NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बीआरडी अस्पताल मामले में डॉ. कफ़ील खान को योगी सरकार ने किया बर्खास्त
“मुझे योगी सरकार से शुरू से ही उम्मीद नहीं थी। मैंने हमेशा से न्यायालय पर भरोसा किया।जब मेरा कोई दोष नहीं है, तो इंसाफ़ आज नहीं तो कल मिलेगा ही मिलेगा।”
असद रिज़वी
11 Nov 2021
kafeel khan

गोरखपुर के बाबा राघव दास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत के मामले पर उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए डॉ कफ़ील ख़ान को बर्खास्त कर दिया है। डॉ कफ़ील सरकार के इस फ़ैसले को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।

डॉ कफ़ील की बर्खास्तगी का फैसला उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन (यूपीएससी) की मंजूरी के बाद लिया गया है। यूपीपीएससी ने उनकी बर्खास्तगी का आदेश बीती रात मेडिकल शिक्षा विभाग को भेजा था।

मेडिकल शिक्षा विभाग प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने फ़ोन पर बताया  कि चार वर्ष से  निलंबित डॉ कफ़ील को अब बर्खास्त कर दिया गया है।

जब न्यूज़क्लिक ने डॉ कफ़ील ख़ान से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अगस्त 2017 में क़रीब 63 बच्चों ने “ऑक्सिजन” की कमी के कारण दम तोड़ दिया था। ऑक्सिजन की कमी का कारण यह था कि प्रदेश सरकार ने “ऑक्सिजन सप्लायरों” को भुगतान नहीं किया था।

उन्होंने कहा कि इस मामले में मेरे समेत आठ लोग निलम्बित हुए थे। जिसमें से सात को बहाल कर दिया गया। केवल उनको ही बर्खास्त किया गया है। डॉ कफ़ील ने दावा किया कि बीआरडी त्रासदी के बाद अभी तक “मेडिकल लापरवाही और भ्रष्टाचार” की हुई तमाम जाँचों में उनको “क्लीन चिट” मिली है। इसके बावजूद सरकार ने उनको बर्खास्त कर दिया।

डॉ कफ़ील ख़ान ने कहा “मुझे योगी सरकार से शुरू से ही उम्मीद नहीं थी। मैंने हमेशा से न्यायालय पर भरोसा किया। जब मेरा कोई दोष नहीं है तो इंसाफ़ आज नहीं तो कल मिलेगा ही मिलेगा।” 

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ कफ़ील ख़ान ने बताया कि वह इस आदेश की कॉपी मिलते ही न्यायालय में इसे चुनौती देंगे।

डॉ कफ़ील ख़ान की बर्ख़ास्तगी के मामले ने सियासी रंग भी ले लिया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने योगी सरकार को निशना बनाते हुए कहा है कि डॉ कफ़ील ख़ान की बर्खास्तगी दुर्भावना से प्रेरित है। नफरती एजेंडा से प्रेरित सरकार उनको प्रताड़ित करने के लिए ये सब कर रही है। प्रदेश कांग्रेस की प्रभारी प्रियंका ने कहा कि सरकार को ध्यान रखना चाहिए कि वो संविधान से ऊपर नहीं है। कांग्रेस पार्टी डॉक्टर कफील की न्याय की लड़ाई में उनके साथ है और हमेशा रहेगी।

बता दें कि अगस्त 2017 में बीआरडी मेडिकल कॉलेज (गोरखपुर) के बाल रोग विभाग के प्रवक्ता डॉ. कफ़ील ख़ान उस समय मीडिया की सुर्खी में आए, जब बीआरडी मेडिकल कॉलेज में क़रीब 60 बच्चों की ऑक्सीजन की कमी के कारण मौत हो गई थी।

डॉ. कफ़ील पहले मीडिया में एक नायक की तरह सामने आए थे, जिनके प्रयासों से कई बच्चों की जान बचाई गई।लेकिन बाद में इस मामले में योगी सरकार द्वारा उन्हें दोषी मानकर 22 अगस्त को निलंबित कर, जेल भेज दिया गया था। मामले की छानबीन के लिए सरकार द्वारा एक कमेटी गठित की गई।

18 अप्रैल 2019 को दायर की गई जांच रिपोर्ट में जांच अधिकारी हिमांशु कुमार ने डॉ. कफ़ील ख़ान को निर्दोष बताया। रिपोर्ट में कहा गया था कि उन के खिलाफ भ्रष्टाचार या लापरवाही के सबूत नहीं मिले हैं। हालाँकि यह रिपोर्ट 27 सितंबर को सार्वजनिक की गई थी।

इस की रिपोर्ट के आने के बाद सरकार ने निलंबित डॉक्टर के ख़िलाफ़ एक दूसरी जाँच 24 फरवरी 2020  बैठाने का फ़ैसला लिया। लेकिन 08 अगस्त 2021 को सरकर ने अदालत को बताया कि दूसरी जाँच का आदेश वापिस लिया जा रहा है।

बता दें कि डॉ कफ़ील ख़ान, बीआरडी मेडिकल कॉलेज मामले में रिहा होने के बाद नगरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ अलीगढ़ में एक कथित भड़काऊ भाषण देने के आरोप में दोबारा जेल भेज दिये गये थे।

उन्होंने 12 दिसंबर 2019 को सीएए के विरुद्ध एक सभा में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के बाहर एक भाषण दिया था।जिसके बाद जनवरी के आख़िर में उनको गिरफ़्तार किया गया था। इस से पहले इस मामले में  वह जेल से बाहर आते,उन पर रासुका लगा दी गई।

उस समय न्यूज़क्लिक से फोन पर बातचीत में डॉ. कफ़ील ने योगी सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा था कि वे यूपी एसटीएफ का शुक्रिया अदा करते हैं कि मुंबई से लाते समय उनका एनकाउंटर नहीं किया गया।

मथुरा जेल से रिहाई मिलने के बाद वह पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित अपने घर न आकर राजस्थान चले गये थे।उनके परिवार वालों का कहना था कि गोरखपुर में घर पर रहते हुए भी उनको झूठे मुक़दमों में फंसाया जा सकता था।

डॉ कफ़ील ख़ान पर प्रदेश सरकार द्वारा दूसरी जाँच वापिस लेने के फैसले के बाद माना जा रहा था कि उनको जल्द ही बहाल किया जा सकता है। लेकिन अब सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें बर्खास्त कर दिया है।

Dr Kafeel Khan
Yogi Adityanath
yogi government
BRD Medical College
BRD hospital case

Related Stories

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

क्या वाकई 'यूपी पुलिस दबिश देने नहीं, बल्कि दबंगई दिखाने जाती है'?

यूपी: बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच करोड़ों की दवाएं बेकार, कौन है ज़िम्मेदार?

उत्तर प्रदेश राज्यसभा चुनाव का समीकरण

योगी सरकार द्वारा ‘अपात्र लोगों’ को राशन कार्ड वापस करने के आदेश के बाद यूपी के ग्रामीण हिस्से में बढ़ी नाराज़गी

मनरेगा मज़दूरों के मेहनताने पर आख़िर कौन डाल रहा है डाका?

योगी 2.0 का पहला बड़ा फैसला: लाभार्थियों को नहीं मिला 3 महीने से मुफ़्त राशन 


बाकी खबरें

  • migrant
    सोनिया यादव
    महामारी का दर्द: साल 2020 में दिहाड़ी मज़दूरों ने  की सबसे ज़्यादा आत्महत्या
    30 Oct 2021
    एनसीआरबी के आँकड़ों के मुताबिक़ पिछले साल भारत में तकरीबन 1 लाख 53 हज़ार लोगों ने आत्महत्या की, जिसमें से सबसे ज़्यादा तकरीबन 37 हज़ार दिहाड़ी मजदूर थे।
  • UP
    लाल बहादुर सिंह
    आंदोलन की ताकतें व वाम-लोकतांत्रिक शक्तियां ही भाजपा-विरोधी मोर्चेबन्दी को विश्वसनीय विकल्प बना सकती है, जाति-गठजोड़ नहीं
    30 Oct 2021
    पिछले 3 चुनावों का अनुभव गवाह है कि महज जातियों के जोड़ गणित से भाजपा का बाल भी बांका नहीं हुआ, इतिहास साक्षी है कि जोड़-तोड़ से सरकार बदल भी जाय तो जनता के जीवन में तो कोई बड़ी तब्दीली नहीं ही आती, संकट…
  • Children playing in front of the Dhepagudi UP school in their village in Muniguda
    राखी घोष
    ओडिशा: रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूल बंद होने से ग्रामीण क्षेत्रों में निम्न-आय वाले परिवारों के बच्चे सबसे अधिक प्रभावित
    30 Oct 2021
    रिपोर्ट इस तथ्य का खुलासा करती है कि जब अगस्त 2021 में सर्वेक्षण किया गया था तो ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 28% बच्चे ही नियमित तौर पर पठन-पाठन कर रहे थे, जबकि 37% बच्चों ने अध्ययन बंद कर दिया था।…
  • climate change
    संदीपन तालुकदार
    जलवायु परिवर्तन रिपोर्ट : अमीर देशों ने नहीं की ग़रीब देशों की मदद, विस्थापन रोकने पर किये करोड़ों ख़र्च
    30 Oct 2021
    रिपोर्ट के अनुसार, विकसित देश भारी हथियारों से लैस एजेंटों को तैनात करके, परिष्कृत और महंगी निगरानी प्रणाली, मानव रहित हवाई प्रणाली आदि विकसित करके पलायन को रोकने के लिए एक ''जलवायु दीवार'' का…
  • mmummies
    संदीपन तालुकदार
    चीन के तारिम बेसिन ममी : डीएनए विश्लेषण से सामने आए हैरान करने वाले तथ्य
    30 Oct 2021
    27 अक्टूबर को 'नेचर' में प्रकाशित नए अध्ययन से पता चलता है कि यह ममी कुछ स्वदेशी लोगों के अवशेष हैं जिन्होंने शायद अपने पड़ोसी समूहों से कृषि विधियों को अपनाया था।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License