NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कई एनजीओ ने राष्ट्रपति से एफसीआरए संशोधन विधेयक पर हस्ताक्षर नहीं करने का अनुरोध क्यों किया है?
संसद ने विदेशी अंशदान विनियमन (एफसीआरए) संशोधन विधेयक को बुधवार को पारित कर दिया है। इसमें प्रस्ताव है कि किसी भी एनजीओ के पदाधिकारियों को एफसीआरए लाइसेंस के रजिस्ट्रेशन के लिए आधार नंबर देना अनिवार्य होगा। साथ ही सरकारी कर्मचारियों के विदेश से धन हासिल करने पर रोक होगी।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
25 Sep 2020
कई एनजीओ ने राष्ट्रपति से एफसीआरए संशोधन विधेयक पर हस्ताक्षर नहीं करने का अनुरोध क्यों किया है?

दिल्ली: कई गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से अपील की कि वह विदेशी अंशदान विनियमन (एफसीआरए) संशोधन विधेयक पर हस्ताक्षर नहीं करें और विचार विमर्श के लिए इसे संसदीय समिति के पास भेज दें।

गौरतलब है कि संसद ने एफसीआरए में संशोधन के लिए बुधवार को विधेयक पारित किया था जिसमें पंजीकरण के लिए गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) के पदाधिकारियों की आधार संख्या जमा करना अनिवार्य किया गया है।

सरकार का कहना है कि प्रस्तावित कानून एनजीओ के विरोध में नहीं है और इसका उद्देश्य पारदर्शिता लाना है। आपको बता दें कि यह कानून 2010 में बना था और तब से इसमें तीन बार 2012, 2015 और 2019 में बदलाव लाया जा चुका है।

गौरतलब कि संसद ने बुधवार को विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक 2020 को मंजूरी दे दी। राज्यसभा में यह विधेयक विपक्षी सांसदों की गैरमौजूदगी में पारित हुआ है। जबकि लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी थी।

इस विधेयक के प्रावधान के अनुसार किसी एनजीओ के पंजीकरण के लिए उसके पदाधिकारियों का आधार देना होगा। साथ ही सरकारी कर्मचारियों के विदेश से धन हासिल करने पर रोक होगी। इस संशोधन विधेयक में एनजीओ के प्रशासनिक खर्च को मौजूदा 50 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत करने का प्रस्ताव किया गया है।

विपक्षी दल और एनजीओ कर रहे हैं विरोध

लोकसभा में कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने इस बिल का विरोध किया। उन्होंने कहा कि एफसीआरए के प्रावधानों को सख्त बनाने की बजाय लचीला बनाया जाना चाहिए। उनका कहना था कि पिछले 6 साल में इसका इस्तेमाल उन गैर सरकारी संगठनों के खिलाफ किया जा रहा है जो सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।

मनीष तिवारी ने कहा कि 2010-2019 के दौरान 19,000 से अधिक एफसीआरए कैसिंल किए गए लेकिन सरकार जवाब देने में विफल रही कि कितने मामले अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचे।

तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने कहा कि यह कुछ संगठनों को एफसीआरए की प्राप्ति रोकने का प्रयास है। कुछ लोग ही विदेशी अनुदान ले सकें, ऐसा प्रयास है। यह अल्पसंख्यकों के लिये ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि इसे विनियमित करने की बजाए नियमन से मुक्त करना चाहिए।

कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि कभी-कभी ऐसा लगता है कि सत्तापक्ष की बजाय विपक्ष से सवाल किया जाता है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक विपक्ष और विरोधियों की आवाज दबाने का प्रयास है।

भारतीय एनजीओ की शीर्ष इकाई ‘वॉलंटरी एक्शन नेटवर्क इंडिया’  (वानी) से जुड़े संगठनों ने एक बयान में राष्ट्रपति से विधेयक पर हस्ताक्षर न करने तथा इसे विचार के लिए संसदीय समिति को वापस भेजने का आग्रह किया है।

वानी ने इसे देश भर में विकास, राहत, वैज्ञानिक शोध और जनसेवा जैसे कामकाज में लगे एनजीओ को खत्म करने वाला कदम बताते हुए कहा कि इस बिल से एनजीओ समुदाय के लिए काम करना मुश्किल हो जाएगा। एनजीओ का कहना है कि बिल में मान लिया गया है कि जो भी एनजीओ विदेश से पैसा ले रहे हैं वे गलत हैं, जबतक वे खुद को सही साबित न कर दें।

एनजीओ पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया (पीएफआई) की कार्यकारी निदेशक पूनम मुटरेजा ने कहा, ‘हम राष्ट्रपति से अनुरोध करते हैं वह इस संशोधन विधेयक को वापस भेज दें और इसपर विचार के लिए विशेष समिति बनाई जाए।’

इम्पल्स एनजीओ नेटवर्क की संस्थापक हसीना खारबीह ने कहा, ‘लोकतांत्रिक भारत में, एफसीआरए विधेयक, 2020 गैर सरकारी संगठनों के लिए अनुकूल नहीं है। यह संशोधन उनकी स्वतंत्रता को बाधित करेगा और उसके जमीनी काम पर नियंत्रण लगाएगा।’

बता दें कि एफसीआरए के तहत पंजीकृत एनजीओ को 2016-17 और 2018-19 के बीच 58,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का विदेशी कोष मिला है। देश में अभी करीब 22,400 एनजीओ एफसीआरए के तहत पंजीकृत हैं।

क्या कहना है सरकार का?

राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि यह विधेयक किसी गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) के खिलाफ नहीं है बल्कि उन एनजीओ के हित में है जो पूरी पारदर्शिता के साथ अपना काम अच्छे तरीके से कर रहे हैं।

उन्होंने इस आशंका को भी दूर करने का प्रयास किया कि यह किसी भी संगठन को भयभीत करने के लिए है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक विदेशों से मिलने वाले अंशदान के दुरूपयोग और विचलन को रोकने के लिये है।

उन्होंने कहा कि विदेशी अंशदान विनियमन कानून (एफसीआरए) एक राष्ट्रीय और आंतरिक सुरक्षा कानून है और यह सुनिश्चित करने के लिये है कि विदेशी धन भारत के सार्वजनिक, राजनीतिक एवं सामाजिक विमर्श पर हावी नहीं हो।

नित्यानंद राय ने कहा कि विदेशी अंशदान में पूरी पारदर्शिता जरूरी है। एनजीओ को जिस कार्य के लिये पैसा मिले, वह उसी कार्य में खर्च होना चाहिए। उन्होंने इस विधेयक को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से अहम बताया।

उन्होंने कहा कि ऐसे उदाहरण हैं जिनमें एनजीओ ने अपने खर्च का ब्यौरा ठीक तरीके से नहीं दिया। उन्होंने कहा कि इसके तहत एनजीओ को विदेशी अनुदान के संबंध में दिल्ली में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में खाता खोलना होगा। हालांकि इसके लिए उन्हें दिल्ली आने की जरूरत नहीं होगी और अपने आसपास की किसी भी शाखा के जरिए यह खाता खोला जा सकता है।

समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ 

FCRA Amendment Bill
FCRA
NGO
Ram Nath Kovind
Parliament of India
Foreign Contribution Regulation Act
opposition parties
BJP
modi sarkar
Narendra modi
Congress

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • leather industry
    न्यूज़क्लिक टीम
    बंद होने की कगार पर खड़ा ताज नगरी का चमड़ा उद्योग
    10 Feb 2022
    आगरा का मशहूर चमड़ा उद्योग और उससे जुड़े कारीगर परेशान है। इनका कहना है कि सरकार इनकी तरफ ध्यान नही दे रही जिसकी वजह से पॉलिसी दर पॉलिसी इन्हें नुकसान पे नुक्सान हो रहा है।
  • Lakhimpur case
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    लखीमपुर कांड: मुख्य आरोपी और केंद्रीय मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा को मिली ज़मानत
    10 Feb 2022
    केंद्रीय मंत्री के बेटे की ओर से पेश वकील ने अदालत से कहा था कि उनका मुवक्किल निर्दोष है और उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं है कि उसने किसानों को कुचलने के लिए घटना में शामिल वाहन के चालक को उकसाया था।
  • uttarakhand
    मुकुंद झा
    उत्तराखंड चुनाव : टिहरी बांध से प्रभावित गांव आज भी कर रहे हैं न्याय की प्रतीक्षा!
    10 Feb 2022
    उत्तराखंड के टिहरी ज़िले में बने टिहरी बांध के लिए ज़मीन देने वाले ग्रामीण आज भी बदले में ज़मीन मिलने की आस लगाए बैठे हैं लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
  •  Bangladesh
    पीपल्स डिस्पैच
    बांग्लादेश: सड़कों पर उतरे विश्वविद्यालयों के छात्र, पुलिस कार्रवाई के ख़िलाफ़ उपजा रोष
    10 Feb 2022
    बांग्लादेश में शाहजलाल विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई के बाद, देश के कई विश्वविद्यालयों में छात्र एकजुटता की लहर दौड़ गई है। इन प्रदर्शनकारी छात्रों ने…
  • Newsletter
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    वैश्विक निरक्षरता के स्थिर संकट के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएँ
    10 Feb 2022
    संयुक्त राष्ट्र ने नोट किया कि 'दुनिया भर में 150 करोड़ से अधिक छात्र और युवा कोविड-19 महामारी के कारण बंद स्कूल और विश्वविद्यालयों से प्रभावित हो रहे हैं या प्रभावित हुए हैं'; कम से कम 100 करोड़…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License