NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
युवाओं की हुंकार, 'यंग इंडिया अगेंस्ट सीएए-एनआरसी-एनपीआर'
राजधानी दिल्ली समेत 25 से ज्यादा शहरों में देश के युवाओं ने 'यंग इंडिया अगेंस्ट सीएए-एनआरसी-एनपीआर के बैनर तले प्रदर्शन किया।
सोनिया यादव
20 Jan 2020
protest

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और एनआरसी के खिलाफ देश भर में प्रदर्शन जारी है।सोमवार, 20 जनवरी को राजधानी दिल्ली समेत 25 से ज्यादा शहरों में देश के युवाओं ने 'यंग इंडिया अगेंस्ट  सीएए-एनआरसी-एनपीआर  के बैनर तले प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन में हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और 100 से ज्यादा संगठनों ने इसमें भागीदारी की। इस प्रदर्शन में नागरिक समाज और वरिष्ठ लोगों ने भी यंग इंडिया का साथ दिया।

दिल्ली में इस आंदोलन का व्यापक असर दिखाई दिया। यंग इंडिया के आह्वान पर हजारों लोग मंडी हाऊस पर एकत्र हुए। इसके बाद आजादी के नारों और क्रांतिगीतों के साथ जंतर-मंतर तक विरोध मार्च निकाला गया। इस प्रदर्शन में बड़े पैमाने पर छात्र संगठन, महिलाएं और नागरिक समाज के लोग शामिल हुए। पुलिस बल की भारी तैनाती और निगरानी के बीच लोगों ने सरकार और प्रशासन पर जमकर हल्ला बोला।

प्रदर्शन में शामिल विकंलाग शौर्य ने न्यूज़क्लिक को बताया, ‘मैं द्वारका से आया हूं और सरकार से पूछना चाहता हूं कि आखिर सरकार हमारे वोट का गलत इस्तेमाल क्यों कर रही है। सरकार क्यों बहुमत का दुरुपयोग संविधान के खिलाफ कर रही है। कभी छात्रों पर हमला हो रहा है, कहीं प्रदर्शकारियों पर गोली चल रही है, आखिर सरकार चाहती क्या है। अमित शाह हमें क्रोनोलॉजी समझा रहे हैं, आज मैं अमित शाह को बताना चाहूंगा कि अब आप क्रोनोलॉजी समझिए, पहले हम आपको अपनी सरकार नहीं मानेंगे, फिर सीएए को नहीं मानेंगे और फिर एनआरसी और एनपीआर में कागज़ नहीं दिखाएंगे।'
protest 1.JPG
इस विरोध प्रदर्शन में जवारहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, जामिया मिल्लिया इस्लामिया समेत कई कॉलेज के छात्रों और संगठनों ने भागीदारी की। इस दौरान छात्रों ने 'हम कागज नहीं दिखाएंगे' और 'इंकलाब जिंदाबाद' के नारे भी लगाए। छात्रों ने सरकार से मंहगाई, बेरोज़गारी, आर्थिक मंदी पर जमकर सवाल किए।

जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद ने कहा, ‘शिक्षण संस्थानों और शिक्षा के क्षेत्र में लगाने के लिए सरकार के पास पैसा नहीं है, लेकिन पूरे देश में सीएए, एनआरसी और एनपीआर लागू करवाने के लिए सरकार के पास खूब पैसा है। सरकार अपने एजेंडे में देश के टैक्स पेयर्स की बात करती है, कुछ लोग कहते हैं कि जेएनयू जैसे संस्थानों में टैक्स के पैसे बर्बाद होते हैं, लेकिन आज सबके सामने है कि किसका पैसा कहां बर्बाद हो रहा है।'

जेएनयूएसयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष एन साईं ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में बताया, ‘सरकार बार-बार अपने एजेंडे में यंग इंडिया की बात करती है इसलिए आज हम यंग इंडिया सरकार को बता देना चाहते हैं कि हम  सीएए-एनआरसी-एनपीआर  के खिलाफ हैं। हम अपने संविधान को मानते हैं, जो किसी भी भेदभाव को नकारता है। हम संविधान का अनुच्छेद 14 सरकार को याद दिलाना चाहते हैं, जो हर धर्म को बराबरी की नज़र से देखता है। फिर सरकार नागरिकता को धर्म के आधार पर कैसे बांट सकती है? हम भारत के लोग, हम भारत के युवा इस सीएए, एनआरसी और एनपीआर को नहीं मानते। आज देश के 25 से ज्यादा शहरों में ये आंदोलन हो रहा है और ये जारी रहेगा, जब तक सरकार इस कानून को वापस नहीं ले लेती।'

इस प्रदर्शन में जामिया, शाहीनबाग, खोड़ा, अज़मेरी गेट समेत कई इलाकों से भारी संख्या में आई महिलाओं और युवा लड़कियों ने हिस्सा लिया। सभी ने सरकार पर अत्याचारी होने का आरोप लगाया, साथ ही मीडिया द्वारा उनके आंदोलन को बदनाम करने की पीड़ा भी बताई।
protest 2.JPG

जामिया से आईं राफिया कहती हैं, ‘हमारे पीएम सिर्फ मन की बात करते हैं, हमारी बातें नहीं सुनते। हम महीने भर से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन पीएम तो क्या उनके किसी मंत्री और नेता के पास भी समय नहीं है कि हमारा हालचाल ही पूछ लें, उल्टा सरकार और बीजेपी के नेता हमें बदनाम करने में लगे हैं कि हम पैसे लेकर धरना दे रहे हैं। हम पूछना चाहते हैं कि बीजेपी ने लोगों को पैसे देकर वोट लिए थे? क्या बीजेपी के जो लोग समर्थन दे रहे हैं, वो पैसे लेकर दे रहे हैं? हम सभी लोगों से कहना चाहते हैं कि इतनी ठंड़ में हम अपनी औलादों के साथ पैसे के लिए नहीं बैठते, बल्कि इसलिए बैठते हैं ताकि कल को कोई हमसे कागज़ के लिए पैसे ना मांगे, हम से हमारी नागरिकता का सबूत ना मांगे।'

इस प्रदर्शन में राजनीतिक पार्टियों के युवा नेताओं के साथ सामाजिक संगठन के लोग भी शामिल हुए। एक स्वर में सभी ने सीएए और एनआरसी को विभाजनकारी करार दिया और सरकार से इसे तुरंत वापस लेने की अपील की।

भाकपा माले की सेंटर कमेटी मेंबर सुचेता डे ने न्यूज़क्लिक को बताया, ‘इस आंदोलन में जो फ्रंट पर लड़ रहे हैं वो छात्र हैं, पुलिस की लाठियां खा रहे हैं, जेल जा रहे हैं वो छात्र हैं। देश में जब भी बड़ा आंदोलन हुआ है, उसकी अगुआई छात्रों ने ही की है। आज देश का युवा अपनी ताकत दिखा रहा है कि हम भले ही अलग-अलग हिस्सों में पुलिस का, गुंडों का दमन झेल रहे हैं लेकिन हमारा मुद्दा एक है और हम एकजुट हैं सीएए-एनआरसी-एनपीआर के खिलाफ।

ये जो सरकार है वो बार-बार देश के युवाओं को, शाहीन बाग की महिलाओं को, पिछड़े तबकों को अपमानित करती है। किरेन रिजिजु जैसे मंत्री कहते हैं कि ये यंग माइंड्स में जहर कौन भर रहा है? तो हम सरकार से कहना चाहते हैं कि राजनीतिक पार्टियां इस मुद्दे का विरोध कर रही हैं, ये उनकी जिम्मेदारी है लेकिन वो सिर्फ बोल रहे हैं। सच्चाई ये है कि इस आंदोलन को सड़कों पर लाने वाले युवा हैं, छात्र हैं, तो सरकार अपने भ्रम को दूर कर ले कि छात्र राजनीति के बहकावे में हैं।'
protest 3.JPG
सामाजिक संगठन अनहद की 62 वर्षीय शबनम हाशमी इस आंदोलन को युवाशक्ति का आंदोलन बताती हैं। उनके अनुसार देश के सभी वरिष्ठ नागरिकों की ये जिम्मेदारी है कि वे इस समय युवाओं के साथ खड़े हों, महिलाओं के साथ खड़े हों और उनके संघर्ष को सफल बनाए क्योंकि ये सीएए कानून खतरनाक है। हमारे संविधान के खिलाफ है, गरीब और आदिवासियों के खिलाफ है।

इस प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे कई लोगों ने पड़ोसी देश नेपाल, भूटान और श्रीलंका से आए शरणार्थियों के संबंध में भी सरकार से सवाल किया। साथ ही देश में गरीब और वंचित तबके के लोगों के लिए चिताएं भी व्यक्त की।

क्रांतिकारी युवा संगठन के दिनेश ने न्यूज़क्लिक से कहा, ‘हम सरकार से पूछना चाहते हैं कि आखिर सरकार ने सिर्फ तीन देशों को ही क्यों चुना और जब प्रताड़ना, अत्याचार की बात हो रही है, तो एक धर्म के लोगों को क्यों छोड़ दिया गया? सरकार नेपाल, भूटान, म्यांमार के पीड़ित लोगों के बारे में क्यों चुप है? जब बात दिल्ली में रह रहे रोहिंग्या की होती है, तो हम सभी जानते हैं कि रोहिंग्या हमारे गटर साफ करते हैं, जिससे उनकी मौत भी हो जाती है। जो लोग दूसरे देशों से आते हैं, वो गरीब हैं टाटा-अंबानी नहीं। वो हमारे देशोंं में आकर काम करते हैं, जीडीपी में योगदान करते हैं तो फिर सभी को नागरिकता देने में क्या हर्ज है। सिर्फ धर्म के आधार पर क्यों नागरिकता दी जा रही है।'

गौरतलब है कि देश के विभिन्न हिस्सों में सीएए-एनआरसी और एनपीआर को लेकर जबरजस्त विरोध देखने को मिल रहा है। छात्रों और महिलाओं ने आंदोलन का मोर्चा संभाल रखा है। सरकार भले ही सीएए पर एक इंच पीछे ना होने की बात कर रही हो लेकिन इसका विरोध कर रहे लोगों के भी मनोबल में कोई कमी नहीं है।

CAA
NRC
NPR
youth protest
Student Protests
Protest against NRC
Protest against CAA
Delhi University
JNU
Jamia Milia Islamia
Constitution of India

Related Stories

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

जेएनयू: अर्जित वेतन के लिए कर्मचारियों की हड़ताल जारी, आंदोलन का साथ देने पर छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष की एंट्री बैन!

CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा

‘जेएनयू छात्रों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं, पुलिस फ़ौरन कार्रवाई करे’ बोले DU, AUD के छात्र

जेएनयू हिंसा: प्रदर्शनकारियों ने कहा- कोई भी हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या खाना चाहिए

JNU में खाने की नहीं सांस्कृतिक विविधता बचाने और जीने की आज़ादी की लड़ाई

नौजवान आत्मघात नहीं, रोज़गार और लोकतंत्र के लिए संयुक्त संघर्ष के रास्ते पर आगे बढ़ें

झारखंड: राज्य के युवा मांग रहे स्थानीय नीति और रोज़गार, सियासी दलों को वोट बैंक की दरकार

SFI ने किया चक्का जाम, अब होगी "सड़क पर कक्षा": एसएफआई

देश बड़े छात्र-युवा उभार और राष्ट्रीय आंदोलन की ओर बढ़ रहा है


बाकी खबरें

  • वसीम अकरम त्यागी
    विशेष: कौन लौटाएगा अब्दुल सुब्हान के आठ साल, कौन लौटाएगा वो पहली सी ज़िंदगी
    26 May 2022
    अब्दुल सुब्हान वही शख्स हैं जिन्होंने अपनी ज़िंदगी के बेशक़ीमती आठ साल आतंकवाद के आरोप में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बिताए हैं। 10 मई 2022 को वे आतंकवाद के आरोपों से बरी होकर अपने गांव पहुंचे हैं।
  • एम. के. भद्रकुमार
    हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आईपीईएफ़ पर दूसरे देशों को साथ लाना कठिन कार्य होगा
    26 May 2022
    "इंडो-पैसिफ़िक इकनॉमिक फ़्रेमवर्क" बाइडेन प्रशासन द्वारा व्याकुल होकर उठाया गया कदम दिखाई देता है, जिसकी मंशा एशिया में चीन को संतुलित करने वाले विश्वसनीय साझेदार के तौर पर अमेरिका की आर्थिक स्थिति को…
  • अनिल जैन
    मोदी के आठ साल: सांप्रदायिक नफ़रत और हिंसा पर क्यों नहीं टूटती चुप्पी?
    26 May 2022
    इन आठ सालों के दौरान मोदी सरकार के एक हाथ में विकास का झंडा, दूसरे हाथ में नफ़रत का एजेंडा और होठों पर हिंदुत्ववादी राष्ट्रवाद का मंत्र रहा है।
  • सोनिया यादव
    क्या वाकई 'यूपी पुलिस दबिश देने नहीं, बल्कि दबंगई दिखाने जाती है'?
    26 May 2022
    एक बार फिर यूपी पुलिस की दबिश सवालों के घेरे में है। बागपत में जिले के छपरौली क्षेत्र में पुलिस की दबिश के दौरान आरोपी की मां और दो बहनों द्वारा कथित तौर पर जहर खाने से मौत मामला सामने आया है।
  • सी. सरतचंद
    विश्व खाद्य संकट: कारण, इसके नतीजे और समाधान
    26 May 2022
    युद्ध ने खाद्य संकट को और तीक्ष्ण कर दिया है, लेकिन इसे खत्म करने के लिए, संयुक्त राज्य अमेरिका को सबसे पहले इस बात को समझना होगा कि यूक्रेन में जारी संघर्ष का कोई भी सैन्य समाधान रूस की हार की इसकी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License