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ग्रीस : पब्लिक हेल्थ और सुरक्षित कार्यस्थलों की मांग करते हुए श्रमिक इकट्ठा हुए
ग्रीक सरकार ने 5 नवंबर को COVID-19 मामलों में ताज़ा वृद्धि के मद्देनज़र देशव्यापी नया प्रतिबंध लागू किया।
पीपल्स डिस्पैच
11 Nov 2020
ग्रीसः

मंगलवार 10 नवंबर को ग्रीस में श्रमिक सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा की मांग और COVID-19 महामारी के दौरान कार्यस्थल में स्वास्थ्य और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नेशनल डे ऑफ एक्शन के रूप में कार्य स्थानों और शहरों में इकट्ठा हुए। ट्रेड यूनियनों के नेतृत्व में श्रमिकों ने भी एथेंस में स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर मार्च किया।

5 नवंबर को ग्रीक सरकार ने COVID-19 मामलों में वृद्धि के मद्देनज़र देशव्यापी लॉकडाउन लागू किया। ग्रीस पहले दौर में 22 मार्च से 4 मई तक प्रतिबंध लगाने के दौरान संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित करने में सक्षम रहा। लेकिन प्रतिबंध में ढ़ील देने के बाद से संक्रमण की दर में वृद्धि हुई है और अक्टूबर से मामलों में भारी वृद्धि हुई है। 10 नवंबर तक ग्रीस में 825 मौतों के साथ 58,187 COVID-19 से संक्रमण के मामले सामने आए हैं।

फेडरेशन ऑफ ग्रीक हॉस्पिटल डॉक्टर्स एसोसिएशन (ओईएनजीई) ने इस महामारी से लड़ने के लिए बेहद आवश्यक ज़रुरत का सुझाव दिया है। इसमें तत्काल बड़े पैमाने पर भर्तियां, सभी डॉक्टरों की स्थायी पदों पर नियुक्ति, सहायकों को नियमित करना, स्वास्थ्य प्रणाली के लिए सरकार से पूर्ण, पर्याप्त और विशेष फंड करना, इस महामारी से निपटने के लिए सरकारी योजना में निजी स्वास्थ्य क्षेत्र को शामिल करना, स्वास्थ्य संरचनाओं, कार्यस्थलों में, बंद संरचनाओं में कर्मचारियों का नि: शुल्क और बड़े पैमाने पर निरंतर जांच करना और सरकार की मज़दूर विरोधी, ट्रेड यूनियन विरोधी विरोधी नीतियों को वापस लेना शामिल है।

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ ग्रीस (केकेई) के नेता दिमित्रिस कूतसूम्बस ने 10 नवंबर को कहा कि "यूनियनों का आज एक्शन डे कार्यस्थल में सुरक्षा उपायों के लिए और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की मज़बूत करने के लिए है। हम स्वास्थ्य कर्मियों और कर्मचारियों के साथ अपनी आवाज़ उठाते हैं।"

इससे पहले विश्व स्वास्थ्य दिवस यानी 7 अप्रैल को फेडरेशन ऑफ ग्रीक हॉस्पिटल डॉक्टर्स एसोसिएशन (ओईएनजीई) के नेतृत्व में ग्रीक स्वास्थ्य कर्मचारियों ने सरकारी सहायता की मांग करते हुए देशव्यापी अभियान चलाया था। इस मांग में देश में COVID-19 के ख़िलाफ़ लड़ाई के लिए पर्याप्त फंड, स्टाफ और संसाधनों सहित सरकारी मदद की मांग की गई थी।

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