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कानपुर में ज़ीका की दहशत, अलर्ट मोड पर हेल्थ महकमा
बारिश से पहले मच्छरों पर काबू पा लिया गया होता, तो इस वायरस के फैलाव के चलते लोगों में जो डर है, वह नहीं होता। ज़ीका से भले ही किसी की मौत नहीं हुई है, लेकिन प्रभावित इलाकों में ख़ौफ़ और दहशत का मंज़र साफ-साफ नज़र आ रहा है।
विजय विनीत
05 Nov 2021
Zika panic in Kanpur

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से करीब 80 किलोमीटर पश्चिम स्थित कानपुर के चकेरी इलाके में ज़ीका वायरस के चलते खौफनाक दहशत है। 'मैनचेस्टर ऑफ़ द ईस्ट' का खिताब हासिल करने वाले इस शहर में पहली मर्तबा ज़ीका वायरस ने जोरदार हमला बोला है।

सूबे की औद्योगिक राजधानी में इस वायरस के 66 मरीजों की शिनाख्त हुई है, जिनमें 21 महिलाएं हैं। चार बच्चियां भी इसकी चपेट में हैं, जिनकी उम्र चार से बारह साल है। कानपुर के जार्ज मऊ, आदर्शनगर, तिवारीपुर, लालबंगला, कैंट और श्यामनगर इलाकों में ज़ीका वायरस से पीड़ित मरीजों की तादाद लगातार बढ़ रही है। इसी इलाके में मुख्य चिकित्साधिकारी समेत स्वास्थ्य महकमे के कई अफसरों के दफ्तर भी हैं। दो हेल्थ वर्कर्स भी ज़ीका की चपेट में है, जिसके चलते हेल्थ महकमे की चिंता और बढ़ गई है।

कानपुर में अब तक छह सौ लोगों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं, जिनकी रिपोर्ट आनी बाकी है। हेल्थ महकमे के अफसर भी यह मानकर चल रहे हैं कि वायरस का प्रकोप फिलहाल आसानी से थमने वाला नहीं है।

कानपुर में खौफनाक ढंग से बढ़ रहे ज़ीका के मरीजों के हाल पर दैनिक जागरण के लिए रिपोर्टिंग करने वाले ऋषि दीक्षित साफ-साफ हेल्थ महकमे को दोषी ठहराते हैं। वह कहते हैं, "सालों बाद मलेरिया विभाग की नींद टूटी है। जिन इलाकों में ज़ीका वायरस का शिकंजा कस रहा है, वहां बेशुमार गंदगी और बाजबजाते नाले-नालियों में मच्छरों डेरा है। संभव है कि ज़ीका के वायरस यहां पहले से ही पलते रहे हों और जांच अब हुई है। बारिश से पहले मच्छरों पर काबू पा लिया गया होता, तो इस वायरस के फैलाव के चलते लोगों में जो डर है, वह नहीं होता। ज़ीका से भले ही किसी की मौत नहीं हुई है, लेकिन प्रभावित इलाकों में खौफ और दहशत का मंजर साफ-साफ नजर आ रहा है।"

ऋषि यह भी कहते हैं, "हेल्थ महकमे की कई टीमें प्रभावित इलाकों में सर्वे कर रही हैं। खून और लारवा के सैंपल जुटाए जा रहे हैं। फिर भी ज़ीका वायरस के फैलाने के सोर्स पता नहीं चल सका है। साफ-सफाई के मामले में नगर निगम अभी भी घोर लापरवाही बरत रहा है। कुछ इलाकों में मच्छरों को मारने के लिए दवाएं छिड़की जा रही हैं। साथ ही फागिंग भी कराई जा रही है, लेकिन उसका कोई खास असर नहीं है। जीके के रोकाथम के लिए जिला प्रशासन को जो कदम उठाना चाहिए, वह नहीं उठाया जा रहा है। यह स्थिति नई बीमारे के खतरे को बढ़ावा देने वाली है।"

कानपुर के जिस चकेरी इलाके में ज़ीका का प्रकोप है, उसकी आबादी करीब दस लाख है। यहां रहने वाले लोगों पर पाबंदी लगाई गई है कि कोई भी व्यक्ति किसी के लिए खून डोनेट नहीं करेगा। हरजेंद्रनगर, कैलाशनगर, तिवारीपुर, जार्जमऊ, जेके कालोनी, मोतीनगर लालबंगला, अहिरवा, शिवकटरा, श्यामनगर, कृष्णानगर, भवानीनगर में हेल्थ महकमे की टीमें सर्वे और सैंपल कलेक्शन का काम कर ही हैं। फिर भी हालात काबू में नहीं है। एयरफोर्स कैंपस के आसपास के इलाकों में ज़ीका ज्यादा सक्रिय है। इन इलाकों में साफ-सफाई पर अब भी मुकम्मल तौर पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। डर इस बात का है कि अगर मच्छरों के जरिये ज़ीका समूचे शहर में फैल गया तब क्या होगा?"

इसे भी पढ़ें: कानपुर में ज़ीका वायरस के 30 नये मरीज़, कुल संख्या 66 हुई

ज़ीका के 66 मरीज चिह्नित

कानपुर में ज़ीका के जो 66 केस सामने आए हैं उनमें 35 मरीज वो हैं जिनका एयरफोर्स कैंपस में आना-जाना रहा है। एयरफोर्स कैंपस में ज़ीका के छह मामले सामने आए हैं। यह वायरस कैंटोमेंट के उस इलाके में भी घुस गया है जहां सेना के जवान रहते हैं। यहां भी चार मरीज चिन्हित किए गए हैं। कृष्णानगर में तीन और श्यामनगर में चार मामले सामने आए हैं। बाकी मरीज दूसरे इलाकों के हैं। पोखपुर और आदर्शनगर मोहल्ले में ज़ीका वायरस का खौफ बढ़ रहा है। ये दोनों मुहल्ले एयरफोर्स कैंपस से फसत पांच सौ मीटर की दूरी पर हैं। यहां ज्यादातर एयरफोर्स के वो कर्मचारी अथवा जवान रहते हैं, जिन्हें कैंपस में आवास आवंटित नहीं हो सका है।

पोखरपुर में ही 23 अक्टूबर 2021 को ज़ीका वायरस के पहले मामले की शिनाख्त हुई थी। इसके बाद इस मुहल्ले को हाट स्पाट घोषित कर दिया गया। पोखरपुर में ज़ीका के 19,  हरजेंद्र नगर में 14 और तिवारीपुर-आदर्शनगर में 20 लोगों में इस वायरस की पुष्टि हो चुकी है। एयरफोर्स कैंपस में छह केस आए हैं। कैंटोमेंट जहां आर्मी रह रही है वहां चार केस हैं। कृष्णानगर में तीन और श्यामनगर में चार केस हैं। बाकी मरीज दूसरे इलाकों के हैं। भवानीनगर में पहले एक रोगी की शिनाख्त हुई थी और अब वहां तीन नए केस सामने आ गए हैं।

तीन हॉट स्पॉट बनाए गए

ज़ीका के खौफ के चलते प्रशासन ने कानपुर में तीन हॉट स्टॉप इलाके चिह्नित किए हैं। ये इलाके हैं पोखपुर, आदर्शनगर और भवनीनगर। कानपुर के मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. नैपाल सिंह ने ‘न्यूजक्लिक’ से कहा, " एयरफोर्स कैंपस से तीन किमी के दायरे में ज़ीका वायरस का सर्वे किया जा रहा हैं। उन सभी मरीजों की तलाश की जा रही है जो किसी भी तरह के बुखार की चपेट में हैं। निरोधात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। जांच के लिए 50 टीमें सैंपलिंग कर रही हैं। ज़ीका वायरस के फैलने के कारणों की पड़ताल करने के लिए सौ टीमों का लगाया गया है। इस बाबत एक मेगा कलस्टर और दो माइनर कस्टर बनाए गए हैं। कोई मरीज गंभीर नहीं है। वायरस काफी हल्के किस्म का है, जिससे किसी की मौत की पुष्टि नहीं हुई है। "

हेल्थ महकमे के आकड़ों के मुताबिक पोखपुर के जकार्डिया कांप्लेक्स में ज़ीका के जिस मरीज की शिनाख्त हुई है उसके परचितों और रिश्तेदारों के खून के नमूने जांचे गए थे, जिनमें कोई पाजिटिव केस नहीं मिला। हालांकि पोखपुर और आदर्शनगर में ज़ीका वायरस से पीड़ित मरीजों तादाद कम होने का नाम नहीं ले रही है। ज़ीका से पीड़ित मरीजों की केस हिस्ट्री जुटाई गई है, जिससे ज्ञात हुआ है कि उन्होंने कहीं यात्राएं नहीं की हैं।

एयरफोर्स हॉस्पिटल ने पकड़ी बीमारी

कानपुर में ज़ीका वायरस संक्रमण का पहला मामला मिला है। यह उत्तर प्रदेश में भी ज़ीका वायरस का पहला मामला है। ज़ीका के पहले मरीज का एयरफ़ोर्स हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था। ज़ीका जैसे लक्षण दिखने पर उसका सैंपल पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरॉलजी (एनआईवी) भेजा था। बाद में जांच में ज़ीका वायरस से पॉज़िटिव होने की पुष्टि हुई थी। इस मरीज का इलाज अब मरीजों का इलाज अब केजीएमयू (लखनऊ) से डॉक्टर मानवेंद्र त्रिपाठी और दिल्ली स्थित एम्स से डॉक्टर केजी चौधरी की टीम कर रही है।

कानपुर में ज़ीका वायरस से पीड़ित जिन 66 मरीजों को चिह्नित किया गया है उनमें आठ को सेवन एयरफोर्स हास्पिटल में और दो अन्य को काशीराम ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। बाकी मरीजों का उपचार होम आइसोलेशन में हो रहा है। डीएम विशाख जी. अय्यर के मुताबिक, " सभी मरीज़ की हालत स्थित बनी हुई है। अलर्ट मोड पर काम करते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार जांचें कर रही हैं। ज़ीका की जांच अब लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल कालेज में कराई जा रही है। नगर निगम ने पूरे इलाके में साफ़-सफ़ाई, एंटी लार्वा का छिड़काव और फ़ॉगिंग का कार्य शुरू कर दिया है।"

ज़ीका की धुरी एयरफोर्स कैंपस 

उत्तर प्रदेश में ज़ीका वायरस का पहला मामला कानपुर में शिनाख्त होने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग थोड़ा चौकन्ना दिख रहा है। फिर भी स्थिति काबू में नहीं है। वरिष्ठ पत्रकार आलोक पांडेय कहते हैं, " यह ख़तरनाक बात है की ज़ीका वायरस के फैलाव की धुरी एयरफोर्स कैंपस है। इस इलाके के 35 लोगों में ज़ीका की पुष्टि हुई है। हालांकि यहां जो वायरस है उसकी प्रवृत्ति काफी कमजोर है। पोखपुर और आदर्शनगर मोहल्लों में खासतौर पर उन लोगों की आबादी है जिनके परिवार के लोग एयरफोर्स में नौकरी करते हैं। माना जा सकता है कि ज़ीका से पीड़ित मरीजों की तादाद बढ़ सकती है।"

कानपुर आईआईटी के प्रो. मणिंद्र अग्रवाल से हुई अपनी बातचीत का ब्योरा देते हुए आलोक बताते हैं, " पूरे नवंबर महीने तक ज़ीका वायरस का जोर रहेगा। प्रो. मणिंद्र ने कोरोनाकाल में गणितीय मॉडल पर जो चार्ट बनाया था, वह सौ फीसदी खरा उतरा था। कोरोना की तर्ज पर आईआईटी कानपुर के इस वैज्ञानिक ने ज़ीका वायरस के हमलों के बारे में अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन-प्रशासन को भेजी है। आमतौर पर ज़ीका वायरस का प्रकोप 14 दिनों तक रहता है। अगर इसके मच्छरों का फैलाव रोक दिया जाए तो 28 दिनों के अंदर ज़ीका खात्म हो सकता है। लगता है कि 20 नवंबर के बाद हालात में थोड़ा सुधार होगा। फिलहाल मरीजों की तादाद तेज रफ्तार से बढ़ने की उम्मीद है।"

कानपुर मंडल के अपर निदेशक (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) डॉ. जीके मिश्रा कहते हैं, " ज़ीका वायरस की चेन 14 दिनों तक चलेगी। इस दौरान हम सघन मानिटरिंग करेंगे। 28 दिन बाद शहर को ज़ीका रहित घोषित करने पर विचार किया जाएगा। ज़ीका का फैलाव रोकने के लिए साफ-सफाई और मच्छरों के खात्म के लिए बड़े पैमाने पर मुहिम चलाई जा रही है। लोगों से अपील की जा रही है कि वो पूरी बांह वाले कपड़े पहनें और घरों में मच्छरों को मारने के लिए हर संभव उपाय करें।"

गर्भवती महिलाओं के लिए जानलेवा

डॉ. मिश्रा के मुताबिक,  "ज़ीका वायरस से संक्रमित होने का सबसे ज्यादा ख़तरा गर्भवती महिलाओं को रहता है। गर्भ में पल रहे शिशु के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक है। इसे ध्यान में रखते हुए गर्भवती महिलाओं की डोर टू डोर सैंपलिंग की जा रही है। पोखरपुर में सबसे पहले संक्रमित पाए गए एयरफोर्स कर्मी के घर के आसपास अब तक करीब 50 से ज्यादा गर्भवती महिलाओं की जांचें की जा चुकी हैं। इस वायरस को फैलने से रोकने के लिए कोविड सबसे अच्छी केस स्टडी है। जिस तरह जांच बढ़ाकर और ज्यादा संक्रमण वाले इलाकों को कंटेनमेंट‌ जोन घोषित करके कोरोना के केसों पर काबू पाया गया था, उसी तरह ज़ीका वायरस पर भी काबू पाया जाएगा।"

पत्रकार आलोक राय कहते हैं, " कानपुर शहर के सभी मोहल्लों में ज़ीका वायरस से बचाव से संबंधित पोस्टर चिपकाए जा रहे हैं। साथ ही लोगों को मच्छरों से बचाव के लिए उपाय भी बताए जा रहे हैं। ज़ीका वायरस एयरफोर्स कर्मी में कैसे आया?  यह अभी रहस्य बना हुआ है। स्वास्थ्य महकमे की ओर से बताया जा रहा है कि ज़ीका वायरस का संक्रमण एडीज इजिप्टी मच्छर के काटने से भी होता है। यह मच्छर डेंगू और चिकनगुनिया की वजह भी बनता है। संक्रमित मरीज के साथ संबंध बनाने पर यह स्वस्थ व्यक्ति में भी फैल सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक यह एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है जो इंसानों में लकवा और मौत की वजह बन सकता है।"

युगांडा में पकड़ा गया था ज़ीका वायरस

आमतौर पर ज़ीका वायरस फ्लाविविरिडए परिवार के हैं, जो जो दिन के समय सक्रिय रहते हैं। इंसानों में यह मामूली बीमारी के रूप में जाना जाता है, जिसे ज़ीका बुखार कहते हैं। पहली बार ज़ीका वायरस से जुड़ी महामारी प्रशांत महासागर के याप आइलैंड में 2007 में आई थी। इसके बाद ब्राजील, अमेरिका और एशिया में ये एक महामारी की तरह फैला। इसका पहला मामला 1947 में युगांडा में सामने आया था। इसके पाँच साल बाद यह वायरस इंसानों में पाया गया। पीले बुखार पर शोध कर रहे पूर्वी अफ्रीकी विषाणु अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों को ज़ीका के जंगल में रीसस मकाक (एक प्रकार का लंगूर) में इस बीमारी का पता लगया। इस बंदर को बार-बार बुखार हो जाता था। बाद में नाइजीरिया में साल 1954 में एक व्यक्ति इस बीमारी की चपेट में आया।

साल 2007 में इसका प्रभाव पहली बार अफ्रीका और एशिया के बाहर देखने को मिला। ज़ीका की चपेट में आने के बाद मरीज के शरीर में एक रुग्णता आ जाती है, जिससे बुखार हो जाता है। आंखें लाल, जोड़ों में दर्द के साथ शरीर पर लाल चकत्ते उभर आते हैं। शारीरिक संबंध बनाने और खून चढ़ाने से भी इसके फैलने की संभावना रहती है। यह रोग गर्भवती मां से गर्भस्थ शिशु में जा सकता है वर्टिकली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन और शिशु के सिर के अपूर्ण विकास की वजह बन सकता है। गर्भावस्था के दौरान ज़ीका वायरस का संक्रमण शिशुओं में जन्मजात विकृतियां पैदा कर सकता है।

बीएचयू के मेडिसिन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डा.आरएस मौर्य कहते हैं, "अमेरिका, अफ्रीका के बाद भारत समेत दुनिया 86 देशों में ज़ीका संक्रमण के प्रमाण मिले हैं। ज़ीका वायरस के संक्रमण या इससे जुड़े रोगों के लिए कोई उपचार उपलब्ध नहीं है। ज़ीका वायरस के संक्रमण के लक्षण आमतौर पर हल्के होते हैं। ज़ीका वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए दिन और शाम के समय मच्छरों के काटने से बचाव एक प्रमुख उपाय है। गर्भवती महिलाओं, प्रजनन आयु की महिलाओं और छोटे बच्चों के बीच मच्छरों के काटने की रोकथाम पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।"  

डॉ. मौर्य सलाह देते हैं, "बुखार, दाने या गठिया जैसे लक्षणों से पीड़ित लोगों को भरपूर आराम करना चाहिए, तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए और आम दवाओं के साथ दर्द और बुखार का इलाज करना चाहिए। यदि लक्षण बिगड़ते हैं, तो उन्हें चिकित्सा देखभाल और सलाह लेनी चाहिए। ज़ीका ट्रांसमिशन वाले क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं या जो ज़ीका वायरस संक्रमण के लक्षण विकसित करते हैं, उन्हें प्रयोगशाला परीक्षण और अन्य नैदानिक देखभाल के लिए चिकित्सा ध्यान देना चाहिए।"

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