NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
अर्थव्यवस्था
क्यों अर्थव्यस्था में जल्द सुधार की उम्मीद बेमानी है?
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक के ताजा अनुमान से यही लगता है कि अर्थव्यवस्था के कोरोना वायरस महामारी के असर से जल्द बाहर निकलने की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
17 Oct 2020
अर्थव्यस्था

विश्व बैंक के अध्यक्ष डेविड मालपास ने कहा है कि कोरोना वायरस महामारी के चलते दुनिया 1930 के दशक की महामंदी के बाद से सबसे गहरी मंदी से जूझ रही है और उन्होंने कोविड-19 महामारी को कई विकासशील और सबसे गरीब देशों के लिए ‘भयावह घटना’ बताया।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि आर्थिक संकुचन की सीमा को देखते हुए कई देशों में ऋण संकट का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने कहा, ‘मंदी बहुत गहरी है, महामंदी के बाद से सबसे बड़ी मंदी में एक है। और कई विकासशील देशों तथा सबसे गरीब देशों के लोगों के लिए ये वास्तव में अवसाद की एक भयावह घटना है।’

उन्होंने कहा कि इस बैठक और कार्रवाई का केंद्र बिंदु इन देशों को राहत पहुंचाना है तथा विश्व बैंक इन देशों के लिए एक बड़ा वृद्धि कार्यक्रम तैयार कर रहा है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि विश्व बैंक को लगता है कि इस समय ‘के’ (K) आाकर का सुधार हो रहा है। ‘K’ आकार के सुधार का अर्थ मंदी के बाद दुनिया के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग दर से सुधार का होना है।

इसका मतलब है कि उन्नत अर्थव्यवस्थाएं विशेष रूप से अपने वित्तीय बाजारों और उन लोगों के लिए सहायता प्रदान करने में सक्षम हैं जो घर पर रहकर काम रहे हैं, लेकिन जो लोग अनौपचारिक अर्थव्यवस्था के भीतर हैं, उन्होंने अपनी नौकरी खो दी है और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों पर निर्भर हैं।

मालपास ने कहा कि विकासशील देशों के लिए, खासकर निर्धनतम विकासशील देशों के लिए, ‘K’ में नीचे की ओर जाने वाली रेखा निराशाजनक मंदी या महामंदी का संकेत है। नौकरियां खत्म हो जाने, आय में गिरावट के कारण और दूसरे देशों में काम करने वाले मजदूरों से जो पैसा आता था उसके बंद हो जाने से निर्धनतम देशों की जनता इसे झेल रही है।

इसी तरह आईएमएफ के अनुसार इस वित्त वर्ष में भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी 10.3 प्रतिशत गिरेगी। संस्था ने खुद जून में सिर्फ 4.5 प्रतिशत गिरावट की बात की थी, लेकिन उसने अब अपना अनुमान और नीचे कर दिया है। यही नहीं, उसने यह भी कहा है कि 10.3 प्रतिशत की गिरावट के बाद प्रति व्यक्ति जीडीपी के मामले में भारत बांग्लादेश से भी पीछे हो जाएगा।

चालू वित्त वर्ष के अंत तक मार्च 2021 में भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी गिर कर 1,877 डॉलर पर पहुंच जाएगी, जबकि बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति जीडीपी में बढ़ोतरी होगी और वो 1,888 डॉलर पर पहुंच जाएगी। आईएमएफ के अनुसार दक्षिण एशिया में श्रीलंका के बाद भारत ही सबसे बुरी तरह से प्रभावित अर्थव्यवस्था होने जा रहा है।

गौरतलब है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आईएमएफ की ओर से जारी किए गए प्रति व्यक्ति जीडीपी के आंकड़ों को ट्वीट किया है। इस ट्वीट में राहुल गांधी ने कटाक्ष करते हुए कहा है, ‘बीजेपी के नफरत भरे सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की 6 साल की ठोस उपलब्धि, बांग्लादेश भारत से आगे निकलने के लिए तैयार है।’

अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टलीना जॉर्जीवा ने कहा कि आज दुनिया के सामने कोरोना वायरस महामारी से निपटने और बेहतर कल बनाने की दोहरी चुनौती है।

उन्होंने कहा, ‘महामारी से पहले ही 10 लाख से अधिक लोगों की जानें जा चुकी है। इस संकट के आर्थिक प्रभाव से विश्व अर्थव्यवस्था इस साल 4.4 प्रतिशत घटेगी और अगले साल उत्पादन में 11,000 अरब डॉलर की कमी की आशंका है। इसके अलावा दशकों में पहली बार बड़े स्तर पर व्यवधान और गरीबी बढ़ने से लोगों में एक हताशा है, जिसे बयां नहीं किया जा सकता।’

जॉर्जीवा ने कहा कि वृद्धि, रोजगार और जीवन स्तर में सुधार के लिये समझ-बूझ के साथ वृहत आर्थिक नीतियों और मजबूत संस्थानों की जरूरत है।

मीडिया कॉन्फ्रेंस में जॉर्जीवा ने जो तीन सुझाव रखे हैं वे गौर करने लायक हैं। पहला, बीमारी से निपटना, दूसरा लचीली और समावेशी अर्थव्यवस्था का निर्माण और तीसरा कर्जों पर ध्यान देना। गौरतलब है कि 2021 में वैश्विक कर्ज ग्लोबल जीडीपी के 100 फीसदी की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच जाने का अनुमान है। अभी दुनिया भर की तमाम सरकारें लंबे समय तक दोनों हाथों से कर्ज लेने को मजबूर हैं। सोचने की बात है कि ये कर्जे अगर समय से वापस नहीं हुए तो क्या होगा।

अगर हम इस भारत के संदर्भ में देखें तो हमारी अर्थव्यवस्था अभी भी फिर से अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पाई है। अभी जितने भी आंकड़े आ रहे हैं वह मंदी का संकेत दे रहे हैं। महामारी के दौरान नौकरियां तो पूरी दुनिया में गईं लेकिन करोड़ों लोगों का शहरों से गांव की तरफ वैसा पलायन और कहीं देखने को नहीं मिला जैसा भारत में मिला।

एक आकलन के अनुसार सिर्फ अप्रैल महीने तक ही करीब 12 करोड़ लोगों का रोजगार छिन गया था। इनमें 9 करोड़ से ज़्यादा दिहाड़ी मजदूर और छोटे व्यापारियों के यहां काम करने वाले कर्मचारी थे। इनमें से बड़ी संख्या में मज़दूर खेती-किसानी में एडजस्ट हुए लेकिन वहां भी काम कम और लोग ज़्यादा होने से स्थिति ठीक नहीं रही। रोजगार का आकलन करने वाली निजी संस्था सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) ने कहा है कि अप्रैल-अगस्त के दौरान लगभग 2.1 करोड़ वेतनभोगी कर्मचारियों ने अपनी नौकरी खो दी। ऐसे में जब तक इन सब लोगों को नौकरियां वापस नहीं मिलती तक इस स्थिति में सुधार की गुंजाइश नहीं है। ताजा अनुमान यही बता रहे हैं कि इसके लिए लंबे समय तक इंतजार करना होगा।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

COVID-19
Global Economy
Economic Recession
IMF
World Bank
David Malpass
indian economy

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

महामारी में लोग झेल रहे थे दर्द, बंपर कमाई करती रहीं- फार्मा, ऑयल और टेक्नोलोजी की कंपनियां


बाकी खबरें

  • Savarkar and gandhi
    राम पुनियानी
    क्या गांधी ने सावरकर से दया याचिका दायर करने को कहा था?
    18 Oct 2021
    विशिष्ट हिंदू राष्ट्र की धारणा को विकसित करने वाले सावरकर ने अंडमान से अंग्रेज़ों को दया याचिकायें लिखी थीं और ऐसा करने के लिए उन्हें किसी और ने नहीं कहा था बल्कि यह उनके ख़ुद का निजी फ़ैसला था।
  • gandhi ji and sawarkar
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    गांधी बनाम सावरकरः हिंद स्वराज बनाम हिंदुत्व
    18 Oct 2021
    असली सवाल महात्मा गांधी बनाम सावरकर का नहीं है। असली सवाल उन दो दृष्टियों का है जो एक दूसरे से भिन्न हैं और जिनकी नैतिकता में जमीन आसमान का अंतर है। यह अंतर्विरोध रहेगा और ‘अमृत महोत्सव’ में इस पर…
  • kisan andolan
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मंत्री अजय मिश्रा की बर्ख़ास्तगी की मांग को लेकर किसानों का ‘रेल रोको’ आंदोलन
    18 Oct 2021
    एसकेएम के मुताबिक आज का रेल रोको आंदोलन कुल 6 घंटे का रहेगा। इस दौरान पूरे देश में रेल सेवाएं सुबह 10 से शाम 4 बजे तक बाधित की जाएंगी। रेल संपत्ति को बिना क्षति पहुंचाए, रेल रोको शांतिपूर्ण रहेगा।…
  • Coal
    प्रबीर पुरकायस्थ
    बिजली की मौजूदा तंगी सरकारी नियोजन में आपराधिक उपेक्षा का नतीजा है
    18 Oct 2021
    जहां तक बिजलीघरों में पर्याप्त कोयला न रहने के वर्तमान संकट का सवाल है, यह नियोजन के अभाव और सरकार की घोर अक्षमता के योग का नतीजा है। 
  • Putin
    जेम्स डब्ल्यू कार्डेन
    रूस किस तरह का ख़तरा है?
    18 Oct 2021
    रूसी खतरे के अलावा किसी भी विषय पर द्विदलीय सहमति इतनी अचल नहीं है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License