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स्वास्थ्य
भारत
नफ़रत भरे माहौल में क्या कोरोना वायरस से लड़ पाएगा भारत?
अब तक भारत में कोरोना वायरस के छह मामले सामने आ चुके हैं। इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि एक बार इस तरफ नज़र दौड़ाई जाए कि क्या भारत इससे बचने या लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार है?
अजय कुमार
03 Mar 2020
coronavirus
Image courtesy: NotSoCommon

कोरोनो वायरस के संक्रमण को लेकर रिपोर्ट पल-पल बदल रही है। लगातार संक्रमति देशों की संख्या बढ़ रही है। लांसेट की रिपोर्ट कहती है कि अभी तक कोरोना वायरस पूरी दुनिया के 70 से अधिक देशों में फ़ैल चुका है। पूरी दुनिया में कोरोना वायरस से जुड़े तकरीबन 90 हज़ार से मामले सामने आ चुके है। इसमें से 3 हज़ार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। चीन में इसे EPIDEMIC (स्थानिक महामारी) घोषित किया जा चुका है, चूँकि यह पूरी दुनिया में फ़ैल चुका है इसलिए हो सकता है कि दुनिया के स्तर पर भी इसे जल्द ही महामारी घोषित कर दिया जाए।

ऐसी स्थिति में भारत कोरोना वायरस की चपेट से कब तक बचकर रह सकता था। कल से लेकर अब तक भारत में कोरोना वायरस के छह मामले सामने आ चुके हैं। इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि एक बार इस तरफ नज़र दौड़ाई जाए कि क्या भारत इससे बचने और लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार है? इस सवाल पर विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक सीनियर अफसर कहते हैं कि ''भारत पूरी तरह से बेखबरी की स्थिति में है, मजे में है और संतुष्टि में है।''

अधिकारी का बयान चिंतित करने वाला है। इसलिए क्योंकि कोरोना वायरस का अब तक इलाज नहीं ढूढ़ा जा सका है। यह एक विषाणु यानी वायरस से फैल रहा संक्रमण है। भारत एक बहुत बड़ी सघन आबादी वाला इलाका है। जहां पर बहुत सारे लोगों के पास जीवन जीने की बुनियादी सुविधाएं भी नहीं है। ऐसे में हो सकता है कि यह वायरस भारत में बहुत तेजी से भी फैले।

भारत सरकार ने अब तक क्या किया है?

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने कोरोना के मामलों पर निगरानी रखने के लिए मंत्रियों के एक समूह (GoM) का गठन किया है।

- चीन से भारत आने वाले लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। किसी भी तरह की आशंका होने पर अलग रखकर उनका इलाज किया जा रहा है।

- कोरोना वायरस से जुड़ी शिकायत और सुझाव के लिए एक कॉल सेंटर शुरू किया गया है। इसका नंबर है: 01123978046 ये 24 घंटे काम करता है।

- ट्रैवल एडवाइज़री जारी की गई। ट्रैवल पॉलिसी में बदलाव किए गए।

- 21 हवाई अड्डों और सी पोर्ट (बंदरगाहों) पर यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग शुरू की गई है। थर्मल स्क्रीनिंग वो प्रक्रिया है जिसके तहत कोरोना जैसे वायरस के संक्रमण की जांच की जा रही है।

- कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री बी. श्रीरामुलू ने कहा कि हैदराबाद के एक अस्पताल में भर्ती कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए सभी लोगों के स्वास्थ्य पर एक चिकित्सीय दल नजर रख रहा है।

-केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा सोमवार को दिल्ली निवासी एक व्यक्ति में कोरोना वायरस की पुष्टि किए जाने के बाद एअर इंडिया के चालक दल के उन सदस्यों को 14 दिन तक अपने घर में पृथक रहने को कहा गया है जिनके विमान में उक्त व्यक्ति ने यात्रा की थी। जिस व्यक्ति में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई वह 25 फरवरी को वियना से दिल्ली आ रहे विमान में सवार था।

इसे भी पढ़ें :कोरोना वायरस: संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों पर नज़र रख रहा चिकित्सीय दल

लेकिन निगरानी रखने के यह सारे कदम इस बात से जुड़े हैं कि कोरोना वायरस के मामलों को भारत से दूर रखने में कामयाबी हासिल की जाए। मोटे तौर पर यह कहा जा सकता है कि सरकार का जोर इस बात पर ज्यादा है कि कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की शिनाख्त कर उन्हें एयरपोर्ट से ही बाहर रखा जाए। लेकिन इसमें भी एक कमी है। अगर कोई व्यक्ति ऐसे देश से आ रहा है जहां अभी कोरोनो वायरस का मामला रिपोर्ट नहीं हुआ है, तो उसे नहीं रोका जाएगा, लेकिन वह उस देश से पहले उस देश से आया है जहां संक्रमण हुआ था उसे कैसे रोका जाएगा। मतलब ये कि रोक रूट पर ही लगानी होगी।

इसके अलावा हमारे यहां इन क़दमों में ऐसी किसी भी पहल के बारे में नहीं बताया गया है, जो यह बताए कि कोरोना वायरस का संक्रमण भारत में हो गया तो इसे कैसे रोका जाएगा?

केरल में तीन मामले आये थे। केरल इनसे निपटने में कामयाब रहा क्योंकि केरल की बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत है। इसके साथ सच्चाई यह भी है कि कोरोना वायरस से प्रभावित लोगों की संख्या बहुत कम थी और इनमें संक्रमण बहुत शुरूआती स्तर पर था, अगर संक्रमण बाद के स्तरों में होता तो इसे रोक पाने में बहुत मुश्किलें आती। अगर कोरोना वायरस से प्रभावित लोगों की संख्या में भारी इजाफा होने लगे तब क्या होगा ?

हमारे यहां एम्स और सरकारी अस्पताल में मिलने वाली लम्बी डेटों और लम्बी लाइनों से तो आप परिचित ही होंगे। इससे आप समझ सकते हैं कि जब कोरोना वायरस का संक्रमण लाखों लोगों में होता है तब क्या हो सकता है? इसे संभालना कितना मुश्किल हो जाएगा। हमारी बुनियादी और स्वास्थ्य सुविधाएँ चीन जितना मजबूत नहीं कि हम छह- सात दिनों में ही अस्पताल खड़ा कर दे। कोरोना वायरस से लड़ने में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं का बहुत अधिक महत्व है। इसलिए चीन में कोरोना वायरस से जुड़े मामले तकरीबन 80 हजार से अधिक आएं और मौतें हुई तकरीबन 2800 और ईरान में तकरीबन 1500 से मामलें आये और मौतें हुई 66, इसका मतलब है कि जिनके पास वायरस से लड़ने की तैयारियां अधिक हैं या वायरस से लड़ने की ज्यादा क्षमता है, उन्होंने वायरस से लड़ने में ज्यादा कामयाबी पायी है। ऐसे में आप भारत के बारे में भी सोच सकते हैं।

साल 1897 का एपिडेमिक डिजीज नाम का एक कानून है। यह कानून एपिडेमिक बन चुके वायरस से संक्रमित लोगों को अलग रखने की बात करता है। प्राइवेट हॉस्पिटलों को एपिडेमिक वायरस से संक्रिमत लोगों के लिए अलग से व्यवस्था करने की सुझाव देता है।लेकिन हॉस्पिटल क्या इसका पालन करते हैं,इसके बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं है।

दिल्ली साइंस फोरम के सदस्य डी रघुनन्दन कहते हैं कि भारत की बुनियादी स्वास्थ्य से ऐसा कहीं से भी नहीं लगता कि भारत कोरोना वायरस से ठीक ढंग से जूझ पाएगा। हमने अभी तक केरला को कोरोना वायरस से जूझते हुए देखा है। केरल की तहसील, जिला और राज्य स्तर की स्वास्थ्य की बुनियादी सुविधाएं मजबूत है। इसलिए केरला इससे जूझ पाया। लेकिन यही भारत के दूसरे राज्यों के लिए नहीं कहा जा सकता है।। केरल के तीन मरीजों को सेल्फ क्वारांटाइन में रखा गया था। यानी उनकी घर पर ही अलग थलग रखने की सलाह दी गई थी।

इन मरीजों से दिन में दो बार डॉक्टर कॉल करके बात करते थे कि उन्होंने दिन भर क्या काम क्या ? किससे मिले और किस तरह से मिले। इस तरह से केरल ने काम किया। लेकिन जब यह लाखों लोगों में फैल जाएगा तब स्थिति कैसी हो सकती है उसके बारे में कहना नामुमकिन है।

दिल्ली साइंस फोरम के सदस्य डी रघुनन्दन दूसरे देशों के बारे में कहते हैं कि इस पर किसी भी देश को नहीं कहा जा सकता है की उसने कामयाबी पाई है। वजह यह कि इसका कोई इलाज नहीं है। अभी भी केवल रोकथाम के सहारे ही इससे रोकने की कोशिश की जा रही है। जापान के किसी क्रूज पर कारोना वायरस के संक्रमण की जानकारी आई। उस क्रूज को क्वारंटाइन कर दिया गया।

लेकिन जो व्यक्ति उन लोगों को खाना देने जाता था उससे वायरस जापान की तरफ फैल गया। उस पर रोक नहीं लगी। ठीक ऐसे ही समझिए कि अगर किसी को कोरोना वायरस हुआ, उसे अलग थलग भी रखा गया लेकिन उसकी छींक से किसी मेज या किसी सामान पर वायरस बिखर गए और दूसरे किसी आदमी ने उस मेज या सामान को छू लिया तब वायरस का संक्रमण होना तय है। अगर ऐसी स्थिति है तो सोचने वाली बात है कि भारत कैसे इस वायरस से लड़ पाएगा।

अब आशंकाओं की बात करते है। चूंकि यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संक्रमण के जरिए फैलना वाला रोग है। तब यह भी सोचकर देखिए कि जिस व्यक्ति को कोरोना वायरस होगा उसके साथ आसपास के लोग कैसा व्यवहार करेंगे? उस वक़्त जब लोगों में यह बात फैली होगी कि यह रोगी व्यक्ति के संपर्क में आने से फैल जाता है। जब पहली बार एचआईवी फैला था तो लोगों का शक इतना गहरा था कि लोग द्वारा ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों पर हमला करने की खबरें भी आती थी। मौजूदा समय के नफ़रत भरे माहौल में इसे सोचकर देखिए। लोगों के अंदर का डर अपने मन में मौजूद नफ़रत को लेकर इससे कैसे निपटेगा?

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