NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
आदिवासी दिवस: भाजपा  राज से नाराज़ आदिवासी समाज ने उठाई अधिकारों की आवाज़ !
 आदिवासी समाज का भाजपा सरकार पर यह आरोप है कि वह संविधान की पाँचवीं अनुसूची के प्रावधानों को धता बता कर उन्हें उनकी परंपरागत जंगल  ज़मीनों से लाठी, बंदूक के बल पर लगातार उजाड़ रही है। 
अनिल अंशुमन
09 Aug 2019
aadiwasi

 संयुक्त राष्ट्र संघ के आह्वान पर आदिवासी समाज की हक़ बराबरी को स्थापित करने के लिए पिछले 22 वर्षों से प्रत्येक  9 अगस्त को अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस मनाया जाता है । दुनिया के कई देशों की सरकारें आदिवासी समुदाय को महत्व देकर इसके लिए प्रोत्साहित करतीं हैं । विडम्बना है कि भारत के आदिवासियों को ये सुलाभ आज भी नहीं हासिल हो सका है। क्योंकि यहाँ की सरकारें इस दिवस का भी इस्तेमाल आदिवासी समाज के साथ षड्यंत्र के रूप में करतीं हैं।  

झारखंड प्रदेश के आदिवासी समाज के लोगों ने इस दिवस को भाजपा सरकार द्वारा आदिवासियों पर किए जा रहे हमलों के प्रतीकार दिवस के रुप में मनाया। हालांकि गोदी मीडिया के जरिये भाजपा सरकारें अपने आदिवासी हित का काफी ढींढोरा पीट रहीं हैं , बावजूद इसके जमीनी सच यही है कि भाजपा राज से आदिवासी समाज क्षुब्ध होने के साथ साथ उसके लगातार आंदोलित है। जो स्वाभाविक भी प्रतीत होता है। आदिवासियों की मानें तो हाल के वर्षों में जब से देश के शासन में भाजपा सत्तारूढ़ हुई है , यह समाज भी इसका मुख्य निशाना  बना हुआ है। जिसका एक उदाहरण है - झारखंड के पड़ोसी गैर भाजपा राज्यों की सरकारों ने इस दिवस पर सरकारी अवकाश घोषित किया हुआ है। लेकिन झारखंड की सरकार इस दिवस पर अवकाश घोषित करने की मांग को लगातार अनसुना कर रही है।

आदिवासी समाज का भाजपा सरकार पर यह आरोप है कि वह संविधान की पाँचवीं अनुसूची के प्रावधानों को धता बता कर उन्हें उनकी परंपरागत जंगल ज़मीनों से लाठी, बंदूक के बल पर लगातार उजाड़ रही है। वनाधिकार के सवाल पर भी आज जो पूरे देश के आदिवासी अधार में लटके हुए हैं , सुप्रीम कोर्ट में समय पर सरकार की सही भूमिका नहीं रहने के कारण ही हुआ है। अलग झारखंड राज्य गठन के बाद भी राज्य में पाँचवीं अनुसूची को लागू करने में सरकारें लगातार टालतीं रहीं ।

क्षुब्ध होकर खूंटी के आदिवासियों ने अपने गांवों में पाँचवी अनुसूची के अधिकारों को पत्थलगड़ी में लिखकर दर्शाया तो दर्जनों गांवों के सैंकड़ों आदिवासियों को सरकार ने राजद्रोही घोषित कर दिया। पत्थलगड़ी के 28 गांवों के 150 से 3000 लोगों तक पर ‘ अज्ञात ‘ नाम से संगीन फर्जी मुकदमे कर गए हैं । फलतः आज भी अनगिनत आदिवासी पुलिस द्वारा पकड़े जाने के भय से अपने घर, परिवार, गाँव से निर्वासित जीवन जी रहें हैं । दूसरी ओर , शांति- व्यवस्था बहाली के नाम पर रात- दिन गांवों में मार्च करती अर्ध सैन्यबलों की टुकड़ियों से सारा इलाका भयग्रस्त हो चुका है । इसी तरह गोड्डा में अडानी पवार प्रोजेक्ट के लिए बंदूक की नोंक पर उजाड़े गए रैयत आदिवासियों  को आजतक इंसाफ नहीं मिल सका है।  

आदिवासी समुदाय का एक बड़ा आरोप है कि भाजपा सरकार व संघ परिवार आदिवासियों कों हिन्दू संस्कृति का अंग घोषित कर इनकी स्वायत्त परंपरा - संस्कृति और धर्म को नष्ट - भ्रष्ट करने का संगठित कुत्सित प्रयास चला रही  है। पिछले वर्ष मध्य प्रदेश में तो आरएसएस ने विश्व आदिवासी दिवस के नाम बदलकर स्वदेशी दिवस की संज्ञा तक दे डाली । उसी वर्ष रांची में हुई संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी मण्डल की बैठक में आदिवासियों के ‘सरना धर्म' को हिन्दू धर्म से अलग मानने से इंकार कर दिया गया । जबकि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट कह दिया है कि आदिवासी हिन्दू नहीं हैं।

 aadiwasi 1st.jpg
आदिवासी भाषा, संस्कृति के विकास को संवैधानिक संरक्षण मिला हुआ है । लेकिन संथाली को छोड़ प्रदेश की शेष सभी आदिवासी भाषाओं को सरकार की घोर उपेक्षा ने उन्हें अपने ही देस में परदेसी बना दिया है । आज भी इनके प्राथमिक से उच्चतर स्तर तक के पठन–पाठन व पाठ्यक्र्म , पुस्तक प्रकाशन तथा शिक्षकों की नियुक्ति इत्यादि की कारगर योजना नहीं होने के कारण सभी आदिवासी भाषाएँ अस्तित्व संकट की कगार पर पहुँच गईं हैं।
    
विश्व आदिवासी दिवस मनाने के बहाने भाजपा शासित प्रदेशों के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में कई स्थानों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित कर आदिवासी समाज में अपनी पैठ बढ़ाने की कवायद हुई है। लेकिन झारखंड के अधिकांश आदिवासी समुदाय इन सभी आयोजनों से दूर दूर ही रहे।  

इस दिन झारखंड के 'हो' आदिवासी बाहुल्य कोल्हान क्षेत्र के चाईबसा,चक्रधरपुर में अखिल भारतीय क्रांतिकारी आदिवासी महासभा के आह्वान पर इस इलाके के आदिवासी अपने अपने क्षेत्र में नंग–धड़ंग व थाली–कटोरा लेकर पदयात्रा निकालकर डीसी के घेराव की घोषणा की है। जमशेदपुर में भी आदिवासी गांवों को नगर निगम में जबरन शामिल करने के खिलाफ आदिवासी समाज के लोगों ने विरोध प्रदर्शन कर यह दिवस मनाया। प्रदेश की राजधानी रांची में भी कई सभा–सेमीनारों में वर्तमान भाजपा सरकार की आदिवासी विरोधी नीतियां थोपे जाने को लेकर चर्चा–विमर्श कार्यक्रम हुए। 

सवाल है कि आखिर क्यों वर्तमान सरकार से समस्त आदिवासी समाज क्षुब्ध-नाराज़ होने के साथ साथ भयाक्रांत है? हालिया “ कश्मीर तोड़ो कांड “ के बाद तो सोशल मीडिया में कई आदिवासी बुद्धिजीवियों व सामाजिक कार्यकर्त्ताओं ने बड़े-बड़े पोस्ट डालकर कई आशंकाएं जतायीं हैं । जिसमें ये कहा जा रहा है कि कहीं सीएनटी–एसपीटी कानून और संविधान की पाँचवीं अनुसूची जैसे विशेष प्रावधानों को धारा 370 की भांति समाप्त कर आदिवासी इलाकों को भी सामान्य क्षेत्र घोषित न कर दिया जाये ! क्योंकि वर्तमान सरकार आदिवासी प्रेम का जितना भी दिखावा कर ले , जमीनी हक़ीक़त में वह उतनी ही निर्ममता से तमाम नियम–क़ायदों की धज्जियां उड़ाकर उनके जंगलों–ज़मीनों को निशाना बना रही है । विरोध करने वाले आदिवासियों को पहले तो ‘ विकास विरोधी और माओवादी ‘  कहकर दमन किया गया । अब जबकि आदिवासियों पर भी देशद्रोही–राजद्रोही का आरोप मढ़ा जा रहा है तो ऐसे में अनिष्ठ होने के आसार ही अधिक दीखलाई पड़ रहें हैं   !

aadiwasi
world trible day
tribles in jharkhand
BJP
tribals status in modi government
SC/ST

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • तारिक़ अनवर
    यूपी चुनाव : मथुरा की जनता ने कहा मंदिर के नाम पर भंग हो रही सांप्रदायिक शांति
    19 Jan 2022
    कई स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह कोई मुद्दा नहीं है, हम इसे चुनावी मुद्दा नहीं बनने देंगे।
  • corona
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2.82 लाख से ज़्यादा नए मामले, 441 मरीज़ों की मौत
    19 Jan 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 4.83 फ़ीसदी यानी 18 लाख 31 हज़ार हो गयी है।
  • यूपीः योगी सरकार में मनरेगा मज़दूर रहे बेहाल
    एम.ओबैद
    यूपीः योगी सरकार में मनरेगा मज़दूर रहे बेहाल
    19 Jan 2022
    प्रदेश में काम न मिलने के अलावा मनरेगा से जुड़े मज़दूरों को समय पर भुगतान में देरी का मामला अक्सर सामने आता रहता है। बागपत में इस योजना के तहत काम कर चुके मज़दूर पिछले दो महीने से मज़दूरी के लिए तरस…
  •  Memorial
    विक्रम सिंह
    1982 की गौरवशाली संयुक्त हड़ताल के 40 वर्ष: वर्तमान में मेहनतकश वर्ग की एकता का महत्व
    19 Jan 2022
    19 जनवरी, 1982 के दिन आज़ाद भारत के इतिहास में शायद पहली बार ऐसी संयुक्त हड़ताल का आयोजन किया गया था जो न केवल पूरी तरह से सफल रही बल्कि इसकी सफलता ने भविष्य में मजदूरों और किसानों की एकता कायम करते…
  • bhasha singh
    न्यूज़क्लिक टीम
    खोज ख़बर ; कश्मीर से UP: सियासत की बिछी बिसात, फ़रेब का खेल
    18 Jan 2022
    खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने कश्मीर प्रेस क्लब को साजिशाना ढंग से बंद करने और उत्तर प्रदेश में बिछी सियासत की बिसात पर की चर्चा। कार्यक्रम में उन्होंने कश्मीर के पत्रकार अनीस ज़रगर और…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License