरोपी स्वास्थ्यकर्मी के खिलाफ रौशनगंज थाने में अपना बयान दर्ज कराया और फिर इसी आधार पर थाने में एफआईआर भी दर्ज हुई है।

स्थानीय पत्रकार नीरज सिंह ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में बताया कि पीड़िता का पति लुधियाना में पेन्ट का काम करता है। 25 मार्च को ही ये लोग एंबुलेंस से बिहार लौटे थे। पीड़िता की तबीयत पहले ही काफी खराब थी, जिसके बाद पहले परिवारवाले पीड़िता को शेरघाटी के सरकारी अस्पताल ले गए और फिर 27 मार्च को अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया, जहां ये घटना हुई है।

नीरज आगे कहते हैं  कि जब वे इस पूरे मामले को समझने के लिए पीड़िता की सास से मिले तो उन्होंने बताया कि जिस आइसोलेशन वार्ड में उनकी बहू को रखा गया था, वहां कोई और नहीं था।  सास के मुताबिक,  “बार-बार कहने कहने पर भी मुझे बहू के पास अंदर नहीं जाने दिया गया। जब मैंने बहू के कपड़े बदले तब मुझे उसकी साड़ी खून से सनी दिखाई दिया। मेरे बहुत पूछने उसने मुझसे कहा कि कोई चेकअप के लिए आता है जो उसके साथ गलत हरकत करता है। जब बाहर हमने गेट के गार्ड को ये सारी बातें बताई तो उसने हमें इज़्ज़त के नाम पर चुप करा दिया।”

नीरज के अनुसार पुलिस का कहना है कि इस मामले में सीसीटीवी फुटेज़ उपलब्ध नहीं है क्योंकि अस्पताल में सिर्फ़ 7 दिन का ही सीसीटीवी फुटेज स्टोर रखा जाता है और इस मामले में एफ़आईआर देर से हुई है।

इसे भी पढ़ें : लॉकडाउन के बीच भी नहीं थम रही यौन हिंसा, ललितपुर में नाबालिग़ से दुष्कर्म की कोशिश

बिहार के एक गैर-सरकारी महिला संगठन से जुड़ी ज्योति बताती हैं, “मैं पीड़ित महिला के पति से मिली तो उन्होंने मुझे बताया कि उनकी पत्नी बहुत कमजोर थी, बावजूद इसके अस्पताल से उसे छुट्टी दे दी गई। घर आने के बाद वो बिल्कुल चुप हो गई थी। फिर एक रात बोली कि ‘अगर हम आपको कुछ बताएंगे तो आप हमें छोड़ तो नहीं देंगे’। बस उस रात के बाद अगली सुबह वो नहीं रही।

ज्योति आगे कहती हैं कि ये कैसा सुशासन है जहां महिलाएं अस्पताल में भी सुरक्षित नहीं हैं।  जब हमारे देश में ज़िंदा रहते हुए महिलाओं को न्याय नहीं मिलता तो हम ये कैसे उम्मीद कर लें कि मौत के बाद किसी महिला को न्याय मिल जाएगा।

क्या कार्रवाई हो रही है?

इस संबंध में गया के एसएसपी राजीव मिश्रा ने मीडिया को बताया कि शनिवार, 11 अप्रैल की रात इस मामले में एक व्यक्ति की गिरफ़्तारी हुई है। हालांकि उन्होंने ये भी साफ किया कि शिकायत दुष्कर्म की नहीं, बल्कि मॉलस्टेशन (छेड़छाड़) की है।

बता दें कि स्थानीय मीडिया में मामले के तूल पकड़ने के बाद मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधीक्षक डॉ. विजय कृष्ण प्रसाद ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के लिए टीम गठित की है।

राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने भी इस मामले पर संज्ञान लिया है। वहीं बिहार की विभिन्न महिला संगठनों ने इसे गंभीर और शर्मनाक बताया है। उन्होंने बिहार सरकार के प्रधान सचिव को ख़त लिख कर मामले की जाँच और महिलाओं की सुरक्षा की माँग की है। उन्होंने अपनी मांग में क्वारंटाइन सेंटर और आईसोलेशन वार्ड में महिलाओं के लिए अलग से व्यवस्था की माँग की है जहाँ महिला नर्सों को रखे जाने और पूर्ण सुरक्षा देने की गुज़ारिश की गयी है।

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने इस मामले को गंभीर बताते हुए इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

गौरतलब है कि देश-विदश में लॉकडाउन के दौरान महिलाओं के खिलाफ हिंसा की घटनाओं में इज़ाफा देखने को मिला है। संयुक्त राष्ट्रसंघ प्रमुख ने भी लॉकडाउन के दौरान महिलाओं की रक्षा करने की सरकारों से अपील की है। इससे पहले देश में राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी लॉकडाउन में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामलों में बढ़ोत्तरी पर चिंता व्यक्त की थी।

इसे पढ़ें : लॉकडाउन के चलते घरेलू हिंसा के मामले बढ़े, महिला उत्पीड़न में यूपी सबसे आगे

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Nitish Kumar

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