NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
यक्ष प्रश्न : दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण का ज़िम्मेदार कौन?
पंजाब-हरियाणा के किसानों की पराली जलाने की समस्या हो या ऑड-ईवन का फार्मूला पक्ष-विपक्ष एकजुट होने के बजाय आमने-सामने ही भिड़ते नज़र आ रहे हैं।
सोनिया यादव
05 Nov 2019
delhi pollution
Image courtesy: Amar Ujala

राजधानी दिल्ली में छाई जहरीली धुंध की परत फिलहाल छंटती दिखाई दे रही है लेकिन इसके बावजूद अभी भी हवा में ज़हर बना हुआ है। एयर क्वॉलिटी इंडेक्स में हवा का स्तर ख़तरनाक है। सरकारें एक-दूसरे के ऊपर इसका ठीकरा फोड़ने में व्यस्त हैंं। पंजाब-हरियाणा के किसानों की पराली जलाने की समस्या हो या ऑड-ईवन का फार्मूला पक्ष-विपक्ष एकजुट होने के बजाय आमने-सामने ही भिड़ते नज़र आ रहे हैं।

इस संबंध में 4नवंबर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, ‘दिल्ली का हर साल दम घुट रहा है और हम इस मामले में कुछ भी नहीं कर पा रहे हैं। किसी भी सभ्य समाज में ऐसा नहीं हो सकता। केंद्र और राज्य दोनों को कुछ करना होगा।'

पीठ ने कहा कि दो दिन इतनी हालत खराब भी थी कि घर में बेडरूम में भी हवा की गुणवत्ता 500 के पास थी (सामान्यतया यह 100 होनी चाहिए)। यह आपातकाल के हालात से भी खराब हालात थे। हालत ऐसे हैं कि लोगों को सलाह दी जा रही है कि दिल्ली छोड़ दें या दिल्ली न आएं। यह क्या है क्या हम दिल्ली को खाली होने देंगे जो देश की राजधानी है। समय आ गया है हमें कुछ करना ही होगा।

आरोप-प्रत्यारोपों के बीच सबसे अहम बात ये है कि आख़िर साल दर साल बढ़ते प्रदूषण के पीछे कारण क्या हैं? दिवाली और छठ पर जलने वाले पटाखे, किसानों का पराली जलाना, औद्योगिकरण, निर्माण कार्य या दिल्ली की सड़कों पर तेजी से दौड़ते वाहन।

सुप्रीम कोर्ट ने पराली जलाने वाले किसानों के संदर्भ में कहा कि उसे इन किसानों से कोई सहानुभूति नहीं है क्योंकि ऐसा करके वे दूसरों की जिंदगी जोखिम में डाल रहे हैं। न्यायालय ने प्रदूषण की स्थिति से निबटने के लिए तत्काल सभी आवश्यक कदम उठाने का केंद्र, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली सरकारों को निर्देश दिया है।
878436-873149-stubbleburning.jpg
इसी बीच पंजाब सरकार का भू-जल संरक्षण कानून 2009 भी सुर्खियों में आया। जिसे कई जानकारों द्वारा प्रदूषण मेें वृद्धि की वजह माना जा रहा है। पंजाब सरकार भूजल संरक्षण के लिए कानून 2009 में लेकर आई। इसके अनुसार किसानों पर अप्रैल माह में धान की रोपाई पर प्रतिबंध लगा दिया गया और मानसून के बाद रोपाई का कानून बनाया गया, जिससे धान की रोपाई में उपयोग होने वाले पानी को बचाया जा सके। लेकिन समस्या ये है कि धान की रोपाई जून के आखिरी सप्ताह तक लटकने से इसकी कटाई नवंबर तक खिंच जाती है और किसानों के पास धान की कटाई और गेहूं की रोपाई के बीच समय ही नहीं बचता, जिसकी वजह से तुरत-फुरत में खेत खाली करने के लिए किसान पराली जलाते हैं। इसके चलते सर्दियों की शुरुआत में दिल्ली की हवा दमघोंटू हो जाती है।

पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर में कार्यत डॉ. राहुल सिंह ने न्यूज़क्लिक को बताया, 'सर्दियों में अक्सर हवाएं धीमी गति से चलती हैं, वातावरण में नमी की अधिकता होती है जिसके चलते पराली जलाने से जो धुआं निकलता है वो पर्यावरण को ज्यादा प्रदूषित करता है'।
भारतीय मौसम विभाग, चंडीगढ़ के एक अधिकारी ने कहा कि इन दिनों हवाएं उत्तर पश्चिम से दक्षिणपूर्वी सतह की ओर बह रही हैं। गति बहुत सुस्त है, जिसके चलते मौसम में नमी अधिक है। और इसी कारण धुआं आसानी से हवा से खत्म नहीं हो पाता। पहले किसानों का पराली जलाने का समय एक बड़ी समयावधि में फैला हुआ होता था। जो अक्टूबर तक निपट जाता था। तब हवा और नमी दोनों ही अभी के मुकाबले अनुकूल होते थे।

अक्टूबर में जो उतर भारत में विंड पैटर्न होता है वो उस प्रदूषण को समय के साथ बहा ले जाते थे, लेकिन जैसे ही ये साइकिल लेट अक्टूबर और नवंबर में शुरू हुई उत्तर भारत में इस मौसम में स्थिर हो जाने वाली हवा ने इनके बहाव को रोकना शुरू कर दिया।

दिल्ली एनसीआर में वाहनों की बढ़ती संख्या भी प्रदूषण में बढ़ोतरी का अहम कारण है। टाइम्स ऑफ इंडिया अख़बार की खबर के मुताबिक पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) के तहत भारतीय उष्‍णदेशीय मौसम विज्ञान संस्‍थान (आईआईटीएम) पुणे द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली-एनसीआर में प्रमुख प्रदूषकों के उत्सर्जन सूची में वाहनों के उत्सर्जन की भागीदारी में 2010 की तुलना में 2018 में भारी इजाफा हुआ है।
Trafficjamdelhi.jpg
अध्ययन के अनुसार 2010-18 की अवधि के दौरान दिल्ली की सड़कों पर वाहनों की संख्या में चार गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। 2010 में राजधानी में जहां वाहनों का उत्सर्जन लगभग 25.4% प्रतिशत था तो वहीं 2018 में बढ़कर 41 प्रतिशत हो गया है जबकि एनसीआर में ये आकंड़ा 32.1 प्रतिशत से बढ़कर 2018 में 39.1 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

एमओईएस द्वारा पिछले साल के अंत में जारी उत्सर्जन सूची रिपोर्ट में राजधानी में विभिन्न प्रकार के वाहनों द्वारा 'वाहन किलोमीटर की यात्रा' (वीकेटी) पर दैनिक डेटा के आधार पर प्रदूषण का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि ओला / उबर / मेरु आदि में प्रति वर्ष लगभग 1,45,000 किमी प्रति वर्ष की उच्च वीकेटी है। जो वायु प्रदूषण को बढ़ावा देते हैं। दिल्ली के बाहर की कारों ने चार-पहिया वाहनों के कुल उत्सर्जन में लगभग 25-45% का योगदान दिया है।

पर्यावरणविद् राजीव कुमार का कहना है, 'पराली की समस्या तो सिर्फ एक-आध महीने की है लेकिन सड़कों पर लगातार दौड़ते वाहनों की समस्या हमेशा की है। हम आज अपनी-अपनी गाड़ियों में सफर करने को शान समझते हैं, लेकिन इससे पर्यावरण को कितना नुकसान हो रहा है इसकी कोई सुध लेता है? हम रोज़ प्रदूषित हवा में सांस लेने को मज़बूर हैं और इसके जिम्मेदार भी हम ही हैं।'

विकास के नाम पर तेज़ी से बढ़ते निर्माण कार्यों ने भी लोगों का जीना दूभर कर रखा है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण के ख़तरनाक स्तर के मद्देनदर दिल्ली एनसीआर में निर्माण कार्य पर पूरी तरह रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि जो भी ऐसा करेगा उस पर पांच लाख रुपये का जुर्माना किया जाएगा। वहीं कूड़ा जलाने पर पांच हजार रुपये का जुर्माना होगा। ये जुर्माना कोर्ट के इस आदेश के तहत होंगे।

गौरतलब है कि इसी साल जून में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने दिल्ली को फिर से विश्व के चौथे सर्वाधिक प्रदूषित शहर की सूची में रखा था। साल दर साल दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का बढ़ता प्रकोप स्थिति को बेकाबू कर रहा है। सरकारे भले ही एक-दूसरे के पाले में जिम्मेदारी की गेंद फेंक रही हों, लेकिन सच्चाई यही है कि इस प्रदूषण में सबकी मिली-जुली भागीदारी है।

Air Pollution
Delhi smog
stubble burning
Haryana
punjab
manohar laal khattar
capt amrenider singh
Delhi-NCR
Arvind Kejriwal
Odd-Even

Related Stories

वर्ष 2030 तक हार्ट अटैक से सबसे ज़्यादा मौत भारत में होगी

बिहार की राजधानी पटना देश में सबसे ज़्यादा प्रदूषित शहर

विश्व जल दिवस : ग्राउंड वाटर की अनदेखी करती दुनिया और भारत

जलसंकट की ओर बढ़ते पंजाब में, पानी क्यों नहीं है चुनावी मुद्दा?

दिल्ली: क्या कोरोना के नए मामलों में आई है कमी? या जाँच में कमी का है असर? 

चुनावी कुंभ:  उत्तराखंड के डॉक्टरों की अपील, चुनावी रैलियों पर लगे रोक

दिल्ली में ओमीक्रॉन के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र शनिवार-रविवार का कर्फ़्यू

हर नागरिक को स्वच्छ हवा का अधिकार सुनिश्चित करे सरकार

वायु प्रदूषण: दिल्ली में स्कूल, कॉलेज, सरकारी कार्यालय 29 नवंबर से फिर खुलेंगे

दिल्ली ही नहीं गुरुग्राम में भी बढ़ते प्रदूषण से सांसों पर संकट


बाकी खबरें

  • jammu and kashmir
    अजय सिंह
    मुद्दा: कश्मीर में लाशों की गिनती जारी है
    13 Jan 2022
    वर्ष 2020 और वर्ष 2021 में सेना ने, अन्य सुरक्षा बलों के साथ मिलकर 197 मुठभेड़ अभियानों को अंजाम दिया। इनमें 400 से ज्यादा कश्मीरी नौजवान मारे गये।
  • Tilka Majhi
    जीतेंद्र मीना
    आज़ादी का पहला नायक आदिविद्रोही– तिलका मांझी
    13 Jan 2022
    ब्रिटिश साम्राज्य की स्थापना के बाद प्रथम प्रतिरोध के रूप में पहाड़िया आदिवासियों का यह उलगुलान राजमहल की पहाड़ियों और संथाल परगना में 1771 से लेकर 1791 तक ब्रिटिश हुकूमत, महाजन, जमींदार, जोतदार और…
  • marital rape
    सोनिया यादव
    मैरिटल रेप को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, क्या अब ख़त्म होगा महिलाओं का संघर्ष?
    13 Jan 2022
    गैर-सरकारी संगठनों द्वारा दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि मैरिटल रेप के लिए भी सज़ा मिलनी चाहिए। विवाहिता हो या नहीं, हर महिला को असहमति से बनाए जाने वाले यौन संबंध को न कहने का हक़…
  • muslim women
    अनिल सिन्हा
    मुस्लिम महिलाओं की नीलामीः सिर्फ क़ानून से नहीं निकलेगा हल, बडे़ राजनीतिक संघर्ष की ज़रूरत हैं
    13 Jan 2022
    बुल्ली और सुल्ली डील का निशाना बनी औरतों की जितनी गहरी जानकारी इन अपराधियों के पास है, उससे यह साफ हो जाता है कि यह किसी अकेले व्यक्ति या छोटे समूह का काम नहीं है। कुछ लोगों को लगता है कि सख्त कानूनी…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपी चुनाव 2022: बीजेपी में भगदड़ ,3 दिन में हुए सात इस्तीफ़े
    13 Jan 2022
    सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने दावा किया है कि रोजाना राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार के एक-दो मंत्री इस्तीफा देंगे और 20 जनवरी तक यह…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License