NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
आप ग्रेटा थनबर्ग को सुनते हैं, साध्वी पद्मावती को क्यों नहीं?
साध्वी पद्मावती की बिगड़ी हालत को लेकर मातृसदन आश्रम सहमा हुआ है। साध्वी पद्मावती को सोमवार रात दिल्ली एम्स ले जाया गया। गंगा की खातिर आश्रम पहले ही अपने दो संतों को खो चुका है। वास्तव में प्रश्न तो सरकार के सामने है कि जब कुछ सब स्पष्ट है,तो वह गंगा की अविरलता के लिए निर्माणाधीन बांधों को क्यों नहीं रोक रही?
वर्षा सिंह
18 Feb 2020
साध्वी पद्मावती

गंगा की अविरलता को लेकर अनशन कर रही साध्वी पद्मावती को बड़ी अफरा-तफरी के बीच सोमवार देर रात दिल्ली एम्स में भर्ती कराया गया। हरिद्वार के मातृसदन आश्रम ने सुबह संदेश दिया कि साध्वी की स्थिति ठीक नहीं है। अपने शीर्ष अधिकारियों को मातृसदन भेज अनशन को विराम लगवाने वाली केंद्र सरकार को साध्वी लगातार चिट्ठियां लिखती रहीं, लेकिन जवाब नहीं मिला। त्रिवेंद्र सिंह रावत या उनकी सरकार का कोई नुमाइंदा साध्वी से मिलने नहीं पहुंचा। यहां तक कि मातृसदन आश्रम के पास होने वाले कार्यक्रम तक मुख्यमंत्री ने रद्द किए।

मुख्यमंत्री हरिद्वार में होने वाले कुंभ की तैयारियों को लेकर बेहद सजग हैं, क्योंकि वहां गंगा किनारे लगने वाला आस्था का मेला सरकार की झोली भरेगा। मौजूदा सरकारें असहमतियों की आवाज़ें सुनने के लिए तैयार नहीं है।

साध्वी पद्मावती की बिगड़ी हालत को लेकर मातृसदन आश्रम सहमा हुआ है। गंगा की खातिर आश्रम पहले ही अपने दो संतों को खो चुका है। प्रो. जीडी अग्रवाल (स्वामी सानंद) की मौत ने हर गंगा प्रेमी को सदमे में डाल दिया था। आश्रम के संत निगमानंद भी अनशन करते हुए अस्पताल में मौत की नींद सोए। इसके अलावा गोकुलनाथ और वाराणसी के नागनाथ भी अविरल गंगा की मांग के साथ आमरण अनशन करते हुए मौत की नींद सो चुके हैं।

गंगा के लिए अनशन मातृसदन की परंपरा

मातृसदन के इस आंदोलन को समर्थन दे रहे माटू जन संगठन के विमल भाई कहते हैं कि सत्ता के सामने अपने मुद्दों को लाने के बहुत तरीके होते हैं। मातृ सदन ने भी रास्ता चुना है, क्या करें क्या ना करें, ये उनका ही निर्णय होगा। वास्तव में प्रश्न तो सरकार के सामने है कि जब कुछ सब स्पष्ट है, तो वह गंगा की अविरलता के लिए निर्माणाधीन बांधों को क्यों नहीं रोक रही? जबकि इन बांधों से राज्य सरकार को होने वाले आर्थिक नुकसान की भरपाई का हल भी है।

आप साध्वी पद्मावती की आवाज़ क्यों नहीं सुन रहे!

मैगसेसे अवार्ड विजेता जल पुरुष राजेंद्र सिंह कहते हैं कि साध्वी पद्मावती गंगा के लिए सत्याग्रह कर रही हैं। जब स्वीडन की 15 साल की ग्रेटा थनबर्ग ने सिर्फ एक घंटे के लिए पर्यावरण के बारे में बोलना शुरू किया, तो वहां की पार्लियामेंट ने उसे सुना, पूरी दुनिया में उनकी आवाज़ पहुंची। वहीं 18 साल की पद्मावती गंगा के लिए अपने जीवन का त्याग करने को तैयार हैं लेकिन आप उन्हें नहीं सुन रहे। भारत का मीडिया भी इसे ठीक से पेश नहीं कर रहा।

राजेंद्र सिंह कहते हैं कि जब मनमोहन सरकार ने प्रोफेसर जीडी अग्रवाल के अनशन के बाद भागीरथी नदी के तीन बड़े बांधों को रद्द किया और भागीरथी नदी को इकोलॉजिकली सेंसेटिव घोषित किया, ये तय किया कि भागीरथी पर नए बांध आगे नहीं बनेंगे, तो नरेंद्र मोदी को अलकनंदा और मंदाकिनी के बांधों को क्यों नहीं निरस्त करना चाहिए। अलकनंदा, मंदाकिनी और भागीरथी जब देवप्रयाग में मिलती हैं तो गंगा बनती है। यदि आप गंगा में आस्था रखते हैं तो आपको बांध हटाने पड़ेंगे। जल पुरुष का सुझाव है कि पर्यावरण के साथ संतुलन बताते हुए हमें सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा जैसे विकल्पों की ओर बढ़ाना होगा।

साध्वी पद्मावती की मांगें

बनारस में महाकाल एक्सप्रेस ट्रेन के कोच में मंदिर बनाने और हरी झंडी दिखाने वाले 'गंगा पुत्र' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कम से कम साधु-संतों से तो बात कर लेते। 18 साल की साध्वी पद्मावती 15 दिसंबर से पानी, नींबू, शहद के साथ अनशन कर रही हैं। वो लगातार यही कहती हैं कि जब तक मांगें पूरी नहीं होती अनशन जारी रहेगा। मां गंगा को बांधों और खनन से मुक्त करिए। गंगा अविरल होगी, तभी निर्मल होगी। गंगा गमन करेगी, तभी उसकी सांसे चलेंगी। गंगा को गौमुख से गंगा सागर तक बहने दो। उनकी प्रमुख मांग उत्तरकाशी और चमोली में गंगा पर बने चार बांधों को बंद करने की है।

हरिद्वार प्रशासन के रवैये से नाराज़ मातृसदन

आश्रम के स्वामी शिवानंद बार-बार कहते हैं कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर हरिद्वार प्रशासन साध्वी का अनशन खत्म कराने के लिए अलग-अलग हथकंडे अपना रहा है। लेकिन साध्वी से वार्ता करने कोई नहीं आ रहा। उनका आरोप है कि 30 जनवरी को दून अस्पताल से लौटने के बाद से ही साध्वी की तबीयत बिगड़ रही थी। वह मानसिक तौर पर परेशान थीं। डॉक्टर का नाम सुनते ही वह डर जातीं। जिस डॉक्टर से पद्मावती को आपत्ति थी, मना करने के बावजूद हरिद्वार प्रशासन बार-बार उसी डॉक्टर को आश्रम भेज रहा था। आश्रम ने दून अस्पताल की उस समय मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. मीनाक्षी जोशी के व्यवहार से भी नाराजगी जतायी कि उन्होंने बिना जांच के साध्वी को दो महीने की गर्भवती बता दिया। शिवानंद कहते हैं कि आश्रम की छवि बिगाड़ने के लिए ऐसा किया गया। लेकिन वे अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो सके। उलटा सरकार की ही किरकिरी हुई।

शिवानंद बताते हैं कि 13 फरवरी से हरिद्वार प्रशासन की गतिविधियां आश्रम में तेज़ हो गईं थीं। मातृसदन में गंगा के लिए अनशन कर चुके दो संतों की मृत्यु का डर उनके जेहन में था। फिर दून अस्पताल में उनके साथ जो व्यवहार हुआ, उससे भी वो परेशान रहीं। शिवानंद बताते हैं कि15 फरवरी की रात भी पुलिस बल के साथ एक डॉक्टर आया। वह चिल्ला-चिल्ला कर बहस करता रहा। उस रोज भी डॉक्टर ने चेकअप किया तो पद्मावती स्वस्थ थीं। रविवार को भी उनकी सभी जांच सही आई। लेकिन वह सदमे में थी।

सोमवार सुबह तबीयत बिगड़ने पर उन्हें हरिद्वार के रामकृष्ण अस्पताल में भर्ती कराया गया। जिसके बाद हायर सेंटर रेफर किया गया। हरिद्वार प्रशासन पद्मावती को ऋषिकेश एम्स ले जाना चाहता था, जिससे मातृसदन ने इंकार कर दिया। काफी बहस के बाद दिल्ली एम्स जाने को राजी हुए। सोमवार रात दिल्ली एम्स ले जाया गया। इसके लिए आनन-फानन में हरिद्वार से दिल्ली के लिए स्पेशल ग्रीन कॉरीडोर बनाया गया ताकि एंबुलेंस को कहीं रुकना न पड़े। दिल्ली तक 6 घंटे का सफ़र ढाई घंटे में तय किया गया।

बिहार के नालंदा से सांसद कौशलेंद्र सिंह ने साध्वी के बेहतर इलाज के लिए एम्स प्रशासन को पत्र भी लिखा है।

लोकसभा चुनाव के समय मातृ सदन का अनशन रोकने के लिए केंद्र की सरकार और नमामि गंगे के अधिकारी जो तेज़ी दिखा रहे थे, सरकार बनने के बाद केंद्र की सरकार और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत जिस तरह अपनी बात से पलट गए, वह सिर्फ मातृ सदन के लिए ही नहीं, हर किसी के लिए निराशाजनक है। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में लोगों की आवाज़ ही अनसुनी की जा रही है।

ganga
ganga river pollution
Protest for Ganga
Sadhvi Padmavati
Greta Thanberg
मातृसदन
Trivendra Singh Rawat
BJP
haridwar

Related Stories

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

आंगनवाड़ी महिलाकर्मियों ने क्यों कर रखा है आप और भाजपा की "नाक में दम”?

NEP भारत में सार्वजनिक शिक्षा को नष्ट करने के लिए भाजपा का बुलडोजर: वृंदा करात

नौजवान आत्मघात नहीं, रोज़गार और लोकतंत्र के लिए संयुक्त संघर्ष के रास्ते पर आगे बढ़ें


बाकी खबरें

  • up
    सोनिया यादव
    यूपी चुनाव 2022: कई जगह जमकर लड़ीं महिला उम्मीदवार, कई सीटों पर विजयी
    10 Mar 2022
    बीते विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार महिला उम्मीदवारों की संख्या में 4 प्रतिशत का इज़ाफ़ा हुआ है और वो फिलहाल मैदान में 30 से अधिक सीटों पर आगे चल रही हैं।
  • biren singh
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मणिपुर में भाजपा सरकार बनाने की प्रबल दावेदार केवल बहुमत का इंतज़ार
    10 Mar 2022
    मणिपुर की बात करें तो मणिपुर में विधानसभा की कुल 60 सीटें हैं। बहुमत के लिए 31 सीटों की जरूरत है। खबर लिखने तक मणिपुर में भी भाजपा 60 में से 15 सीट जीत चुकी है और 13 सीट पर आगे चल रही है।
  • आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: महंगाई-बेरोज़गारी पर हावी रहा लाभार्थी कार्ड
    10 Mar 2022
    यूपी की ज़मीन पर इस बार किसान आंदोलन से लेकर लखीमपुर कांड और हाथरस कांड की गूंज थी। कोविड की पहली लहर और दूसरी लहर की मार थी, छुट्टा पशु की परेशानी थी, महंगाई, बेरोज़गारी जैसे बड़े मुद्दे थे। विपक्ष…
  • अनिल अंशुमन
    झारखंड : मुआवज़े की मांग कर रहे किसानों पर एनटीपीसी ने किया लाठीचार्ज
    10 Mar 2022
    अपने खेतों के बदले उचित मुआवज़े की मांग कर रहे प्रदर्शनकारी किसानों पर हुए लाठीचार्ज से किसान आक्रोशित हो गए और जवाब में अधिकारियों पर पथराव किया।
  • bela and soni
    सौरव कुमार
    सोनी सोरी और बेला भाटिया: संघर्ष-ग्रस्त बस्तर में आदिवासियों-महिलाओं के लिए मानवाधिकारों की लड़ाई लड़ने वाली योद्धा
    10 Mar 2022
    भारत की सामूहिक उदासीनता ने आदिवासियों के अधिकारों को कुचलने वालों के प्रतिरोध में कुछ साहसी लोगों को खड़ा करने का काम किया है, और उनमें सबसे उल्लेखनीय दो महिलाएं हैं- सोनी सोरी और बेला भाटिया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License