NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
आधी नहीं पूरी आबादी का विकल्प बनें महिलाएं
महिलाओं की राजनीति में भागीदारी और भूमिका को लेकर “मेरा रंग फाउंडेशन ट्रस्ट” के वार्षिक समारोह में 'राजनिति और महिलाएं' विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में महिलाओं की समस्याओं, राजनीति, संपत्ति और वैश्विक स्तर पर आ रहे बदलाओं की चर्चा की गई।
प्रदीप सिंह
14 Oct 2019
मेरा रंग फाउंडेशन ट्रस्ट

महिला आरक्षण लंबे समय से संसद में पास होने का इंतजार कर रहा है। लेकिन देश में कभी भी राष्ट्रीय स्तर पर महिला आरक्षण के लिए कोई सशक्त आंदोलन नहीं चला। महिलाओं का एक वर्ग महिला आरक्षण की मांग उठाता रहा है। आरक्षण न होने के बावजूद आज महिलाएं समाज और जीवन के हर क्षेत्र में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।

लेकिन चुनावी राजनीति में जिस तरह से शासक वर्ग की परेशानियां बढ़ रही है उसे देखते हुए बुद्धजीवियों का कहना है कि महिला आरक्षण देर-सबेर संसद में पास हो जाएगा। ऐसे में संसद और विधानसभा में महिलाओं की राजनीतिक दिशा क्या होगी? महिला सवालों पर उनका नज़रिया क्या होगा? क्या उनके पास महिलाओं और देश के लिए कोई मॉडल है? क्या उनका भी वहीं हश्र नहीं होगा जो दलित और ओबीसी प्रतिनिधियों का हुआ?

अब तक की लोकसभा को देखा जाए तो सत्रहवीं लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या सबसे ज्यादा है। लेकिन महिलाओं के सवालों पर उनकी 'आपराधिक चुप्पी' है। कठुआ, उन्नाव और भाजपा नेता स्वामी चिन्मयानंद के मुद्दे पर एक भी महिला सांसद ने सवाल नहीं उठाया। ऐसे में आने वाले दिनों में महिलाओं की राजनीति में भागीदारी और भूमिका को लेकर “मेरा रंग फाउंडेशन ट्रस्ट” के वार्षिक समारोह में 'राजनिति और महिलाएं' विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में महिलाओं की समस्याओं, राजनीति, संपत्ति और वैश्विक स्तर पर आ रहे बदलाओं की चर्चा की गई।

जाने-माने राजनीतिक विश्लेषक अभय कुमार दुबे ने कहा कि “अगर राजनीति में महिलाएं आ रही हैं तो उन्हें एक वैकल्पिक राजनीति के बारे में भी सोचना होगा। नहीं तो पितृसत्ता को कोई चुनौती नहीं मिलेगी और एक महिला भी परोक्ष रूप से पितृसत्ता को ही मजबूत बनाती रहेगी। इसके लिए यह जरूरी है कि इस वैकल्पिक राजनीति का सैद्दांतिक सूत्रीकरण भी किया जाए।”

अपनी बात को विस्तार देते हुए उन्होंने कहा कि भारत की राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रणाली ऐसी है कि कोई भी अल्पसंख्यक, दलित,पिछड़ा और महिला लोकसभा-विधानसभा का चुनाव जीतने के बाद यह नहीं कह सकता कि वह अपने जाति-धर्म का ज्यादा प्रतिनिधत्व करता है। इसलिए किसी वर्ग के प्रतिनिधि को सबका प्रतिनिधि बनना पड़ेगा तभी वह अपने वर्ग-समुदाय के लिए कुछ काम कर सकता है।

अभय दुबे ने कहा कि आज देश में पहले के मुकाबले दलित और पिछड़ों के प्रतिनिधि पहले से ज्यादा चुनकर आ रहे हैं। कई राज्यों में दलित और पिछड़ों का प्रतिनिधित्व का दावा करने वाली पार्टियों की सरकार रही,लेकिन कोई राजनीतिक मॉडल न होने के कारण दलितों-पिछडों के जीवन में कोई खास बदलाव नहीं आया।  

गांधी शांति प्रतिष्ठान में आयोजित इस कार्यक्रम में महिलाओं की राजनीतिक भूमिका और भागीदारी पर विचार-विमर्श हुआ। वक्ताओं ने कहा कि एक महिला का राजनीति में आना ही साहसिक कदम है। राजनीति में बने रहना उससे भी अधिक कठिन है। सबने यह स्वीकार किया कि बदलाव आ रहा है और आने वाले समय में इस प्रश्न पर ज्यादा गहराई से विचार-विमर्श करना होगा कि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी कैसे बढ़ाई जाए।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता रागिनी नायक ने कहा कि बिना किसी पोलिटिकल बैकग्राउंड के राजनीति में आना बहुत मुश्किल होता है, वह भी एक स्त्री के लिए। उन्होंने कहा कि जब एक स्त्री राजनीति मे आती है तो उस पर उम्मीदों का बहुत बड़ा बोझ भी लाद दिया जाता है। वो बदलाव तभी लाएंगी जब वह कुर्सी पर आसीन होंगी। महिला मुद्दों पर महिला ज्यादा संवेदनशील तरीके से सोच सकती है।

शीबा असलम फ़हमी ने कहा कि महिलाओं में राजनीतिक चेतना का विकास न हो इसकी शुरुआत घर से ही होने लगती है। क्योंकि अगर लड़की के भीतर विवेक पैदा होगा तो वह इसकी शुरुआत सबसे पहले अपने घर से ही करेगी। वह सवाल करेगी, अधिकार मांगेगी। लेकिन महिलाओं को ससुराल से नहीं मायके से ही अधिकार मिलने चाहिए। मायके मे यदि उसे बराबरी, सम्मान, संपत्ति और अपने मन से कुछ करने का अधिकार होगा तभी वह ससुराल में अधिकार की बात कर सकती है। महिलाओं को संपत्ति में अधिकार मिले तो वह अपने पैरों पर खड़ी हो सकती है।
IMG-20191014-WA0025.jpg
सपा नेता एवं इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष रिचा सिंह ने कहा कि “जब एक लड़की राजनीति में आना चाहती है तो घर से लेकर बाहर तक उसके मनोबल को तोड़ने का पूरा प्रयास किया जाता है। अगर कहीं वह सफल हो जाती है तो माना जाता है कि वह अपनी प्रतिभा के दम पर सफल नहीं हुई है बल्कि उसने कुछ शॉर्टकट तलाशे हैं। महिलाओं को तो समाज में क्या गर्भ से ही मारने की साजिश रची जाती है। यदि पैदा हो गई तो पढ़ाई,नौकरी या राजनीति कहीं भी जाना चाहे तो परिवार और समाज से संघर्ष करना पड़ता है। महिलाएं राजनीति में आकर तभी महिलाओं का प्रतिनिधि बन सकती हैं जब वे पूरे समाज का प्रतिनिधि बनें।”

दिल्ली विश्वविद्यालय के प्राध्यापक तथा स्त्री मुद्दों पर मुखर लेखक तारा शंकर ने कहा कि बड़े अफसोस की बात है कि बहुत बुनियादी हक भी हमें आजादी के बहुत साल बाद मिले हैं। राजनीतिक भागीदारी तो बहुत दूर की चीज लगती है।

जेएनयू से अध्यक्ष पद की छात्र राजद प्रत्याशी प्रियंका भारती ने कहा कि जब हम सदन में महिलाओं के 33 प्रतिशत आरक्षण की बात कहते हैं तो इस बात पर गौर करना होगा कि कहीं यह एक खास वर्ग तक तो नहीं सिमटकर रह जाएगा। उन्होंने फूलन देवी का जिक्र करते हुए कहा कि फूलन से हमें हथियार उठाना नहीं सीखना है मगर शोषण के खिलाफ आवाज उठाना जरूर सीखना है।

कथाकार व पत्रकार गीताश्री ने कहा कि 'मेरा रंग' ने महिला मुद्दों पर वीडियो बनाने से शुरुआत की थी और शालिनी के सतत प्रयासों से आज यह एक स्त्री विमर्श का एक प्रमुख मंच है। उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी आज के समय में एक बहुत जरूरी विषय है। 'मेरा रंग' की संस्थापक शालिनी श्रीनेत ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।  

कार्यक्रम का संचालन आँचल बावा ने किया और अंत में जाने-माने आर्टिस्ट सीरज सक्सेना ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।

gender inequality
Mera Rang Foundation Trust
Politics and Women
Women reservation
Richa Singh
Delhi University
JNU

Related Stories

दिल्ली: रामजस कॉलेज में हुई हिंसा, SFI ने ABVP पर लगाया मारपीट का आरोप, पुलिसिया कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

दिल्ली: दलित प्रोफेसर मामले में SC आयोग का आदेश, DU रजिस्ट्रार व दौलत राम के प्राचार्य के ख़िलाफ़ केस दर्ज

डीयूः नियमित प्राचार्य न होने की स्थिति में भर्ती पर रोक; स्टाफ, शिक्षकों में नाराज़गी

ज्ञानवापी पर फेसबुक पर टिप्पणी के मामले में डीयू के एसोसिएट प्रोफेसर रतन लाल को ज़मानत मिली

‘धार्मिक भावनाएं’: असहमति की आवाज़ को दबाने का औज़ार

जेएनयू: अर्जित वेतन के लिए कर्मचारियों की हड़ताल जारी, आंदोलन का साथ देने पर छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष की एंट्री बैन!

भारत में छात्र और युवा गंभीर राजकीय दमन का सामना कर रहे हैं 

कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट को लेकर छात्रों में असमंजस, शासन-प्रशासन से लगा रहे हैं गुहार

बैठक में नहीं पहुंचे अधिकारी, छात्र बोले- जेएनयू प्रशासन का रवैया पक्षपात भरा है

‘जेएनयू छात्रों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं, पुलिस फ़ौरन कार्रवाई करे’ बोले DU, AUD के छात्र


बाकी खबरें

  • Sustainable Development
    सोनिया यादव
    सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में भारत काफी पीछे: रिपोर्ट
    03 Mar 2022
    एनुअल स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायरमेंट 2022 रिपोर्ट के मुताबिक सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में भारत फिलहाल काफी पीछे है। ऐसे कम से कम 17 प्रमुख सरकारी लक्ष्य हैं, जिनकी समय-सीमा 2022 है और धीमी गति…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पूर्वांचल की जंग: 10 जिलों की 57 सीटों पर सामान्य मतदान, योगी के गोरखपुर में भी नहीं दिखा उत्साह
    03 Mar 2022
    इस छठे चरण में शाम पांच बजे तक कुल औसतन 53.31 फ़ीसद मतदान दर्ज किया गया। अंतिम आंकड़ों का इंतज़ार है। आज के बाद यूपी का फ़ैसला बस एक क़दम दूर रह गया है। अब सात मार्च को सातवें और आख़िरी चरण के लिए…
  • election
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव: बस्ती के इस गांव में लोगों ने किया चुनाव का बहिष्कार
    03 Mar 2022
    बस्ती जिले के हर्रैया विधानसभा में आधा दर्ज़न गांव के ग्रामीणों ने मतदान बहिष्कार करने का एलान किया है। ग्रामीणों ने बाकायदा गांव के बाहर इसका बैनर लगा दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी…
  • gehariyaa
    एजाज़ अशरफ़
    गहराइयां में एक किरदार का मुस्लिम नाम क्यों?
    03 Mar 2022
    हो सकता है कि इस फ़िल्म का मुख्य पुरुष किरदार का अरबी नाम नये चलन के हिसाब से दिया गया हो। लेकिन, उस किरदार की नकारात्मक भूमिका इस नाम, नामकरण और अलग नाम की सियासत की याद दिला देती है।
  • Haryana
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हरियाणा: आंगनबाड़ी कर्मियों का विधानसभा मार्च, पुलिस ने किया बलप्रयोग, कई जगह पुलिस और कार्यकर्ता हुए आमने-सामने
    03 Mar 2022
    यूनियन नेताओं ने गुरुवार को कहा पंचकुला-यमुनानगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बरवाला टोल प्लाजा पर हड़ताली कार्यकर्ताओं और सहायकों पर  हरियाणा पुलिस ने लाठीचार्ज  किया।  
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License