NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
आदिवासियों से उनकी ज़मीन और अधिकार छीनकर विकास उनका कर रही है सरकार
वनों के मामूली उत्पादन पर निर्भर इन आदिवासियों को उजार दिया गया और उन्हें उस जगह विस्थापित कर दिया गया जहां उनके परिवार के आजीविका के लिए कोई साधन मौजूद नहीं हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
22 Jun 2018
आदिवासि

एक बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना 'इंदिरा सागर पोलवारम परियोजना' ने आंध्र प्रदेश में क़रीब 55,000 आदिवासी परिवारों को विस्थापित कर दिया है। भारत में किसी विकास परियोजना के चलते आदिवासियों का यह सबसे बड़ा विस्थापन है। अनुसूचित जनजाति के राष्ट्रीय आयोग (एनसीएसटी) ने पाया है कि अधिग्रहित भूमि के लिए मुआवजे के तौर पर आदिवासियों को दी गई वैकल्पिक भूमि कृषि योग्य नहीं है क्योंकि ये पथरीले इलाक़े हैं जहां पानी कम है या तो नहीं है। आयोग ने राज्य सरकार से मांग की है कि वैकल्पिक भूमि जो कि कृषि के लिए उपयुक्त है परियोजना के चलते विस्थापित लोगों को दी जाए।

 

ये पोलावरम परियोजना गोदावरी नदी पर बनाया जा रहा है जिससे माना जाता है कि सिंचाई के लिए क़रीब 2.91 लाख हेक्टेयर भूमि को पानी और 540 गांवों को पीने के पानी मिलेगा। इस परियोजना को आधिकारिक तौर पर इंदिरा सागर बहुउद्देशीय परियोजना के रूप में जाना जाता है जो कि वर्ष 2004 से निर्माणाधीन है। इससे 960 मेगावॉट बिजली उत्पादन की उम्मीद है इसके अलावा उद्योगों के लिए पानी उपलब्ध हो सकेगा। ये आंकड़े पर्यावरण मंत्रालय के पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (ईआईए) की रिपोर्ट में सामने आए हैं।

 

आयोग ने यह भी बताया है कि ये आदिवासी जो वन के उत्पादन पर मामूली तौर निर्भर थे उन्हें उजार दिया गया और वैसी जगहों पर स्थानांतरित कर दिया गया जहां उनके पास आजीविका के लिए कोई साधन मौजूद नहीं था।

 

आयोग ने आंध्र सरकार से आदिवासियों को आजीविका के वैकल्पिक साधन मुहैया करने के लिए कहा है। एनसीएसटी ने सरकार को कॉलेजों और एम्स जैसे मेडिकल कॉलेजों जैसी सामाजिक आधारभूत संरचना मुहैया करके पुनर्वास कॉलोनियों में जीवन की गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करने का भी निर्देश दिया है। एनसीएसटी को शिकायतें मिलीं है कि बाढ़ के कारण नवनिर्मित मकान नष्ट हो गए और उनका पुनर्निर्माण नहीं किया गया।

 

पर्यावरण मंत्रालय से द वायर को प्राप्त दस्तावेजों के मुताबिक़ 3 लाख से ज़्यादा लोग जिनमें 1.5 लाख आदिवासी और 50,000 दलित शामिल हैं उन्हें 10,000 एकड़ वनभूमि और 121, 975 एकड़ ग़ैर-वन भूमि से विस्थापित हो जाएंगे। उधर नहर, उपनहर, टाउनशिप और 'ग्रीन बेल्ट' के लिए अन्य 75,000 एकड़ भूमि अधिग्रहित की जा रही है।

 

 

इस परियोजना के जारी निर्माण कार्य के चलते पश्चिमी गोदावरी ज़िले के पोलावरम मंडलम के देवरागोढ़ी और उत्तरी गोदवारी ज़िले में पुडीपल्ली पंचायत में आदिवासियों और अन्य स्थानीय लोगों के विस्थापन के मुद्दे पर एनसीएसटी के अध्यक्ष डॉ. रामेश्वर ओराओं द्वारा ओडिशा के मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त मुख्य सचिव और आंध्र प्रदेश के जल संसाधन विभाग के सचिव के साथ साल 2016 में एक बैठक की गई। इस बैठक में पोलावारम परियोजना प्राधिकरण के सदस्य सचिव (जल संसाधन मंत्रालय) और ग्रामीण विभाग मंत्रालय के सचिव (भूमि संसाधन) भी मौजूद थें। आयोग ने आंध्र सरकार से कुछ मांग की थी। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक़, ये मांग थी: "आंध्र प्रदेश सरकार को ओडिशा और छत्तीसगढ़ सरकार की चिंताओं को ध्यान में रखना चाहिए। वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत विस्थापित आदिवासी परिवारों को पट्टा के तौर पर नहीं दिया गया है। आंध्र प्रदेश, ओडिशा और छत्तीसगढ़ सरकारों को इस संबंध में तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। इस परियोजना के प्रभावित परिवारों को आवंटित बंजर भूमि संबंधित राज्य सरकारों द्वारा विकसित की जानी चाहिए। राज्य सरकारों को विस्थापित परिवारों को अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए डेटा बेस बैंक तैयार करने की भी सलाह दी गई थी ताकि उन्हें उनके विस्थापन के चलते किसी भी तरह का नुकसान न हो सके।

 

Indira Sagar Polavaram project
Godavari
TDP
गोदावरी

Related Stories

आंध्र प्रदेश: तिरुपति उपचुनाव में वाईएसआरसीपी को बढ़त?

"जगन का विधान परिषद समाप्त करने का फ़ैसला अलोकतांत्रिक और प्रतिशोधी"

तेलंगाना आरटीसी की हड़ताल जारी, अब कर्मचारियों को राजनीतिक दलों  का भी समर्थन

जगनमोहन रेड्डी ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में ली शपथ

आंध्र : जगन मोहन रेड्डी वाईएसआरसीपी के विधायक दल के नेता चुने गए

वाईएसआरसीपी के विधायक दल की बैठक शनिवार को

आधार डेटा की चोरीः यूआईडीएआई ने डेटा सुरक्षा के अपने ही दावों की पोल खोली

चुनाव 2019: गुंटूर में मिर्च की पैदावार करने वाले सभी किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ा है

मोदी जी की साढ़े 4 साल की उपलब्धि! रेड कारपेट से काले झंडों तक का सफ़र

तेलंगाना विधानसभा के लिए 70 फीसदी मतदान


बाकी खबरें

  • indian freedom struggle
    आईसीएफ़
    'व्यापक आज़ादी का यह संघर्ष आज से ज़्यादा ज़रूरी कभी नहीं रहा'
    28 Jan 2022
    जानी-मानी इतिहासकार तनिका सरकार अपनी इस साक्षात्कार में उन राष्ट्रवादी नायकों की नियमित रूप से जय-जयकार किये जाने की जश्न को विडंबना बताती हैं, जो "औपनिवेशिक नीतियों की लगातार सार्वजनिक आलोचना" करते…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2.5 लाख नए मामले, 627 मरीज़ों की मौत
    28 Jan 2022
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 6 लाख 22 हज़ार 709 हो गयी है।
  • Tata
    अमिताभ रॉय चौधरी
    एक कंगाल कंपनी की मालिक बनी है टाटा
    28 Jan 2022
    एयर इंडिया की पूर्ण बिक्री, सरकार की उदारीकरण की अपनी विफल नीतियों के कारण ही हुई है।
  • yogi adityanath
    अजय कुमार
    योगी सरकार का रिपोर्ट कार्ड: अर्थव्यवस्था की लुटिया डुबोने के पाँच साल और हिंदुत्व की ब्रांडिंग पर खर्चा करती सरकार
    28 Jan 2022
    आर्थिक मामलों के जानकार संतोष मेहरोत्रा कहते हैं कि साल 2012 से लेकर 2017 के बीच उत्तर प्रदेश की आर्थिक वृद्धि दर हर साल तकरीबन 6 फ़ीसदी के आसपास थी। लेकिन साल 2017 से लेकर 2021 तक की कंपाउंड आर्थिक…
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    रेलवे भर्ती: अध्यापकों पर FIR, समर्थन में उतरे छात्र!
    28 Jan 2022
    आज के एपिसोड में अभिसार शर्मा बात कर रहे हैं रेलवे परीक्षा में हुई धांधली पर चल रहे आंदोलन की। क्या हैं छात्रों के मुद्दे और क्यों चल रहा है ये आंदोलन, आइये जानते हैं अभिसार से
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License