NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
सोशल मीडिया
भारत
राजनीति
राहुल गांधी यह आरोप क्यों लगा रहे हैं कि फेसबुक, व्हॉट्सएप पर बीजेपी-आरएसएस का नियंत्रण है?
अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में फेसबुक द्वारा भारत में सत्तारूढ़ दल के नेताओं पर घृणा भाषण संबंधी नियमों को लागू करने में लापरवाही का दावा किया गया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
17 Aug 2020
 फेसबुक, व्हॉट्सएप पर बीजेपी
Image Courtesy: The Logical Indian

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बीजेपी और आरएसएस पर फेक न्यूज फैलाने का आरोप लगाया है। राहुल गांधी ने रविवार को कुछ रिपोर्ट के साथ एक ट्वीट किया। ट्वीट में राहुल गांधी ने लिखा, 'भाजपा और आरएसएस भारत में फेसबुक और व्हाट्सएप को नियंत्रित करते हैं। वे इसके माध्यम से फर्जी खबरें और नफरत फैलाते हैं और इसका इस्तेमाल मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए करते हैं। आखिरकार, अमेरिकी मीडिया फेसबुक के बारे में सच्चाई के साथ सामने आया है।'

बता दें कि राहुल गांधी पिछले कुछ समय से बीजेपी और मोदी सरकार के खिलाफ आक्रमक रुख अपनाए हुए हैं। वह कोरोना वायररस, चीनी घुसपैठ और बेरोजगारी समेत विभिन्न मुद्दों पर मोदी सरकार को आड़े हाथ ले चुके हैं।

क्या छपा है वॉल स्ट्रीट जर्नल में

अमेरिकी अखबार 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' में छपे एक लेख में कहा गया है कि भारत में सत्ताधारी पार्टी बीजेपी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के हेट स्पीच और आपत्तिजनक सामग्री को लेकर फेसबुक "कोताही बरतता" है। लेख में फेसबुक के एक अधिकारी के हवाले से यह भी कहा गया है कि बीजेपी कार्यकर्ताओं को दंडित करने से "भारत में कंपनी के कारोबार पर असर पड़ेगा।" लेख में कहा गया है कि फेसबुक ने बीजेपी को लेकर व्यापक पैमाने पर अनुचित तरजीह दी है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत में फेसबुक की टॉप पब्लिक पॉलिसी एग्जीक्यूटिव ने बीजेपी से जुड़े ग्रुप्स और कम से कम चार लोगों पर हेट स्पीच रूल्स लागू करने का विरोध किया था। यह उस विस्‍तृत योजना का हिस्‍सा था, जिसके तहत फेसबुक ने बीजेपी और कट्टरपंथी हिंदुओं को 'फेवर' किया।

जर्नल में शुक्रवार को प्रकाशित रिपोर्ट में फेसबुक के अनाम भीतरी सूत्रों के साथ साक्षात्कारों का हवाला दिया है। इसमें दावा किया गया है कि उसके एक वरिष्ठ भारतीय नीति अधिकारी ने कथित तौर पर सामुदायिक आरोपों वाली पोस्ट डालने के मामले में तेलंगाना के एक भाजपा विधायक पर स्थायी पाबंदी को रोकने संबंधी आंतरिक पत्र में दखलंदाजी की थी।

खुलासे के बाद हमलावर विपक्ष

बता दें कि अमेरिका के समाचार पत्र वॉल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय जनता पार्टी के नेता टी.राजा ने अपनी फेसबुक पोस्ट में कहा था कि रोहिंग्या मुसलमानों को गोली मार देनी चाहिए। मुस्लिमों को देशद्रोही बताया था और मस्जिद गिराने की भी धमकी दी थी। इसका विरोध फेसबुक की कर्मचारी ने किया था और इसे कंपनी के नियमों के खिलाफ माना था। इस रिपोर्ट को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने भी फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग पर सवाल किए थे।

दिग्विजय सिंह ने रविवार को ट्वीट कर कहा था, 'मार्क जकरबर्ग प्लीज इस पर बात करें। प्रधानमंत्री मोदी के समर्थक अंखी दास को फेसबुक में नियुक्त किया गया, जो खुशी-खुशी मुस्लिम विरोधी पोस्ट को सोशल मीडिया पर अप्रूव करता है। आपने साबित कर दिया कि आप जो उपदेश देते हैं उसका पालन नहीं करते।'

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने भी फेसबुक को इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद घेरा है। माकपा ने कहा कि क्या फेसबुक ने बीजेपी के साथ मिलकर नफरत को फैलाया है और चुनावी मुद्दों पर पक्षपात किया है?

वॉल स्ट्रीट जर्नल में छपी खबर का हवाला देते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन ने सोशल साइट फेसबुक और सोशल मैसेजिंग एप वॉट्सएप पर चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मदद करने का आरोप लगाया है। और कहा कि संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से इसकी जांच कराई जानी चाहिए।

अजय माकन ने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े लोगों और फेसबुक के शीर्ष अधिकारियों के बीच क्या संबंध हैं, इसकी जांच कराई जानी चाहिए। फेसबुक मुख्यालय को भी इसकी जांच करनी चाहिए। यह सर्वाधिक यूजर्स वाले देश में फेसबुक की विश्वसनीयता से जुड़ा है।उन्होंने कहा कि फेसबुक को चाहिए कि वो उन एग्जीक्यूटिव्स को हटाए, जिनके भाजपा नेताओं से संबंध हैं।

माकन ने कहा कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से लोग भरोसा खो देंगे। अजय माकन ने आरोप लगाया कि भाजपा और फेसबुक के भारतीय अधिकारियों के बीच सांठगांठ है। माकन ने कहा कि हमने फेसबुक के गवर्नेंस और इलेक्शंस के ग्लोबल हेड, वॉट्सएप के ग्लोबल सीईओ, लोकसभा चुनाव के दौरान आंखी दास से भी मुलाकात कर इस मुद्दे को उठाया था, लेकिन इस दिशा में कुछ भी नहीं किया गया।

एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया कि फेसबुक के कर्मचारी बीजेपी के नियंत्रण में काम कर रहे हैं। उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा कि अलग-अलग देशों के लिए फेसबुक के अलग-अलग मानक क्यों, यह किस तरह का निष्पक्ष मंच है। यह रिपोर्ट बीजेपी के लिए नुकसानदायक है। अब समय आ गया है कि बीजेपी के फेसबुक के साथ संबंधों का खुलासा किया जाए।

सूचना प्रौद्योगिकी पर संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि समिति रिपोर्ट के बारे में फेसबुक का पक्ष जानना चाहेगी। शशि थरूर ने ट्वीट किया, 'मैं इसमें उठाए गए मुद्दों को देखूंगा और निश्चित रूप से जिनका नाम आया है, उनसे जवाब मागूंगा।'

थरूर की टिप्पणी पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि उन्हीं विषयों को समिति के समक्ष उठाया जा सकता है जो स्वीकार्य हैं और संसदीय स्थायी समितियों के नियमों के अनुरूप हैं। उन्होंने कहा कि इन समितियों को सदस्यों द्वारा अपनी पार्टी के नेताओं के ‘अहम’ के तुष्टीकरण के लिए राजनीतिक मंच नहीं बनाना चाहिए।

रविशंकर ने दिया जवाब

कांग्रेस द्वारा इस मसले पर हमलावर होने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विपक्षी दल को कैंब्रिज एनालिटिका मुद्दे की याद दिलाने का प्रयास किया। प्रसाद ने पलटवार करते हुए ट्वीट किया, ‘जो हारने वाले लोग अपनी ही पार्टी में लोगों को प्रभावित नहीं कर सकते, वे ऐसा माहौल बनाते रहते हैं कि पूरी दुनिया पर भाजपा और आरएसएस का नियंत्रण है।’

उन्होंने कहा, ‘आप चुनाव से पहले आंकड़ों को हथियार बनाने के लिए कैंब्रिज एनालिटिका तथा फेसबुक के साथ गठजोड़ करते हुए रंगे हाथ पकड़े गये थे और अब हमसे सवाल पूछने की धृष्टता कर रहे हैं।’

राहुल के बयानों पर जवाब देते हुए प्रसाद ने यह भी कहा, ‘सच यह है कि आज सूचना प्राप्त करने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लोकतांत्रिक रूप दिया गया है। अब इन पर आपके परिवार के अनुयायियों का कब्जा नहीं रहा है और इसलिए यह बात आपको चुभती है।’

गौरतलब है कि प्रसाद ने जिस कैंब्रिज एनालिटिका का जिक्र किया वह 2018 में कांग्रेस पर लगे आरोपों से संबंधित है। आरोप थे कि ब्रिटिश कंपनी ने 2019 के लोकसभा चुनावों में मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए कांग्रेस को फेसबुक की अनेक पोस्ट का विश्लेषण करने की पेशकश की थी। कांग्रेस ने आरोपों को खारिज कर दिया था।

फेसबुक ने भी दी सफाई

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक ने भी इस मसले पर सफाई दी है। फेसबुक के प्रवक्ता ने कहा है कि यह प्लेटफॉर्म नफरत या हिंसा फैलाने वाले पोस्ट को लेकर नियमों की अनदेखी कभी नहीं करता है। उसने कहा कि इसके लिए दुनियाभर में एक ही मापदंड लागू हैं जिससे किसी भी राजनीतिक दल या अन्य संस्थान या फिर उससे जुड़े व्यक्ति को कोई छूट नहीं दी जाती है।

फेसबुक प्रवक्ता ने कहा, 'हम हिंसा को उकसाने वाले हेट स्पीच और कंटेंट को प्रतिबंधित करते हैं। हम यह देखे बिना इन नीतियों को दुनियाभर में लागू करते हैं कि किसी की क्या राजनीतिक हैसियत है या वो किस दल से जुड़ा है। हम निष्पक्षता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए नियमों को और धारदार बना रहे हैं। साथ ही हम अपनी प्रक्रियाओं की नियमित रूप से ऑडिंटिंग भी करते रहते हैं।'

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

इसे भी पढ़ें : #सोशल_मीडिया : सत्ताधारियों से पूरी दुनिया में है फेसबुक की नजदीकी

#सोशल_मीडिया : क्या सुरक्षा उपायों को लेकर व्हाट्सऐप ने अपना पल्ला झाड़ लिया है? 

Rahul Gandhi
WhatsApp
Facebook
BJP
RSS
CPI
Social Media

Related Stories

बीजेपी के चुनावी अभियान में नियमों को अनदेखा कर जमकर हुआ फेसबुक का इस्तेमाल

फ़ेसबुक पर 23 अज्ञात विज्ञापनदाताओं ने बीजेपी को प्रोत्साहित करने के लिए जमा किये 5 करोड़ रुपये

चुनाव के रंग: कहीं विधायक ने दी धमकी तो कहीं लगाई उठक-बैठक, कई जगह मतदान का बहिष्कार

पंजाब विधानसभा चुनाव: प्रचार का नया हथियार बना सोशल मीडिया, अख़बार हुए पीछे

अफ़्रीका : तानाशाह सोशल मीडिया का इस्तेमाल अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए कर रहे हैं

मुख्यमंत्री पर टिप्पणी पड़ी शहीद ब्रिगेडियर की बेटी को भारी, भक्तों ने किया ट्रोल

मृतक को अपमानित करने वालों का गिरोह!

सांप्रदायिक घटनाओं में हालिया उछाल के पीछे कौन?

हेट स्पीच और भ्रामक सूचनाओं पर फेसबुक कार्रवाई क्यों नहीं करता?

वे कौन लोग हैं जो गोडसे की ज़िंदाबाद करते हैं?


बाकी खबरें

  • chhat
    भाषा
    भाजपा सांसद ने डीडीएमए के प्रतिबंधों के बावजूद यमुना किनारे छठ पूजा की तैयारियों की शुरुआत की
    08 Nov 2021
    कोविड महामारी के चलते डीडीएमए ने इस साल यमुना घाटों पर छठ पूजा के आयोजन पर रोक लगा दी है। डीडीएमए ने प्रशासन और पुलिस को इस रोक का सख्ती से पालन करने का निर्देश भी जारी किया है।
  • SC
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
    लखीमपुर हिंसा की जांच से सुप्रीम कोर्ट नाख़ुश, हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की निगरानी का सुझाव
    08 Nov 2021
    पीठ ने आरोपपत्र दाखिल किए जाने तक जांच की निगरानी करने के लिए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश राकेश कुमार जैन या न्यायमूर्ति रंजीत सिंह के नाम का सुझाव दिया। पीठ ने कहा कि मामले की…
  • journalist has been sitting on dharna for 50 days in Chandauli
    सरोजिनी बिष्ट
    यूपी के चंदौली में 50 दिन से धरने पर बैठा है एक पत्रकार, लेकिन कोई सुनवाई नहीं
    08 Nov 2021
    विजय विश्वकर्मा नाम के स्थानीय पत्रकार अपने ऊपर लादे गए मुक़दमों के ख़िलाफ़ अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। उनकी इस लड़ाई में समाज का वह तमाम प्रगतिशील तबका भी साझीदार है जो लगातार एक भ्रष्ट व्यवस्था…
  • cycle rally
    न्यूज़क्लिक टीम
    दिल्ली: महंगाई के ख़िलाफ़ मज़दूरों, महिलाओं, छात्र-नौजवानों व कलाकारों ने एक साथ खोला मोर्चा
    08 Nov 2021
    दिल्ली के विभिन्न इलाकों से सैकड़ों की संख्या में आये मज़दूरों, महिलाओं, छात्रों, नौजवानों व कलाकारों ने साइकल रैली व जुलूस में हिस्सा लिया। रामलीला मैदान के सामने ज़ाकिर हुसैन कॉलेज से शुरू हुई रैली…
  • Gujarat fishermen firing
    भाषा
    गुजरात मछुआरा गोलीबारी: 10 पाकिस्तानी नौवहन सुरक्षाकर्मियों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज
    08 Nov 2021
    गुजरात के अपतटीय क्षेत्र में अरब सागर में पीएमएसए के कर्मियों ने मछली पकड़ने वाली एक नौका पर शनिवार को गोली चला दी थी जिसमें चालक दल के एक सदस्य की मौत हो गयी और अन्य एक घायल हो गया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License