NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
रोटी-बेटी के रिश्ते वाला नेपाल अपने ही लोगों से क्यों मुंह मोड़ रहा है?
विधायक पुष्कर सिंह धामी कहते हैं कि यहां से लगते नेपाल के कंचनपुर जिले के प्रशासन के साथ प्रवासियों को ले जाने की सहमति नहीं बन पा रही है। बहुत से प्रवासी ऐसे भी हैं जिन्होंने कंचनपुर से आगे महेंद्र नगर जैसे जिलों में जाना है। नेपाल सरकार इन्हें आने की अनुमति नहीं दे रही है। इस संबंध में उनकी राज्य के मुख्य सचिव और एसएसबी से भी बात हुई है।
वर्षा सिंह
20 May 2020
uttrakhand

उत्तराखंड और नेपाल से लगती सीमाओं पर आम बोलचाल में कहा जाता है कि नेपाल के साथ हमारा रोटी-बेटी का संबंध है। नेपाल से बड़ी संख्या में लोग रोजगार के लिए सीमा पार कर उत्तराखंड में आते हैं। यहां के खेतों में नेपाली मज़दूरों का पसीना भी बहता है। नेपाल के साथ कारोबारी रिश्ते भी हैं तो सामरिक दृष्टि से भी ये पूरा क्षेत्र संवेदनशील है।

उधमसिंह नगर में बड़ी संख्या में फंसे हुए हैं नेपाल के लोग

उधमसिंहनगर में इस समय बड़ी संख्या में नेपाली मूल के लोग मौजूद हैं जो पहले चरण के लॉकडाउन के समय से ही अपने घरों को लौटना चाहते थे लेकिन अंतर्राष्ट्रीय सीमा सील होने की वजह से फंसे हुए हैं। लॉकडाउन में छूट मिलने के बाद दिल्ली-मुंबई समेत देशभर से बड़ी संख्या में नेपाली प्रवासी भी लगातार वतन वापसी के लिए लौट रहे हैं। इनकी संख्या बढ़ रही है लेकिन सीमा बंद है। ऐसे में भोजन की व्यवस्था, रहने की व्यवस्था जैसी समस्याएं भी हैं।

खटीमा के विधायक ने गृह मंत्रालय को लिखा पत्र

उधमसिंहनगर के खटीमा से विधायक पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को गृह मंत्रालय को पत्र लिखा। उन्होंने लिखा कि अंतर्राष्ट्रीय सीमा सील होने के कारण यहां बड़ी संख्या में भीड़ जुट रही है। नेपाली लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विधायक के साथ ही सामाजिक संस्थाएं भी राशन सामाग्री, भोजन, मास्क की व्यवस्था कर रही है। लेकिन प्रशासन को निर्देशित करने की आवश्यकता है कि नेपाल सरकार से बात कर सीमा खुलने तक भोजन और रहने की व्यवस्था करें।

नेपाल सरकार से नहीं मिल रही प्रवेश की अनुमति

कुमाऊं का अधिकांश क्षेत्र नेपाल सीमा से लगा हुआ है। पिथौरागढ़, चंपावत और उधमसिंहनगर की सीमाएं नेपाल से जुड़ती हैं। उधमसिंहनगर के खटीमा के मेलाघाट और नगरा तराई से नेपाल जाने की खुली सीमा है। काली नदी भी यहां भारत-नेपाल के बीच सीमा बनाती है। विधायक पुष्कर सिंह धामी कहते हैं कि यहां से लगते नेपाल के कंचनपुर जिले के प्रशासन के साथ प्रवासियों को ले जाने की सहमति नहीं बन पा रही है। बहुत से प्रवासी ऐसे भी हैं जिन्हेंने कंचनपुर से आगे महेंद्र नगर जैसे जिलों में जाना है। नेपाल सरकार इन्हें आने की अनुमति नहीं दे रही है। इस संबंध में उनकी राज्य के मुख्य सचिव और एसएसबी से भी बात हुई है।

खटीमा आए नेपाली प्रवासी.jpg

पुष्कर सिंह धामी के मुताबिक पूरे जिले में 4-5 हज़ार नेपाली प्रवासी हो सकते हैं। क्वारनटीन सेंटर में 14 दिन बिताने के बाद ये जिले में ही इधर उधर छिटके हुए हैं। वह बताते हैं कि 16 नेपाली क्वारनटीन सेंटर से ही चुपचाप निकल गए। कहां गए ये पता नहीं चला। देश के अन्य हिस्सों से खटीमा-बनबसा तक उनका परमिट बन जा रहा है। लेकिन इससे आगे वे अपने आप जा नहीं पा रहे।

उधमसिंहनगर के खटीमा में एसडीएम निर्मला बिष्ट कहती हैं कि राहत शिविरों में नेपाली लोगों के ठहरने की व्यवस्था की गई है। नेपाल सरकार से और कंचनपुर जिले के प्रशासन से लगातार बातचीत की कोशिश की जा रही है लेकिन अभी तक नेपाल की ओर से कोई पॉजीटिव रिस्पॉन्स नहीं मिला। निर्मला बताती हैं कि उनके क्षेत्र में 500 से अधिक लोग मौजूद हैं लेकिन ये कभी आ रहे हैं, कभी लौट रहे हैं, इसलिए इनकी संख्या घट-बढ़ रही है। उनके मुताबिक प्रशासन ने इनके भोजन और ठहरने की पूरी व्यवस्था की है। एसडीएम के मुताबिक उनके जिले में नेपाल के साथ खुली सीमा होने की वजह से लोगों के चोरी-छिपे जाने की आशंका भी बनी रहती है। आधिकारिक तौर पर उधमसिंहनगर से कोई भी नेपाली अपने देश नहीं लौटा है। जबकि देशभर से नेपाली लोग लगातार आ रहे हैं।

पिथौरागढ़ प्रशासन ने नेपाली नागरिकों का प्रवेश रोका

हालांकि इससे पहले 30 अप्रैल को पिथौरागढ़ से करीब ढाई हज़ार नेपाली नागरिकों को उनके देश भेजा गया था। नेपाल के दारचुला जिले के प्रशासन से बातचीत के बाद सहमति बन गई थी। फिर मेडिकल परीक्षण के बाद नेपाल सरकार ने अपनी बसें अपने लोगों को लाने के लिए भेजीं। पिथौरागढ़ में धारचुला के एसडीएम अनिल शुक्ला कहते हैं कि अब हम नेपाली लोगों को अपने जिले में प्रवेश ही नहीं करने दे रहे। हल्द्वानी, रुद्रपुर से ही उन्हें लौटा दिया जा रहा है।

कोरोना से भयभीत नेपाल के लोग हर हाल में चाहते हैं वतन वापसी

उधर, टिहरी के चंबा में परिवार समेत फंसे नेपाल के दैलेख जिले के रहने वाले पद्मबहादुर किसी भी कीमत पर अपने देश लौटना चाहते हैं। वह कहते हैं कि कोरोना जैसी बीमारी और उसके बाद बने हालात ने उन्हें डरा दिया है। अब अपने वतन, अपनी मिट्टी की ओर ही लौटना है। तभी चैन पड़ेगा। वह कहते हैं कि इस बीमारी का कोई भरोसा नहीं, अपने घर पहुंच जाएंगे तो राहत मिलेगी। पद्मबहादुर ने बताया कि टिहरी के जिलाधिकारी से इस बारे में बात की तो उन्होंने कहा कि खुद ही गाड़ी की व्यवस्था कर लो। हम इसमें कुछ नहीं कर सकते।

पद्मबहादुर टिहरी में चंबा-मसूरी के बीच सड़क निर्माण के कार्य में मज़दूरी करते थे। नजदीक के गांवों के खेतों में भी मज़दूरी करते थे। लॉकडाउन में काम ठप हो गया तो पद्मबहादुर जैसे कई नेपालियों के आगे भी रोटी का संकट आ गया। वह बताते हैं कि पहले उनके करीब 40-50 साथी थे। इनमें से कुछ जा चुके हैं। अभी फिलहाल चंबा में करीब 24 नेपाली नागरिक हैं। इनमें महिलाएं-बच्चे भी हैं। अब तक इन लोगों ने अपनी ही बचत के पैसों से राशन की व्यवस्था की। लेकिन अब पैसे भी खत्म हो चुके हैं। ये पूछने पर कि अब तो लॉकडाउन में ढील दी गई है, काम शुरू हो गया है, पद्मबहादुर अब यहां रुकना नहीं चाहते।

(वर्षा सिंह स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

Coronavirus
Lockdown
Migrant workers
migrants
Uttrakhand
Nepal

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में आज फिर कोरोना के मामलों में क़रीब 27 फीसदी की बढ़ोतरी

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के घटते मामलों के बीच बढ़ रहा ओमिक्रॉन के सब स्ट्रेन BA.4, BA.5 का ख़तरा 

बच्चों को कौन बता रहा है दलित और सवर्ण में अंतर?

कोरोना अपडेट: देश में फिर से हो रही कोरोना के मामले बढ़ोतरी 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना मामलों में 17 फ़ीसदी की वृद्धि

कार्टून क्लिक: चीन हां जी….चीन ना जी

उत्तराखंड: क्षमता से अधिक पर्यटक, हिमालयी पारिस्थितकीय के लिए ख़तरा!

कोरोना अपडेट: अभी नहीं चौथी लहर की संभावना, फिर भी सावधानी बरतने की ज़रूरत

जम्मू-कश्मीर के भीतर आरक्षित सीटों का एक संक्षिप्त इतिहास

कोरोना अपडेट: दुनियाभर के कई देशों में अब भी क़हर बरपा रहा कोरोना 


बाकी खबरें

  • poonam
    सरोजिनी बिष्ट
    यूपी पुलिस की पिटाई की शिकार ‘आशा’ पूनम पांडे की कहानी
    16 Nov 2021
    आख़िर पूनम ने ऐसा क्या अपराध कर दिया था कि पुलिस ने न केवल उन्हें इतनी बेहरमी से पीटा, बल्कि उनपर मुकदमा भी दर्ज कर दिया।
  • UP
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी : जनता बदलाव का मन बना चुकी, बनावटी भीड़ और मेगा-इवेंट अब उसे बदल नहीं पाएंगे
    16 Nov 2021
    उत्तर-प्रदेश में चुनाव की हलचल तेज होती जा रही है। पिछले 15 दिन के अंदर यूपी में मोदी-शाह के आधे दर्जन कार्यक्रम हो चुके हैं। आज 16 नवम्बर को प्रधानमंत्री पूर्वांचल एक्सप्रेस वे का उद्घाटन करने…
  • Ramraj government's indifference towards farmers
    ओंकार सिंह
    लड़ाई अंधेरे से, लेकिन उजाला से वास्ता नहीं: रामराज वाली सरकार की किसानों के प्रति उदासीनता
    16 Nov 2021
    इस रामराज में अंधियारे और उजाले के मायने बहुत साफ हैं। उजाला मतलब हुक्मरानों और रईसों के हिस्से की चीज। अंधेरा मतलब महंगे तेल, राशन-सब्जी और ईंधन के लिए बिलबिलाते आम किसान-मजदूर के हिस्से की चीज।   
  • दित्सा भट्टाचार्य
    एबीवीपी सदस्यों के कथित हमले के ख़िलाफ़ जेएनयू छात्रों ने निकाली विरोध रैली
    16 Nov 2021
    जेएनयूएसयू सदस्यों का कहना है कि एक संगठन द्वारा रीडिंग सत्र आयोजित करने के लिए बुक किए गए यूनियन रूम पर एबीवीपी के सदस्यों ने क़ब्ज़ा कर लिया था। एबीवीपी सदस्यों पर यह भी आरोप है कि उन्होंने कार्यक्रम…
  • Amid rising tide of labor actions, Starbucks workers set to vote on unionizing
    मोनिका क्रूज़
    श्रमिकों के तीव्र होते संघर्ष के बीच स्टारबक्स के कर्मचारी यूनियन बनाने को लेकर मतदान करेंगे
    16 Nov 2021
    न्यूयॉर्क में स्टारबक्स के कामगार इस कंपनी के कॉर्पोरेट-स्वामित्व वाले स्टोर में संभावित रूप से  बनने वाले पहले यूनियन के लिए वोट करेंगे। कामगारों ने न्यूयॉर्क के ऊपर के तीन और स्टोरों में यूनियन का…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License