NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
शीत सत्र: संसद में पहले की अपेक्षा ज़्यादा आक्रामक नज़र आएगा विपक्ष
किसानों व कृषि से जुड़े मामलों के साथ-साथ कमरतोड़ महंगाई, बेरोजगारी, देश की बाहरी और आंतरिक सुरक्षा, पेगासस जासूसी कांड, श्रम कानून, त्रिपुरा दंगे, कश्मीर हिंसा और कोरोना जैसे मुद्दों पर भी सरकार की घेरेबंदी की जाएगी।
अफ़ज़ल इमाम
29 Nov 2021
loksabha

कांग्रेस के भीतर तृणमूल की सेंधमारी से दोनों पार्टियों में तनाव निश्चित रूप से बढ़ा है, लेकिन किसानों-मजदूरों व आम जनता के बुनियादी सवालों पर मोदी सरकार को घेरने के लिए समूचा विपक्ष न सिर्फ पूरी तरह एकजुट है, बल्कि पहले की अपेक्षा और भी आक्रामक नजर आ रहा है।

विवादित कृषि कानूनों को वापस लेने  संबंधी विधेयक पहले दिन ही लोकसभा में पेश किया जाएगा, लेकिन विपक्षी नेताओं ने तय किया है कि सभी उपजों पर एमएसपी को कानूनी अधिकार बनाने व बिजली संशोधन विधेयक वापस लेने समेत किसानों की जो आधा दर्जन प्रमुख मांगे हैं, उन्हें प्रमुखता से उठाया जाएगा।

किसानों व कृषि से जुड़े मामलों के साथ-साथ कमरतोड़ महंगाई, बेरोजगारी, चीन का अतिक्रमण समेत देश की बाहरी और आंतरिक सुरक्षा, पेगासस जासूसी कांड, श्रम कानून, त्रिपुरा दंगे, कश्मीर हिंसा और कोरोना से मरने वाले लोगों को 4-4 लाख रुपए मुआवजा देने के साथ-साथ इस महामारी से निपटने के लिए बनाए गए पीएम केयर फंड आदि जैसे मुद्दों पर भी सरकार की घेरेबंदी की जाएगी।

रविवार को सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में भी विपक्ष ने अपनी मंशा जाहिर कर दी है। यदि विपक्ष अपनी रणनीति में कामयाब हो जाता है तो इसका गहरा असर चुनाव वाले राज्यों पर भी पड़ेगा, जहां चुनावी बहस को जनता के बुनियादी सवालों के बजाए जिन्ना और अन्य सांप्रदायिक मुद्दों में उलझाने की कोशिशें की जा रही हैं। संसद का यह सत्र 29 नवंबर से 23 दिसंबर तक चलेगा, जिसमें करीब 19 बैठकें होनी हैं।

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में यह पहला मौका है, जब उसे किसानों के दबाव में झुकना पड़ा है। इसलिए विपक्ष इस अवसर को किसी भी सूरत में छोड़ना नहीं चाहता है। कुछ ही दिनों में यूपी, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा व मणिपुर में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, लिहाजा सभी पार्टियों के तेवरों में पहले अधिक आक्रामकता नजर आ रही है। सरकार को यूपीए घटकों के साथ-साथ अपने पुराने सहयोगी अकाली दल और विभिन्न मौकों पर अपने अलग-थलग दिखाने वाली बसपा के भी विरोध का सामना करना पडेगा। इतना ही नहीं कांग्रेस और तृणमूल के बीच इस बात की प्रतिस्पर्धा दिखाई पड़ सकती है कि भाजपा से सही मायने में राष्ट्रीय स्तर पर कौन मोर्चा ले सकता है? दोनों पार्टियों के बीच तनाव काफी बढ़ गया है, लेकिन संसद में उठाए जाने वाले मुद्दों को लेकर सहमति दिख रही है।

उधर किसानों ने भी दिल्ली की सीमाओं से संसद भवन के लिए कूच करने तैयारी कर ली थी, लेकिन फिलहाल उन्होंने अपने इस फैसले को टाल दिया है। उन्होंने अपनी मांगों को लेकर पीएम मोदी को जो चिट्ठी भेजी है, उसके जवाब का इंतजार वे 4 दिसंबर तक करना चाहते हैं। इसके बाद ही वे अपनी आगे की रणनीति तय करेंगे। इस पत्र में एमएसपी के लिए कानून बनाने, बिजली संशोधन विधेयक वापस लेने, आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों को मुआवजा व शहीद स्मारक, आंदोलनकारी किसानों पर किए गए मुकदमे वापस लेने और लखीमपुर- खीरी कांड मामले में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी की बर्खास्तगी व गिरफ्तारी आदि मांगे शामिल हैं।

साथ ही किसान यह भी चाहते हैं कि इन सभी मुद्दों पर सरकार उनके साथ औपचारिक रूप से बात करे, लेकिन अभी तक उन्हें इसका भी जवाब नहीं मिला है। ध्यान रहे जब लखीमपुर में किसानों को गाड़ियों के नीचे रौंदा गया था, तभी टेनी को पद से हटाने की मांग उठी थी, लेकिन वे अभी तक पद पर बने हुए हैं, हालांकि उनका बेटा आशीष मिश्रा गिरफ्तार हो चुका है। कहा जा रहा है कि यूपी चुनाव में वोटों का गणित बिगड़ने के डर से भाजपा टेनी के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रही है। विपक्ष पहले भी इस मामले को लेकर काफी मुखर रहा है। अब संसद सत्र के दौरान भी वह टेनी की बर्खास्तगी की मांग जोरशोर से करेगा।

ध्यान रहे कि पिछले सत्र से ठीक पहले पेगासस जासूसी कांड का खुलासा हुआ था, जिसके बाद संसद में काफी शोर शराबा हुआ था। इस मामले पर सरकार की तरफ से अभी तक कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इसकी जांच के लिए एक समिति गठित करने का आदेश दिया है। अब मोबाइल फोन कंपनी एप्पल द्वारा पेगासस की निर्माता इजरायली कंपनी एनएसओ पर मुकदमा किए जाने के बाद यह मामला फिर से गरमा गया है। विपक्ष का कहना है कि पेगासस जैसे जासूसी सॉफ्टवेयर सिर्फ सरकारें ही खरीद सकती हैं, इसलिए सरकार बताए कि इसे खरीदा गया है या नहीं? और इसका इस्तेमाल किन-किन लोगों के खिलाफ किया गया? कांग्रेस के एक बड़े नेता ने कहा है कि संसद के इस सत्र में भी सरकार से इन सवालों का जवाब मांगा जाएगा।

तीसरा सबसे अहम मुद्दा चीन द्वारा एलएसी पर गांव बसाने का है, जिसके बारे में अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा अपनी एक रिपोर्ट में खुलासा किया गया है। सरकार पहले चीन के मुद्दे पर अपना बयान दे चुकी है, लेकिन विपक्ष का कहना है कि चीनी अतिक्रमण के बारे में ताजा रिपोर्ट पर देश के सामने स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। इतना ही नहीं विपक्ष ने कश्मीर हिंसा, त्रिपुरा दंगे और यूपी में दलित परिवार की हत्या आदि जैसे मुद्दों पर भी सरकार को घेरने की तैयारी है।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

Parliament's winter session
Winter Session
Narendra modi
Modi government
opposition parties
Parliament session
Congress
TMC
New Farm Laws
Farm Laws Repealed

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

हार्दिक पटेल भाजपा में शामिल, कहा प्रधानमंत्री का छोटा सिपाही बनकर काम करूंगा

राज्यसभा सांसद बनने के लिए मीडिया टाइकून बन रहे हैं मोहरा!

ED के निशाने पर सोनिया-राहुल, राज्यसभा चुनावों से ऐन पहले क्यों!


बाकी खबरें

  • Israeli court rejects appeal for release of Palestinian detainee on hunger strike for 126 days
    पीपुल्स डिस्पैच
    इज़रायली अदालत ने 126 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे फिलिस्तीनी बंदी की रिहाई की अपील ख़ारिज की
    19 Nov 2021
    प्रशासनिक बंदी कायेद अल-फ़स्फौस को अपने लगातार भूख हड़ताल पर बैठने की वजह से गंभीर शारीरिक दुष्परिणामों का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें वजन घटने, निम्न रक्तचाप और अनियमित दिल की धड़कन शामिल है। डाक्टरों…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटे में 11,106 नए मामले, 459 मरीज़ों की मौत
    19 Nov 2021
    केरल रोज़ संशोधित आंकड़े जोड़ रहा है, लेकिन अन्य राज्य ऐसा नहीं कर रहे हैं। ऐसे में दावा किया जा रहा है कि देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 1 लाख 26 हज़ार 620 हो गई है।
  • US, China Commence ‘Responsible Competition’
    एम. के. भद्रकुमार
    अमेरिका, चीन ने 'ज़िम्मेदार प्रतिस्पर्धा' की शुरूआत की
    19 Nov 2021
    बाइडेन और शी के बीच हुई वर्चुअल मीटिंग का सार यह है कि यूएस-चीन संबंधों का अक्रियाशील चरण समाप्त हो सकता है।
  • Miguel
    तान्या वाधवा
    दुनिया क्यूबा के साथ खड़ी है
    19 Nov 2021
    दुनिया भर के सामाजिक आंदोलनों और संगठनों ने क्यूबा के साथ एकजुटता दिखायी और 15 नवंबर को देश में अमेरिका समर्थित विपक्ष के विरोध की योजना को ख़ारिज करते हुए बेशुमार प्रदर्शनों का आयोजन किया गया।
  • YCL
    जोए एलेक्जेंड्रा, विजय प्रसाद
    COP-26 में जिस एकमात्र व्यक्ति पर गिरफ़्तारी के बाद धाराएं लगाई गईं, वह कम्यूनिस्ट था
    19 Nov 2021
    बढ़ते पर्यावरण संकट के बीच यह ज़्यादा साफ़ हो चुका है कि पूंजीवाद ना केवल इस समस्या की जड़ है, बल्कि यह कोई वैकल्पिक समाधान भी उपलब्ध नहीं कराता। जो लोग "समाजवाद या अवसान" के आह्वान को बुलंद कर रहे…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License