NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
हर्षिल के सेब किसानों की समस्याओं का हल क्यों नहीं ढूंढ पायी उत्तराखंड सरकार
हर्षिल के काश्तकारों ने इस महोत्सव का सीधे तौर पर बायकॉट कर दिया। महोत्सव शुरू होने के चार रोज़ पहले से ही हर्षिल में धरना-प्रदर्शन शुरू हो गया था। महोत्सव के दिन हर्षिल में किसानों ने ढोल-दमाऊं जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ राज्य सरकार के विरोध में रैली निकाली।
वर्षा सिंह
25 Sep 2021
Harshil farmers
हर्षिल में सेब किसानों की समस्याओं की अनदेखी को लेकर विरोध-प्रदर्शन। फोटो: माधवेंद्र रावत

देहरादून में अंतर्राष्ट्रीय सेब महोत्सव की ख़बर से ही हर्षिल की ठंडी वादियों के सेब किसानों का पारा गरम होने लगा था। मौजूदा भाजपा सरकार अपने कार्यकाल के आखिरी साल में है। चुनावी वर्ष में घोषणाओं की झड़ी लगाई जा रही है। लेकिन सेब किसानों की मूल दिक्कतें अब भी कायम हैं। इन पांच वर्षों में उनके लिए कुछ नहीं बदला। उत्तरकाशी में हर्षिल समेत 8 गांवों के किसान अब भी बागवानी से जुड़ी जरूरतों के लिए हिमाचल का मुंह ताक रहे हैं।

24 सितंबर को देहरादून में तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेब महोत्सव शुरू हुआ। जिसमें हिमाचल समेत दुनियाभर के सेब उत्पादक अपने उत्पाद और अनुभव साझा कर रहे हैं। हर्षिल के काश्तकारों ने इस महोत्सव का सीधे तौर पर बायकॉट कर दिया। महोत्सव शुरू होने के चार रोज़ पहले से ही हर्षिल में धरना-प्रदर्शन शुरू हो गया था। महोत्सव के दिन शुक्रवार को हर्षिल में किसानों ने ढोल-दमाऊं जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ राज्य सरकार के विरोध में रैली निकाली।

उत्तरकाशी में हर्षिल घाटी के 8 गांव सुक्की, झाला, पुराली, जसपुर, बगोरी, हर्षिल, धराली और मुखबा सेब उत्पादन के लिए मशहूर हैं। यहां के सेब की देश-दुनिया में अच्छी मांग है। इसके बावजूद राज्य सरकार किसानों की समस्याओं का हल नहीं तलाश सकी।

देहरादून में 24 से 26 सितंबर तक अंतर्राष्ट्रीय सेब महोत्सव। फोटो:  वर्षा सिंह

हर्षिल के सेब उत्पादकों की समस्याएं

प्राकृतिक आपदा, भूस्खलन, रास्ते बंद होना जैसी वजहों से कई बार हर्षिल के सेब बाज़ार तक नहीं पहुंच पाते और किसानों का भारी नुकसान होता है। किसानों की लगातार चली आ रही मांग के बाद हर्षिल घाटी के झाला गांव में  वर्ष 2018 में कोल्ड स्टोरेज बनकर तैयार हुआ और तीन वर्ष तक चला। लेकिन इस वर्ष कोल्ड स्टोरेज बंद पड़ा  है। सरकार ने इसे शुरू नहीं किया। सेब काश्तकार कहते हैं कि इससे हमें भारी नुकसान उठाना पड़ा है। कोल्ड स्टोरेज में सेब रहने से किसान अपनी उपज की बेहतर कीमत हासिल कर सकता है।

दूसरी बड़ी समस्या वन्यजीवों को लेकर है। भालुओं, लंगूरों और तोतों के झुंड के चलते आठों गांव में जंगली जानवर पेड़ों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। दो दशक से ये समस्या गंभीर बनी हुई है। सेब काश्तकारों ने वन विभाग और उद्यान विभाग से मांग की थी कि उन्हें ANIDERS (Animal Intrusion Detection and Repellent System) मुहैया कराया जाए। ये सोलर से चलने वाला यंत्र है। जिसमें जंगली जानवरों के नज़दीक आने पर रंग-बिरंगी रोशनी और अलग-अलग किस्मों की आवाज़ निकलती है। जिससे वन्यजीव भाग जाते हैं।

हर्षिल घाटी के 8 गांवों में सेब उत्पादन आजीविका का मुख्य ज़रिया है। फोटो: वर्षा सिंह

‘महोत्सव की जगह किसानों पर करते खर्च’

हर्षिल वन पंचायत के सरपंच और सेब काश्तकार माधवेंद्र सिंह रावत कहते हैं कि हर्षिल के लोगों की आजीविका का मुख्य ज़रिया सेब ही है। हमने उद्यान विभाग और वन विभाग के सामने लगातार अपनी समस्याएं रखीं। लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला है। हम सभी किसान ये मांग करते हैं कि वन्यजीवों से बचाव के यंत्र हमें सब्सिडी पर उपलब्ध करा दें लेकिन सरकार इसके लिए भी तैयार नहीं है। सोलर घेरबाड़ जैसे विकल्प भी हैं लेकिन इन पांच वर्षों में इस पर एक काम नहीं हुआ।   

किसान, कृषि मंत्री सुबोध उनियाल के इस बयान से भी नाराज़ हैं कि बाज़ार में जम्मू-कश्मीर के सेब की मांग और पहचान हर्षिल के सेबों से ज्यादा ज्यादा है। मंत्री के इस बयान पर उत्तरकाशी के धराली गांव के प्रगतिशील सेब काश्तकार सचेंद्र पंवार कहते हैं “राज्य सरकार हर्षिल के सेब की ब्रांडिंग की बात करती है और उन्हें ही ये पता नहीं की हर्षिल के सेब की गुणवत्ता कश्मीर के सेबों से बेहतर है। कश्मीर में सेब का उत्पादन ज्यादा है। लेकिन गुणवत्ता के मामले में हमारे सेब हिमाचल के किन्नौर के सेबों की बराबरी करते हैं। जो कि देश का सर्वश्रेष्ठ सेब माना जाता है। ये हमारी जलवायु का असर है। यही वजह है कि किन्नौर से सेब लेने वाले खरीदार अब हर्षिल भी आ रहे हैं”।

सचेंद्र कहते हैं “देहरादून में अंतर्राष्ट्रीय सेब महोत्सव के नाम पर लाखों रुपये खर्च किये जा रहे हैं और हमारे लिये बना कोल्ड स्टोरेज तक शुरू नहीं किया गया। सेब काश्तकारों ने फैसला किया है कि हम महोत्सव का बहिष्कार करेंगे”।  

हर्षिल घाटी के ही सुखीटाप गांव के किसान मोहन सिंह जानना चाहते हैं कि जब अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव में हर्षिल का स्टॉल खाली मिलेगा तो सरकार क्या जवाब देगी। “कोल्ड स्टोरेज बंद रहने और वन्यजीवों के चलते हमारी फसल का बहुत अधिक नुकसान हुआ है और सरकार ने इस पर कुछ भी नहीं किया”।

सेब महोत्सव में उठी किसानों की समस्याएं। फोटो: वर्षा सिंह

अंतर्राष्ट्रीय सेब महोत्सव के पहले दिन फजीहत

देहरादून में अंतर्राष्ट्रीय सेब महोत्सव परिसर में अच्छी चहल-पहल रही। कृषि विभाग, उद्यान विभाग, यमुना घाटी, अडानी समूह, हिमाचल के काश्तकार समेत कई स्टॉल लगे थे। उत्तराखंड के सेबों की कई वेराइटी से मेज़ें सजी हुई थी। लेकिन हर्षिल के सेब यहां से नदारद रहे।

राज्य के उद्यान विभाग के निदेशक एचएस बावेजा मंच से उद्यान विभाग की योजनाओं से जुड़ी जानकारी दे रहे थे। उसी समय राज्य के पहले खेल मंत्री रहे नारायण सिंह राणा ने सेब उत्पादकों की समस्याएं उठाईं।

सभागार में मौजूद अधिकारियों और उत्तराखंड-हिमाचल से आए किसानों के बीच नारायण सिंह ने कहा “उद्यान विभाग सेब के किसानों को खाद और जरूरी दवाइयां तक नहीं दिला पा रहा है। सेब के किसान अपनी समस्याओं के हल, उन्नत किस्म की पौध, बीज, कृषि उपकरण के लिए हिमाचल प्रदेश जाना पड़ता है। ऐसा क्यों है? किसानों की जरूरत उनके अपने राज्य में क्यों नहीं पूरी हो रही?”

सेब की खेती को बढ़ावा देने के लिए पिछले वर्ष राज्य सरकार ने उत्तराखंड एप्पल फेडरेशन बनाया है। फेडरेशन के सचिव विपिन पंडित बताते हैं हिमाचल प्रदेश में सेब का सालाना तकरीबन 3000 करोड़ का व्यापार है। जबकि उत्तराखंड अभी मात्र 300 करोड़ का ही व्यापार कर रहा है। हिमाचल की सेब बगीचों की क्षमता पूरी हो चुकी है। जबकि उत्तराखंड में अब भी 3000 करोड़ तक व्यापार की संभावनाएं बनी हुई है। हम इस दिशा में कार्य कर रहे हैं।

कोल्ड स्टोरेज न चलने की समस्या पर विपिन मानते हैं कि इससे किसानों का नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि स्टोरेज का एक हिस्सा जल्द ही किसानों के लिए खोल दिया जाएगा। अडानी ग्रुप से इसके लिए बातचीत की गई है। वह ये भी मानते हैं कि जंगली जानवरों की समस्या पर्वतीय किसान परिवारों के लिए बड़ी समस्या बन चुकी है। जिसका अब तक कोई हल नहीं निकाला जा सका है।

(वर्षा सिंह, देहरादून स्थित स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

UTTARAKHAND
Harshil
Harshil farmers
Apple Farmers
Apple Farming
Apple Festival in Dehradun
International Apple Festival
Uttarakhand government
Pushkar Singh Dhami
Tirath Singh Rawat
Trivendra Singh Rawat
BJP

Related Stories

उत्तराखंड के ग्राम विकास पर भ्रष्टाचार, सरकारी उदासीनता के बादल

तमिलनाडु: छोटे बागानों के श्रमिकों को न्यूनतम मज़दूरी और कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रखा जा रहा है

आख़िर किसानों की जायज़ मांगों के आगे झुकी शिवराज सरकार

किसान-आंदोलन के पुनर्जीवन की तैयारियां तेज़

सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी

झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!

दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को मिला व्यापक जनसमर्थन, मज़दूरों के साथ किसान-छात्र-महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन

देशव्यापी हड़ताल का दूसरा दिन, जगह-जगह धरना-प्रदर्शन

यूपी चुनाव: पूर्वी क्षेत्र में विकल्पों की तलाश में दलित

बनारस की जंग—चिरईगांव का रंज : चुनाव में कहां गुम हो गया किसानों-बाग़बानों की आय दोगुना करने का भाजपाई एजेंडा!


बाकी खबरें

  • प्रियंका शंकर
    रूस के साथ बढ़ते तनाव के बीच, नॉर्वे में नाटो का सैन्य अभ्यास कितना महत्वपूर्ण?
    19 Mar 2022
    हालांकि यूक्रेन में युद्ध जारी है, और नाटो ने नॉर्वे में बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है, जो अभ्यास ठंडे इलाके में नाटो सैनिकों के युद्ध कौशल और नॉर्वे के सैन्य सुदृढीकरण के प्रबंधन की जांच करने के…
  • हर्षवर्धन
    क्रांतिदूत अज़ीमुल्ला जिन्होंने 'मादरे वतन भारत की जय' का नारा बुलंद किया था
    19 Mar 2022
    अज़ीमुल्ला ख़ान की 1857 के विद्रोह में भूमिका मात्र सैन्य और राजनीतिक मामलों तक ही सिमित नहीं थी, वो उस विद्रोह के एक महत्वपूर्ण विचारक भी थे।
  • विजय विनीत
    ग्राउंड रिपोर्ट: महंगाई-बेरोजगारी पर भारी पड़ी ‘नमक पॉलिटिक्स’
    19 Mar 2022
    तारा को महंगाई परेशान कर रही है तो बेरोजगारी का दर्द भी सता रहा है। वह कहती हैं, "सिर्फ मुफ्त में मिलने वाले सरकारी नमक का हक अदा करने के लिए हमने भाजपा को वोट दिया है। सरकार हमें मुफ्त में चावल-दाल…
  • इंदिरा जयसिंह
    नारीवादी वकालत: स्वतंत्रता आंदोलन का दूसरा पहलू
    19 Mar 2022
    हो सकता है कि भारत में वकालत का पेशा एक ऐसी पितृसत्तात्मक संस्कृति में डूबा हुआ हो, जिसमें महिलाओं को बाहर रखा जाता है, लेकिन संवैधानिक अदालतें एक ऐसी जगह होने की गुंज़ाइश बनाती हैं, जहां क़ानून को…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मध्यप्रदेश विधानसभा निर्धारित समय से नौ दिन पहले स्थगित, उठे सवाल!
    19 Mar 2022
    मध्यप्रदेश विधानसभा में बजट सत्र निर्धारित समय से नौ दिन पहले स्थगित कर दिया गया। माकपा ने इसके लिए शिवराज सरकार के साथ ही नेता प्रतिपक्ष को भी जिम्मेदार ठहराया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License