NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
आधारः सुप्रीम कोर्ट में श्याम दीवान ने कहा 'ग़ुलाम बन जाएंगे नागरिक'
पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ 'आधार' की वैधता को चुनौती देने वाली 24 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
18 Jan 2018
Aadhaar data leak

आधार की संवैधानिक वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 17 जनवरी यानी बुधवार को आख़िरी सुनवाई शुरु कर दी है। याचिकाकर्ता की तरफ़ से बहस करते हुए वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कहा कि आधार नागरिकों के 'सिविल डेथ' का कारण बन सकता है। उन्होंने कहा कि इसकी अनिवार्यता से नागरिक बन जाएंगे ग़ुलाम ।

 

विभिन्न बुनियादों पर आधार को चुनौती देने वाली 24 याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाख़िल की गई हैं। इन आधारों में नीजता संबंधी मूल अधिकार के हनन और नागरिकों के लिए सभी प्रकार की सेवाओं और लाभ से जुड़ी इसकी अनिवार्यता भी शामिल है। याचिकाकर्ताओं ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश के पुट्टास्वामी और सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय के नेतृत्व में अपील की।

 

भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ आधार से जुड़ी इन याचिकाओं की सुनवाई कर रही है। खंडपीठ के अन्य न्यायाधीशों में न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड, न्यायमूर्ति ए के सीकरी, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति अशोक भूषण शामिल हैं।

 

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कहा कि आधार "भारत के हर लोगों को एक इलेक्ट्रॉनिक पट्टे में जकड़ना चाहता है", जो नागरिकों की प्रोफाइलिंग करने और सरकार द्वारा निगरानी में सक्षम होगा।

 

दीवान ने कहा कि "ये पट्टा केंद्रीय डेटा बेस से जुड़ा है जो नागरिक के जीवन भर के लेन देन पर नज़र रखने के लिए बनाया गया है। यह रिकॉर्ड सरकार को लोगों की प्रोफाइल तैयार करने, उनकी गतिविधियों पर नज़र रखने, उनकी आदतों का आंकलन करने और गुप्त रूप से उनके व्यवहार को प्रभावित करने में सक्षम बनाएगा।

बुनियादी सेवाओं और कल्याणकारी योजनाओं को आधार से अनिवार्य रूप से जोड़े जाने को लेकर चुनौती देते हुए दीवान ने कहा कि बिना आधार के रहना लोगों के लिए असंभव हो गया है और यह नागरिकों के "सरकारी वजह से मौत" (सिविल डेथ) का कारण बन सकता है।

इन्हीं पांच न्यायाधीशों की संविधान खंडपीठ ने 15 दिसंबर 2017 को विभिन्न सेवाओं को आधार से लिंक करने के केंद्र सरकार के फ़ैसले की समय सीमा को बढ़ाने का अंतरिम आदेश पारित किया था। अदालत ने समय सीमा बढ़ाकर 31 मार्च 2018 कर दिया था। आधार से लिंक करने के मामलों में मोबाइल नंबर को भी लिंक करना भी शामिल है।

दीवान ने कहा कि सरकार को एक "बटन मिल गया है जो किसी व्यक्ति के सिविल डेथ का कारण बन सकता है।"

वरिष्ठ वकील ने कहा कि लोगों को सेवाओं और लाभ के इस्तेमाल के लिए एक वैकल्पिक पहचान प्रमाण प्रस्तुत करने की अनुमति दी जानी चाहिए ताकि आधार न होने के चलते उनको अपने अधिकार से वंचित न किया जा सके।

दीवान ने कहा कि अगर केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए आधार परियोजना को इसी तरह जारी रखने की अनुमति दी जाती है तो भारत के लोकतांत्रिक ढाँचे के खतरनाक असर और ख़तरों के परिणाम सामने आ सकते हैं।

उन्होंने कहा कि "समय के साथ प्रोफाइलिंग ने राज्य को असंतोष को दबाना और राजनीतिक निर्णय लेने को प्रभावित करने में सक्षम बनाता है। जिस तरह आधार प्लेटफार्म को निजी क्षेत्रों तक पहुंच की इज़़ाजत दी गई है ऐसे में ट्रैकिंग और प्रोफ़ाइलिंग के स्तर में तेजी से वृद्धि होगी।

"कई राज्य सरकारों ने निवासियों के प्रोफाइल बनाने के लिए आधार प्लेटफार्म का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है जो अधिनायकवादी शासन की याद दिलाती हैं।"

दीवान ने सवाल किया कि क्या भारत के संविधान ने निगरानी राज्य बनाने का इजाज़त दी है जहां सरकार द्वारा सामान्य और नियमित लेन देन रिकॉर्ड किए जा रहे हैं।

दीवान ने कहा कि आधार ने नागरिकों और सरकार के बीच के रिश्तों को बदल दिया, नागरिक अब "ग़ुलाम" बन जाएंगे जो भारत के संविधान की कल्पना या जनादेश का हिस्सा नहीं है।

दीवान ने इस मांग को भी उठाया कि जो लोग पहले से यूआईडी कार्यक्रम में शामिल हो चुके हैं उन्हें डेटा को हटाने का विकल्प दिया जाए और सेवाओं और सामाजिक लाभ प्राप्त करने के लिए पहचान के वैकल्पिक साधनों की अनुमति दी जाए।

उन्होंने कहा "नकारात्मक तौर पर सिर्फ़ इसलिए नागरिकों को दी जाने वाली सुविधा पर रोक नहीं लगाई जा सकती क्योंकि किसी नागरिक के पास आधार कार्ड नहीं है या वे आधार कार्ड का इस्तेमाल करना नहीं चाहता है।"

दीवान ने कई अन्य महत्वपूर्ण सवालों को भी उठाया। इन सवालों में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और भारतीयों की स्वायत्तता को बॉयोमीट्रिक्स तक पहुंच बनाने को लेकर पूछे गए।

उन्होंने सवाल किया कि क्या आधार अधिनियम 2016 क़ानून के रूप में वैध था क्योंकि इसे धन विधेयक के रूप में पारित किया गया था। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने पूछा कि क्या आधार विधेयक संसद की स्थायी समिति को भेजा गया था तो दीवान ने नहीं में जवाब दिया।

डाटा लीक होने और सुरक्षा के ख़तरों पर लगातार सामने आ रही ख़बरों पर दीवान ने यह भी सवाल उठाया कि क्या आधार डेटाबेस की प्रमाणित भेद्यता राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करती है।

न्यायाधीशों द्वारा वकील से कई अन्य सवाल पूछे गए। न्यायाधीश एके सीकरी और डीवाई चंद्रचूड़ ने यह जानना चाहा कि यूएस वीज़ा हासिल करने के लिए गए बायोमेट्रिक का आधार के बॉयोमेट्रिक्स से किस तरह अलग है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या याचिकाकर्ता चाहते हैं कि 2009 और 2016 के बीच एकत्र किए गए सभी आँकड़े नष्ट किए जाएंगे।

न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने यह भी पूछा कि यदि आधार का इस्तेमाल केवल सत्यापन के लिए किया जा सकता है और यदि इसका इस्तेमाल केवल उस उद्देश्य के लिए किया गया जिसके लिए लिया गया तो यह ठीक होगा।

आधार परियोजना की शुरूआत नंदन नीलेकणी ने की और इसे "दुनिया की सबसे बड़ी जनसंपर्क परियोजना" के रूप में करार दिया गया है। इसे यूपीए -2 के समय के दौरान पेश किया गया था लेकिन मोदी सरकार नागरिकों द्वारा लगभग सभी सेवाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए यूआईडी को अनिवार्य करने जा रही है।

नौ न्यायाधीशों की संविधान खंडपीठ द्वारा 24 अगस्त 2017 को नीजता को मौलिक अधिकार घोषित किए जाने के पांच महीने बाद अंतिम सुनवाई शुरू हुई। मौलिक अधिकार को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा) के तहत संरक्षित किया गया है। नीजता को लेकर आधार को चुनौती देने के मामले में सुनवाई शुरू हुई। 

Aadhar card
Aadhar card data leak
Supreme Court
data breach
निजिता का अधिकार
UIDAI

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

मलियाना कांडः 72 मौतें, क्रूर व्यवस्था से न्याय की आस हारते 35 साल

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?


बाकी खबरें

  • Mothers and Fathers March
    पीपल्स डिस्पैच
    तख़्तापलट का विरोध करने वाले सूडानी युवाओं के साथ मज़बूती से खड़ा है "मदर्स एंड फ़ादर्स मार्च"
    28 Feb 2022
    पूरे सूडान से बुज़ुर्ग लोगों ने सैन्य शासन का विरोध करने वाले युवाओं के समर्थन में सड़कों पर जुलूस निकाले। इस बीच प्रतिरोधक समितियां जल्द ही देश में एक संयुक्त राजनीतिक दृष्टिकोण का ऐलान करने वाली हैं।
  • गौरव गुलमोहर
    यूपी चुनाव: क्या भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं सिटिंग विधायक?
    28 Feb 2022
    'यदि भाजपा यूपी में कम अंतर से चुनाव हारती है तो उसमें एक प्रमुख कारण काम न करने वाले सिटिंग विधायकों का टिकट न काटना होगा।'
  • manipur
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मणिपुर में पहले चरण का चुनाव, 5 ज़िलों की 38 सीटों के लिए 67 फ़ीसदी से ज़्यादा मतदान
    28 Feb 2022
    मणिपुर विधानसभा के लिए आज पहले चरण का मतदान संपन्न हो गया। मतदान का समय केवल शाम 4 बजे तक ही था। अपराह्न तीन बजे तक औसतन 67.53 फ़ीसदी मतदान हुआ। अंतिम आंकड़ों का इंतज़ार है।
  • jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड : फिर ज़ोर पकड़ने लगी है ‘स्थानीयता नीति’ बनाने की मांग : भाजपा ने किया विरोध
    28 Feb 2022
    हेमंत सोरेन सरकार को राज्य में होने वाली सरकारी नियुक्तियों के लिए घोषित विसंगतिपूर्ण नियोजन नीति को छात्रों-युवाओं के विरोध के बाद वापस लेना पड़ा है। लेकिन मामला यहीं थम नहीं रहा है।
  • Sergey Lavrov
    भाषा
    यूक्रेन की सेना के हथियार डालने के बाद रूस ‘किसी भी क्षण’ बातचीत के लिए तैयार: लावरोव
    28 Feb 2022
    लावरोव ने यह भी कहा कि रूस के सैन्य अभियान का उद्देश्य यूक्रेन का ‘‘विसैन्यीकरण और नाजी विचारधारा से’’ मुक्त कराना है और कोई भी उस पर कब्जा नहीं करने वाला है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License