NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
इतना आसान नहीं है महिलाओं के लिए वर्क फ्रॉम होम!
कोरोना वायरस के 'कम्युनिटी ट्रांसमिशन' को रोकने के लिए लोगों को घर से काम करने यानी वर्क फ्रॉम होम की सुविधा दी जा रही है। ऐसे में महिलाओं के लिए ‘घर से काम करना’ और ‘घर का काम करना’ दोनों कैसे एक चुनौती बन गई है, इसे जानने के लिए न्यूज़क्लिक ने कई कामकाजी महिलाओं से बातचीत की।
सोनिया यादव
24 Mar 2020
work from home
प्रतीकात्मक तस्वीर

“असाधारण समय के लिए असाधारण कदमों की जरूरत होती है”

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली को लॉकडाउन करने से पहले ये बात कही। प्रधानमंत्री ने भी कुछ ऐसा ही संदेश देने की कोशिश की। इसका सीधा मतलब है कि इस समय देश कठिन समय से गुजर रहा है। कोरोना वायरस संक्रमण के मामले भारत में तेज़ी से बढ़ रहे हैं और वायरस के इसी बढ़ते हुए चेन को तोड़ने के लिए कई राज्यों और शहरों को पूरी तरह से लॉक डाउन कर दिया गया है। इस बीमारी की अगली स्टेज यानी 'कम्युनिटी ट्रांसमिशन' को रोकने के लिए लोगों को घर से काम करने यानी वर्क फ्रॉम होम की सुविधा दी जा रही है। ऐसे में महिलाओं के लिए ‘घर से काम करना’ और ‘घर का काम करना’ दोनों कैसे एक चुनौती बन गई है, इसे जानने के लिए न्यूज़क्लिक ने कई कामकाजी महिलाओं से बातचीत कर उनकी परेशानियों को समझने की कोशिश की।

गुरुग्राम की एक निज़ी आईटी कंपनी में काम करने वाली आस्था बताती हैं कि उन्हें पिछले चार दिनों से वर्क फ्रॉम होम की सुविधा दी गई है और ये इस समय सबसे ज़रूरी कदम है। लेकिन आस्था मानती हैं कि घर से काम करने में सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि अब कोई तय शिफ़्ट नहीं है, कितने भी घंटे काम करना पड़ सकता है।

न्यूज़क्लिक से बातचीत में उन्होंने कहा, "मुझे लगता है हम सब जिस मुश्किल दौर से गुज़र रहे हैं, इस समय घर पर रहना ज्यादा सुरक्षित है लेकिन हम औरतों के लिए अब दोहरी चुनौती है। हमारे लिए अब कोई फ़िक्स शिफ़्ट नहीं है, न ही कोई लंच या ब्रेक टाइम। पहले 9 घंटे की शिफ़्ट होती थी अब घर से काम करने पर है कि जब तक काम ख़त्म न हो बैठे रहो। ऊपर से घर में आपको बाकी जिम्मेदारियां भी निभानी हैं। ऐसे में काम उतना ही है या शायद कम भी है लेकिन डिलिवरी टाइम बढ़ गया है।"

आस्था आगे बताती हैं कि ऑफिस या घर के काम में कोई ज्यादा फ़र्क नहीं आया लेकिन दबाव बहुत बड़ गया है। रात-रात तक वॉट्सऐप ग्रुप में डिस्कशन चल रहे हैं। काम कम नहीं हो रहा लेकिन शायद मैनेजमेंट इससे संतुष्ट नहीं हो पा रहा। इधर घर पर बच्चे और परिवार के लोग इसे अभी तक अपना नहीं पाए हैं।

पेशे से इंजीनियर अर्पिता फिलहाल घर से काम कर रही हैं। उनका कहना है कि महिलाओं के लिए घर से काम के साथ ही कई और जिम्मेदारियां भी जुड़ गई हैं। अब घर पर ऑफिस का काम भी करो, साथ में बच्चों की छुट्टीयां हैं तो उन्हें भी संभालों। मैनेजमेंट को लगता है कि जो घर से काम कर रहे हैं उनके पास कोई और काम नहीं है और बच्चों को लगता है कि हम उन्हें कोई टाइम नहीं दे पा रहे। फ़िज़िकल एक्टिविटी भी काफ़ी कम हो रही हैं। पहले ऑफ़िस से लौटने के बाद काम ख़त्म हो जाता था अभी काम कब ख़त्म होगा इसका कोई समय नहीं है।

अर्पिता बताती हैं, “मैं तो पिछले एक हफ्ते से डबल शिफ्ट कर रही हूं। ऑफ़िस में बैठकर काम करना आसान होता है। साथ ही थोड़े समय आप घर से अलग होकर फ्री भी फील कर लेती हैं। ऑफ़िस में अलग-अलग लोगों से मिलना, कुछ न समझ आए तो थोड़ी मदद भी आसानी से मिल जाती है। वहां कोई चीज़ किसी को दिखानी हो, कुछ अप्रूव करानी हो तो तुरंत हो जाती है, आप अपनी बात दूसरों को बेहतर ढंग से समझा सकते हैं लेकिन फ़ोन पर यह काम थोड़ा मुश्किल हो जाता है। पहले घर पर काम करने के लिए बाई आती थी, उससे बड़ी मदद हो जाती थी। अब सोसाइटी में उसकी भी मनाही हो गई है, तो घर का काम और ऑफिस का काम दोनों साथ में करना पड़ रहा है, जो बहुत चुनौतीपूर्ण है।”

देविका एक एनजीओ में बतौर एसोसिएट मैनेजर काम करती हैं। वो मानती हैं कि अब उन पर काफ़ी दबाव है, उन्हें हर समय ये चिंता होती है कि काम सही से टाइम पर हो रहा है या नहीं। अगर किसी के यहां इंटरनेट नहीं चल रहा या किसी को कोई और दिक्कत है तो उन्हें उस व्यक्ति का काम भी मैनेज करना पड़ता है।

वो कहती हैं, "घर बैठ कर लोगों को मैनेज करना बहुत मुश्किल है। काम और हालात दोनों बदल गए हैं। जो काम हम सब ऑफ़िस में आसानी से कर लेते थे उसे पूरा करने में कई तरह की दिक़्क़तें सामने आ रही हैं। कई बार मानसिक दबाव भी होता है सब कुछ तय समय सीमा के भीतर करने का। पूरा रूटीन बदल गया है, ऐसा लगता है न घर संभल रहा है न ऑफिस।"

हालांकि इस दौरान हमें कुछ ऐसी महिलाएं भी मिली जिनके पास काम तो है लेकिन घर से काम करने की सुविधा मौजूद नहीं है, न ही वो बहुत पढ़ी-लिखी हैं। दूसरों के घरों में काम करने वाली घरेलू सहायिकाएं हों या छोटी-मोटी गुमटी लगाकर चाट-पकौड़ी बेचने वाली महिलाएं इन पर तो इन महामारी की दोगुनी मार पड़ी है।

25 साल की सीमा घरेलू सहायिका का काम करती हैं, उन्होंने बताया, “हम पढ़े-लिखे लोग तो हैं नहीं, जो घर पर बैठ कर कंप्यूटर में काम कर लें, हमारी तो रोज़ी-रोटी ही दूसरों के घरों में काम करने से चलती है। इस बीमारी के चलते लोगों ने काम से छुट्टी तो दे दी लेकिन अब हम पैसे कहाँ से लाएंगे? हम क्या काम करेंगे, क्या खाएंगे?”

मंडी हाउस नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के सामने छोटी सी पकौड़े की दुकान लगाने वाली सविता बताती हैं, “हमें दुकान लगाने से मना कर दिया है, अब हम घर में बिना काम के बैठे हैं। मेरे तीन बच्चे हैं, अब अगले महीने उनकी फीस का इंतजाम कैसे होगा? ये बीमारी मालूम नहीं कब खत्म होगी। हम लोग गरीब हैं, हमें बीमारी तो बाद में मारेगी, पहले भूख-बेरोज़गीरी मार देगी।”

गौरतलब है कि कोरोना वायरस के कहर से दुनिया त्रस्त है। लोगों को सोशल डिस्टेंस की सलाह दी जा रही है, पब्लिक गैदरिंग कम से कम करने के साथ, मॉल, कॉलेज, स्कूल आदि को बंद किया जा रहा है। लोग घरों से बाहर निकलने में भी घबरा रहे हैं। ऐसे में जिन महिलाओं को घर से काम करना पड़ रहा है वो एक नई तरह की मुश्किल से गुज़र रही हैं। कोरोना के डर से वो न तो कहीं बाहर जा सकती हैं और न ही घर में काम से ब्रेक ले पा रही हैं। ऐसे में वो मानसिक और शारीरिक थकान का शिकार हो रही हैं।

साइकोलॉजिस्ट मनीला कहती हैं, “आपको घर से काम करना एक-दो दिन अच्छा लग सकता है लेकिन आपको इसकी आदत नहीं है, इसलिए ये बदलाव आसान नहीं है। घर और ऑफिस दो अलग-अलग जगह हैं ऐसे में दोनों को एक मान कर चलना थोड़ा मुश्किल है। ये ट्रेंड कंपनियों के लिए भी नया है। पूरा दिन ऑफिस में गुजारने वाली महिलाओं को इसमें ढलने में वक़्त लगेगा। घर पर कैद होने का अपने आप में मानसिक दवाब बन जाता है। ऐसे में आपको घर और ऑफिस दोनों की जिम्मेदारियां निभानी है, ये बड़ी चुनौती है। ऐसे में कई महिलाओं में चिड़चिड़ापन और उलझन देखना आम बात होगी, लेकिन अगर परिवार के लोग साथ देंगे तो सब आसान हो जाएगा।”

Coronavirus
novel coronavirus
COVID-19
Coronavirus lockdown
Work From Home
Women
Difficult for women

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • ganga
    सबरंग इंडिया
    गंगा मिशन चीफ ने माना- कोरोना की दूसरी लहर में लाशों से ‘पट’ गई थी गंगा, योगी सरकार करती रही इनकार
    27 Dec 2021
    कोरोना की विनाशकारी दूसरी लहर के दौरान उत्तर प्रदेश में गंगा नदी ‘लाशों को फेंकने की आसान जगह’ बन गई थी। ये दावा एक नई किताब में किया गया है जिसके लेखक नेशनल मिशन टू क्लीन गंगा के महानिदेशक और नमामि…
  • Adityanath and Yogi
    सुबोध वर्मा
    कितना प्रभावी है यूपी का 'डबल इंजन'? 
    27 Dec 2021
    उत्तर प्रदेश के कुछ प्रमुख आर्थिक संकेतक इस दावे को झूठा साबित करते हैं कि मोदी-योगी का 'डबल इंजन' शासन का मॉडल लोगों के लिए अच्छा है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 6,531 नए मामले, ओमिक्रॉन के मामले बढ़कर 500 के पार पहुंचे 
    27 Dec 2021
    देश में ओमीक्रॉन का ख़तरा लगातार बढ़ता ही जा रहे है। ओमीक्रॉन देश के अब तक 19 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेश में फ़ैल चुका है, और कुल मामलों की संख्या बढ़कर 578 हो गयी है |
  • Narendra Singh Tomar
    अफ़ज़ल इमाम
    तोमर का बयान- एक तीर से दो निशाने !
    27 Dec 2021
    सूत्रों का मानना है कि किसानों की नई नवेली पार्टियों को मुद्दा थमाने के लिए तोमर ने यह बयान दिया है, ताकि इन दोनों राज्यों में उन्हें सक्रिय होने और जन समर्थन हासिल करने का मौका मिल सके।
  • Jammu and Kashmir
    द लीफलेट
    मुद्दा: जम्मू-कश्मीर परिसीमन आयोग का प्रस्ताव आख़िर क्यों है विवादास्पद
    27 Dec 2021
    जहां जम्मू को छह नयी विधानसभा सीटें मिलेंगी,वहीं कश्मीर को महज़ एक और अतिरिक्त सीट से संतोष करना होगा।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License