NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
बंगाल : मज़दूरों का लॉन्ग मार्च जारी, 10 को कोलकाता में जमावड़ा
राज्य की सभी सड़कों पर लॉन्ग मार्च को देखने के लिए मज़दूरों की भीड़ उमड़ रही है क्योंकि विभिन्न ज़िलों के औद्योगिक क्षेत्रों के मज़दूर कोलकाता और सिलीगुड़ी तक मार्च निकाल रहे हैं।
दित्सा भट्टाचार्य
06 Dec 2019
Translated by महेश कुमार
Protest

पिछले 6 दिनों में, मज़दूरों के लॉन्ग मार्च ने पास के बर्धमान ज़िले और कोलकाता के चित्तरंजन के बीच की कुल 283 किलोमीटर की दूरी में से लगभग 137 किलोमीटर की दूरी को तय कर लिया है। बाक़ी बचे 5 दिनों के भीतर मज़दूर 146 किलोमीटर की दूरी को भी लॉन्ग मार्च के ज़रीये तय करेंगे, लॉन्ग मार्च के समापन से पहले 11 दिसंबर को कोलकाता में एक विशाल आम सभा होगी।

1_10.JPG

5 दिसंबर, गुरुवार की सुबह, यानी छठे दिन, हज़ारों मज़दूर गलसी, पुरबा बर्धमान से मार्च में शामिल हो गए थे। मज़दूरों के साथ एकजुटता प्रकट करते हुए छात्र, युवा, महिला, किसानों और कृषि मज़दूर बड़ी तादाद में उनके साथ मार्च में हिस्सा ले रहे हैं। स्टूडेंट्स फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया (एसएफ़आई), डेमोक्रेटिक यूथ फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया (डीवाईएफ़आई), ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वुमेन्स एसोसिएशन (एआईडीडबल्यूए), ऑल इंडिया किसान सभा (एआईकेएस), और ऑल इंडिया एग्रीकल्चरल वर्कर्स यूनियन (एआईएयू) ने लॉन्ग मार्च को अपना पूरा समर्थन दिया है, जिसे सीटू के बैनर तले आयोजित किया गया है।

2_11.JPG

हालांकि, पश्चिम बंगाल में केवल यही एकमात्र लॉन्ग मार्च नहीं हो रहा है बल्कि एक अन्य मार्च 1 दिसंबर को मालदा से शुरू हुआ था और वह सिलीगुड़ी की तरफ़ जा रहा है, जहां 10 दिसंबर को एक आमसभा आयोजित की जाएगी। पूरे राज्य में जैसे सड़कों पर मज़दूरों की बाढ़ सी आ गई है क्योंकि वे विभिन्न ज़िलों में सभी औद्योगिक क्षेत्रों कोलकाता से सिलीगुड़ी तक मार्च में शामिल हो रहे हैं।

न्यूज़क्लिक से बात करते हुए, चितरंजन-कोलकाता लॉन्ग मार्च में हिस्सा लेने वाले एक बेरोज़गार युवक माखन मुलिक ने कहा, “राज्य में नौकरियां नहीं हैं। युवाओं को काम की तलाश में दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। यह ऐसा समय है जब हमें कुछ करना चाहिए और इसलिए मैं यह सुनिश्चित करने के लिए लगभग 300 किलोमीटर के पैदल मार्च में शामिल हुआ हूं ताकि सरकार हमारी अनदेखी न करे।”

3_7.JPG

मोदी सरकार द्वारा सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू) के निजीकरण के ख़िलाफ़, राज्य में औद्योगिकीकरण और सभी के लिए रोज़गार की मांग को लेकर साथ ही 'सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को बचाओ' के नारे के साथ लॉन्ग मार्च का आयोजन किया गया है। यह मार्च भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा देश भर में नागरिकों की राष्ट्रीय रजिस्टर बनाने (एनआरसी) के प्रस्तावित कार्यान्वयन का भी विरोध करता है। मार्च में भाग लेने वाले लोगों ने घोषणा की है कि वे किसी भी परिस्थिति में एनआरसी को स्वीकार नहीं करेंगे।

दैनिक वेतन भोगी मज़दूर रूपन रूइदास ने न्यूज़क्लिक को बताया, “मैंने बिना रुके 22 दिन तक काम किया, ताकि मैं 11 दिनों के लॉन्ग मार्च में शामिल हो सकूं। मैं एक निर्माण मज़दूर हूं; मैं संघर्ष को समझता हूं। इसलिए, मुझे किसी को भी इस मार्च के महत्व को समझने की ज़रूरत नहीं पड़ी। हम हर दिन अपनी आजीविका के लिए लड़ रहे हैं। यह लॉन्ग मार्च भी एक लड़ाई है, जिसे अगर एक बार जीत लिया गया, उससे राज्य भर के लाखों मज़दूरों का जीवन आसान हो जाएगा।”

4_3.JPG

न्यूज़क्लिक से बात करते हुए, उत्तर 24 परगना सीटू के ज़िला सचिव, गार्गी चटर्जी ने कहा कि, “राज्य सरकार ने अभी तक इस संघर्ष को दर्ज नहीं किया है। हालांकि, सरकार के इस रुख ने मज़दूरों को हतोत्साहित नहीं किया है। इसने मज़दूरों के इरादे को और अधिक मज़बूत कर दिया हैं, और अधिक दृढ़ बना दिया है।” उन्होंने बताया कि हर दिन, ज़्यादा से ज़्यादा लोग लॉन्ग मार्च में शामिल हो रहे हैं क्योंकि यह विभिन्न गांवों और इलाक़ों से गुज़र रहा है। उन्होंने कहा, "इन लोगों ने जो ताक़त दिखाई है, और जिस दृढ़ संकल्प का परिचय दिया है, इससे राज्य सरकार को समझ आ जाना चाहिए कि पश्चिम बंगाल की जनता जनविरोधी नीतियों और नकली वादों से तंग आ चुकी है। अब वे सिर्फ़ शिक्षा, रोज़गार और औद्योगीकरण चाहते हैं।”

West Bengal Long March
Save Public Sector
Workers Long March
West Bengal
Siliguri
kolkata

Related Stories

पश्चिम बंगालः वेतन वृद्धि की मांग को लेकर चाय बागान के कर्मचारी-श्रमिक तीन दिन करेंगे हड़ताल

बंगाल हिंसा मामला : न्याय की मांग करते हुए वाम मोर्चा ने निकाली रैली

बंगाल: बीरभूम के किसानों की ज़मीन हड़पने के ख़िलाफ़ साथ आया SKM, कहा- आजीविका छोड़ने के लिए मजबूर न किया जाए

कोलकाता: बाबरी मस्जिद विध्वंस की 29वीं बरसी पर वाम का प्रदर्शन

पश्चिम बंगाल: वामपंथी पार्टियों ने मनाया नवंबर क्रांति दिवस

पश्चिम बंगाल: ईंट-भट्ठा उद्योग के बंद होने से संकट का सामना कर रहे एक लाख से ज़्यादा श्रमिक

किसान आंदोलन की सफल राजनैतिक परिणति भारतीय लोकतंत्र की ऐतिहासिक ज़रूरत

पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के ख़िलाफ़ संजुक्त मोर्चा ने कोलकाता में विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया 

केरल, तमिलनाडु और बंगाल: चुनाव में केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल

पश्चिम बंगाल: वेतन वृद्धि की मांग को लेकर पारा शिक्षक 70 दिनों से कर रहे हैं प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • लाल बहादुर सिंह
    सावधान: यूं ही नहीं जारी की है अनिल घनवट ने 'कृषि सुधार' के लिए 'सुप्रीम कमेटी' की रिपोर्ट 
    26 Mar 2022
    कारपोरेटपरस्त कृषि-सुधार की जारी सरकारी मुहिम का आईना है उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित कमेटी की रिपोर्ट। इसे सर्वोच्च न्यायालय ने तो सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन इसके सदस्य घनवट ने स्वयं ही रिपोर्ट को…
  • भरत डोगरा
    जब तक भारत समावेशी रास्ता नहीं अपनाएगा तब तक आर्थिक रिकवरी एक मिथक बनी रहेगी
    26 Mar 2022
    यदि सरकार गरीब समर्थक आर्थिक एजेंड़े को लागू करने में विफल रहती है, तो विपक्ष को गरीब समर्थक एजेंडे के प्रस्ताव को तैयार करने में एकजुट हो जाना चाहिए। क्योंकि असमानता भारत की अर्थव्यवस्था की तरक्की…
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 1,660 नए मामले, संशोधित आंकड़ों के अनुसार 4,100 मरीज़ों की मौत
    26 Mar 2022
    बीते दिन कोरोना से 4,100 मरीज़ों की मौत के मामले सामने आए हैं | जिनमें से महाराष्ट्र में 4,005 मरीज़ों की मौत के संशोधित आंकड़ों को जोड़ा गया है, और केरल में 79 मरीज़ों की मौत के संशोधित आंकड़ों को जोड़ा…
  • अफ़ज़ल इमाम
    सामाजिक न्याय का नारा तैयार करेगा नया विकल्प !
    26 Mar 2022
    सामाजिक न्याय के मुद्दे को नए सिरे से और पूरी शिद्दत के साथ राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में लाने के लिए विपक्षी पार्टियों के भीतर चिंतन भी शुरू हो गया है।
  • सबरंग इंडिया
    कश्मीर फाइल्स हेट प्रोजेक्ट: लोगों को कट्टरपंथी बनाने वाला शो?
    26 Mar 2022
    फिल्म द कश्मीर फाइल्स की स्क्रीनिंग से पहले और बाद में मुस्लिम विरोधी नफरत पूरे देश में स्पष्ट रूप से प्रकट हुई है और उनके बहिष्कार, हेट स्पीच, नारे के रूप में सबसे अधिक दिखाई देती है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License