NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
बदहाल अर्थव्यवस्था: सकल बैंक ऋण की वृद्धि दर में भी भारी गिरावट
आरबीआई की मासिक रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2019 में सकल बैंक ऋण की वृद्धि दर 13.1 प्रतिशत थी जो जनवरी 2020 में घटकर 8.5 प्रतिशत पर आ गयी है।
पुलकित कुमार शर्मा
08 Mar 2020
बदहाल अर्थव्यवस्था

भारतीय रिजर्व बैंक की फरवरी माह की मासिक रिपोर्ट बताती है कि कमर्शियल बैंक के सकल ऋण की वृद्धि दर में फिर से बड़ी गिरावट आई है। रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2013 में बैंक ऋण की वृद्धि दर 15.2 प्रतिशत थी जो जनवरी 2020 में घटकर 8.5 प्रतिशत पर आ गयी है।  पिछले साल यानी जनवरी 2019 में यह 13.1 प्रतिशत थी। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि कर्ज की वृद्धि दर में आई इस गिरावट का सीधा असर रोजगार और आर्थिक वृद्धि पर पड़ेगा।

गौरतलब है कि बैंकों द्वारा दिया जाने वाला ऋण देश में रोजगार और आर्थिक वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश के छोटे बड़े व्यापारी और उद्योगपतियों को बैंक ऋण की मदद से ही व्यवसाय को बढ़ाने का मौका मिलता हैं जिसके फलस्वरूप रोजगार और उत्पादन में वृद्धि होती है।    

आकड़ों से पता चलता है कि जबसे मोदी सरकार आई है तबसे व्यापारी और उद्योगपतियों के ऋण लेने की क्षमता में कमी आयी है। जानकारों का मानना है कि सरकार की गलत नीतियों के चलते व्यापारी और उद्योगपतियों को नुकसान का सामना करना पड़ा है। इसके कारण देश की आर्थिक वृद्धि के साथ साथ व्यापारी और उद्योगपतियों का मनोबल भी गिरा है। उद्योगपतियों को निवेश के बाद भी मुनाफा नहीं मिल रहा हैं जिसके कारण सकल बैंक ऋण (Gross Bank Credit) की वृद्धि दर में गिरावट आयी है।

जनवरी 2013 में बैंक ऋण की वृद्धि दर 15.2 प्रतिशत थी जो जनवरी 2020 में घटकर 8.5 प्रतिशत पर आ गयी हैं जैसा की नीचे दिखाया गया है।

pic 1.jpg

सभी क्षेत्रों में बैंक ऋण की स्थिति -

अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाले मुख्यतः तीन क्षेत्र कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र हैं। साथ ही पर्सनल ऋण के माध्यम से लिया गया ऋण भी इन तीनों क्षेत्रों से ही जुड़ा होता है। पिछले कुछ समय से इन क्षेत्रों में ऋण की वृद्धि दर में बहुत बड़ी गिरावट आयी है। कृषि क्षेत्र में यह घट कर 6.5 प्रतिशत रह गयी है। उद्योग में घट कर 2.5 प्रतिशत रह गयी है। सेवाओं के क्षेत्र में घट कर 8.9 प्रतिशत रह गयी है। व्यक्तिगत ऋण में यह दर समान बनी हुई है जैसा की नीचे दिखाया गया है।

Pic 2.png

उधोग क्षेत्र में ऋण की स्थिति

उद्योग अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण क्षेत्र है। देश की उन्नति में और रोजगार के सृजन में इस क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। काफी समय से इस क्षेत्र में भी भारी मंदी चल रही है। इसके कारण इस क्षेत्र द्वारा लिए जाने वाले बैंक ऋण की वृद्धि दर में भारी गिरावट आ रही है। उद्योग को रोजगार और निवेश के आधार पर तीन भागों में बांटा गया हैं जिसमे सूक्ष्म एवं लघु उद्योग, मध्यम उद्योग और विशाल उद्योग शामिल हैं। मोदी की सरकार आने के बाद से ही इन उद्योगों में निवेश के लिए गए ऋण में गिरावट चल रही है।

हालांकि इस साल सूक्ष्म एवं लघु उद्योग में मामूली 0.5 प्रतिशत का उछाल आया है। हालांकि  मध्यम वर्ग के उद्योग में ऋण की भारी गिरावट आयी है। और विशाल उद्योगों में भी यह गिरावट 2.8 प्रतिशत पर पहुंच गयी है। जैसाकि नीचे दिखाया गया है।

Picture3_0.png

सेवाओं में लिए गए ऋण में वृद्धि दर

सेवा क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था में योगदान देने वाला सबसे बड़ा क्षेत्र है। जनवरी 2019 से इस क्षेत्र में बैंक ऋण वृद्धि दर में सबसे बड़ी गिरावट देखी गयी है। सेवा क्षेत्र के कुछ सब क्षेत्र ऐसे हैं जो सबसे ज्यादा रोजगार देने वाले है। उन सभी क्षेत्रों में ऋण वृद्धि दर में सबसे ज्यादा गिरावट आयी है। नीचे के ग्राफ में देख सकते हैं।

Pic 4.png

व्यक्तिगत ऋण में बैंक ऋण की स्थिति

व्यक्तिगत ऋण किसी भी व्यक्ति की व्यक्तिगत ज़रूरतों जैसे- आवास, घर सुधार, कार, वाहन, शिक्षा , विवाह, व्यापार आदि के लिए दिया जाता है।

व्यक्तिगत ऋण की सीमा ज्यादातर ऋण को चुकाने की क्षमता पर निर्भर करती है। हालांकि व्यक्तिगत ऋण की वृद्धि दर में कोई गिरावट नहीं आयी हैं लेकिन कोई वृद्धि भी नहीं हुई है।

व्यक्तिगत ऋण के कुछ सब क्षेत्र ऐसे हैं जिनमे ज्यादा गिरावट देखी गयी है। इसमें फ़िक्स डिपॉजिट्स के अग्रिम लिए जाने वाले ऋण की वृद्धि दर में भारी गिरावट आयी है। शेयर आदि के अग्रिम लिए जाने वाले ऋण की वृद्धि दर में भी भारी गिरावट आयी है। शिक्षा के लिए ऋण लेने वाले में भी गिरावट आयी है। जैसाकि नीचे दिखाया गया है

table.JPG
सरकार को लगता है कि निजी क्षेत्र में रियायत देने से अर्थव्यवस्था को सुधारा जा सकता है। इसलिए सरकार लगातार कार्पोरेशन टैक्स, रियल स्टेट आदि में छूट देने में लगी हुई है लेकिन अर्थव्यवस्था लगातार गिरती जा रही है।

इसका कारण यह है कि सरकार गलत नब्ज़ पकड़ रही है क्योंकि व्यापारी और उद्योगपति इसलिए ऋण लेते हैं जिससे उत्पादन को ज्यादा से ज्यादा बढ़ाया जा सके लेकिन जब अर्थ व्यवस्था में मांग ही ठप पड़ी हुई हैं तो उद्योगपति उत्पादन किसके लिए करेंगे। इसलिए सरकार को जरूरत है कि देश की अर्थ वृद्धि और जनता के की मांग को बढ़ने के बेहतर पॉलिसी बनाये

RBI
Industrial Loan
Home Loan
Service Loan
Agriculture Loan
banking sector
Banking sector crises
Bank credit loan
BJP
Nirmala Sitharaman
modi sarkar
Shaktikanta Das

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • अनिंदा डे
    मैक्रों की जीत ‘जोशीली’ नहीं रही, क्योंकि धुर-दक्षिणपंथियों ने की थी मज़बूत मोर्चाबंदी
    28 Apr 2022
    मरीन ले पेन को 2017 के चुनावों में मिले मतों में तीन मिलियन मत और जुड़ गए हैं, जो  दर्शाता है कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद धुर-दक्षिणपंथी फिर से सत्ता के कितने क़रीब आ गए थे।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली : नौकरी से निकाले गए कोरोना योद्धाओं ने किया प्रदर्शन, सरकार से कहा अपने बरसाये फूल वापस ले और उनकी नौकरी वापस दे
    28 Apr 2022
    महामारी के भयंकर प्रकोप के दौरान स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक सर्कुलर जारी कर 100 दिन की 'कोविड ड्यूटी' पूरा करने वाले कर्मचारियों को 'पक्की नौकरी' की बात कही थी। आज के प्रदर्शन में मौजूद सभी कर्मचारियों…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में आज 3 हज़ार से भी ज्यादा नए मामले सामने आए 
    28 Apr 2022
    देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 3,303 नए मामले सामने आए हैं | देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 0.04 फ़ीसदी यानी 16 हज़ार 980 हो गयी है।
  • aaj hi baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    न्यायिक हस्तक्षेप से रुड़की में धर्म संसद रद्द और जिग्नेश मेवानी पर केस दर केस
    28 Apr 2022
    न्यायपालिका संविधान और लोकतंत्र के पक्ष में जरूरी हस्तक्षेप करे तो लोकतंत्र पर मंडराते गंभीर खतरों से देश और उसके संविधान को बचाना कठिन नही है. माननीय सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कथित धर्म-संसदो के…
  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    जुलूस, लाउडस्पीकर और बुलडोज़र: एक कवि का बयान
    28 Apr 2022
    आजकल भारत की राजनीति में तीन ही विषय महत्वपूर्ण हैं, या कहें कि महत्वपूर्ण बना दिए गए हैं- जुलूस, लाउडस्पीकर और बुलडोज़र। रात-दिन इन्हीं की चर्चा है, प्राइम टाइम बहस है। इन तीनों पर ही मुकुल सरल ने…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License