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मज़दूर संगठनों ने सरकार से चार श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन पर रोक की मांग की
श्रम संहिताएं (लेबर कोड्स), मौजूदा 44 श्रम क़ानूनों का स्थान ले रहे है। मज़दूर संगठन इसका शुरआत से ही विरोध कर रहे हैं और इसे मालिकों के पक्ष और मज़दूरों के ख़िलाफ़ बता रहे है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
21 Jan 2021
मज़दूर संगठनों ने सरकार से चार श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन पर रोक की मांग की

नयी दिल्ली: देश के 10 केंद्रीय मजदूर संगठनों के संयुक्त मंच ने बुधवार को सरकार से चार श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन पर रोक लगाने और इस पर फिर से चर्चा करने की मांग की।

दस केंद्रीय मजदूर संगठनों- इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक), ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी), हिंद मजदूर सभा (एचएमएस), सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू), इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (एआईयूटीयूसी), ट्रेड यूनियन को-ऑर्डिनेशन सेंटर (टीयूसीसी), सेल्फ-एम्प्लॉइड वुमेन्स एसोसिएशन (सेवा), ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (एआईसीसीटीयू), लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन (एलपीएफ) और यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (यूटीयूसी) के संयुक्त मंच द्वारा जारी बयान में यह मांग की गई।

इस मंच के साथ कुछ स्वतंत्र संगठन और फेडरेशन भी जुड़े हैं।

आपको बता दें पूरे देश में लागू श्रम कानूनों को समेकित (Integrated) करने और उनमें संशोधन करने के लिए बनाए गए तीन लेबर कोड को विपक्ष के विरोध के बावजूद मंगलवार, 22 सितंबर 2020  को लोकसभा में पास कर दिया गया है। और बुधवार, 23 सितंबर को विपक्ष की गैर मौजूदगी में राज्यसभा ने भी इन्हें पारित कर दिया था। इन कोड्स या संहिताओं में औद्योगिक संबंध संहिता, 2020, व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थिति संहिता, 2020 तथा सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 शामिल हैं। इसके अलावा वेतन संहिता, 2019 पहले ही पारित हो चुका है। ये सभी श्रम संहिताएं (लेबर कोड्स) 44 मौजूदा श्रम कानूनों का स्थान ले रहे है। मज़दूर संगठन इसका शुरआत से ही विरोध कर रहे हैं और इसे मालिकों के पक्ष और मज़दूरों के ख़िलाफ़ बता रहे हैं।  

बुधवार को संयुक्त बयान में कहा गया, ‘‘केंद्रीय मजदूर संगठनों की मांग है कि सभी चार संहिताओं को रोक दिया जाना चाहिए और फिर इन श्रम संहिताओं पर केंद्रीय मजदूर संगठनों के साथ सच्ची भावना से द्विपक्षीय और त्रिपक्षीय बातचीत होनी चाहिए।’’

मंच ने श्रम मंत्री संतोष गंगवार को लिखे पत्र में पिछले पांच वर्षों से भारतीय श्रम सम्मेलन का आयोजन नहीं करने का भी विरोध किया।

श्रम मंत्रालय ने इन नए कानूनों को लागू करने के लिए श्रम संहिताओं के तहत नियमों को अंतिम रूप दे रहा है। मंत्रालय ने बुधवार को सामाजिक सुरक्षा और व्यवसायों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कामकाजी परिस्थितियों पर चर्चा के लिए मजदूर संगठनों और अन्य हितधारकों की बैठक बुलाई थी।

मंत्रालय इस महीने के अंत तक श्रम संहिताओं के तहत नियमों को अंतिम रूप देना चाहता है, ताकि इन कानूनों को लागू किया जा सके।

हालांकि मज़दूर संगठनों ने श्रम मंत्रालय की इन बैठकों को केवल दिखावा बताया और इस बैठक का बहिष्कार मज़दूर संगठन पहले ही कर चुके हैं।

उनका कहना है ये श्रम सहिंता मजदूर-मालिक संबंध के संतुलन को निर्णायक रूप से मालिक के पक्ष में स्थानांतरित कर देगा, उसके मुताबिक नई संहिता में ऐसे कई प्रावधान हैं जो श्रमिकों के विभिन्न वर्गों के कई छोटे अधिकारों को खत्म कर देगा।

संक्षेप में, मज़दूर संगठनों की बात करें, तो उनका कहना है कि मोदी सरकार ने शोषणकारी मालिकों से श्रमिकों के लिए उपलब्ध सभी सुरक्षा नियमों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ये नई संहिता वे पिछली शताब्दी में हमारे (मज़दूरों ) संघर्षों के माध्यम से श्रमिकों द्वारा पाए गए सभी लाभों को प्रभावी ढंग से नष्ट कर देंगे. 

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ)

CITU
AICCTU
INTUC
AITUC
Central Trade Unions
Labor code
Modi government
SANTOSH GANGWAR

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